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कॉमेडियन आईएस जौहर का वो बोल्ड इंटरव्यू जिसे पढ़ करण जौहर भी नर्वस हो जाएं!

साठ और सत्तर के दशक में बॉलीवुड में कुछ ऐसे आर्टिस्ट थे जो हर फिल्म में नजर आ जाते थे. महमूद, जॉनी वाकर, टुनटुन, मुकरी तो हीरो के बराबर होते थे. पर इनके अलावा और भी कई लोग थे जो बहुत महत्वपूर्ण थे लेकिन शायद उनके महत्व को समझा नहीं गया. एेसे ही एक व्यक्ति थे आई एस जौहर, जिनका पूरा नाम था इंदर सेन जौहर. फिल्म ‘शागिर्द’ में जॉय मुखर्जी जिस बूढ़े के पीछे ‘बड़े मियां दीवाने ऐसे ना बनो’ गाते हुए चलते हैं, वो बूढ़ा जौहर ही थे. आई एस जौहर का नाम आते ही दिमाग में आता है कि वो करण जौहर के दादा, चाचा या रिश्तेदार रहे होंगे. गूगल करने पर भी वही सर्च में सबसे ऊपर आता है पर ऐसा कुछ है नहीं.

जौहर 1956 से 1982 तक हिंदी फिल्मों में किए अपने कॉमिक रोल्स के कारण लोगों के दिमाग में आज भी जिंदा हैं लेकिन कॉमेडियन का ये टैग उनके गजब व्यक्तित्व का मामूली हिस्सा भी नहीं कवर करता. अब देखिए न कि बीते 10 मार्च को उनका बर्थडे था लेकिन बॉलीवुड ने उन्हें याद नहीं किया, लेकिन ये कॉमेडी आर्टिस्ट से इतर उनका व्यक्तित्व ही है जिसकी वजह से आज अचानक ही हम उन पर बात कर रहे हैं.

उनके विचार, उनकी बातें, फिलॉसफी और उनका खुलापन एेसा था कि 1950-80 के दशक में तो क्या आज के समाज में भी स्वीकार कर पाना मुश्किल है. अगर वे 2017 में एेसी बातें कर रहे होते तो जरूर ही उन पर 100 केस लाद दिए जाते. जौहर ने 1983 में संडे मैगजीन को एक इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने इंसेस्ट, भगवान के साथ सेक्स, होमोसेक्सुअलिटी और दबी इच्छाओं पर खुल कर बात की थी. हर बात एकदम स्पष्ट. कोई लुका-छिपी नहीं. ये मैगजीन एम जे अकबर चलाते थे जो कि अब भाजपा के नेता हैं. समझ लीजिए कि इस वक्त तो वो इंटरव्यू अकबर भी नहीं छापते.

इस इंटरव्यू का टाइटल था  माय सेक्सुअल निर्वाना. मतलब ‘मेरा यौन निर्वाण.’

हमेशा कहा जाता है कि इंडिया कामसूत्र और खजुराहो का देश रहा है. फिर भी यहां पर सेक्स को लेकर एक अजीब टेंशन है. आई एस जौहर ने अपने इंटरव्यू की शुरुआत ही कुछ यूं की थीः

ज्यादा दिन नहीं हुए कि हम लोगों ने समाज के कमजोर वर्गों के दुख और शोषण को देखना शुरू किया है. पर दिमाग फाड़ने वाला दुख ये है कि दस में से नौ हिंदुस्तानी एक ऐसी चीज से व्यथित रहते हैं जिसके बारे में कोई बात नहीं करता. ये चीज है सेक्स को दबाना. जिसके बारे में कोई बोलने की हिम्मत नहीं करता. ना ही कोई उसकी परवाह करता है.

मुझे एक रहस्यमयी अनुभव हुआ था. उसकी वजह से अपनी सेक्सुअल समस्याओं के लिए लोग मेरी मदद लेने लगे थे. अचानक मैंने देखा कि दुनिया के सारे रेगिस्तानों को मिलाकर उससे भी बड़ा सेक्सुअल रेगिस्तान बना हुआ है, जहां पर औरतें और मर्द दर्द में कराह रहे हैं. पानी से निकलकर मरती हुई मछली भी तड़फड़ाती है, पर ये लोग तड़फड़ा भी नहीं पा रहे.

