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जब पाकिस्तान के खिलाफ तेंडुलकर के रन आउट होने पर ईडन गार्डन्स में दंगा हो गया था

कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जिनकी कहानी आप किसी और कहानी से शुरू करके नहीं सुनाते. ये किरदार खुद में एक दुनिया होते हैं, इनके किस्से अपने आप में संदर्भ होते हैं.


साल 1999, 16 फरवरी. कलकत्ता का ईडन गार्डन्स मैदान.

आज भारत और पाकिस्तान के बीच एशियन टेस्ट चैंपियनशिप का पहला मैच शुरू हो रहा है. इस सीरीज़ में श्रीलंका भी खेल रहा है. बांग्लादेश को अभी टेस्ट टीम का दर्जा नहीं मिला है, इसलिए वो इस सीरीज़ में नहीं है. ये चैंपियनशिप बड़ी मुश्किल से तय हो पाई है. भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बहुत गरम हैं. खौलती बयानबाज़ी के बीच भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बस यात्रा का ऐलान किया है. वहां पाकिस्तान में सेना-प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पैरों के नीचे से ज़मीन खींच ली है. दुनिया को ये कुछ वक्त बाद पता चलेगा. वही वक्त, जिसके पेट में करगिल युद्ध पल रहा है. 29 जनवरी को नवाज करगिल के स्कर्दू में सैन्य ठिकानों का दौरा करने आए थे. बहुत कुछ जल रहा है.

अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ (दाएं)
अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ (दाएं)

दोनों मुल्कों के खिलाड़ी भी इस आग से अछूते नहीं हैं. उन्हें बयानों में कीवर्ड की तरह इस्तेमाल किया गया. यही आग ठंडी करने के लिए हमने पिछले दिनों पाकिस्तान के साथ दो टेस्ट मैचों की सीरीज़ खेली. पहला मैच 28 जनवरी से चेन्नई में हुआ था, जिसमें पाकिस्तान जीता था और दूसरा मैच 4 फरवरी से दिल्ली में हुआ था, जिसमें हम जीते थे. इसी दूसरे मैच की दूसरी पारी में अनिल कुंबले ने एक इनिंग्स में 10 विकेट लेने का कारनामा किया था.

दोनों देशों की सियासत ने अपने खिलाड़ियों को प्यादा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. पाकिस्तान तो एकदम आखिरी वक्त में खेलने के लिए तैयार हुआ है. तय ये भी हुआ था कि ईडन गार्डन्स में सीरीज़ का आखिरी मैच होगा, लेकिन देखिए. आज ये मैदान पहले मैच की मेज़बानी कर रहा है. आज हम पाकिस्तान से खेलने जा रहे हैं

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पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला लिया था. लेकिन श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद ने उनका ये फैसला सिलबट्टे की तरह उनके मुंह पर मार दिया. खून निकल आया. अभी 10 ओवर भी खत्म नहीं हुए थे और पाकिस्तान के 26 रनों पर 6 विकेट गिर गए थे. चार श्रीनाथ ने लिए और दो प्रसाद ने. कोई भी बैट्समैन दूसरे डिजिट तक नहीं पहुंचा था. बाद में विकेटकीपर बैट्समैन मोईन खान ने 70 रन न मारे होते, तो अल्लाह ही मालिक था. मोईन को सचिन ने आउट किया था. पहली पारी में पाकिस्तान 76 ओवर खेलकर कुल 185 रनों तक पहुंचा. श्रीनाथ ने इनिंग्स में 5 विकेट लिए.

विकेट लेने का जश्न मनाते जवागल श्रीनाथ
विकेट लेने का जश्न मनाते जवागल श्रीनाथ

इंडिया की तरफ से पारी सदगोपन रमेश और वीवीएस लक्ष्मण ने शुरू की. लक्ष्मण जल्दी आउट हो गए थे, तो अनिल कुंबले को नाइट वॉचमैन के तौर पर भेजा गया था. यहां तक सब कुछ दुनियादारी ही था, क्योंकि अभी तक वो शख्स तस्वीर में नहीं आया था, जिसके बारे में कहते हैं कि वो हमेशा बांया पैड पहले बांधता था.

