Submit your post

Follow Us

जब पूरी दुनिया भारत के खिलाफ थी, तब अकेला फ्रांस भारत के साथ खड़ा था

एक होता है ऑमलेट. और एक होता है फ्रेंच टोस्ट. पहला आप जानते होंगे. दूसरा?

अंडा लीजिए. उसको फोड़िए. फेंटिए. उसमें दूध मिलाइए. अब एक ब्रेड की स्लाइस लीजिए. उसको अंडे-दूध के घोल में डुबो दीजिए. तवा या फ्राई पैन गर्म कीजिए. थोड़ा मक्खन डालिए. ब्रेड की गीली स्लाइस को सेंक लीजिए. इसी को बोलते हैं फ्रेंच टोस्ट.

एक होता है किस. और एक होता है फ्रेंच किस.

पहला आप जानते होंगे. दूसरा?

जब किस को एकदम गहराई से किया जाता है, तो वो कहलाता है फ्रेंच किस. जिसमें एक इंसान की जीभ दूसरे की जीभ को छूती है. धीरे-धीरे. इसको सबसे गहरा, सबसे रोमांटिक किस कहते हैं.

फ्रेंच टोस्ट और फ्रेंच किस का जिक्र क्यों? क्योंकि जिक्र फ्रांस का है. तो शुरुआत किसी जाने-पहचाने ग्राउंड से की जानी चाहिए. ताकि आप कनेक्ट कर सकें. क्योंकि ज्यादातर लोगों को इन दोनों के बारे में पता होता है. फ्रांस के जिक्र से पहले एक किस्सा सुनिए.

पोखरण में हुए परमाणु समझौते के बाद जब यूरोपियन यूनियन भारत पर प्रतिबंध लगाना चाहता था, तब फ्रांस भारत के पक्ष में खड़ा हुआ था.
पोखरण में हुए परमाणु समझौते के बाद जब यूरोपियन यूनियन भारत पर प्रतिबंध लगाना चाहता था, तब फ्रांस भारत के पक्ष में खड़ा हुआ था.

ये पोखरण परमाणु परीक्षण के वक्त की बात है. केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. परीक्षण के बाद भारत पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए. तब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे टोनी ब्लेयर. ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन (EU) का सदस्य था. उन्होंने EU सम्मेलन में भारत पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया. इस मुश्किल घड़ी में फ्रांस भारत के साथ खड़ा हुआ. उसने कहा कि EU अगर भारत पर प्रतिबंध लगाएगा, तो वो (फ्रांस) अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करके इसे खारिज कर देगा. ब्रजेश मिश्रा तब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) थे. वो खुद पहुंचे पैरिस. फ्रांस को शुक्रिया बोलने. उसके बाद ही भारत और फ्रांस के बीच सामरिक सहयोग शुरू हुआ. दोनों मुल्क इस पार्टनरशिप की 20वीं सालगिरह मना रहे हैं.

फ्रांस और भारत, दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है
फ्रांस का इतना जिक्र यूं है कि वहां के राष्ट्रपति हमारे मेहमान हुए हैं. हमारे यहां आए हुए हैं. नाम है- इमैनुअल मैक्रों. उनकी पत्नी ब्रिजिट साथ हैं. ये साल चल रहा है 2018. दो साल पहले, यानी 2016 में फ्रांस के राष्ट्रपति थे फ्रांस्वा होलांद. वो भारत आए थे. गणतंत्र दिवस परेड में हमारे मुख्य मेहमान थे वो. फिर मई 2017 में मैक्रों बने फ्रांस के राष्ट्रपति. फ्रांस में सत्ता बदलने के बाद हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां पहुंचे थे. मैक्रों से मिलने. उनको भारत आने का न्योता दिया था. तय हुआ कि इंटरनैशनल सोलर अलाइंस (ISA) का सम्मेलन होगा दिल्ली में. उसी में शिरकत करने के मुहूर्त में मैक्रों भारत पहुंचेंगे. ये सम्मेलन 2017 में ही होना था. मगर कार्यक्रम टल गया. इसीलिए तब मैक्रों का भी आना टल गया. मार्च 2018 में इस सम्मेलन का होना फिक्स हुआ. और मैक्रों भी भारत आ गए. भारत और फ्रांस के रिश्ते ऐसे हैं कि दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है. दोनों के पास एक-दूसरे को देने के लिए ऐसी चीजें हैं, जिसकी उन्हें जरूरत है.

फ्रांस ने भारत को क्या दिया?