सेक्सुअल रेगिस्तान वाली बात भयावह है, पर सच है. हमारे समाज में सेक्स को लेकर बहुत भय है. हमारे बीच बातें नहीं होतीं. एक उम्र पार कर जाने के बाद हम चीजें समझना शुरू करते हैं. तमाम सोशल साइट्स पर अगर कीवर्ड देखें तो सेक्स को लेकर कुंठा दिखाती है. सेक्स को प्यार करने वाले लोग नहीं हैं. सेक्स से डरने वाले लोग हैं. वो जानते ही नहीं कि इसे प्यार भी किया जा सकता है.

अपने इसी इंटरव्यू में उन्होंने बेहद विस्फोटक बातें यहां कहींः

पर बिना किसी रहस्यमयी अनुभव के भी मैं उन लोगों को गाइड कर सकता था. क्योंकि मैं खुद पूरी जिंदगी सेक्स को रोगी रहा था. वेट ड्रीम्स (गीले सपने), होमोसेक्सुअलिटी (समलैंगिकता), हस्तमैथुन, इनसेस्ट (ख़ून के रिश्ते वाले व्यक्ति से यौन संबंध), नपुंसकता और अत्यधिक औरत-गमन सबके लक्षण थे मुझमें. सबसे खराब थी मेरी अनियंत्रित सेक्सुअल फैंटसी. जिसमें मैं खूबसूरत देवियों और देवताओं की तस्वीरों में जान डाल देता था. अपनी भक्ति से. फिर मैं उनके साथ सेक्स करता था.

अपने बचपन के बारे में बात करते हुए जौहर कहते हैं कि उनके सेक्सुअल एडवेंचर 6 की उम्र से ही शुरू हो गए थे. अपने कजिन के साथ वो सेक्सुअल गेम खेलते. कजिन का चार साल का छोटा भाई गुलू भी वहीं खेलता, पर ये लोग उसे खुद से दूर ही रखते.

आई एस इस इंटरव्यू में आगे बताते हैंः

ये एक सिंपल गेम था. कजिन और मैं एक-दूसरे के ऊपर लेट जाते. पूरे कपड़े पहने हुए. औऱ अश्लील कविताएं पढ़ते. हम ये दिखाते कि हम लोग एक-दूसरे से लड़ रही सेनाओं के जनरल हैं. क्योंकि हमारे मुहल्ले के पास ही ब्रिटिश आर्मी रिक्रूटमेंट भी करती थी.

इन दोनों ने पास खेल रहे गुलू को जितना कम आंका था, वो उससे ज्यादा तेज निकला. ये उसे इस खेल में शामिल नहीं करते थे तो उसने जा के घर में कह दिया किः

दोनों एक-दूसरे को स्क्रू कर रहे हैं. मुझे नहीं शामिल कर रहे.

फिर दोनों को घर-परिवार के सामने पेश किया गया तो आई एस जौहर की मां ने पूछा कि “क्या तुम लोगों ने कपड़े भी उतारे थे?” तो गुलू ने ही कह दिया कि नहीं. पर कहने का अंदाज ये था जैसे कपड़े ना उतारना भी इनका क्राइम था. मतलब ऐसे खेल रहे थे औऱ कपड़े भी नहीं उतारे थे. कि उसे भी नहीं खेला रहे थे.

तो फिर हुआ ये कि चार चप्पल खिलाने के बाद इन लोगों को गली में नंगा करके खड़ा कर दिया गया.

बाद में जौहर को एक और अनुभव हुआ जिसके बारे में उन्होंने बताया, जिसे पढ़ते हुए मस्तिष्क शून्य हो जाता हैः

आधी रात को मैं जग गया. क्योंकि बेडरूम में कुछ अजीब आवाजें आ रही थीं. मैं अपने मां-बाप के साथ ही सोता था. पर अंधेरा इतना था कि कुछ दिख नहीं रहा था. मेरी मां की तरह की आवाज वाली एक आवाज आ रही थी – रुको, रुको. रोको. मेरे पापा की तरह की एक आवाज आई – मैं नहीं रुकूंगा. मुझे लगा कि मेरे पापा, मम्मी को टॉर्चर कर रहे हैं. मैं कैसे उसकी मदद कर सकता हूं. क्या मुझे कुछ शोर-शराबा करना चाहिए कि पापा रुक जाएं. कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि मुझे भी टॉर्चर करने लगें. मैं डर गया, पसीना-पसीना हो गया और मूत दिया.

