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दुनिया का सबसे रहस्यमयी वैज्ञानिक, जिसे मौत की खबर देने सफेद कबूतर आया

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कहानी इंट्रेस्टिंग होनी चाहिए, फिर इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वो सच है या झूठ.

यह फ़िल्म ‘रोशोमोन’ का एक डायलॉग है.

फिर एक और मूवी है – ‘बिग फिश’. उसमें भी एक डायलॉग है कि – ‘ज़्यादातर लोग अपनी कहानियां सीधे-सीधे बता देंगे, वो कहानियां पेचीदा नहीं होंगी, लेकिन वो इंट्रेस्टिंग भी नहीं होंगी.

निकोल टेस्ला की केवल ये फोटो ही सत्य और मिथक के बीच के अंतर को खत्म कर देती है, उसके बाद जो बचता है वो के - रहस्य!
निकोल टेस्ला की केवल ये फोटो ही सत्य और मिथक के बीच के अंतर को खत्म कर देती है, उसके बाद जो बचता है वो केवल – रहस्य!

हम ये दोनों डायलॉग यहां पर क्यूं बता रहे हैं? क्यूंकि अव्वल तो निकोला टेस्ला की कहानी काफी पेचीदा है लेकिन इसी वजह से काफी इंट्रेस्टिंग भी है. साथ ही बेशक निकोला टेस्ला की कहानी कोई ज़्यादा पुरानी नहीं है, लेकिन फिर भी इस कहानी के साथ इतने मिथक और इतनी किंवदन्तियां जुड़ चुकी हैं कि उन्हीं किसी मिथक में से एक है – निकोला का एलियन होना या एलियंस से बात करना.

मिथकों में से वास्तविकता हटाना और उंगली से ठीक-ठीक पॉइंट आउट करना कि ये सच है ये कल्पना, गेहूं से घुन को अलग करने की कवायद है, वो भी जब वो पूरी तरह गूंथ दिए गए हों. अस्तु…


# दो दिन बड्डे, यानी दो दिन पार्टी

ठीक आधी रात को – यानी जुलाई नौ और दस, 1856. इस वक्त पैदा हुआ ये क्रोएशियन (उस वक्त की ‘हिस्ट्री की जियोग्राफी’ के हिसाब से ऑस्ट्रियन) लड़का एक पादरी की संतान था. जैसे अपने यूपी-बिहार में इंजीनियरिंग और डॉक्टरी की पढ़ाई के अलावा और कोई पढ़ाई, पढ़ाई नहीं मानी जाती, और कोई प्रोफेशन, प्रोफेशन नहीं माना जाता, ठीक वैसे ही उन दिनों टेस्ला के मूल देश में पादरी या सैनिक बनने के अलावा और कोई विकल्प, विकल्प नहीं माना जाता था.

टेस्ला की एक रेयर फोटो (http://tesla.stractest.org)
टेस्ला की एक रेयर फोटो (इमेज – tesla.stractest.org)

इसलिए उसके पिता उससे बाइबिल के लंबे-लंबे वर्सेस का रट्टा लगवाते – क्यूंकि वो उसके पादरी बनने में भी काम आते और सैनिक बनने की दशा में युद्ध में भी.

टेस्ला की मां सर्बिया के सबसे पुराने नामी खानदानों में से एक से आती थीं. वो धागों से हर तरह की कलाकारी कर लेती थीं. कहा जाता है कि वो इतनी दक्ष थीं कि पलकों के बालों में तीन गांठें लगा सकती थीं.


# देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए

ये बंदा, टेस्ला, बचपन में नाएग्रा फॉल्स के सपने देखा करता था, मगर ये कोई बड़ी बात नहीं थी. बड़ी बात ये थी कि उसने बचपन में ही, और सपने में ही, नाएग्रा के वेग से एक घूमता हुआ पहिया देख लिया था. उसने अपने अंकल को बताया कि एक दिन वो अमेरिका जाएगा और नाएग्रा फॉल से पहिया घुमाएगा.