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इंडिया 147/3. शोएब अख्तर ने अभी-अभी दीवार को क्लीन बोल्ड करके पवेलियन भेजा है. ये एक शानदार यॉर्कर थी. द्रविड़ ने अख्तर के हाथ से गेंद छूटते हुए देखी थी. वो ऑफ स्टंप की तरफ छोड़ी गई थी. लेकिन जब तक द्रविड़ का शरीर और दिमाग इस पर सहमत हो पाता कि गेंद उन तक पहुंचते-पहुंचते लेग स्टंप पर चली जाएगी, उससे पहले ही लेग स्टंप उखड़कर दूर गिर चुका था. स्टेडियम गूंज रहा था.

108 गेंदों पर 24 रन बनाकर पवेलियन जाते हुए राहुल द्रविड़ सोच रहे थे कि उन्होंने ऐसा क्या कर दिया, जो इतना शोर हो रहा था. तभी उन्होंने नज़र उठाकर देखा कि सचिन तेंडुलकर चले आ रहे हैं. ये शोर सचिन के लिए था.

पहली पारी में द्रविड़ के आउट होने के बाद बैटिंग के लिए आते सचिन.
पहली पारी में द्रविड़ के आउट होने के बाद बैटिंग के लिए आते सचिन.

हल्का भूरा सा दिखने वाला बल्ला बगल में दबा था. सचिन अभी दाएं हाथ का दस्ताना पहन ही रहे थे. कमेंट्री हो रही थी कि अब वो आदमी मैदान में उतरा है, जिसे पूरी दुनिया खेलते देखना चाहती है. सचिन क्रीज़ पर पहुंचे. एक बार बल्ला ज़मीन पर रखा. फिर आदतन बीच में आकर पिच को बल्ले की कुछ ठोकरें दीं. रावलपिंडी एक्सप्रेस ने एक लंबा रनअप लेना शुरू किया. जैसे-जैसे अख्तर के रनअप की रफ्तार बढ़ रही थी, स्टेडियम का शोर बढ़ता जा रहा था. एक बार फिर गेंद हाथ से छोड़ दी गई. यॉर्कर…

ड्रेसिंग रूम में राहुल द्रविड़ अभी मुश्किल से सेटल ही हो पाए हैं. स्टेडियम दहाड़ रहा है. पर अगले ही पल द्रविड़ के कानों में एकदम सन्नाटा है. उन्होंने टीवी से नज़रें मिलाईं. उनके शब्दों में उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि उन्हें पता था कि क्या हुआ है. टीवी पर देर से आने वाले मैच में द्रविड़ ने सचिन को आउट होते देखा. ऑफ स्टंप की तरफ फेंकी गई यॉर्कर, जो पिछली गेंद की तरह स्विंग हुई और सचिन के ऑफ और लेग स्टंप के बीच की जगह को चौड़ा कर गई.

सचिन का मिडिल विकेट उखड़ चुका था.
सचिन का मिडिल विकेट उखड़ चुका था.

राहुल द्रविड़ ने आउट होने के बाद एक बार स्टंप और फिर अख्तर को आश्चर्य से देखा था. सचिन ने नहीं देखा. वो तुरंत मुड़े और चल दिए. दाएं हाथ का दस्ताना उतर चुका था.

आउट होने के बाद स्टंप्स की तरफ देखते द्रविड़.
आउट होने के बाद स्टंप्स की तरफ देखते द्रविड़.

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कट टू चौथा दिन,
फरवरी 19.

पहली पारी में पाकिस्तान के 185 रनों के जवाब में इंडिया ने 223 रन बनाए. 38 रनों की लीड मिली. हिंदी अखबारों की भाषा में कहें, तो भारत ने नियमित अंतराल पर विकेट खोए थे. फिर पाकिस्तान ने दूसरी पारी में 316 रन बनाए. उनकी तरफ से सईद अनवर ने 188 रनों की नॉटआउट पारी खेली. लग रहा था जैसे पहली पारी के सारे ज़ख़्मों का मरहम ईडन गार्डन्स से ही लेकर जाएंगे. इस पारी में श्रीनाथ ने 8 विकेट लिए और इस तरह मैच में उनके कुल 13 विकेट हो गए थे. भारत को मैच जीतने के लिए 279 रनों का टारगेट और करीब दो दिन का वक्त मिला.