मेरे पापा की सांस उखड़ गई. और वो भी वही बातें कहने लगे जो मैं और मेरा कजिन सेक्स गेम खेलते हुए कहते थे. बहुत अश्लील थी वो बातें. सबसे अविश्वसनीय था कि ये वही बातें थीं, लाइन बाय लाइन. बाद में जब पापा मरे तो राम नाम सत्य कहते हुए मेरे दिमाग में वही लाइनें चल रही थीं.

आई एस की जिंदगी भी कुछ इसी अंदाज की थी.

उनका जन्म 16 फरवरी 1920 को हुआ था. इस इंटरव्यू को देने के साल भर बाद 10 मार्च 1984 को उनकी मौत हो गई थी. उनका जन्म स्थान अब पाकिस्तान में है. वकालत पढ़ने से पहले उन्होंने इकॉनमिक्स और पॉलिटिक्स में एमए किया था. 1947 में देश के विभाजन के वक्त वो परिवार के साथ एक शादी में पटियाला आए हुए थे. तभी लाहौर में दंगे हो गए. वो वापस नहीं जा सके. परिवार दिल्ली आ गया. बाद में वो बंबई (अब मुंबई) चले गए. जहां फिल्म ‘एक थी लड़की’ से उन्होंने अपना करियर शुरू किया.

फिल्म हैरी ब्लैक के एक दृश्य में एक्ट्रेस बारबरा रश के साथ आई एस जौहर. (फोटोः मैरी इवान्स पिक्चर लाइब्रेरी 2008)
फिल्म हैरी ब्लैक के एक दृश्य में एक्ट्रेस बारबरा रश के साथ आई एस जौहर. इस फिल्म में रोल की तैयारी के लिए इनका मेकओवर देखिए. पसलियां दिखने लगी थी. (फोटोः मैरी इवान्स पिक्चर लाइब्रेरी 2008)

जौहर ने हिंदी फिल्मों के अलावा हॉलीवुड फिल्म ‘हैरी ब्लैक’, ‘लॉरेंस ऑफ अरेबिया’ और अमेरिकी टीवी सीरीज ‘माया’ में भी काम किया था. 1952 में पार्टीशन पर एक बेहतरीन फिल्म बनाई ‘नास्तिक’ जिसे उन्होंने लिखा, डायरेक्ट किया और इसमें काम भी किया था. महमूद के साथ मिलकर ‘जौहर महमूद इन गोवा’ और ‘जौहर महमूद इन हॉन्गकॉन्ग’ भी बनाई. बॉब होप और बिंग क्रॉस्बी की फिल्मों से प्रेरित थी ये दोनों फिल्में. ‘मेरा नाम जौहर’ भी फिल्म बनाई. और भी कई फिल्में बनाईं जिनमें अपना नाम जोड़ा.

पांच शादियां की थीं. पर हर चीज का मजाक बनाते थे जौहर. 1971 में इनको ‘जॉनी मेरा नाम’ के लिए बेस्ट कॉमेडियन का अवॉर्ड भी मिला था. जौहर हिंदी फिल्मों को कूड़ा कहते थे. पर इनकी फिल्में भी बहुत बुरी थीं. इन्होंने इमरजेंसी के दौरान नसबंदी पर इसी नाम से फिल्म भी बनाई थी. इसमें वो दिखाते हैं कि एक नर्स इनका ऑपरेशन करने आती है और ये अपने कमर के नीचे हाथ रखते हैं. ये फिल्म भी पिटी थी. फिर ‘5 राइफल्स’ के नाम से भी फिल्म बनाई थी. बांग्लादेश की लड़ाई पर. इसमें राजेश खन्ना और शशि कपूर के डुप्लीकेट्स लिए थे. पर ये फिल्म भी बिल्कुल नहीं चली थी.