नियाग्रा फॉल्स
नियाग्रा फॉल्स

उसने ऐसा किया भी. कैसे, वो आगे बताएंगे.


# स्टडी एट दी टाइम ऑफ़ कोलेरा

बहरहाल सत्रह की उम्र में उसे हैज़ा हो गया था. होने को तो ये हैज़ा उसकी ज़िंदगी को मौत में बदलने के लिए आया था और उसकी ज़िंदगी बदल के गया भी लेकिन मौत में नहीं, एक पॉजिटिव सेंस में.

Tesla - 4

टेस्ला ने पापा को ब्लैकमेल किया – मैं अच्छा हो जाऊंगा, अगर आप मुझे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने दोगे.’ और वही हुआ जिसका आप लोग अनुमान लगा रहे हैं – वो अच्छा हुआ – पापा ने अपना वादा पूरा किया.


# पढ़ोगे लिखोगे, बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे बनोगे टेस्ला

फर्स्ट इयर में कॉलेज में फर्स्ट आने वाला बंदा, जितने ज़रूरी सब्जेक्ट होते हैं उससे ज्यादा एग्जाम क्लियर करने वाला बंदा, एक भी दिन क्लास न मिस करने वाला बंदा, सेकेंड इयर का अंत आते-आते जुए की लत में अपने को तबाह करने लगा. थर्ड इयर में अपनी पॉकेट मनी और अपनी कॉलेज की फीस भी हार गया.

लेकिन हार के जीतने वाले को ही टेस्ला कहते हैं. धीरे-धीरे सारे पैसे रिकवर कर लिए, और फिर ‘संभोग से समाधि’ की तर्ज़ पर एक झटके में जुआ खेलना छोड़ दिया.

लेकिन कुछ नुकसान ऐसे होते हैं जिनकी भरपाई करना असंभव है. पैसा तो वापस आ गया, समय नहीं आया. यूं थर्ड इयर क्लियर नहीं हो पाया और फिर इक्कीसवीं सदी के ‘इंडियन ट्रेंड’ की तरह हमारी कहानी का नायक इंजीयरिंग कॉलेज ड्रॉपआउट हो गया – अपने सपने पूरे करने के लिए.

बेलग्रेड के निकोला टेस्ला संग्रहालय में निकोल टेस्ला की मूर्ति.
बेलग्रेड के निकोला टेस्ला संग्रहालय में निकोल टेस्ला की मूर्ति.

उसके बाद टेस्ला ने कई जगह काम किया कई जगह पढ़ाई की लेकिन कुछ भी कंसोलिडेट नहीं कर पाया. बुडापेस्ट में जॉब की, वहां से अमेरिका गया इमिग्रेंट बनकर. बीसवीं सदी के ‘इंडियन ट्रेंड’ की तरह – अपने सपने पूरे करने के लिए.

बहरहाल, ये इमिग्रेंट जब अमेरिका पहुंचा तो उसके पास पैसे के नाम पर केवल तीन सेंट बचे थे. जिस जहाज में वो सफर करके आया था वो डूबते-डूबते बचा था, उसके बाद जहां पर उतरा, वहां भगदड़ मच गई. वहां फिर मौत के मुंह से बच कर आ गया. वो इमिग्रेंट, जो तब मारा जाता तो अमेरिका को कोई फ़र्क नहीं पड़ता. लेकिन ये कहना ग़लत है कि कोई फ़र्क नहीं पड़ता, दरअसल अमेरिका ही नहीं बल्कि हमको, हम सब को पता ही नहीं चलता, कि आज हम कितने पीछे होते, उस एक व्यक्ति के न होने से.


