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"इमरान ख़ान, वसीम अकरम और वक़ार यूनुस ने बॉल टेंपरिंग करके पाकिस्तान की बदनामी की"

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया के तीन खिलाड़ियों ने बॉल टेंपरिंग की बात कबूली तो क्रिकेट की दुनिया में खूब हल्ला मचा. गलत और अमान्य तरीकों से गेंद से छेड़छाड़ करने के चक्कर में तीनों के करियर दांव पर लग गए. मकसद था रिवर्स स्विंग पाना और विपक्षी टीम को हराना. क्या रिवर्स स्विंग करने वाला हर गेंदबाज बॉल टेंपरिंग करता है और रिवर्स स्विंग एक आर्ट है या चीटिंग? इसका जवाब उस बॉलर से बेहतर कौन दे सकता है जिसने सबसे पहले रिवर्स स्विंग करनी शुरू की. पाकिस्तान के तेज गेंदबाज सरफ़राज़ नवाज़ ने साल 1969 से लेकर 1984 तक 55 टेस्ट खेले और 171 विकेट लिए. सरफराज़ को ही रिवर्स स्विंग का जनक कहा जाता है. उनसे ही पहले इमरान खान और फिर आगे वसीम अकरम और वकार युनुस से होते हुए ये आर्ट इंग्लिश काउंटी में कई गेंदबाजों का घातक हथियार बना. 69 साल के सरफराज़ नवाज़ ने लंदन से फोन पर दी लल्लनटॉप  से रिवर्स स्विंग और बॉल टेंपरिंग समेत क्रिकेट के कई मसलों पर बात की.

ऑस्ट्रेलिया में हुए बॉल टेंपरिंग कांड को आप कैसे देखते हैं?

ये सिंपल बॉल टेंपरिंग का मसला बिल्कुल नहीं था. ये सोची-समझी स्ट्रेटजी के तहत की हुई हरकत थी. मैच जीतने के लिए टीम के सीनियर प्लेयर्स ने प्लैन किया था कि बॉल टेंपर करनी है. अब यहां आईसीसी (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) का स्टैंड देखिए. बस एक मैच का बैन और मैच फीस काटकर इन प्लेयर्स को छोड़ दिया. मगर ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने प्लेयर्स पर सख्ती दिखाई और बोर्ड ने फिर इन्हें साल भर के लिए बैन किया. ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने इसे सबसे पहले चीटिंग कहा, न कि आईसीसी ने. मैं ये देख रहा हूं कि आईसीसी के पास जो भी शिकायत जाती है, वो उस पर कोई सख्त एक्शन न लेकर नाम के लिए जुर्माना लगा देती है.

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55 टेस्ट मैचों में सरफ़राज़ ने 171 विकेट लिए हैं. 

आईसीसी में इस वक्त जुआ ग्रुप के लोग बैठे हैं. मुझे शक है कि डेव रिचर्ड्सन (ICC CEO) को भी सारी भ्रष्ट एक्टिविटीज का पता होगा. ये वहीं रिचर्ड्सन हैं जो हैंसी क्रोनिए की साउथ अफ्रीकन टीम में वाइस कैप्टन थे. क्या उस वक्त रिचर्ड्सन को क्रोनिए के जुए के बारे में पता नहीं होगा? ऐसे लोगों को आईसीसी में रखना ही गलत है. वहां पाकिस्तान में नजम सेठी (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन) को देख लीजिए, पीएसएल से पहले वहां 15 सट्टेबाज पकड़े गए हैं. किसी पर कोई कार्रवाई नहीं. बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL) में भी लंबा-चौड़ा करप्शन हुआ है जिस पर जांच होनी थी, अभी तक कुछ नहीं हुआ है. हर गंभीर मामले को अंडर दी कारपेट कर दिया जा रहा है. आईसीसी में सख्त और ईमानदार लोगों को लाने की जरूरत है.

ICC में किस तरह के बदलावों की जरूरत है?

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2007 वर्ल्ड कप के दौरान कोच बॉब वूल्मर की मौत को सरफ़राज़ ने मर्डर करार दिया था.

मेरा तो कहना है कि आईसीसी को खत्म कर देना चाहिए. जब कंट्री टू कंट्री मैच हो ही रहे हैं और कोई आईसीसी कैलेंडर नहीं है तो फिर इसका क्या काम बचा है. आईसीसी पर अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं और इतनी एंटी-करप्शन यूनियनें बनी हुई हैं. इन्होंने आज तक क्या करप्शन पकड़ा है? बल्कि सामने आई हुई चीजों को भी ये छिपा लेते हैं. जब शारजाह कमीशन बना था, उसमें क्लाइव लॉइड और आईएस बिंद्रा थे. मैंने उन्हें करप्शन के प्रूफ दिए थे जिसके बाद शारजाह पर उन्हें 10 साल का बैन लगाना पड़ा था.” (1980 और 90 के दशक में शारजाह क्रिकेट के लिए सबसे पसंदीदा जगह बना हुआ करता था. मगर 2000 में यहां क्रिकेट बैन हो गई. उस वक्त यहां क्रिकेट पर सट्टे को सबसे पहले उजागर सरफ़राज़ नवाज़ ने ही किया था. नवाज़ ने उस वक्त कहा था कि सट्टेबाजी की शुरुआत पाकिस्तान के साल 1978-79 के भारत दौरे पर हो चुकी थी. ये बाद में शारजाह तक पहुंच गया और फिर मैच फिक्सिंग के मामले सामने आने लगे.)

रिवर्स स्विंग आपने ईजाद की, उसका फायदा उठाने के लिए गेंदबाज इतनी तिकड़म क्यों भिड़ा रहे हैं?

