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जसपाल भट्टी के 10 ज़िंदादिल किस्से

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जसपाल भट्टी. नाम सुनते ही हंसता-हंसाता चेहरा सामने आ जाता है. याद आते हैं ‘फ्लॉप शो’ और ‘माहौल ठीक है’ जैसे शो. ये वो दौर था जब डिश टीवी की जगह छत पर एक एंटीना लगा रहता था. और शो शुरू होने से पहले ही एंटीना हिला-डुला कि सारी फ्रिक्वेंसी सेट कर दी जाती थी. और फिर सब साथ में बैठ जाते. जसपाल भट्टी, सविता भट्टी, विवेक शौक, बी.एन. शर्मा जैसे कलाकार मिलकर दूरदर्शन पर एक नयापन सा लाते थे. और वही नयापन हमें हिलती हुई टीवी स्क्रीन में भी शो देखने को मजबूर कर देता था.

जसपाल भट्टी की बात हो और सविता भट्टी का नाम न आए ऐसा होना मुश्किल है. उनकी रील और रियल लाइफ पार्टनर रहीं. ‘फ्लॉप शो’ में दोनों एक साथ दिखते. हंसते-खेलते लड़ते-झगड़ते. उस शो को प्रोड्यूस भी कर रही थीं सविता. 1985 में दोनों की शादी हुई. 2012 तक ही दोनों साथ रहे लेकिन आप सविता जी से पूछिए. वो बताएंगी कि कैसे जसपाल जी हमेशा उनके साथ हैं. और किस तरह इस साथ को उन्होंने बनाए रखा. देखिए न, आज फोन पर बात कर रहा था तो बात करते करते खुद ही मुस्कुराते हुए बोलीं, “अभी मैं जसपाल जी के कमरे में ही बैठी हूं.” 

सवीता और जसपाल भट्टीसविता और जसपाल भट्टी

जसपाल भट्टी को जानने के लिए सविता जी से बेहतर कोई नहीं हो सकता है. मैं आज उनसे पहली बार बात कर रहा था. करीब एक घंटे तक बात चली. जसपाल भट्टी पर बात हो रही थी तो एक पल के लिए भी नहीं लगा कि फोन के दूसरी तरफ बैठी शख्स से पहली बार बात कर रहा हूं. मेरी उत्सुकता और उनकी खुशी का स्केल पूरे इंटरव्यू के दोरान हाई लेवल पर ही रहा. आप भी पढ़िए, पीछे क्यों रहेंगे?

जसपाल भट्टी से हुई शुरुआती मुलाकात के  बारे में बताइए. 

मिड 80s की बात है. दूरदर्शन पर ‘चित्रहार’ आया करता था. हम हफ्ते भर 5 गाने सुनने का इंतज़ार करते थे. फिर एक सरदार जी बार बार शो के बीच में आते और अपनी कॉमेडी करके चले जाते. कभी वन लाइनर कभी कटाक्ष. मुझे बड़े इरिटेटिंग लगते थे. बताओ हफ्ता भर इंतज़ार करो गानों का और बीच में आ जाएं सरदार जी. फिर जब ऐसा लगातार होने लगा तो मैंने सोचा एक दिन सुन ही लेती हूं. सुना तो बड़े नपे-तुले हल्के-फुल्के शब्दों में सोसाइटी पर तंज कस रहे थे. उसके बाद मैं कसौली गई तो वहां इंडिया टुडे मैग्ज़ीन में उनका इंटरव्यू देखा. मैंने उनके बारे में पढ़ा और जाना. पता चला कि वो कॉमेडी करते हुए सरकार और समाज पर कटाक्ष करते हैं. मुझे इम्प्रेसिव लगे. इसी बीच मेरी शादी के लिए मम्मी पापा लड़का ढूंढ रहे थे. पापा के एक फ्रेंड ने चंडीगढ़ में एक लड़का बताया. मैं बचपन में चंडीगढ़ रही थी, 3rd 4th क्लास में. फिर पता चला कि जिस लड़के की बात हो रही है वो जसपाल भट्टी ही हैं.

उनके घर गए तो पहली बार जसपाल जी से मिलना हुआ. उनका कमरा ऊपर वाले फ्लोर पर था. मैं इस वक्त उसी कमरे में बैठी हूं. खैर, मैं वहां गई तो जसपाल जी चेयर पर बैठे थे और सामने किताब रखी थी. किताब पर लिखा था How to learn French. मैं बड़ी इम्प्रेस हुई कि बंदा तो सही है. उन्होंने मुझसे कुछ बात नहीं की. और सिर्फ एक सवाल किया किया कि मैं डिफेंस बैकग्राउंड (पापा एयर फोर्स में थे) से हूं तो कोई दिक्कत तो नहीं आएगी? मैंने भी छेड़ने के लिए बोल दिया कि दिक्कत तो आएगी. जसपाल जी हंस कर बोले कि “कोई बात नहीं, मैं संभाल लूंगा”. बस फिर हमारा रोका हो गया.