# एक जोक जिसने टेस्ला की जिंदगी (फिर) बदल दी

वो होता है न रेज्युमे में, रेफरेंसेज़ – अवेलेबल ऑन रिक्वेस्ट, वैसे ही हमारे टेस्ला सा’ब एक लेटर लेकर गए थे अपनी जॉब के लिए एडिसन के पास. लेटर एडिसन के बिज़नस पार्टनर का था. लेटर में लिखा था – एडिसन जी, मैं दुनिया में दो कमाल के लोगों को जानता हूं. एक आप हैं और दूसरा आपके सामने खड़ा है.’

थॉमस एल्वा एडिसन (इमेज - विकिपीडिया)
थॉमस एल्वा एडिसन (इमेज – विकिपीडिया)

एडिसन कौन?

अरे वो जिसने चेतन भगत की तरह इंजीयरिंग के साथ-साथ एमबीए भी किया था. अरे नहीं-नहीं, लिटरली नहीं! मतलब ये कि उसको विज्ञान के साथ-साथ बिज़नस में भी महारत हासिल थी. एक तरफ़ बिजली का अविष्कार, दूसरी तरफ़ पैसों का भंडार. बड़ी कंपनी खोल ली. पूरे न्यूयॉर्क में जगह-जगह बिजली के प्लांट लगा दिए थे. तो इसलिए एम्पलॉई भी रख लिए. खैर ये कहानी एडिसन की नहीं, लेकिन फिर भी हमारी कहानी का बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर वही है.

तो एडिसन ने बिजली का अविष्कार किया और उसको चलाने के लिए डीसी का प्रयोग किया. इस पूरी कहानी में एसी-डीसी बहुत यूज़ हुआ है इसलिए बिना विज्ञान में ज़्यादा घुसे बस इतना जान लेते हैं कि दो तरह के बंदे होते हैं – संस्कारी और बिगड़ैल, जहां संस्कारी घर में बड़े एप्रिशिएट किए जाते हैं, शाबाशी पाते हैं, मगर न वो, न उनके किस्से ही दूर-दूर तक पहुंच पाते हैं. वहीं बिगड़ैल घर में लगभग अस्वीकार्य होते हैं, चाहे गली-मुहल्ले क्या पूरे कस्बे, पूरे शहर तक में उनके चर्चे हों, उनका आना-जाना, उनकी एक्सेस हो.

एसी - अल्टरनेटिंग करेंट, डीसी - डायरेक्ट करेंट. मगर अभी के लिए इतना जान लेते हैं कि एसी टेस्ला की फेवरेट और डीसी एडिसन की.
एसी – अल्टरनेटिंग करेंट, डीसी – डायरेक्ट करेंट. मगर अभी के लिए इतना जान लेते हैं कि एसी टेस्ला की फेवरेट और डीसी एडिसन की.

इसी तरह करंट भी दो तरह के होते हैं डीसी और एसी – डीसी है, संस्कारी करंट. घर में काफी यूजफुल, ज़्यादातर इलेक्ट्रिकल चीज़ें इसी से चलती हैं, लेकिन एक जगह से दूसरी जगह नहीं पहुंच पाती. वहीं एसी बिगड़ैल – बैडेस – घर के किसी काम की नहीं, एक-दो काम कर ले तो कर ले, गोया कोई एहसान सरीखा. मगर फिर भी एक जगह से दूसरी जगह बड़े आराम से पहुंच जाती है. और हां, एसी करंट चूंकि बिगड़ैल है तो इससे कोई पंगे भी नहीं लेता – बोले तो – छू दो तो भड़क जाए – टाइप्स. तो इससे दूरी ही अच्छी.

तो एडिसन की डीसी ने घर तो रोशन कर दिए मगर बिजली एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना उनके लिए दूभर हो रहा था. हर आधे मील के दायरे में एक पावर स्टेशन बनाना पड़ता था. बिजली नया कॉन्सेप्ट था इसलिए आज के स्टार्ट-अप्स की तरह उसमें भी काफी इन्वेस्टमेंट हुआ था, कॉस्ट कटिंग की किसी ने नहीं सोची थी. तो दिक्कत नहीं थी. लेकिन भविष्य में होने वाली थी.