इनका एक नाटक ‘भुट्टो’ फेमस हुआ था. ये दुनिया के हर तानाशाह पर लागू होता है. जौहर के मुताबिक ये नाटक एंटी भुट्टो, एंटी ज़िया और एंटी इंदिरा था.

आई एस जौहर की शादी हुई थी रम्मा बैंस से. दोनों में प्यार तब हुआ था जब जौहर पटियाला आए थे . उस वक्त जौहर 23 के थे और रम्मा 13 की. तीन साल बाद दोनों ने शादी कर ली. फिर दोनों दिल्ली आ गए थे. दंगे हो गए थे. रहने के लिए जगह नहीं थी. टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू के मुताबिक रम्मा ने बताया था कि उन्होंने इंडिया गेट के पास खाली पड़े एक बंगले का शीशा तोड़ दिया और अंदर घुस गईं. पति, पत्नी और दो बच्चे उसमें रहने लगे. उन्होंने बताया कि सरकार हर तीन महीने में इनकी बिजली काट देती थी कि ये लोग घर छोड़ दें. पर इनके एक इंजीनियर चाचा थे, वो आ के बिजली जोड़ देते. फिर इन लोगों को रेडियो वगैरह में काम मिलने लगा.

1949 में ये लोग बंबई आ गए. वहां दोनों को काम मिलने लगा. जौहर लिखने लगे. 1960 में रम्मा अपने बच्चों को पढ़ाने लंदन चली गईं. और खुद भी एक कोर्स कर लिया. न्यूट्रीशन और हेल्थ से जुड़ा. फिर दिल्ली में अपना सलून खोल लिया. महारानियां और नेताओं के घरों की लड़कियां भी आती थीं. रम्मा के मुताबिक इंदिया गांधी और सोनिया गांधी भी बाद में आई थीं इस सलून में.

1972 में रम्मा बंबई फिर आईं. टाटा ग्रुप की मदद से हेल्थ क्लब शुरू किया. इसमें सिमोन टाटा, जीनत अमान, मुमताज, रेखा, जया सब आती थीं. इसी दौरान उन्होंने ‘गरम हवा’ फिल्म में भी काम कर लिया. फिर रम्मा ने कथित रूप से देश की पहली एरोबिक्स क्लास शुरू की. इसमें श्रीदेवी से लेकर सायरा बानो तक आती थीं. कुमार मंगलम बिड़ला और अंबानी भी जाते थे.

फिल्म गरम हवा के एक दृश्य में रम्मा बैंस.
फिल्म गरम हवा के एक दृश्य में रम्मा बैंस.

पर एक लोचा भी हुआ था. इन सबके बीच रम्मा ने एक हरबंस शिवलोक से रिश्ता जोड़ लिया. जौहर ने रम्मा को तलाक देने से मना कर दिया तो वो अपने मां-बाप के पास वापस लौट गईं. फिर तलाक हो गया. हरबंस से शादी हो गई. दस साल तक दोनों साथ रहे. फिर रम्मा को पता चला कि जौहर बीमार हैं, अकेले हैं. हालांकि उन्होंने कई शादियां कर ली थीं, पर फिलहाल अकेले थे. कुछ यूं हुआ कि रम्मा बंबई चली गईं और जौहर के साथ रहने लगीं. उनके मुताबिक उन्होंने अपने बच्चों को छोड़ के भावनात्मक गलती की थी और उनकी दूसरी शादी के बावजूद जौहर ने उन्हें उतना ही प्यार दिया था.

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ऑस्कर-2017 में नामांकित फिल्मों के बारे में यहां पढ़ेंः

1. “मूनलाइट”
2.ला ला लैंड”
3. “मैनचेस्टर बाय द सी”
4. “हैकसॉ रिज”
5. “नॉक्टर्नल एनिमल्स”
6. “फेंसेज़”
7. “अराइवल”
8. “हैल ऑर हाई वॉटर”
9. “फ्लोरेंस फॉस्टर जेनकिन्स”
10. “लविंग”

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