रफेल डील
पिछले कुछ महीनों से हमारे यहां काफी चर्चा में है ये डील. 36 रफेल विमान खरीदे हैं भारत ने. फ्रांस से. भारत की सरकार ने फ्रांस की सरकार के साथ ये सौदा किया. 2016 में हुई ये डील. लंबे समय से इसे लेकर बातचीत चल रही थी. विवाद इसलिए हुआ कि मौजूदा मोदी सरकार से पहले सत्ता में रही UPA गर्वनमेंट ने भी इसे लेकर बात की थी. तब जो दाम तय हुआ था, उससे कहीं ज्यादा कीमत पर अब मोदी सरकार ने इसे खरीदा है. सरकार का बचाव है कि इन विमानों में कई अतिरिक्त तकनीकें, हथियार, स्पेयर पार्ट्स वगैरह लगवाए गए हैं. सो विमानों की कीमतें बढ़ गईं. खैर, विवाद एक तरफ. विमानों की बात हो, तो वायु सेना बड़ी खुश बताई जा रही है इससे. उसका कहना है कि ये विमान भारत की जरूरतों के हिसाब से बिल्कुल ठीक हैं. फ्रांस को इस डील से काफी मुनाफा हुआ है. कुल मिलाकर ये डील ऐसी है कि दोनों को ही फायदा हुआ है.

रफेल सौदे पर जो विवाद हुआ, उसे अलग कर दीजिए. जहां तक इन लड़ाकू विमानों की बात है, तो भारत की जरूरतों के हिसाब से ये एकदम माकूल है.
रफेल सौदे पर जो विवाद हुआ, उसे अलग कर दीजिए. जहां तक इन लड़ाकू विमानों की बात है, तो भारत की जरूरतों के हिसाब से ये एकदम माकूल है.

जैतपुर परमाणु ऊर्जा प्रॉजेक्ट
10 मार्च, 2018 को भारत और फ्रांस के बीच ये समझौता हुआ. भारत की तरफ से है न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL). फ्रांस की ओर से है इलेक्ट्रिसाइटे दे फ्रांस (EDF). दोनों के बीच समझौता हुआ. महाराष्ट्र के जैतपुर न्यू्क्लियर पावर प्लांट में छह यूरोपीय प्रेइराज्ड रिऐक्टर्स (EPR) लगाने को. शुरू हो जाने के बाद ये दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र होगा. इसकी कुल क्षमता 10 गीगावॉट है. फ्रांस भारत को EPR तकनीक देगा. भारत और फ्रांस, दोनों ने दिसंबर 2018 तक इसका काम शुरू करने की बात कही है

मेक इन इंडिया में निवेश
भारत चाह रहा है मेक इन इंडिया. यानी, चीजें भारत में बनें. बनाई जाएं. इससे लोगों को नौकरियां मिलेंगी. उत्पादन बढ़ेगा. आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. फ्रांस ने डिफेंस सेक्टर में भारत की मदद करने का वादा किया है. मतलब, हथियार वगैरह बनाने में.

सौर ऊर्जा की मांग दिनोदिन बढ़ती जाएगी. जैसे कुछ देश प्राकृतिक तेल और गैस के मामले में धनी हैं, वैसे ही भारत सूरज की रोशनी के मामले में बहुत अमीर है. इसके ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल से न केवल धरती को, इसके पर्यावरण को, बल्कि भारत को भी बहुत फायदा होगा.
सौर ऊर्जा की मांग दिनोदिन बढ़ती जाएगी. जैसे कुछ देश प्राकृतिक तेल और गैस के मामले में धनी हैं, वैसे ही भारत सूरज की रोशनी के मामले में बहुत अमीर है. इसके ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल से न केवल धरती को, इसके पर्यावरण को, बल्कि भारत को भी बहुत फायदा होगा.

इंटरनैशनल सोलर अलाइंस (ISA)
भारत के पास एक चीज भरपूर है. वो है, सूरज की रोशनी. दुनिया ऊर्जा के ऐसे रास्ते तलाशने में जुटी है, जिससे कम से कम प्रदूषण हो. और जो एकदम नैचुरल हो. फ्रांस में दुनिया ने मिलकर पैरिस क्लाइमेट डील पर दस्तखत किया था. कि बढ़ते तापमान को और बढ़ने से रोकेंगे. प्रदूषण कम करेंगे. कार्बन उत्सर्जन घटाएंगे. अमेरिका के पीछे हटने के बाद अब फ्रांस पर इस डील की गंभीरता बरकरार रखने की बड़ी चुनौती है. मैक्रों की इसमें दिलचस्पी भी है. इस लिहाज से भी भारत फ्रांस का अच्छा पार्टनर साबित हो सकता है.