और टेस्ला अपना वैज्ञानिक कम, भविष्यवक्ता ज़्यादा.

बहरहाल, वापस लौटते हैं जॉब इंटरव्यू वाले किस्से पर. तो एडिसन और टेस्ला पहली बार मिल रहे थे, रेफरेंस लेटर तो दुरुस्त था लेकिन ‘ऑपरेशनल राउंड’ होना अभी बाकी था. कहा जाता है कि एडिसन का ‘ऑपरेशनल राउंड’ क्लियर करना बड़ा मुश्किल होता था. वो टास्क ही ऐसे देता था. तो टेस्ला को भी दिया – एक जहाज के डायनेमो को सही करने का काम.

Tesla - 5

टेस्ला सारी रात जगा और वो काम किया. एडिसन बहुत प्रभावित हुआ और उसने टेस्ला को जॉब में रख लिया.

इस बॉस डॉमिनेटिंग वर्ल्ड यानी बॉससत्तात्मक समाज में सीईओ और एक अदने से कर्मचारी की मुलाकात कम ही होती है लेकिन जब कभी भी होती है कर्मचारी के लिए दुख ही लेकर आती है.

टेस्ला एक बार अपनी एसी वाली ‘प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ की पीपीटी लेकर बॉस के पास गया. बॉस ने रिजेक्ट कर दी. बोला – नहीं, ये नहीं चलेगा. ये पूरे शहर में आग लगा देगा, अगर करना ही है तो डीसी सिस्टम को इंप्रूव करो.

और टेस्ला को एक टारगेट दिया कि यदि टेस्ला अपने एसी वाले फ्यूचरिस्टिक प्रोजेक्ट को छोड़कर एडिसन के ‘डीसी करंट’ वाले करंट प्रोजेक्ट को और फ्रूटफुल बनाता है तो उसे इंसेंटिव के रूप में ‘पचास हज़ार’ डॉलर मिलेंगे. टेस्ला बोला – यस बॉस’, और लग गया अपने काम में. तय मियाद से पहले अपना टारगेट अचीव कर लिया और बॉस से अपना इंसेंटिव लेने पहुंच गया.

लेकिन इंसेंटिव न हो, गोया अच्छे दिन हों – एडिसन ने कहा कि तुम बड़े क्यूट हो, तुम्हें अमेरिकन सेंस ऑफ़ ह्यूमर की बिल्कुल समझ नहीं. टेस्ला ने पूछा – अच्छा हंसना था?

बहरहाल धोखों के क्रम में ये टेस्ला को पहला बड़ा धोखा मिला था. उसने जॉब से रिज़ाइन कर दिया. लेकिन फिर भी एडिसन की कंपनी से उसका नाता नहीं छूटा. किसी मनरेगा टाइप प्रोग्राम के तहत वो एडिसन की कंपनी के लिए जो अंडरग्राउंड वायरिंग हो रही थी, उसके लिए खुदाई करता था.


# वर्ल्ड वॉर या कोल्ड वॉर नहीं, ‘करंट वॉर’

गूगल करके देख लो ‘वर्ल्ड वॉर’, ‘कोल्ड वॉर’ और ‘कोला वॉर’ की मानिंद ही ‘करंट वॉर’ के ऊपर डेडिकेटेड कितनी ही वेबसाइट, कितने ही पेज मिल जाएंगे.

इमेज - www.matrixdisclosure.com
इमेज – matrixdisclosure.com

तो, मजदूरी के बीच-बीच में जब वो साथियों के साथ बीड़ी या चाय पी रहा होता था तो अपने एसी वाले प्रोजेक्ट को दोस्त मजदूरों को बताता था, लेकिन ‘उन सब’ के लिए तो ‘ये सब’ काला अक्षर भैंस बराबर था. मगर उन्हीं दोस्तों में से एक ने उसे एक बड़े इन्वेस्टर का पता दिया. इन्वेस्टर उसके काम से प्रभावित हुए और यूं उसे ‘फर्स्ट राउंड फंडिंग’ मिली. कंपनी का नाम हुआ – टेस्ला इलेक्ट्रिक लाइट एंड मेन्युफेक्चरिंग.

