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माफ़ करिए, मुझे मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर पर गर्व नहीं है

‘सुंदर’ बड़ा ही आम शब्द है. जितना आम, उतना ही भारी. कविताएं, पहाड़, पेड़, झीलें, रंग–किसी भी चीज के लिए सुंदर शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं. जो मुझे सुंदर लगता हो, जरूरी नहीं आपको भी सुंदर लगे. और सुंदरता की अपनी परिभाषा हम सब अपने हिसाब से चुनते हैं. या यूं कहें, चुन सकते हैं.

मगर क्या हमारे चुनाव सचमुच हमारे होते हैं?

ज़रा ये मीम देखिए. ये इसलिए बनाया गया है कि आप राहुल नाम के अपने पुरुष दोस्त को इसमें टैग करें. जिससे राहुल चिढ़े और आपको हंसी आए. राहुल कभी न चाहेगा इस लड़की से उसकी शादी हो. क्योंकि ये काली और मोटी है. आम भाषा में, ‘बदसूरत’ है. सुंदर नहीं है.

ऐसे मीम्स में अक्सर अपने दोस्तों को टैग करने के लिए कहा जाता है.
ऐसे मीम्स में अक्सर अपने दोस्तों को टैग करने के लिए कहा जाता है.

जानते हैं ये कौन हैं? अमेरिकी एक्ट्रेस गैबरी सिदिबे हैं. अपनी एक्टिंग के लिए ऑस्कर में नामांकन पा चुकी हैं. लेकिन यहां उनकी एक्टिंग तो छोड़िए, हम उनका नाम तक नहीं जानते. क्योंकि लोगों की पहचान हम उनकी शक्ल, शरीर और आवाज से करते हैं. उनके काम से नहीं. उन्हें पहचानते ही उन्हें जज करना चाहते हैं. ये हमारी फितरत है.

PP KA COLUMN

सुंदरता का ये आइडिया हमारा अपना नहीं है. ये हमने समाज को और समाज ने हमें दिया है. विज्ञापनों, फिल्मों, साहित्य के जरिए. भारत माता का जयघोष करने वाले लड़के भी शादी के लिए गोरी लड़की चाहते हैं. बिना ये सोच-जाने कि इंडिया की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां दूध से सफ़ेद लोग हो ही नहीं सकते. खासकर दक्षिण भारत में. हमारा रंग गेहुआं है. जिसे हम साबुन और क्रीम से घिसकर गोरा बनाना चाहते हैं.

मगर सुंदरता का पैमाना महज गोरा होने तक सीमित नहीं है. हमारा शरीर दुबला है या नहीं, लड़कियों की छाती भरी हुई है या नहीं, गर्दन लंबी और कम कमर घुमावदार है या नहीं, हमारे लिए बहुत जरूरी है. मॉडलिंग एजेंसी और ब्यूटी कॉन्टेस्ट करवाने वाली संस्थाएं इसका पूरा ध्यान रखती हैं.

मगर सुंदरता का पैमाना महज गोरा होने तक सीमित नहीं है. हमारा शरीर दुबला है या नहीं, लड़कियों की छाती भरी हुई है या नहीं, गर्दन लंबी और कम कमर घुमावदार है या नहीं, हमारे लिए बहुत जरूरी है.
मगर सुंदरता का पैमाना महज गोरा होने तक सीमित नहीं है. हमारा शरीर दुबला है या नहीं, लड़कियों की छाती भरी हुई है या नहीं, गर्दन लंबी और कम कमर घुमावदार है या नहीं, हमारे लिए बहुत जरूरी है.

ब्यूटी कॉन्टेस्ट एक तरह की लड़कियों, एक तरह के शरीरों को बढ़ावा देते हैं. भरी छाती और घुमावदार कमर होने में कोई बुराई नहीं है. जो बात मुझे परेशान करती है कि ये इन लड़कियों को अलग करते हैं. इन्हें बाकी लड़कियों के बेहतर होने का दर्जा मिलता है. ‘सुंदरता’ की वैलिडिटी मिलती है. और वैलिडिटी के साथ पैमाना सेट होता है. वो पैमाना जिसमें बाकी लड़कियां फिट होने के लिए मेहनत करें. और जब नहीं हो पातीं तो वो बुरा महसूस करती हैं. क्योंकि एक तरह की लड़कियों को सुंदर डिक्लेअर कर बाकियों को समाज में स्वीकृत होने का तरीका ढूंढना पड़ता है.

इसलिए मुझे मानुषी छिल्लर पर गर्व नहीं है.

न ही किसी और तरह का ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीतने वाली किसी और लड़की पर.