इंटरनैशनल सोलर अलाइंस भी इसी पार्टनरशिप का हिस्सा है. इसका मकसद है सौर ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा उत्पादन. और ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल. ताकि कच्चे तेल और गैस का इस्तेमाल कम किया जा सके. ISA में 60 से ज्यादा देशों ने दस्तखत किए हैं. ये अपनी तरह का पहला अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका सेंटर भारत है. जिसका मुख्यालय भारत में है. भारत के लिए ये बड़ा मौका है. अपने पास मौजूद संसाधन को अपने पक्ष में भुनाने और इसके सहारे आगे बढ़ने का बेहतरीन मौका है भारत के पास. फ्रांस के होने से भारत को तकनीक मिलेगी. दुनिया में उसकी पहुंच बढ़ेगी. मंजूरी मिलेगी. शायद इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे फ्रांस में लॉन्च किया था.

स्कॉरपेने क्लास पनडुब्बी
फ्रांस ने स्पेन की कंपनी नवानतिया के साथ मिलकर ये पनडुब्बी बनाई थी. फ्रांस के साथ भारत का करार हुआ था. इसके बाद फ्रांस ने भारत को छह पनडुब्बियां बनाने की इजाजत दे दी. फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप (पहले इसका नाम DCNS था) के साथ मिलकर भारत ये पनडुब्बियां बना रहा है. भारतीय नौसेना ने इस श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी ‘करांज’ को जनवरी 2018 में लॉन्च किया. चीन की तरफ से जो खतरा है भारत को, उसके लिहाज से ये पनडुब्बियां बहुत मददगार साबित होंगी.

फ्रांस के पास काफी मजबूत नौसेना है. अभी से नहीं, बल्कि पहले विश्व युद्ध के समय से ही.
फ्रांस के पास काफी मजबूत नौसेना है. अभी से नहीं, बल्कि पहले विश्व युद्ध के समय से ही.

फ्रांस क्या दे सकता है भारत को?

न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में एंट्री
शॉर्ट में NSG. भारत इसमें शामिल होना चाहता है. चीन इसका विरोध करता है. उसका कहना है कि भारत जो चुनिंदा देश भारत का समर्थन करते हैं, उनमें से एक देश फ्रांस भी है. बल्कि फ्रांस ने तो बाकी सदस्य देशों से भी अपील की थी. कि भारत को सपोर्ट करें.

UNSC की सदस्यता
भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस समर्थन की जरूरत है, फ्रांस उसे वो सपोर्ट दे सकता है. क्यों? क्योंकि फ्रांस इस दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक है. इस दुनिया से जुड़े तमाम मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की दादागिरी चलती है. कहां बम गिराना है, किसका साथ देना है, किसके खिलाफ जाना है. वगैरह वगैरह. इस UNSC में पांच पक्की सीटें हैं. यानी, इसके पांच स्थायी सदस्य हैं. अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस. यानी अगर फ्रांस के साथ भारत के मजबूत रिश्ते हों, तो भारत को फायदा पहुंच सकता है. जैसे 1971 की लड़ाई के समय सोवियत ने भारत का साथ दिया था. अमेरिका चाहता था कि भारत तत्काल संघर्षविराम करे. ऐसा होता, तो भारत को नुकसान होता. उसे अपनी फौज पीछे हटानी पड़ती. ऐसा होता, तो बांग्लादेश भी नहीं बन पाता. अमेरिका UNSC में प्रस्ताव लेकर आया. मगर रूस ने उस प्रस्ताव में टंगड़ी मार दी. वीटो कर दिया. रूस ने कश्मीर मुद्दे पर भी यूं ही भारत की मदद की थी. UNSC में. तो अगर फ्रांस के साथ भी भारत के करीबी ताल्लुकात हों, तो ये बात भारत को बड़ी राहत दे सकती है. भारत कब से खुद इसका स्थायी सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है. फ्रांस भारत की इस दावेदारी का भी समर्थन करता है.

समंदर में दावे को लेकर चीन बहुत आक्रामक है. उसकी नीति दूसरों पर हावी होने की है. हिंद महासागर में चीन का विस्तार और उसकी आक्रामकता को भारत अकेला हैंडल नहीं कर सकता. उसे फ्रांस, जापान, अमेरिका जैसे सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी.
समंदर में दावे को लेकर चीन बहुत आक्रामक है. उसकी नीति दूसरों पर हावी होने की है. हिंद महासागर में चीन का विस्तार और उसकी आक्रामकता को भारत अकेला हैंडल नहीं कर सकता. उसे फ्रांस, जापान, अमेरिका जैसे सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी.