इस कंपनी के विज़न को कोई शायद ही समझ पाया. इसने काफी पेटेंट करवाए (अपनी इफिसिएंशी से चलते जिनका इस्तेमाल आज तक होता आ रहा है और भविष्य में भी इनका कोई विकल्प आएगा, इसकी संभावना कम ही है) लेकिन अंततः ये स्टार्टअप फेल हो गया. टेस्ला फिर जॉबलेस हो गया.

 'दी करंट वॉर', 2017 की एक हिस्टॉरिकल ड्रामा फिल्म है जो इसी पर आधारित है.

‘दी करंट वॉर’, 2017 की एक हिस्टॉरिकल ड्रामा फिल्म है जो इसी पर आधारित है.

उसके बाद अल्फ्रेड ब्राउन के साथ मिलकर दूसरा स्टार्ट-अप खोला – टेस्ला इलेक्ट्रिक कंपनी और 1887 में एसी से चलने वाला मोटर बनाया. ये मोटर भी टेस्ला के अन्य अविष्कारों की तरह ही अपने समय से आगे का था. और समय से आगे का था तो उस समय इसकी कोई पूछ नहीं थी. लेकिन इस बार टेस्ला का अविष्कार मार्केट में बज़ क्रिएट करने में सफल रहा. जॉर्ज वेस्टिंगहाउस से सेकेंड राउंड की फंडिंग मिली.

उसके बाद शुरू हुआ – वॉर ऑफ़ करंट. जहां एक तरफ एडिसन और उनकी डीसी थी और दूसरी तरफ टेस्ला और उनकी एसी.


# शेम-शेम

वॉर ऑफ़ करंट ने घृणित रूप धारण कर लिया था.

एडिसन और उसके पीआर ने अपने डीसी को ज्यादा ‘यूज़र फ्रेंडली’ सिद्ध करने के लिए जानवरों के ऊपर एसी करंट लगवाए और इसका सामूहिक प्रदर्शन किया, ताकि लोगों में एसी का डर बैठ जाए.

इतने से भी जब शांति नहीं मिली तो एक कनविक्टेड मर्डरर ‘विलियम कैमलर’ के ऊपर एसी करंट का प्रयोग करने की ठानी गई ताकि एसी के नेगेटिव इफेक्ट्स सबके सामने आ सकें.

दरअसल साउथवेस्ट नाम के एक दंत चिकित्सक ने सोचा कि कैदियों को फांसी पर लटकाने से अच्छा बिजली के झटके से मृत्युदंड देना होगा. उसने जानवरों पर यह टेस्ट करने के बाद एडिसन से संपर्क किया. पहले तो एडिसन की तरफ से उत्तर आया कि नहीं, ये आइडिया सही नहीं है और वो तो मृत्यु दंड के ही सख्त खिलाफ़ हैं.

एक महीने बाद साउथवेस्ट ने एडिसन को फिर से पत्र लिखा. अबकी बार एडिसन की राय बदल गई थी. वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक एडिसन ने जवाब लिखा – इस सब के लिए वेस्टिंगहाउस द्वारा निर्मित ‘अल्टरनेटिंग मशीन’ सबसे उपयुक्त रहेगी.

ये जवाब बावज़ूद इसके था कि वेस्टिंगहाउस एडिसन का सबसे बड़ा ‘राइवल’ था. या यूं कहें कि ये जवाब इसी वजह से था क्यूंकि वेस्टिंगहाउस एडिसन का सबसे बड़ा ‘राइवल’ था.

