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इन दो दिग्गजों से जानिए सुशांत सिंह राजपूत की मौत से पब्लिक इतनी गुस्से में क्यों है?

मनोज बाजपेयी और शेखर कपूर लॉकडाउन के दौरान एक इंस्टाग्राम लाइव करने वाले थे. यहां सिनेमा, क्राफ्ट, फिल्ममेकिंग, लॉकडाउन और उन दोनों की जर्नी पर बात होनी थी. लेकिन उनके इस वीडियो से ठीक पहले फिल्म ‘सोनचिड़िया’ में मनोज के को-स्टार रहे सुशांत सिंह राजपूत की डेथ हो गई. शेखर, सुशांत के साथ ‘पानी’ नाम की फिल्म बनाना चाहते थे. दोनों ने फिल्म की तैयारी में 3 महीने का वक्त गुज़ारा. फिल्म नहीं बन पाई, वो अलग बात है. ऐसे में शेखर और मनोज ने अपना ये लाइव वीडियो सुशांत के बारे में बात करते हुए उन्हें डेडिकेट कर दिया. ये बातचीत सिर्फ सुशांत के बारे में नहीं है. अगर इस बातचीत को सिर्फ एक शब्द में समेटना हो, तो इनसाइटफुल शब्द का प्रयोग कर सकते हैं. विस्तार से आप नीचे पढ़िए-

# मनोज बाजपेयी की यादों में सुशांत

मनोज इस बातचीत में कहते हैं कि वो ये बात स्वीकार ही नहीं कर पा रहे कि सुशांत नहीं रहे. उन दोनों ने ‘सोनचिड़िया’ के सेट पर कितना शानदार समय बिताया था. मनोज बताते हैं कि सुशांत इस बात से बहुत खुश थे कि उन्हें उसी लोकेशन पर शूटिंग करने का मौका मिला है, जहां ‘बैंडिट क्वीन’ शूट हुई थी. लेकिन उनकी सबसे बड़ी खूबी थी, अपने काम, अपने क्राफ्ट से प्रेम. वो किसी भी सीन के शुरू होने से पहले अकेले में जाकर रिहर्सल करते. जब तक सीन शूट न हो जाए, तब तक लगातार प्रैक्टिस करते रहते थे. लोकेशन पर उनका टेबल था, जिस पर 2-3 क्वॉन्टम फिज़िक्स की किताबें पड़ी थीं, जिन्हें वो मुंबई से अपने साथ लाए थे. बगल में एक पावरफुल टेलीस्कोप पड़ा रहता था, जिससे वो गैलेक्सी में ताकते थे. उन्हें मनोज के हाथ का बना मटन बहुत पसंद था. मुंबई आने के बाद भी उन्होंने मनोज को मटन के लिए फोन किया था.

फिल्म 'सोनचिड़िया' के एक सीन में लाखन के किरदार में सुशांत सिंह राजपूत.
फिल्म ‘सोनचिड़िया’ के एक सीन में लाखन के किरदार में सुशांत सिंह राजपूत.