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6.5 फीट की हाइट वाले सरफ़राज़ ने पाकिस्तान के बॉलिंग अटैक को अाक्रामक बनाया था.

फर्क तो ये है कि जब मैं रिवर्स स्विंग करता था तो पुरानी गेंद होने का इंतजार करता था. 40-50 ओवर हो जाने के बाद पुरानी हुई गेंद को ये स्विंग मिलता था. मगर अब तो बॉलर गेंद को टेंपर करके मैच के पहले सेशन से ही रिवर्स स्विंग करवाने लगे हैं. मैंने 15 साल तक काउंटी क्रिकेट खेला है और इंग्लैंड में किसी ने आज तक कभी मुझ पर कोई इल्जाम नहीं लगाया कि मैंने बॉल टेंपर की. ये तो बाद में आकिब जावेद, वसीम अकरम और वकार युनुस जैसे बॉलर आए जिन्होंने बॉल टेंपरिंग शुरू की. वहां से बदनामी हुई. खुद इमरान खान ने कहा था कि वो काउंटी में बॉल टेंपर करता था. ये सारी चीजें मेरे क्रिकेट छोड़ने के बाद की हैं.

वो क्या किस्सा है जब आप बॉल टेंपरिंग पर पाकिस्तान की तरफ से केस लड़ रहे थे?

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करीब 15 साल इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेला सरफ़राज़ ने.

1994 में पाकिस्तान के आकिब जावेद, वसीम अकरम और वकार युनुस के ऊपर बॉल टेंपरिंग के आरोप लगे थे. ये लोग उस वक्त काउंटी खेलते थे. मामला कोर्ट में चला गया तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने मुझे इन खिलाड़ियों का केस लड़ने के लिए कहा था. मैं कोर्ट गया और सामने ज्यूरी में जो लोग थे उन्हें समझा रहा था कि गेंद स्विंग कैसे करती है. कन्वेंशनल स्विंग और रिवर्स स्विंग में क्या फर्क होता है. मगर जब उनमें से कइयों ने कभी क्रिकेट खेला या देखा ही नहीं था, तो उनको कैसे समझाता. फिर MCC (Marylebone Cricket Council)ने बीच में आकर समझौता करवा दिया था और ये केस खत्म हो गया था. उस केस में सामने काउंटी कैप्टन एलन लैंब थे.

आप खुद रिवर्स स्विंग कब और कैसे सीखे?

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जनवरी 1983: सीरीज के चौथे टेस्ट की दूसरी पारी में हैदराबाद के ग्राउंड पर कपिल देव को बोल्ड करते हुए.

मैं उस वक्त पाकिस्तान में यूनिवर्सिटी से खेल रहा था. उस वक्त मैट पर ज्यादातर क्रिकेट खेली जाती थी और पुरानी गेंद को शाइन करने का कोई ट्रेंड नहीं था. एक दिन मैंने गेंद को एक साइड से पसीना और थूक लगाकर शाइन किया. वो गेंद फेंकी तो बॉल एक साइड से स्विंग हुआ. मैं देखकर हैरान हुआ और फिर उसी को आगे डिवलेप किया. मुझे समझ आया कि ये एक साइंस है और पुराना गेंद भी स्विंग कर सकता है.

33 गेंद, 1 रन और ऑस्ट्रेलिया के सात विकेट. अपने इस अद्भुत स्पेल के बारे में बताइए.

1978-79 में पाकिस्तान की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी. मेलबर्न ग्राउंड पर पहले टेस्ट की दूसरी पारी थी और शुरुआती तीन विकेट भी मैंने ही गिराए थे. उस स्पेल में मुझे अच्छी मूवमेंट मिल रही थी. स्कोर 305/3 था. मैंने उस स्पेल में 33 गेंद फेंकीं और 7 आउट कर दिए. उस बीच एक ही रन दिया. ऑस्ट्रेलिया 310 पर ऑउट हो गई. इनमें 5 को बोल्ड मारा था और हम लोग मैच 71 रन से जीते थे. उस दिन के बारे में यही सोचता हूं कि हर खिलाड़ी का दिन होता है और वो मेरा दिन था. ऊपर वाले की रहमत थी. साथ में इमरान खान बॉलिंग कर रहा था, उसे एक भी विकेट नहीं मिला था. मैंने उस मैच पारी में 86 रनों पर 9 विकेट लिए थे. वो कई सालों तक रिकॉर्ड रहा.

आप उस दौर के क्रिकेटर हैं जब स्लेजिंग अपने चरम पर थी, आज उस पर क्या सोचते हैं?

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पाकिस्तान टीम 1979-80 में भारत दौरे पर थी. उस वक्त गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह के साथ इमरान और सरफ़राज़.

स्लेजिंग पर क्या बोलूं. वो तो हम खुद करते रहे हैं. आदमी में हिम्मत होनी चाहिए. माहौल की गर्मी में स्लेजिंग हो ही जाती है. हमारे वक्त में स्टंप के पीछे कोई माइक नहीं होता था और न ही थर्ड अंपायर होता था. तो बहुत कुछ बोला जाता था. 1978 में इंडिया की टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई थी. उस वक्त बाउंसर फेंकने पर कोई पाबंदी नहीं थी. एक बार गुंडप्पा विश्वनाथ बैटिंग कर रहे थे और मैं बॉलिंग. मैं बाउंसर्स फेंक रहा था. हर गेंद उनके सिर के ऊपर से निकल कर जा रही थी. विश्वनाथ गेंद तक पहुंच ही नहीं पा रहे थे. इस दौरान खूब गहमागहमी होती थी. इस पर कप्तान बिशन सिंह बेदी ने गुस्सा होकर टीम ही वापिस बुला ली थी. उसके बाद ही बाउंसर्स फेंकने पर लगाम लगी थी.


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