तो इस तरह वेस्टिंगहाउस की कंपनी द्वारा निर्मित इलेक्ट्रिक चेयर का इस्तेमाल मृत्यु दंड के लिए किया गया, लेकिन इलेक्ट्रिक चेयर को प्रमोट करने वाले एडिसन ही थे.

इसी नेगेटिव पब्लिसिटी से बचने के लिए वेस्टिंगहाउस ने कैमलर के लिए सबसे अच्छा वकील नियुक्त किया, वो इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में भी ले गया, जिससे कि कैमलर की मौत की सजा टाली जा सके.

इलेक्ट्रिक चेयर से दिए गए प्रथम मृत्यु दंड का चित्रण (इमेज - विकिपीडिया)
इलेक्ट्रिक चेयर से दिए गए प्रथम मृत्यु दंड का चित्रण (इमेज – विकिपीडिया)

‘विलियम कैमलर’ की मौत के लिए प्रयुक्त की जाने वाली इलेक्ट्रिक चैयर में पहले दिन एक घोड़े को सफलतापूर्वक (?) मार डाला गया था. फिर 17 सेकंड तक कैमलर को एसी करंट के एक हजार वोल्ट झटके दिए गए. इसके बाद कैमलर को मृत घोषित कर दिया गया. लेकिन उसकी सांसें अब भी चल रही थीं. उसे फिर से करंट दिया गया. अबकी दो हजार वोल्ट का. अब वो मर चुका था. मगर कुछ गवाहों ने दावा किया कि उसके शरीर में आग लग गई. अख़बारों में इसको और सेंसेशनलाइज़ किया गया. मांस के जलने की गंध और इतनी दर्दनाक मौत न देख पाने के चलते दर्शक कमरे से बाहर निकल गए थे.

जहां इस पूरे उपक्रम के बाद वेस्टिंगहाउस बहुत ज़्यादा डर गया था और उसने कहा था कि – इससे बेहतर तो कुल्हाड़ी से गला काट दिया जाता. एडिसन ने कहा था, ‘मुझे लगता है कि जब उसको मौत की सजा के लिए कुर्सी में रखा जाएगा, तो वह मृत्यु तुरंत हो जाएगी.’

यूं इलेक्ट्रिक चेयर से मृत्यु दंड पाने वाला विलियम कैमलर पहला इंसान बना.


# नियाग्रा फॉल वाला सपना

लेकिन इतनी नेगेटिव पब्लिसिटी के बावज़ूद एसी की एक्स्पेटेंस में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही थी. नियाग्रा फॉल से बहने वाले पानी से बिजली बनाने के लिए टेस्ला की राय ली गई और फिर दो-फेज़ वाली एसी करंट का उपयोग करने के लिए वेस्टिंगहाउस की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिला. और एडिसन की हालत ऐसी हो गई थी गोया रोएं या हंसे. क्यूंकि उनकी कंपनी, जो तब जनरल मोटर्स हो चुकी थी, को भी कॉन्ट्रैक्ट मिला था, इस एसी करंट को घर-घर डिस्ट्रिब्यूट करने का.

टेस्ला का स्टार्टअप
टेस्ला का स्टार्टअप

होने को टेस्ला और एडिसन में उस तरह की राईवलरी नहीं थी जितनी टेस्ला के दो बॉसेज़ – एडिसन और वेस्टिंगहाउस के बीच थी. वेस्टिंगहाउस अपनी बिजली को नुकसान में बेच रहा था, जिससे एडिसन बर्बाद हो जाए. और इन सब के बीच में पिस रहा था टेस्ला.