चीन से मुकाबला करने में मदद
भारत की मुश्किल है. कि उसके एक तरफ चीन है. दूसरी तरफ पाकिस्तान. पाकिस्तान और चीन, दोनों दोस्त हैं. और भारत की इन दोनों से ही नहीं पटती. भारत के सामने चीन लगातार कई गेंदें उछालता रहता है. गेंद, मतलब प्रॉब्लम. एक बड़ी दिक्कत हिंद महासागर में है. चीन अपने फायदे के लिए काफी आक्रामक स्टाइल में रहता है. अंतरराष्ट्रीय कारोबार का सबसे सस्ता साधन समुद्र है. समंदर के रास्ते कारोबार का स्कोप भी बहुत है. और इसमें हवाई जहाज के मुकाबले काफी कम खर्च होता है. हिंद महासागर सामरिक और कारोबारी, दोनों नजरियों से बहुत अहम है. दुनिया में समंदर के रास्ते जो तेल का कारोबार होता है, उसका करीब 80 फीसद हिंद महासागर के रूट से होता है. ये महासागर दुनिया के सबसे अहम समुद्रीय रास्ते भी बनाता है. फिर चाहे वो मिडिल ईस्ट हो, अफ्रीका हो, यूरोप हो, या अमेरिका हो. फ्रांस तो पहले विश्व युद्ध के ही समय से काफी मजबूत नौसैनिक ताकत रहा है. उसके पास साधन और संसाधन, दोनों हैं. भारत खुद भी बाहर अपने नौसैनिक अड्डे बनाना चाहता है. भारत और फ्रांस की ये दोस्ती चीन का मुकाबला करने में मददगार साबित होगी.

इसके अलावा समंदर में प्राकृतिक संसाधन भी खूब होते हैं. चीन साउथ चाइना सी में बाकी सारे देशों से भिड़ा हुआ है. किसी की नहीं सुनता. उसके पास बहुत बड़ी सेना है. हथियारों का जखीरा है. इसी ताकत के दम पर चीन लगातार हिंद महासागर में भी अपने पांव पसार रहा है. चीन से सीधे-सीधे भिड़ना तो फिलहाल नामुमकिन है. लेकिन अगर भारत को दुनिया के कुछ बड़े और मजबूत देशों का साथ मिले, तो चीन के लिए भी भारत को नजरंदाज कर पाना आसान नहीं रह जाएगा. और भारत अपने समुद्रीय मार्गों की हिफाजत कर सकेगा.

भारत और चीन के रिश्ते कभी बहुत अच्छे नहीं रहे. पिछले कुछ वक्त से दोनों के बीच लगातार दिक्कतें आ रही हैं. चीन लगातार भारत की अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं में रोड़ा अटका रहा है.
भारत और चीन के रिश्ते कभी बहुत अच्छे नहीं रहे. पिछले कुछ वक्त से दोनों के बीच लगातार दिक्कतें आ रही हैं. चीन लगातार भारत की अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं में रोड़ा अटका रहा है. सीमा विवाद अलग सिरदर्द है.

चीन से निपटने को भारत दोस्तियां बढ़ा रहा है
चीन का दम-खम कम करने के लिए कई देश अब साथ में आ रहे हैं. जैसे- अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत. फ्रांस के साथ जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को बड़ी राहत मिलेगी. फ्रांस के पास कई नौसैनिक अड्डे हैं. अफ्रीका के जिबूती में उसका नेवल बेस है. जिबूती में चीन का भी बेस है. अमेरिका का भी. लेकिन फ्रांस का बेस सबसे बड़ा है. फिर उसका एक बेस अबु धाबी में है. रियूनियन आइलैंड में है. इसके अलावा उसके पास फ्रेंच साउदर्न ऐंड अंटार्कटिक लैंड्स भी है फ्रांस के पास. दोनों देशों के बीच हुए करार के बाद अब ये एक-दूसरे के नौसैनिक अड्डे इस्तेमाल कर सकेंगे. मतलब भारत का जहाज जाकर फ्रांस के नेवल बेस में खड़ा हो सकेगा. पिछले कुछ समय से भारत और फ्रांस साथ मिलकर नौसैनिक अभ्यास भी करती हैं. जॉइंट अभ्यास से भारतीय नौसेना को नई तकनीकें सीखने, बेहतर होने में मदद मिलती है.

ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से अलग हो चुका है. ऐसे में फ्रांस चाहेगा कि वो यूरोप में भारत का सबसे करीबी सहयोगी बने. इसमें फ्रांस का भी बहुत फायदा है. पिछले लंबे समय से फ्रांस का आर्थिक विकास बहुत धीमा है. उसे भारत जैसे आयातक देशों और बाजारों की जरूरत है. इसके अलावा एक और वजह से दक्षिण एशियाई क्षेत्र की अहमियत. भारत के सहारे फ्रांस इस क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ा सकता है.
ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से अलग हो चुका है. ऐसे में फ्रांस चाहेगा कि वो यूरोप में भारत का सबसे करीबी सहयोगी बने. इसमें फ्रांस का भी बहुत फायदा है. पिछले लंबे समय से फ्रांस का आर्थिक विकास बहुत धीमा है. उसे भारत जैसे आयातक देशों और बाजारों की जरूरत है. इसके अलावा एक और वजह से दक्षिण एशियाई क्षेत्र की अहमियत. भारत के सहारे फ्रांस इस क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ा सकता है.

फ्रांस को क्या दे सकता है भारत?
कायदे से देखा जाए, तो इस पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में फ्रांस का पहला अहम पार्टनर भारत ही है. न केवल बाजार के लिहाज से, बल्कि सामरिक तौर पर भी ये पूरा क्षेत्र बेहद अहमियत रखता है. भारत के रास्ते फ्रांस को यहां अपना दांव बढ़ाने का मौका मिलेगा.
ब्रेग्जिट हो चुका है. ब्रेग्जिट, यानी यूरोपियन यूनियन (EU) से ब्रिटेन का तलाक. फ्रांस चाहेगा कि ब्रिटेन के जाने के बाद EU में वो उसका सबसे करीबी सहयोगी बने.
फ्रांस हथियार बनाता है. भारत काफी हथियार खरीदता है. पिछले दो दशकों से चीन अपनी सेना, खासतौर पर नौसेना में खूब पैसा खर्च कर रहा है. हथियार और ताकत के मामले में वो अभी भारत से मीलों आगे है. भारत को ये दूरी पाटनी होगी. भारत को अपनी सुरक्षा के लिए राफेल जैसे कई रक्षा सौदे करने होंगे. फ्रांस भारत को जो सपोर्ट देगा, उसके बदले भारत फ्रांस की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा पहुंचा सकता है. हथियार और रक्षा तकनीक खरीदकर.


ये भी पढ़ें:

वो राष्ट्रपति, जिसकी नीतियों से ज्यादा उसकी लव स्टोरी पर बात हुई

फ्रांस क्यों मुसलमानों को पोर्क खिलाना चाहता है?

घंटों रेप करते हैं, भूखा रखते हैं: नॉर्थ कोरियाई महिला फौजियों का जीवन

इटली के चुनावी नतीजों का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है


वो राष्ट्रपति, जिसकी लव स्टोरी सुर्खियों में रहती है

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

अपने गांव की बोली बोलने में शर्म क्यों आती है आपको?

अपने गांव की बोली बोलने में शर्म क्यों आती है आपको?

ये पोस्ट दूर-दराज गांव से आए स्टूडेंट्स जो डीयू या दूसरी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं, उनके लिए है.

बहू-ससुर, भाभी-देवर, पड़ोसन: सिंगल स्क्रीन से फोन की स्क्रीन तक कैसे पहुंचीं एडल्ट फ़िल्में

बहू-ससुर, भाभी-देवर, पड़ोसन: सिंगल स्क्रीन से फोन की स्क्रीन तक कैसे पहुंचीं एडल्ट फ़िल्में

जिन फिल्मों को परिवार के साथ नहीं देख सकते, वो हमारे बारे में क्या बताती हैं?

चरमसुख, चरमोत्कर्ष, ऑर्गैज़म: तेजस्वी सूर्या की बात पर हंगामा है क्यों बरपा?

चरमसुख, चरमोत्कर्ष, ऑर्गैज़म: तेजस्वी सूर्या की बात पर हंगामा है क्यों बरपा?

या इलाही ये माजरा क्या है?

राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे शख्स से बच्चे ने पूछा- मैं सबको कैसे बताऊं कि मैं गे हूं?

राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे शख्स से बच्चे ने पूछा- मैं सबको कैसे बताऊं कि मैं गे हूं?

जवाब दिल जीत लेगा.

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

Lefthanders Day: बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

Lefthanders Day: बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मेरा बाएं-हत्था होना लोगों को चौंकाता है. और उनका सवाल मुझे चौंकाता है.

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.