कहने का अर्थ ये नहीं है कि इन लड़कियों ने जीवन में मेहनत नहीं की होगी, संघर्ष नहीं किया होगा. मगर क्या ये संघर्ष समाज की दूसरी औरतों के लिए कुछ बेहतर करता है? जवाब आप खुद सोचें.
कहने का अर्थ ये नहीं है कि इन लड़कियों ने जीवन में मेहनत नहीं की होगी, संघर्ष नहीं किया होगा. मगर क्या ये संघर्ष समाज की दूसरी औरतों के लिए कुछ बेहतर करता है? जवाब आप खुद सोचें.

कहने का अर्थ ये नहीं है कि इन लड़कियों ने जीवन में मेहनत नहीं की होगी, संघर्ष नहीं किया होगा. मगर क्या ये संघर्ष समाज की दूसरी औरतों के लिए कुछ बेहतर करता है? जवाब आप खुद सोचें.

लोग कहते हैं कि मिस इंडिया या मिस वर्ल्ड महज शक्ल से नहीं चुनी जातीं. मैं सहमत हूं. कॉन्टेस्ट में कई राउंड होते हैं, जो उनका सामान्य ज्ञान, उनके विचार चेक करते हैं. मगर देखने वाली बात ये है कि उनका सामन्य ज्ञान जांचने से पहले ही कद में कम, मोटी, टेढ़े दांत या मोटी नाक वाली लड़कियों को अलग कर दिया जाता है.

लड़कियों सामन्य ज्ञान जांचने से पहले ही कद में कम, मोटी, टेढ़े दांत या मोटी नाक वाली लड़कियों को अलग कर दिया जाता है.
लड़कियों सामन्य ज्ञान जांचने से पहले ही कद में कम, मोटी, टेढ़े दांत या मोटी नाक वाली लड़कियों को अलग कर दिया जाता है.

फेमिना मिस इंडिया की वेबसाइट देखकर इस बात का अंदाजा एक मिनट में हो जाता है. कॉन्टेस्ट में भाग लेने के कई नियम हैं. हर एक पर पोथा लिखा जा सकता है. मगर कुछ गौरतलब हैं.

1. अप्लाई करने वाली लड़की 18 से 25 साल की हो.
2. शादीशुदा न हो.
3. तलाकशुदा न हो.
4. प्रेगनेंट न हो.
5. कभी मां न बनी हो.
6. प्राकृतिक तौर पर ‘फीमेल’ हो.
7. किसी मानसिक बीमारी का इतिहास न हो.
8. उसका नैतिक चरित्र अच्छा हो.

 नैतिक चरित्र, उसका हिसाब कैसे होगा? बल्कि नैतिक चरित्र की परिभाषा क्या होगी?
नैतिक चरित्र, उसका हिसाब कैसे होगा? बल्कि नैतिक चरित्र की परिभाषा क्या होगी?

जाहिर सी बात है, कॉन्टेस्ट ‘मिस’ इंडिया है तो तलाश गैर-शादीशुदा लड़कियों की होगी. कमाल की बात ये है कि जबरन 16 की उम्र में आपकी शादी कर दी गई हो, तो पति से अलग होकर भी 20 की उम्र में आप इस कॉन्टेस्ट में भाग नहीं ले सकतीं. लड़कियां ऐसी भी तो हो सकती हैं, जिनकी शादी न हुई हो, फिर भी वो मां बन चुकी हो. जबरन या अपनी मर्जी से. ऐसा भी तो हो सकता है कि 13 कि उम्र में कोई सेक्स चेंज करवा लड़की बना हो. ऐसा भी हो सकता है कि किसी दुख या तकलीफ के चलते आपको कम उम्र में मानसिक इलाज की जरूरत पड़ी हो. और नैतिक चरित्र, उसका हिसाब कैसे होगा? बल्कि नैतिक चरित्र की परिभाषा क्या होगी?

मिस्टर वर्ल्ड रोहित खंडेलवाल. सोर्स: यूट्यूब/ज़ूम
मिस्टर वर्ल्ड रोहित खंडेलवाल. सोर्स: यूट्यूब/ज़ूम

कॉन्टेस्ट तमाम होते हैं. शादीशुदा महिलाओं से लेकर पुरुषों तक के लिए भी. हर बार हमें ये संदेश मिलता है कि एक तरह के शरीर ही सुंदर हो सकते हैं. वो पुरुष हो तो उसकी पतली कमर, चौड़ी छाती और मसल्स दिखती हों.

अगर सुंदरता देखने वाले की आंखों में बसती है तो उसका कॉन्टेस्ट क्यों होता है?


पढ़ें: इस सवाल का जवाब बताकर मिस वर्ल्ड बनीं मानुषी छिल्लर

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