लग रहा था कि भारत मैच जीत जाएगा. लेकिन चौथे दिन की इस दोपहर की किस्मत में क्रिकेट के अलावा भी बहुत कुछ लिखा था.

एक बार फिर रमेश और लक्ष्मण पारी शुरू करने उतरे. बात जम गई थी. दोनों ने करीब 32 ओवर में पहले विकेट के लिए 108 रन जोड़ लिए थे. सब हरा-हरा दिख रहा था, तभी सकलेन मुश्ताक ने रमेश को LBW कर दिया. उनके बाद द्रविड़ आए, लेकिन स्कोर 134 पहुंचने पर लक्ष्मण आउट हो गए. उन्हें भी मुश्ताक ने आउट किया. लक्ष्मण के आउट होने का मतलब था कि अब सचिन आएंगे. वो आए. स्टेडियम में करीब एक लाख लोग बैठे थे, जिनमें से अधिकतर तेंडुलकर के अख्तर से हिसाब बराबर करने का इंतज़ार कर रहे थे. मगर वो 43वां ओवर…

43वां ओवर फेंकते वसीम अकरम.
43वां ओवर फेंकते वसीम अकरम.

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जहां से दंगे की शुरुआत हुई

सचिन ने एक बार फिर भयानक शोर के बीच खेलना शुरू किया. 43वां ओवर वसीम अकरम फेंक रहे थे. तीसरी गेंद गुड लेंथ आई. 7 रन पर खेल रहे सचिन ने इसे डीप-मिडविकेट की तरफ मार दिया और रन के लिए दौड़ पड़े. पहले दो रन पूरे करते ही सचिन के 5000 टेस्ट रन पूरे हो गए थे. नदीम खान गेंद के पीछे भाग रहे थे और उनके थ्रो फेंकने से पहले ही सचिन और द्रविड़ तीसरे रन के लिए दौड़ चुके थे. तेंडुलकर आराम से अपना तीसरा रन पूरा करने वाले थे.

अकरम आराम से वापस लौट रहे थे. पीछे कहीं खड़े शोएब अख्तर थ्रो पकड़ने के लिए स्टंप के पास आ गए थे. क्रीज़ के पास खड़े अख्तर गेंद की स्पीड भांपते हुए छोटे कदमों से पीछे हट रहे थे और उधर तेंडुलकर गेंद पर नज़रें जमाए दौड़ते आ रहे थे. न जाने नदीम की किस्मत उस दिन कितनी ज़ोर थी कि बाउंड्री के पास से फेंका गया वो थ्रो सीधे स्टंप पर आकर लगा और इधर सचिन अख्तर की पीठ से टकरा गए. अकरम और कीपर मोईन खान हाथ उठाकर अंपायर की तरफ देखते हुए चिल्ला पड़े, ‘आउट!!!’

स्टंप पर लगती गेंद. शोएब अख्तर से टकराते सचिन तेंदुलकर. अपील करते वसीम अकरम और मोईन खान.
स्टंप पर लगती गेंद. शोएब अख्तर से टकराते सचिन तेंडुलकर. अपील करते वसीम अकरम और मोईन खान.

शोएब अख्तर अपनी पीठ पकड़कर घुटनों के बल गिर गए थे और उधर ग्राउंड अंपायर स्टीव बकनर ने बेझिझक थर्ड अंपायर की तरफ इशारा कर दिया. एक्सपर्ट मार्टिन विलियमसन लिखते हैं कि वहां किसकी गलती थी, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप किसे सपोर्ट कर रहे थे. अख्तर स्टंप के पास आकर वही कर रहे थे, जो कोई भी फील्डर करता और सचिन क्रीज़ के बजाय गेंद की तरफ देख रहे थे. करने को अख्तर गेंद पकड़ने के लिए स्टंप के पास भी खड़े हो सकते थे. थर्ड अंपायर का डिसीज़न आने तक सचिन टीवी स्क्रीन पर द्रविड़ को ये बताते दिख रहे थे कि वो क्रीज़ के अंदर होने को लेकर श्योर हैं.

