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कश्मीर की टॉप 5 ख़बरें: सुप्रीम कोर्ट, पैलेट गन, महबूबा मुफ़्ती, पाकिस्तान और स्पेशल पैकेज

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कश्मीर में लॉकडाउन का 23वां दिन है. स्थितियां सामान्य नहीं हुई हैं. खासतौर पर घाटी का हिस्सा लगातार सुर्खियों में है. कश्मीर के अंदर और बाहर (कश्मीर को लेकर) काफी कुछ घट रहा है. मसलन, सुप्रीम कोर्ट की कुछ अहम टिप्पणियां आई हैं. पैलट गन को प्रदर्शनकारियों की शिनाख़्त के तौर पर इस्तेमाल किए जाने जैसी बातें कही जा रही हैं. पाकिस्तान लगातार कुछ-न-कुछ बोल रहा है. इन सबके बीच ख़बर आ रही है कि केंद्र जम्मू-कश्मीर के लिए एक स्पेशल पैकेज का ऐलान कर सकता है. कुल पांच बड़े अपडेट्स हैं कश्मीर पर. जो हम क्रमवार बता रहे हैं यहां.

1. सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
28 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से जुड़ी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आईं. कश्मीर में नेताओं को हिरासत में रखे जाने के विरुद्ध. राज्य में लगे प्रतिबंधों के नाम. इनमें से आर्टिकल 370 निष्क्रिय करने और राज्य को दो हिस्सों में बांटने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं कोर्ट ने एक बड़ी खंडपीठ को रेफर की हैं. इन याचिकाओं को अब पांच जजों की एक कॉन्सिट्यूशन बेंच सुनेगी. अक्टूबर की शुरुआत में इसकी सुनवाई शुरू होगी. इस मामले में अदालत ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से उनकी प्रतिक्रिया भी मांगी है.

बेंच के आगे आई याचिकाओं में एक CPI (M) नेता सीताराम येचुरी की भी थी. वो अपने सहयोगी मुहम्मद युसूफ तरीगामी की सेहत का हालचाल लेने कश्मीर जाने चाहते हैं. युसूफ CPI (M) की सेंट्रल कमिटी का हिस्सा हैं. चार बार विधायक रह चुके हैं. कुछ समय से बीमार बताए जा रहे हैं. मुख्य न्यायाधीश (CJI)रंजन गोगोई की अध्यक्षता में एक बेंच ने येचुरी की याचिका पर कहा-

अगर एक नागरिक देश के किसी हिस्से में जाना चाहता है, तो उसे जाने की इजाज़त ज़रूर होनी चाहिए.

SC ने ये ताकीद भी की है कि येचुरी इस यात्रा का राजनैतिक इस्तेमाल नहीं कर सकते. अदालत ने कहा कि अगर येचुरी ऐसा करते हैं, तो प्रशासन सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दे सकता है. येचुरी से कहा गया है कि वो कश्मीर से लौटकर अपनी यात्रा की एक रिपोर्ट अदालत में जमा करें. 9 अगस्त को येचुरी और डी राजा कश्मीर गए थे. वहां प्रशासन ने श्रीनगर एयरपोर्ट से उन्हें वापस दिल्ली भेज दिया गया. जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी का एक छात्र भी कोर्ट पहुंचा था. वो घरवालों से मिलने अनंतनाग जाना चाहता था. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वो घर जा सके, इसके लिए ज़रूरी इंतजाम किए जाएं.

2. पैलेट गन प्रदर्शनकारियों की पहचान का टूल बन गया है!
‘अलीबाबा चालीस चोर’ में मरजीना अपनी जेठानी से तराजू मांगने गई. उसे अशर्फियां तौलनी थीं. मीर कासिम की बीवी को शक़ हुआ. इतनी रात क्या तौलेंगे ये लोग? उसने तराजू के पलड़े में मोम लगा दिया. उससे चिपके अशर्फ़ी के एक टुकड़े ने खजाने की गुफा का राज खोल दिया. लोग कह रहे हैं, ऐसा ही कुछ कश्मीर में हो रहा है. प्रदर्शनकारियों को भगाने, उनपर काबू पाने के लिए उनके ऊपर पैलेट गन दागी जाती है. पैलेट गन से होने वाला जख़्म मामूली नहीं होता. गंभीर फिज़िकल इंजरी करते हैं पैलेट्स. मगर अब इनके एक और इस्तेमाल का आरोप लग रहा है. इनके मुताबिक, रात के अंधेरे में सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ घरों पर छापा मारती हैं. तलाशी लेती हैं. जिन्हें पैलेट गट लगी होती है, उन्हें पकड़कर ले जाते हैं.