# जब रात 3 बजे शेखर कपूर को फोन कर देते सुशांत

शेखर कपूर ने ‘मासूम’, ‘मिस्टर इंडिया’ और ‘बैंडिट क्वीन’ जैसी फिल्में बनाई हैं. वो यशराज फिल्म्स के लिए ‘पानी’ नाम की फिल्म पर काम कर रहे थे. इसमें सुशांत सिंह राजपूत ‘गौरा’ का मुख्य किरदार निभाने वाले थे. फिल्म की शूटिंग वगैरह शुरू होने से पहले 3 महीने तक तैयारी चल थी. शेखर, सुशांत के साथ अपनी पहली मुलाकात के बारे में बताते हैं कि उन्हें लगा था कि वो किसी बच्चे से मिल रहे हैं. सुशांत शेखर कपूर के साथ काम करने और ‘पानी’ जैसी फिल्म को लेकर बड़े एक्साइटेड थे. वो फिल्म की हर मीटिंग में शेखर के साथ रहते थे. जब उनका रिहर्सल शुरू हुआ, तो वो हमेशा शेखर से कहते- ‘सर गौरा नहीं मिल रहा’. जब शेखर कहते अच्छा कर रहे हो, तो सुशांत का जवाब होता- ‘मैं सुशांत सिंह कर रहा हूं, इसलिए अच्छा कर रहा हूं. गौरा नहीं कर रहा हूं.’ सुशांत की एक्टिंग सिर्फ शूटिंग या रिहर्सल में खत्म नहीं होती थी. वो उस कैरेक्टर में ही रहते थे. उस किरदार को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग चीज़ें ट्राय करते रहते. बकौल शेखर, ‘पानी’ की तैयारी के दौरान वो उन्हें रात को तीन-तीन बजे फोन करते. सिर्फ ये बताने के लिए उन्हें किरदार के बारे में एक नया आइडिया आया है. और फिर वो आइडिया बताने उनके घर आ जाते. इतनी तैयारी के बाद भी ये फिल्म नहीं पाई क्योंकि प्रोडक्शन हाउस यशराज फिल्म्स ने इस प्रोजेक्ट से हाथ पीछे खींच लिए. लेकिन शेखर को ये अफसोस है कि ‘पानी’ नहीं बनी, तो उन्हें सुशांत के साथ किसी और फिल्म पर काम करना चाहिए थे. लेकिन तब वो ये सब सोचने की बजाय वो गुस्से में इंडिया छोड़कर चले गए.

फिल्म 'पानी' का पोस्टर.
फिल्म ‘पानी’ का पोस्टर.

# सुशांत रुड और एरोगेंट थे?

मीडिया में ऐसी बहुत सी खबरें चल रही हैं. लेकिन मनोज का मानना था कि सुशांत खुलकर हंसते थे और हमेशा मुस्कुराते रहते थे. अपने कहे को पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक किस्सा सुनाया. ‘सोनचिड़िया’ की शूटिंग चल रही थी. मनोज ने सुशांत से कहा कि वो उनके कैरेक्टर के बारे में कुछ इनपुट देना चाहते हैं. जैसे बंदूक को कैसे पकड़ना चाहिए, ताकि ऑथेंटिक लगे. सुशांत ने उनकी पूरी बात सुनी. शूटिंग में उसे अपने क्राफ्ट में इन-कॉरपोरेट किया. और आकर मनोज को कहा कि उनका इनपुट वाकई काम का था और उन्हें करते समय सही लग रहा था. वहीं शेखर कपूर का मानना है कि सुशांत की आंखों में एक विनम्रता थी. वैसी मुस्कुराहट उन्होंने किसी की नहीं देखी.

'सोनचिड़िया' के सेट पर मनोज बाजपेयी से बात करते सुशांत सिंह राजपूत.
‘सोनचिड़िया’ के सेट पर मनोज बाजपेयी से बात करते सुशांत सिंह राजपूत.

# डिप्रेशन और काम न मिलना

ऐसी खबरें मीडिया में चल रही हैं. अलग-अलग रिपोर्ट्स के हवाले से. सुशांत के बारे में शेखर कहते है- ”वो स्क्रिप्ट में घुस जाता था, कैरेक्टर में घुस जाता था. एक्टिंग वो होती है, जब आपको किरदार का एडिक्शन हो जाए. मुझे सुशांत में वो चीज़ दिखी.” ‘पानी’ में गौरा के किरदार का बॉडी स्ट्रक्चर सुशांत से अलग रहने वाला था. क्योंकि वो किरदार जहां रहता था, वहां पानी की भीषण कमी थी. सुशांत ने ये बात सुनते ही कहा कि वो एक हफ्ते में मिलेंगे. जब अगले हफ्ते आए, तो वो बिलकुल दुबले हो चुके थे. शेखर से ही मिलते ही उन्होंने पूछा- ”सर आज मैं गौरा हूं न. आइए कुछ तस्वीरें वगैरह लेते हैं और कैमरे के सामने कुछ करते हैं.” शेखर कहते हैं, जो आदमी अपने कैरेक्टर अपने काम के लिए इतना कुछ करता है, उसके साथ कौन सा डायरेक्टर काम नहीं करना चाहेगा.