एक लंबी माथापच्ची के बाद थर्ड अंपायर केटी फ्रांसिस ने सचिन को आउट दे दिया. इंडिया 145/3. सचिन एक बार फिर निर्भाव चेहरे के साथ पवेलियन की तरफ कूच कर गए.

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19 फरवरी 1999 को किसी भी इंडियन ने कुछ भी चाहा हो, पर ये किसी ने नहीं चाहा था. सचिन के रन आउट होने के बाद उस ओवर की अगली तीन गेंदें राहुल द्रविड़ ने खेलीं, पर ओवर खत्म होते-होते मैदान की सूरत बदल गई. पूरे स्टेडियम में तनाव था. ‘शोएब अख्तर चीटर’ के नारे लग रहे थे. लोग बोतलें फेंक रहे थे. हालात ये हो गए कि स्कोर दिखाने वाले स्क्रीन पर कैपिटल लेटर्स में लिखना पड़ गया, ‘CALCUTTA LOVES CRICKET. PLEASE MAINTAIN EDENS TRADITION.’

ईडन गार्डेन में दर्शकों के लिए बोर्ड पर लिखा मेसेज.
ईडन गार्डेन में दर्शकों के लिए बोर्ड पर लिखा मेसेज.

अंपायर्स ने वक्त से पहले ही ‘टी-टाइम’ अनाउंस कर दिया और पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अंदर ले गए. इसका गुस्साए दर्शकों पर कोई असर नहीं पड़ा. लोग पूरी ताकत से फल और बोतलें मैदान में फेंक रहे थे. आखिरकार खुद सचिन को लोगों को शांत कराने मैदान में आना पड़ा. उनके साथ जगमोहन डालमिया और ढेर सारे पुलिसवाले भी थे. एक घंटे की मशक्कत के बाद मैच दोबारा शुरू हो पाया. ये सचिन ही थे, जिनकी वजह से कोई हिंसा पर आमादा नहीं हुआ. कुछ मिनटों बाद लोग ‘सॉरी’ की तख्तियां भी लहराते नज़र आए.

पर ये बात उनके दिल में घर कर गई थी कि उनके हीरो के साथ अन्याय हुआ है.

रन आउट होने के बाद सचिन ड्रेसिंग रूम के बजाय सीधे थर्ड अंपायर के कमरे में गए. उन्होंने रीप्ले देखा. कुछ कहा नहीं, बस आश्चर्य में सिर हिलाया और चले आए.

इस बवाल का पाक से ज़्यादा इंडिया को नुकसान हुआ. मैच दोबारा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद अख्तर ने द्रविड़ को कीपर के हाथों कैच करा दिया. दिन खत्म होते-होते अज़हरुद्दीन और नयन मोंगिया के विकेट भी गिर गए और मैच पाकिस्तान की पकड़ में आ गया. पांचवे दिन इंडिया को जीत के लिए 65 रन चाहिए थे और उसके पास 4 विकेट बचे थे.

जगमोहन डालमिया और पुलिसवालों के साथ लोगों को शांत कराते सचिन तेंदुलकर.
जगमोहन डालमिया और पुलिसवालों के साथ लोगों को शांत कराते सचिन तेंडुलकर.

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20 जनवरी, पांचवा दिन.

रही-सही कसर पांचवे दिन तब पूरी हो गई, जब दिन की नवीं गेंद पर दादा आउट हो गए. ईडन गार्डन्स में गांगुली का ऐसे मौके पर आउट होना ट्रिगर कर गया. शोर फिर ऊंचा होने लगा और इस बार आवाज़ में कल से ज़्यादा तल्खी थी. करीब 20 मिनट बाद जब वसीम अकरम ने श्रीनाथ को विकेट के पीछे कैच कराया और इंडिया का स्कोर 224/8 हुआ, तुरंत स्टेडियम में अखबार जलाए जाने शुरू हो गए.