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उस वक्त मैं दिल्ली में नौकरी कर रही थी. जसपाल जी को पता था. वो दिल्ली किसी काम से आए लेकिन न तो उन्होंने मुझे कॉल की, न मैंने की. फिर हम सीधा शादी पर ही मिले. रोके के ठीक एक महीने बाद. पूरी शादी में जसपाल जी एकदम चुप रहे. बिदाई के बाद घर आए तो लगा अब बात करेंगे. लेकिन वो तो दूसरे कमरे में ही बैठे रहे. मैं इंतज़ार करती रही लेकिन वो न आए. आईं तो उनकी बहन. बोलीं कि “आप आराम कर लीजिए, शाम को रिसेप्शन है थक जाएंगी”. मैं सो गई. शाम को रिसेप्शन में पहुंचे. जसपाल जी वहां भी कुछ नहीं बोले. मैं उनकी तरफ देखती रही. कुछ देर बाद बोले कि “बैठ जाते हैं अब. थक जाएंगे”. तो शादी के बाद ये हमारे पहले डायलॉग थे जो हमने एक्सचेंज किए.

रुटीन लाइफ में जसपाल जी कैसे थे? रिज़र्व या आउट-स्पोकन?

वो ऑब्ज़र्वर थे. जहां जाते चीज़ें ऑब्ज़र्व करते. बोलने से ज़्यादा लोगों को सुनते और फिर उसे अपनी स्क्रिप्ट में शामिल करते. वैसे वो कम ही बोलते थे लेकिन जब कभी उनके इंजीनियरिंग वाले दोस्त आ जाते तो वो खूब गप्पें मारते. 

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अच्छा उनकी इंजीनियरिंग और उसके बाद की नौकरी के बारे में बताइए.

मुझे एग्ज़ेक्ट तो नहीं याद, शायद 1978 में उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री ली. इसके बाद उनकी पंजाब इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में नौकरी लग गई. जब उनसे शादी की तब वे SDO (सब डिविज़नल ऑफिसर थे). लेकिन ध्यान इसी तरफ (कॉमेडी) रहता था. ऑफिस से स्पेशल परमिशन ले रखी थी. वो ‘दी ट्रिब्यून’ के लिए स्केच भी बनाते थे. 5 साल उनके स्केच अखबार में छपे. उस टाइम तक उन्हें ज़्यादा लोग नहीं जानते थे. फिर 90s  में  जसपाल जी ने ‘फ्लॉप शो’ की स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की. 18 साल की नौकरी के बाद उन्होंने इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड से रिज़ाइन कर दिया. उस टाइम वो Executive Engineer थे.

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आप अपने सबसे हिट शो  ‘फ्लॉप शोके बारे में बताइए. कैसी उम्मीदें थीं दर्शकों से?

शो में काम करने वाले लगभग सभी एक्टर्स नए थे. जिस दिन पहला शो आना था सभी में एक्साइटमेंट थी. एक तो खुद को टीवी पर देखने की और वो भी प्राइम टाइम पर. हमने घर पर छोटी सी पार्टी रखी थी. सब लोग आए. और जैसे ही पहला एपिसोड शुरू हुआ, लोगों के चेहरों पर मुस्कान देखने वाली थी. और मज़े की बात ये थी कि जसपाल जी उस वक्त गाड़ी में पूरे शहर का चक्कर लगा रहे थे, कि कोई सड़क पर घूमता मिल गया तो उसे बोलेंगे कि जा कर ‘फ्लॉप शो’ देख.

एक शूट के दौरान जसपाल भट्टी
एक शूट के दौरान जसपाल भट्टी

 सिर्फ 10 एपिसोड ही क्यों आए फ्लॉप शो के?

जसपाल जी का विज़न बड़ा क्लीयर था. उन्होंने सिर्फ 10 एपिसोड की ही स्क्रिप्ट लिखी थी. उनका कहना था कि “मुझे इतनी स्क्रिप्ट में ही अपना 100% देना है.” ये शो जब हिट हो गया और सब लोगों ने फिर से डिमांड की तो जसपाल जी ने फिर से स्क्रिप्ट लिखी. लेकिन आपको तो पता ही है कि दूरदर्शन में काम करवाना कितना मुश्किल है. स्पॉन्सर्स और फाइनेंस का कुछ चक्कर पड़ गया था. ‘फ्लॉप शो’ इतना फेमस हुआ, इतनी टीआरपी दी, फिर भी दोबारा आने में इतना पंगा हुआ. और आप अाज कल देखिए, कोई टीआरपी वाला शो आ जाए तो चैनल्स पीछे पीछे दौड़ते हैं.

जसपाल जी का कॉमेडी कनेक्शन क्या था? 