22 अगस्त को UN के कुछ मानवाधिकार एक्सपर्ट्स ने कश्मीर को लेकर भारत सरकार से एक अपील जारी की. इसमें रात के समय होने वाले कथित रेड्स का भी जिक्र था. कहा गया था-

विशेषज्ञों ने उन रिपोर्ट्स पर गंभीर चिंता जताई, जिनमें कहा जा रहा है कि सुरक्षा बल रात के समय लोगों के घरों में छापेमारी कर रहे हैं और युवाओं को गिरफ़्तार कर रहे हैं. इस तरह से लोगों को हिरासत में लिया जाना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है. प्रशासन को इस तरह के आरोपों की सही तरह से जांच करनी चाहिए. अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो इसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए.

ये भी पढ़िए: कश्मीर पर मचे इस बवाल को लेकर यूएन ने पहली बार कुछ कहा है

कश्मीर से आ रही ये ख़बर हॉन्ग कॉन्ग की रिपोर्ट्स से मिलती हैं. वहां एक प्रत्यर्पण संधि को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू हुआ. जल्द ही ये प्रो-डेमोक्रेसी मूवमेंट में बदल गया. सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हट रहे. मूवमेंट ख़त्म करने पर आमादा चीन प्रोटेस्ट करने वालों की पहचान के लिए खास तरीके इस्तेमाल कर रहा है. एक तरीका ये है कि प्रोटेस्टर्स के ऊपर रंगीन लिक्विड की बौछार की जाती है. ये रंग त्वचा और कपड़ों पर लगा रह जाता है. फिर इनके सहारे पुलिस प्रदर्शनकारियों को पकड़ती है. ये अकेला टूल नहीं है प्रोटेस्टर्स की शिनाख़्त का. पुलिस के साथ मौजूद फटॉग्रफर प्रोटेस्ट कर रही भीड़ की तस्वीरें खींचते है. ज्यादातर प्रदर्शनकारी चेहरे पर मास्क लगाकर आते हैं. मगर नई-नई तकनीकों की मदद से इन तस्वीरों के सहारे कैमरे में कैद हुए प्रोटेस्टर्स के चेहरे का स्केच बना लिया जाता है.

3. हिरासत में बंद बेटी से नहीं मिल पाई मां
मां हैं गुलशन मुफ़्ती. उनकी बेटी महबूबा मुफ़्ती. महबूबा की बेटी सना इल्तजा मुफ़्ती. सना के मुताबिक, 21 अगस्त को मुफ़्ती परिवार ने स्थानीय पुलिस को एक चिट्ठी भेजी. इसमें उन्होंने गुलशन की महबूबा से एक छोटी मुलाकात कराने की इजाज़त मांगी. मगर इस आवेदन का कोई जवाब नहीं मिला. महबूबा 5 अगस्त से ही प्रिवेंटिव कस्टडी में हैं. सना के मुताबिक, परिवार की तरफ से ये भी कहा गया. कि पुलिस चाहे तो मीटिंग से पहले गुलशन की तलाशी ले सकती है. मगर अब तक परमिशन नहीं दी गई है.

4. पाकिस्तान क्या कर रहा है?
अंग्रेजी में शब्द है- रोटॉरिक. मतलब, सुनने में तो बात अच्छी लगे मगर वो हो बेतुकी और हल्की. इमरान खान कश्मीर पर लगातार रेटॉरिक दे रहे हैं. युद्ध की धमकी. कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने की कोशिश. इन सबके बीच आया विपक्ष के नेता बिलावल भुट्टो का बयान. उन्होंने कहा, पहले पाकिस्तान सोचता था कि श्रीनगर को भारत से कैसे हासिल करे. अब उसकी चिंता ये है कि मुजफ्फराबाद किस तरह बचाया जाए. मुजफ्फराबाद राजधानी है PoK की. बिलावल ने कहा कि इमरान खान सरकार के कारण पाकिस्तान ने कश्मीर खो दिया है.