ये पिछले दिन से कहीं ज़्यादा आक्रामक प्रदर्शन था. लोग हाथों में पत्थर लेकर लहरा रहे थे. उन्हें मैदान में फेंक रहे थे. फल और बोतलों जैसा जो भी सामान हाथ में था, उसे पूरी ताकत से मैदान के अंदर फेंक रहे थे. मैच तो असंभव हो ही गया था, अब खिलाड़ियों को भी खतरा था. दर्शकों का गुस्सा देखकर लग रहा था, जैसे आज वो इंडिया का 10वां विकेट गिरने ही नहीं देंगे, भले इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े. ये एकदम दंगे जैसे हालात थे.

इसके बाद मैच रोक दिया गया. कमान पुलिस के हाथ में दे दी गई. पुलिस ने लात, घूंसों और लाठीचार्ज… जैसे भी हो पाया, करीब 65 हज़ार दर्शकों को मैदान से बाहर किया. इस भीड़ में आदमी-औरतों के अलावा बुजुर्ग और बच्चे भी थे. बचा हुआ मैच करीब तीन घंटे बाद महज़ 200 लोगों की मौजूदगी में खेला गया. इन 200 लोगों में सिर्फ अधिकारी, कुछ VIP, पत्रकार और पुलिसवाले थे. मैदान के बाहर कोई हिंसा नहीं हुई. इसकी व्याख्या यूं की गई कि लोग पाकिस्तान से गुस्सा नहीं थे, सिर्फ तेंडुलकर को इस तरह आउट दिए जाने से गुस्सा थे.

दूसरी पारी में इंडिया को 232 रनों पर ऑलआउट करके पाक ने ये मैच 46 रनों से जीत लिया. 188 रन बनाने वाले सईद अनवर और 13 विकेट लेने वाले जवागल श्रीनाथ को साझे में मैन ऑफ दि मैच चुना गया.

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मैच जीतने के बाद पाकिस्तानी कप्तान वसीम अकरम ने भारतीय पत्रकारों से कहा, ‘आज जो कुछ भी हुआ, उसके ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ आपके लोग और रिपोर्टर्स हैं. आपने कहा कि शोएब ने सचिन को रन लेने से रोकने की कोशिश की, इसलिए मुझे सचिन को दोबारा बैटिंग के लिए बुलाना चाहिए था. मुझे ऐसा क्यों करना चाहिए था? अगर कोई टीम सिर्फ एक खिलाड़ी पर टिकी है, ये हमारे लिए तो ये बोनस है. पूरी दुनिया ने देखा कि दोनों में से किसी की गलती नहीं थी, लेकिन आपने मुझे दोषी ठहराया. क्या ये सही था? मैं दर्शकों को दोष नहीं दूंगा, क्योंकि वो सारे आपकी लिखी हुई खबरें पढ़कर आए थे.’

वसीम अकरम
वसीम अकरम

भारतीय बल्लेबाज अजहरुद्दीन ने कहा, ‘मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता, क्योंकि मुझे जो कुछ भी कहना था, वो मैं 1996 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में श्रीलंका से हारने के बाद कह चुका हूं. दर्शकों को सही बर्ताव करना चाहिए, क्योंकि हम हर बार नहीं जीत सकते. हम भी इंसान हैं और किसी भी दिन फेल हो सकते हैं. इस घटना से हमें दुनिया में शर्मिंदा होना पड़ा. मुझे नहीं पता, उन्होंने ऐसा क्यों किया.’

PS:

1999 में खत्म होने के बाद साल 2001-02 में एक बार फिर एशियन टेस्ट चैंपियनशिप खेली गई, जिसमें बांग्लादेश ने भी हिस्सा लिया. लेकिन इंडिया इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं थी, क्योंकि पाक के साथ राजनीतिक तनाव होने की वजह से भारत पाकिस्तान के साथ नहीं खेल रहा था.

20 फरवरी यानी मैच खत्म होने वाले दिन अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर बस सेवा की शुरुआत की थी.

1999 एशियन टेस्ट चैंपियनशिप में भारत ने अगला मैच 24 से 28 फरवरी के बीच श्रीलंका के साथ खेला था. आशीष नेहरा का डेब्यू वाला ये मैच ड्रॉ रहा था और नेहरा को मैच में एक विकेट मिला था. नेहरा ने अपना आखिरी टेस्ट और आखिरी वनडे पाकिस्तान के खिलाफ खेला है.


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