डिप्रेशन के बारे में शेखर कहते हैं- ‘‘ये ऐसा लफ्ज़ है, जिसके साथ हम क्रिएटिव लोग खेल जाते हैं. ये हमारे लिए एक ऐसा इमोशन बन जाता है, जिसके साथ हम खेलने लगते हैं. हमें इसे सामने लाने की ज़रूत है.” शेखर बताते हैं कि ‘बैंडिट क्वीन’ की शूटिंग पूरी हो गई थी. वो एडिट टेबल पर फिल्म शॉट बाय शॉट नहीं देखना चाहते थे. उन्होंने फिल्म की एडिटर रेणु सलूजा से कहा कि वो अपनी समझ के हिसाब से इन शॉट्स से पूरी फिल्म तैयार कर लें. उसके बाद वो उनके साथ बैठकर एडिट करवाएंगे. रेणु को ये सब बोलकर शेखर दूसरे कमरे में जाकर जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगते. एक दिन रेणु ने पूछा दिया कि आप ऐसा क्यों करते हैं, तो शेखर ने कहा कि वो इस फिल्म को शूट करते समय वो गुस्से में रहते थे. इसलिए अब उसे एडिट करना है, तब भी उनका गुस्से में रहना ज़रूरी है. नहीं, तो वो इस फिल्म को जज नहीं कर पाएंगे. कहने का मतलब अपनी कला के लिए खुद को जितना हो सके पुश करना. शेखर के मुताबिक- ”खुद को पुश करना हमारे काम का हिस्सा है और सुशांत ये चीज़ खूब करता था. ऐसी ज़िंदगी होती है, हम क्रिएटिव लोगों की.”

IFFI (इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया) 2017 के दौरान एक इवेंट में बातचीत करते सुशांत और शेखर.
IFFI (इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया) 2017 के एक सेग्मेंट में बातचीत करते सुशांत और शेखर.

# सब लोग सुशांत की मौत के पीछे की वजह क्यों जानना चाहते हैं?

जब से सुशांत के गुज़रने की खबर आई है, हर ओर अटकलों का दौर शुरू हो गया. सबको ये जानना है कि उनकी मौत कैसे हुई. मनोज सोशल मीडिया पर हैं, तो उन्हें भी इस बारे में पता था. उन्होंने ये सवाल शेखर कपूर से पूछा. इसके जवाब में शेखर कहते हैं कि हम सब को अपनी लाइफ में ड्रामा की बहुत आदत हो गई है. पहले ही हमारा अटेंशन स्पैन (किसी बात को सोचने या समझने पर खर्च किया जाने वाला समय) बहुत कम हो चुका है. हमें हर दिन कोई नई चीज़ चाहिए. हमारी मीडिया वैसे काम करती है, हमारा दिमाग वैसे काम करता है. आज सुशांत की डेथ है, कल कुछ और होगा. शेखर इसमें आगे जोड़ते हैं- ”जब हमारा दिमाग शांत हो जाएगा, तब हम सुशांत की सारी फिल्में बार-बार देखेंगे और समझने की कोशिश करेंगे कि वो इस प्रोफेशन में क्या योगदान देकर गए हैं.” कैसे लोग गुज़र चुके एक्टर्स की फिल्मों को याद करते हैं, इससे जुड़ा एक किस्सा शेखर कपूर बताते हैं. उन्होंने बताया कि वो एक दिन मशहूर हॉलीवुड एक्टर हीथ लेजर (द डार्क नाइट के जोकर) से संभावित फिल्म ‘द 9’ओ क्लॉक वॉर’ (The Nine O’Clock War) के बारे में बात कर रहे थे. अगले दिन दोनों की मुलाकात होने वाली थी. लेकिन हीथ ने फोन कर उस मीटिंग को आगे बढ़ा दिया. अगले दिन शेखर कपूर को उनके साथी ने बताया कि हीथ लेजर गुज़र गए. वो फिल्म कभी नहीं बनी. लेकिन उससे पहले शेखर, केट हडसन और हीथ लेजर को लेकर ‘द फोर फेदर्स’ नाम की फिल्म बना चुके थे.

