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घर बैठे अगर इंडिया ये काम कर दे तो पाकिस्तान तिलमिला जायेगा

उड़ी हमले के बाद भारत पर एक्शन लेने का दबाव बढ़ गया है. सारे वैचारिक व्यक्ति एक सुर से कह रहे हैं कि भारत अगर चाहे तो पाकिस्तान का पानी पीना रोक सकता है. क्योंकि पाकिस्तान में जाने वाली नदियां पहले भारत से गुजरती हैं.

पर क्या ऐसा संभव है? क्योंकि जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान ने 1960 में इंडस वाटर ट्रीटी किया था. नदियों के पानी को बांटने के लिए. और इस ट्रीटी ने 56 सालों में लड़ाइयां देखी हैं, आतंकवाद देखा है और नदियों के बगल से गुजरता खून देखा है. पर इस पर कोई आंच नहीं आई है. ये दुनिया की एकमात्र ऐसी ट्रीटी है जिसमें दो देशों के अलावा वर्ल्ड बैंक भी एक स्टेक-होल्डर है. ये सच है कि सारी नदियां पहले भारत से बहती हैं, पर क्या भारत ये रिस्क ले पायेगा? क्योंकि तब सीधा-सीधा दुनिया में गलत सन्देश जायेगा. कि हमेशा नैतिक हाई ग्राउंड की बात करने वाला भारत एक आक्रामक देश की तरह व्यवहार कर रहा है. इसके साथ ये भी है कि इस ट्रीटी से भारत इंडस नदी का सिर्फ 20% पानी ही यूज कर सकता है.

 

तो क्या है ये ट्रीटी जो गले की खराश बनी हुई है?

कभी-कभी ऐसा होता है कि गले की खराश जाती नहीं और एक वक़्त के बाद अच्छी लगने लगती है. फिर डर लगने लगता है कि अगर ठीक हो गया तो थोड़ा सूना-सूना लगेगा. इस ट्रीटी के साथ भी वही दिक्कत है.

इंडस बेसिन की नदियां तिब्बत और हिमालय से निकलती हैं. इसके बाद जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से गुजरती हैं. फिर पाकिस्तान के सिंध से होते हुए कराची के दक्खिन अरब सागर में गिर जाती हैं. कुल छः मेन नदियां हैं इस सिस्टम में. हिमालय से निकलने के कारण पानी भी भरपूर रहता है. तो ये पूरा क्षेत्र खेती-बारी लायक है. मतलब दुनिया में अपना स्थान रखता है. फिर यहां पर पानी वाले पॉवर-प्लांट भी लगाये जा सकते हैं. तो 1947 के बाद पाकिस्तान को डर था कि भारत पानी के लिए परेशान कर सकता है. 1948 में तय हुआ कि पाकिस्तान पैसा देगा और भारत पानी छोड़ता रहेगा. पर ये चलने वाला नहीं था. क्योंकि लड़ाई भी होनी थी. अब पाकिस्तान ने पूरा जोर लगा दिया कि कुछ ऐसा हो जिससे मामला हाथ से ना निकले.

तभी अमेरिका के टेनेसी वैली परियोजना के डेविड लिलियनथल इंडिया आये. इसी मामले की स्टडी करने. आर्टिकल लिखने आये थे पर राजनीति देख के फंस गए. पर एक बात अच्छी बोल गए:
दुनिया भर के इंजीनियर हर समस्या को एक ही नज़र से देखते हैं. तो इस समस्या का भी समाधान उनके ही पास है.

फिर ‘अराजनीतिक’ वर्ल्ड बैंक ने की मामले में राजनीति

वर्ल्ड बैंक भारत-पाकिस्तान दोनों में पैसा लगा रहा था. वो चाहता था कि जल्दी से जल्दी इस समस्या का हल निकले. उनको डेविड का प्रस्ताव पसंद आया. उस वक़्त के वर्ल्ड बैंक प्रेसिडेंट यूजीन ब्लैक ने इस बात पर जोर दिया कि इस समस्या को इंजीनियर के नजरिये से ही देखा जाये.

पर पाकिस्तान की जिद यही थी कि ऐतिहासिक आधार पर पूरा का पूरा पानी पाकिस्तान को ही दिया जाये. इंडिया को ये मंजूर नहीं ही था. कैसे होता? इंडिया ने प्रस्ताव दिया कि पूर्वी पक्ष वाली नदियां इंडिया को दे दी जायें और पश्चिमी पक्ष वाली पाकिस्तान को. ये पाकिस्तान को मंजूर नहीं था. वर्ल्ड बैंक फ्रस्ट्रेट हो गया. क्योंकि राजनीति करना उसका काम नहीं है.

दो साल की बात-चीत के बाद वर्ल्ड बैंक ने अपनी लिमिट पार कर प्रस्ताव दिया कि पूर्व की अरफ वाली तीन नदियां भारत को और पश्चिम वाली तीन पाकिस्तान को दे दी जाएं. फिर ये भी हुआ कि बांध बनाकर पाकिस्तान के कम हुए पानी की भरपाई की जाये.

इंडिया को व्यास, रावी और सतलज पर अधिकार दिया जाना था. पाकिस्तान को इंडस, चेनाब और झेलम पर.

थोड़ी आना-कानी के बाद रिश्ता बन ही गया

इंडिया तैयार हो गया. पाकिस्तान ने सीधा मना कर दिया. क्योंकि उसे लगा कि ये तो भारत वाला ही प्लान है. उसे सही बात से मतलब नहीं, भारत वाली बात नहीं होनी चाहिए, बस. पाकिस्तान की प्रेस ने खबर उड़ा दी कि ये पाक के पक्ष में नहीं है. देश फंस रहा है. फिर इंडिया के भी एक दिक्कत थे. वर्ल्ड बैंक ने इंडिया से कहा था बांध के पैसे देने के लिए. पर इंडिया क्यों दे? तो बैंक ने इसका उपाय भी निकाल लिया. अमेरिका और इंग्लैंड को राजी कर लिया पैसे देने के लिए. इस बात पर दोनों देश राजी हो गए और 19 सितम्बर 1960 को ट्रीटी पर साइन हो गया.

इसके बाद एक कमीशन भी बनाया गया जो किसी झंझट की सूरत में मामला संभालेगा. वो ये काम करता रहा है. अगर अब इंडिया इस ट्रीटी को तोड़ता है तो पाकिस्तान इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में चला जायेगा. और पूरी संभावना है कि फैसला पाक के पक्ष में ही जायेगा. इसके अलावा एक इंजीनियरिंग समस्या भी है. अगर पानी रोका गया तो जम्मू-कश्मीर और पंजाब में बाढ़ भी आ सकती है. एक और दिक्कत भी हो गई है. अब नदियों में पानी भी कम हो रहा है. जो कि पूरी दुनिया की समस्या है. अब पाकिस्तान को इससे भी दिक्कत होगी. क्योंकि इंडिया अपने पॉवर प्रोजेक्ट भी डेवेलप कर रहा है.

पर सबसे बढ़कर बात ये है कि ये दुनिया की सबसे नायाब संधियों में से एक है. जहां लगातार एक-दूसरे पर हमले होते रहते हैं, वहीं इस मामले पर दोनों देश लगभग एक-दूसरे के सम्मान के साथ रह रहे हैं. तो भविष्य को देखते हुए इस खराश को बरक़रार ही रखा जाना चाहिए.

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