इधर बिलावल इमरान को कश्मीर पर अब तक की सबसे नाकाम पाकिस्तानी गर्वनमेंट बता रहे हैं. उधर इमरान ने 26 अगस्त को टीवी पर राष्ट्र के नाम संदेश दिया. कहा, पाकिस्तान का हर नागरिक कश्मीरियों के लिए सपोर्ट जताने हफ़्ते में आधे घंटे बाहर आए. प्रदर्शन करे. इमरान लाख हाथ-पैर मारे. लेकिन उन्हें इंटरनैशनल सपोर्ट नहीं मिल रहा है. ट्रंप ने एक-दो बार मध्यस्थता की बात कही. मगर G7 सम्मेलन में मोदी के साथ मुलाकात के बाद उन्हीं ट्रंप ने कहा- मुझे लगता है कि वो लोग (भारत-पाकिस्तान) खु़द ये सुलझा सकते हैं.

5. केंद्र कश्मीर के नाम स्पेशल पैकेज का हिंट
सूत्रों के हवाले से मीडिया में ख़बरें चल रही हैं. कि केंद्र जम्मू-कश्मीर के लिए एक विशेष पैकेज जारी कर सकती है. एक कैबिनेट मीटिंग में इसपर चर्चा होने की संभावना है. बताया ये भी जा रहा है कि 27 अगस्त को गृह मंत्रालय में एक बैठक हुई. इसमें विमर्श हुआ कि केंद्र की योजनाओं को राज्य में लागू किया जाए. और ऐसे कदम उठाए जाएं कि घाटी में हालात सामान्य होने की स्थिति बने. सरकार चाहती है कि कश्मीर में भारी निवेश, नौकरियों और वेलफेयर स्कीम्स के सहारे लोगों का सपोर्ट हासिल किया जाए.

28 अगस्त की शाम जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. लोगों का आश्वासन दिया कि जल्द सब ठीक हो जाएगा. कश्मीर की जनता को भरोसा दिया कि सरकार उनके साथ है, उनके भले के लिए चीजें कर रही है. कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 50 हज़ार नौकरियों के मौके आएंगे. गवर्नर के मुताबिक, कश्मीर में निवेश लाने पर लगातार बातें हो रही हैं. सारा काम हो गया, तो कश्मीर भारत का सबसे शानदार सूबा हो जाएगा. पैलेट गन, लोगों के मारे जाने की ख़बरें और फोन-इंटरनेट कनेक्शन पर गवर्नर बोले-

लोगों के मारे जाने की ख़बर ग़लत है. उपद्रव में कुछ लोग घायल हुए हैं. हम तो पैलेट गन लगने की बात भी मान रहे हैं. ऐसी चोटें जिन्हें आई हैं, उनमें से ज्यादातर को कमर के नीचे ज्यादातर चोट लगी है. इससे नुकसान होने वाला नहीं है. रिस्ट्रिक्शन को समझने की कोशिश करें. फोन और इंटरनेट किसके काम आता है? थोड़ा-बहुत हमारे काम आता है, मगर ज्यादा आतंकियों के काम आता है. ये हमारे खिलाफ हथियार है और इसीलिए हमने इसे रोका हुआ है. हम धीरे-धीरे इसे खोल देंगे. 95 में से 46 टेलिफोन एक्सचेंज खोल दिए गए हैं. झूठी अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं. 

कश्मीर पर भारत की डिप्लोमसी अब तक कामयाब रही है. इसी के सहारे वो कश्मीर को इंटरनैशनल मुद्दा बनाने की पाकिस्तान की कोशिशों को काट रहा है. मगर अंतरराष्ट्रीय मीडिया लगातार कश्मीर की रिपोर्टिंग कर रहा है. उनकी रिपोर्ट्स की कई बातें भारत के स्टैंड से मेल नहीं खाती. घरेलू स्तर पर विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है. ऐसे में कश्मीर में ज्यादा समय तक लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता. कम्यूनिकेशन पर लगाए गए बैन को जितना आगे बढ़ाया जाएगा, इसे जस्टिफाई करने का प्रेशर भी सरकार पर बढ़ता जाएगा. जानकारी की आवाजाही में पैदा हुए इस वैक्युम के कारण कश्मीर को लेकर बहुत कन्फ्यूज़न की स्थिति बन गई है. कई ऐसी ख़बरें आ रही हैं, जिनकी पुष्टि का ज़रिया नहीं है. सच क्या है और अफ़वाह क्या है, इसमें अंतर कर पाना मुश्किल हो रहा है. सरकार नहीं चाहेगी कि ऐसी स्थिति ज्यादा दिनों तक बनी रहे.


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