अपनी फिल्म 'द फोर फेदर्स' के एक प्रमोशनल इवेंट के दौरान हीथ लेजर और जिमॉन होन्सू के साथ शेखर कपूर.
अपनी फिल्म ‘द फोर फेदर्स’ के एक प्रमोशनल इवेंट के दौरान हीथ लेजर और जिमॉन होन्सू के साथ शेखर कपूर.

# सुशांत की मौत से लोगों में इतना गुस्सा क्यों है?

सुशांत की डेथ के बाद से सोशल मीडिया पर कोई न कोई सेलेब्रिटी ट्रेंड कर रहा है. लोग सुशांत की मौत का ब्लेम किसी पर डालना चाहते हैं. वो बॉलीवुड में गैंग्स को कोस रहे हैं. लोगों के दोहरेपन पर बात हो रही है. नेपोटिज़्म और उसे बढ़ावा देने वाले एक्टर्स फिल्ममेकर्स से सवाल किया जा रहा है. उनके प्रति गुस्सा जताया जा रहा है. और सबसे ज़रूरी बात ये कि उन्हें सुशांत की मौत का ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है. लेकिन ‘लोगों में इतना गुस्सा है क्यों?’ मनोज ये सवाल शेखर से पूछते हैं, लेकिन खुद इसका जवाब देते हुए कहते हैं-

”मुझे लगता है कहीं न कहीं गुस्सा आम जनता को इसलिए आ रहा है क्योंकि उन्हें एक ऐसा हीरो दिखा था सुशांत में, जो उनके बीच से आया था. अचानक से उन्हें लग रहा है कि उनका रिप्रेंटेशन (प्रतिनिधित्व) खत्म हो गया. वो उन्हें आशा दे रहा था कि उनके बीच का एक लड़का इतनी ऊंचाई तक जा सकता है, तो उनके लिए भी एक उम्मीद है. सुशांत के अचानक जाने से वो लोग रुठ गए हैं. और सबसे ज़्यादा वो शॉक्ड हैं. गुस्सा भी अपनी बात ज़ाहिर करने का, भावनाओं को सामने लाने का, दुख जताने का एक माध्यम है.”

# सुशांत को कैसे याद किया जाए?

उनकी मौत के पीछे की वजह जानने में दिलचस्पी कम करनी चाहिए. उनकी कला, उनका काम, उनकी फिल्मों के बारे में बात करनी चाहिए. दोबारा उनकी फिल्में देखनी चाहिए. शेखर कपूर का मानना है-

”जो लोग बहुत टैलेंटेड होते हैं, जिनकी ज़िंदगी छोटी उम्र में कट जाती है. उनको तो हम बहुत याद रखते हैं. जैसे हम जेम्स डीन को याद करते हैं, हीथ लेजर को याद करते हैं. इसी कैटेगरी में हम सुशांत को याद रखेंगे. और हमें याद रखना पड़ेगा.”


शेखर कपूर और मनोज बाजपेयी का सुशांत सिंह राजपूत को श्रद्धांजली देने वाला वीडियो आप यहां देख सकते हैं:


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वीडियो देखें: सुशांत सिंह राजपूत की कौन-कौन सी फिल्में रिलीज होंगी?

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