# रेडियो किसने बनाया

कहा जाता है कि 13 मार्च, 1895 में यदि टेस्ला की लेब आग की भेंट नहीं चढ़ती तो टेस्ला को ही रेडियो का अविष्कारक माना जाता. लेकिन ये कम लोगों को पता है कि कुछ राजनैतिक कारणों के चलते और कुछ भाग्य और जिजीविषा के चलते रेडियो के अविष्कार का पेटेंट मार्कोनी को मिल गया और उन्हें ही इसका जनक भी माना गया. मार्कोनी एक इटैलियन नागरिक थे, जिन्हें ब्रिटिश नागरिकता मिली थी. बहरहाल कम ही लोग जानते हैं कि टेस्ला की मौत के कुछ महीनों बाद ही मार्कोनी के पेटेंट को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने अमान्य करार दे दिया था और पेटेंट टेस्ला को दे दिया था.

गूल्येलमो मार्कोनी
गूल्येलमो मार्कोनी

लेकिन तब तक मार्कोनी को नोबेल प्राइज़ मिल चुका था और टेस्ला को जीवन में कभी ये प्राइज़ नहीं मिला, हां, कयास ताउम्र लगते रहे.


# तीन काम एक दाम

1898 में टेस्ला ने एक नाव बनाई जो रिमोट से चलती थी. वो अपने वक्त से इतने आगे थी कि लोगों को लगा टेस्ला ने किसी प्रशिक्षित जानवर को उसके अंदर डाल रखा है. टेस्ला को नाव खोल के पूरे कलपुर्जे दिखाने पड़े थे. होने को मुझे लगता है कि उस दौर में यदि ये भी कहा जाता कि इसके अंदर मेंढक या खरगोश बंद था तो भी टेस्ला को बहुत अधिक प्रसिद्धि मिल जाती.

लोग कहते थे हो न हो इस बोट के अंडर ज़रूर एक प्रशिक्षित जानवर है (इमेज - विकिपीडिया)
लोग कहते थे हो न हो इस बोट के अंडर ज़रूर एक प्रशिक्षित जानवर है (इमेज – विकिपीडिया)

बहरहाल यही वो अविष्कार था जो आज-कल के तीन ‘एडवांस’ टेक्निक में काम आता है. मतलब दुनिया का पहला रोबोट, दुनिया की पहली गाइडेड मिसाइल और दुनिया का पहला रिमोट कंट्रोल – ये तीनों अविष्कार टेस्ला ने एक ही प्रयोग में कर डाले थे.


# व्हेन टेस्ला मेट विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद के एक लेटर के अनुसार निकोल टेस्ला को उन्होंने वेदांत, आकाश या जेडपीएफ (जीरो पॉइंट फील्ड) का ज्ञान दिया था. स्वामी विवेकानंद ने टेस्ला को आकाश यानी दो अणुओं के बीच के स्पेस का ज्ञान दिया था. टेस्ला ने अतीत में भी कॉलेज ड्रॉप आउट करने के बाद फिलॉसफी का अध्ययन किया था, पिता तो पादरी थे ही तो आध्यात्मिक होना वहां से भी जुड़ सकता है.

स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद

इसलिए ही टेस्ला को कई अविष्कारों की प्रेरणा एक कौंध के रूप में आई. जिसमें उसके सबसे फेमस अविष्कार – टेस्ला कॉइल, जो डूबते सूरज को देखते हुए बनाया गया था, की भी बात की जा सकती है.


# फ़ास्ट फॉरवर्ड

बहरहाल निकोल टेस्ला ने खूब पैसा कमाया मगर उतनी ही तेज़ी से उड़ाया भी. ये कहना ग़लत न होगा कि उसकी बीमारी भी फ्यूचरस्टिक थी. मतलब उसे तब ओसीडी की बीमारी थी तब इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी. इसी के चलते वो पैसों से ज़्यादा ध्यान अपने प्रयोगों में देता था.