वो अमृतसर से थे. वहां कॉमेडी करनी नहीं पड़ती, रुटीन लाइफ होती रहती है. वहां हर बात को एक अलग ढंग से फनी वे में कहा जाता है. आते जाते तंज कसे जाते हैं. तो जसपाल जी में वो बात अंदर से थी. हर बात को हंसी मज़ाक में कह देना उनकी आदतों में शामिल था. सेंस ऑफ ह्यूमर उनमें इनबिल्ट थी. और मेरे सास-ससुर भी विटी थे. उस विट और ह्यूमर का कम्बिनेशन थे जसपाल जी. 

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आपको पॉलिटिक्स पर उनका सबसे अच्छा एक्ट कौन सा लगता है?

पार्लियामेंट का सेशन चल रहा था. हर्षद महता वाला केस चल रहा था उन दिनों. जसपाल जी हाथ में सूटकेस लेकर पार्लियामेंट के बाहर जाकर खड़े हो गए. कटाक्ष करते हुए कहने लगे कि “200 करोड़ से नीचे की करप्शन तो करनी ही नहीं चाहिए. अपना लेवल सेट कर लो. और सूटकेस भी बड़े बड़े बनवालो ताकि 200 करोड़ आराम से रखे जा सके”. आप देखिए उनके लॉफ्टर में एक बहुत बड़ी ट्रेजेडी छुपी होती थी. 

टीवी से होते हुए जसपाल जी फिल्मों तक जा पहुंचे. आपने मुंबई शिफ्ट होने का नहीं सोचा?

सोचा तो कई बार, लेकिन गए नहीं. जसपाल जी फिल्मों में रोल करने के लिए बार बार मुम्बई जाते. कई बार प्रोड्यूसर सोचते थे कि चंडीगढ़ से फ्लाइट का पैसा भी देना पड़ेगा इसलिए जसपाल जी को कई बार फिल्म में लेते ही नहीं थे. बहुत ही चीज़ों में सिर्फ इसी वजह से कॉम्प्रोमाइज़ करना पड़ा कि हम मुम्बई नहीं रहते थे. जसपाल जी अकसर कहा भी करते थे कि मुम्बई में तुम्हारे (सवीता जी) के लिए अच्छी ऑपरचुनीटीज़ हैं. 

लेकिन आपको अपनी प्रॉयर्टीज़ सेट करनी पड़ती हैं. और काम के साथ साथ हमारी प्रॉयर्टी हमारी फैमिली भी थी. हम जॉइंट फैमिली में रहते हैं. जसपाल जी अपने मां बाप के इकलौते बेटे थे. और मेरे पेरेंट्स भी यहीं रहते हैं. तो हमने सोचा कि हम चंडीगढ़ ही रहेंगे. ये एक कॉन्शियस डिसीज़न था और हम इसके लिए खुश हैं.

Comedian Jaspal Bhatti, engineer with wife Savita at his Residence in Mumbai, Maharashtra, India ( for Simply Punjabi )
अपनी पत्नी सवीता के साथ जसपाल

जसपाल जी की बेस्ट क्वालिटी?

वो बड़े कॉन्फिडेंट और बैलेंस्ड थे. अपनी चीज़ों को लेकर काफी श्योर रहते थे. उनके दिमाग में हमेशा क्लियर रहता था कि उन्हें करना क्या है. इस सब के साथ साथ वो एक आयडल जेंटलमेन थे. हमेशा सबका अच्छा चाहते. साथी कॉमेडियंस के काम को एप्रिशियेट करते. गुस्से वाली बात को भी वो इतने प्यार से टेकल करते थे. इन्हीं सब क्वालिटीज़ ने उन्हें खास और सक्सेसफुल  बनाया.

आखिरी सवाल. Intolerance वर्ड ट्रेंड में है. खासकर फिल्म-टीवी कलाकारों से जब भी बात होती है तो उनसे ये सवाल अकसर पूछा जाता है. लेकिन आपको क्या लगता है कि जिस तरह का व्यंग्य जसपाल जी सरकार पर कसते थे, क्या आज वो होते तो कर पाते?

Jaspal Bhatti would have been banned today had he been alive! ये किसी ने लिखा था कुछ दिन पहले. देखिए टाइम में बदलाव तो आ ही गया है. कैसी बात कहनी है और कैसी नहीं. कहने से पहले एक बार सोचना पड़ता है. पर जहां तक जसपाल जी की बात है वो निडर थे. अपनी बात कहने का दम रखते थे. किसी के भी कहने पर अपनी स्क्रिप्ट नहीं बदलते थे. तो मुझे लगता है कि वो होते तो आज भी उतनी ही बेबाकी से अपना मैसेज कन्वे कर देते. उनका शो ‘माहोल ठीक है’ इसी की मिसाल है.

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 * 25 अक्टूबर का दिन. साल 2012. जसपाल हमें अलविदा कह गए. एक कार एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई. उस जगमगाते दीये ने अपनी असामयिक मौत से भी उतना ही चौंका दिया जितना ज़िंदगी भर अपनी काम से. अपनी कॉमेडी से.

जलंधर के पास रात करीब 1.30 बजे हुआ था कार का एक्सीडेंट.
जलंधर के पास रात करीब 1.30 बजे हुआ था कार का एक्सीडेंट.

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