वह स्वच्छता और संख्या ‘तीन’ से ऑब्सेस्ड हो चुका था. वह लोगों के साथ हाथ मिलाने और हाथ धोने जैसे उपक्रम तीन-तीन के सेट में करता था. खाते वक्त उसकी मेज पर 18 नैपकिन रहनी ज़रूरी थी. और जब भी वो चलता तो अपने कदम गिना करता था. उसे औरतों के गहनों का फोबिया था. वो कहता था कि मोती को एक नज़र देखने भर से मुझे उल्टी आ जाती है.

टेस्ला का म्यूज़ियम - बेलग्रेड, सर्बिया
टेस्ला का म्यूज़ियम – बेलग्रेड, सर्बिया

अपने जीवन के अंतिम दिनों में टेस्ला कबूतरों से भी ऑब्सेस्ड हो गया था, विशेष रूप से एक सफेद मादा कबूतर से. वो उस कबूतर को वैसे ही प्रेम करता था जैसे कोई किसी प्रेमिका से करता हो. टेस्ला की बात मानें तो एक रात सफेद कबूतर उसके होटल की खुली खिड़की से दाखिल हुआ. टेस्ला का मानना था कि कबूतर उसे बता रहा था कि उसकी मृत्यु निकट है. टेस्ला ने कबूतर की आंखों में प्रकाश के दो शक्तिशाली गोले देखे. बाद में टेस्ला ने कहा – ‘हां, यह एक वास्तविक प्रकाश था, एक शक्तिशाली, चमकदार, अंधा कर देने वाला प्रकाश. एक ऐसा प्रकाश जो मेरे द्वारा प्रयोगशाला में निर्मित किए गए सबसे शक्तिशाली प्रकाश की तुलना में कहीं, कहीं अधिक तीव्र था.’ वह कबूतर टेस्ला की बांहों में मर गया. टेस्ला ने तब घोषणा की कि वह जान गया है कि उसने इस जिंदगी का अपना काम समाप्त कर लिया है.


# टाइम मैगज़ीन का कवर

1931 में उसे टाइम मैगज़ीन के कवर पृष्ठ पर जगह मिली, उस वक्त वो 75 वर्ष का था. उसके द्वारा किए गए सभी अविष्कारों की लिस्ट उस मैगज़ीन के एडिशन का फीचर लेख थी. सनद रहे कि तब और आज तक भी टाइम मैगज़ीन की कवर फोटो बनना प्रतिष्ठा की बात है.

उस 'टाइम' की बात
उस ‘टाइम’ की बात

# डेथ बीम

1934 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि टेस्ला ‘डेथ बीम’ पर काम कर रहा था जो आकाश में उड़ रहे दुश्मन के दस हज़ार हवाई जहाजों को एक साथ मारने में सक्षम था. उसने इसे बनाने के लिए उस वक्त के बड़े बिजनेसमेन जे पी मोर्गन से फंडिंग की बात की लेकिन उसे अतीत में सहायता करने वाले मोर्गन ने और फंडिंग देने से इनकार कर दिया. हालांकि, टेस्ला ने सोवियत संघ से 25,000 डॉलर का चेक प्राप्त किया था, लेकिन परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी. 1943 में जब टेस्ला की मृत्यु हुई तो वो छियासी साल का था और तब भी क़र्ज़ में बेतरह डूबा.


# टेस्ला आईएनसी. (2003)

टेस्ला Inc, अमेरिका और विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. और इसके सीईओ - एलोन मास्क - कुछ सबसे प्रसिद्ध सीईओज़ में से एक.
टेस्ला Inc, अमेरिका और विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. और इसके सीईओ – एलन मास्क – कुछ सबसे प्रसिद्ध सीईओज़ में से एक.

एलन मस्क की टेस्ला कंपनी हमारे कहानी के नायक की मृत्यु के साठ साल बाद बनी. इस कंपनी के फाउंडर्स की मानें तो इसका नाम टेस्ला रखा गया हमारे कहानी के नायक को श्रद्धांजलि देने के लिए. और ये कंपनी विश्व की सबसे तेज़ ग्रो करने वाली कंपनियों में से एक है.


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कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.