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शर्म आती है कि हम सलमान खान और कपिल शर्मा के दौर में जी रहे हैं

मुझे नहीं मालूम कि आप लोग, जब हम मीडिया में काम करने वालों को देखते हैं तो क्या सोचते हैं. शायद ये, कि हम प्रेस कार्ड दिखाकर चालान कटवाने से बच जाते हैं. या फिर हम लाखों रूपये लेकर सरकार के पक्ष या विपक्ष में लिखते हैं. किसी को बर्बाद करना हो, तो उनका दुश्मन हमें पैसे देकर खरीद लेता है. मुझे नहीं मालूम कि कौन किसे कितने पैसे देता है. ख़बरें कैसे प्लांट होती हैं या PR कंपनियां कैसे काम करती हैं. मगर मुझे ये मालूम है कि पत्रकार या लेखक का फ़र्ज़ क्या होता है. कि हम अपने मन में आई बातों को निडर होकर लिखें-कहें. भले ही आपकी और मेरी राय एक न हो, मगर मुझे अगर कोई फिल्म खराब लगी है, तो मैं उसे अच्छा कैसे बताऊं?

कपिल की फिल्म 'फिरंगी' का पोस्टर.
कपिल शर्मा की फिल्म ‘फिरंगी’ का पोस्टर.

जहां से मैं देख रही हूं, एंटरटेनमेंट वेबसाइट स्पॉटबॉय-ई के एडिटर विकी लालवानी ने भी यही किया था. उन्होंने कपिल शर्मा की फिल्म देखी. उन्होंने उसकी समीक्षा लिखी. अगर आपको समीक्षा का शाब्दिक अर्थ न पता हो बता दूं, इसके माने होते हैं किसी भी चीज को ऐसी नजर से देखना जैसे हम उसकी पढ़ाई कर रहे हों. उसकी बारीकियों को देखना, उसके बैकग्राउंड को समझना. उसकी तकनीकियों के बारे में विस्तार से समझना. किसी चीज की तारीफ करना, उसकी समीक्षा नहीं होती. मगर कपिल के अंदर इतना दिमाग नहीं कि वो इस बात को समझ पाएं. कपिल के कम समय में भयानक शोहरत देखी. और इस तरह की शोहरत पाने वाले वो इकलौते व्यक्ति नहीं हैं. हवाई जहाज़ भी झटके से उड़ता जरूर है मगर हवा में जाकर एक ऊंचाई पर स्थिर होकर उड़ने लगता है. ऊंचाई पर पहुंचने के बाद स्थिरता आवश्यक है. क्योंकि एक वक़्त ऐसा भी आ जाता है, जब आप और ऊंचा नहीं उठ सकते. मगर गिरने के लिए आपके पास पर्याप्त जगह होती है. कपिल शर्मा की बेहूदी कॉमेडी मैंने जितनी बार भी देखी, मैंने सोचा उनका इससे ज्यादा पतन नहीं हो सकता.

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कपिल के ट्वीट्स.

उन्होंने समाज के सभी कमज़ोर वर्गों के लिए वो सब किया, जो उन्हें और कमज़ोर और लोगों की नज़र में घृणा का पात्र बनाती है. वजनी व्यक्ति को मोटा कहकर चिढ़ाया, पत्नी का रोल करने वाली एक्ट्रेस का उनके शरीर की बनावट और चेहरे के आकार पर मज़ाक उड़ाया. ये बताया कि पत्नी की का फर्ज़ महज पति की शोभा बढ़ाना और लोगों को चाय-पानी करवाना है. लोगों को काले, भैंगे कहकर हंसाना और उसपर हंसना, हमें ये बताता है कि हमारी हास्य की कोई संस्कृति ही नहीं थी. मगर कपिल का पतन और हुआ जब उन्होंने विकी लालवानी को फोन कर ये कहा कि वो उनकी मां और बहन का रेप करेंग. ‘रेप’ एक संवैधानिक शब्द है. इसकी जगह कपिल ने जो शब्द बोला वो इतना बुरा है, कि ये जानते हुए कि मेरी मां इसे पढ़ रही हैं, मैं उसे लिखने में भी शर्मा रही हूं.

कपिल ने विकी को फोन कर कहा कि विकी की बेटी कपिल के साथ सोना चाहती है और अगर विकी पैसे चाहते हैं तो अपनी बेटी बेच दें. एक बार मैं कपिल की स्त्री विरोधी, अमानवीय कॉमेडी को माफ़ भी कर दूं, तो इस बात को कैसे माफ़ करूं कि उन्होंने किसी पुरुष को नीचा दिखाने के लिए उसकी बेटी, मां और बहन के प्रति यौन हिंसा की बातें कहीं. अगर कपिल को विकी से तकलीफ है भी, तो उनका बदला केवल विकी के परिवार की औरतों के शरीर पर हिंसा कर पूरा होगा? देश के लोगों को स्वच्छ भारत का पाठ पढ़ाने वाले कपिल का खुद का दिमाग कब साफ़ होगा? कपिल ने जब ट्विटर पर विकी को गालियां देना शुरू किया, उसके पहले उन्होंने मीडिया को इस बात के लिए भी गालियां दी थीं, कि वो सलमान जैसे अच्छे आदमी को बुरा बना रहे हैं. और बड़े आराम से मीडिया को बिकाऊ कह डाला था.

मुझे इस बात को पढ़कर ज़रा भी आश्चर्य नहीं हुआ कि कपिल शर्मा, सलमान को दोषी करार दिए जाने के बाद भी उनका पक्ष ले रहे थे. सलमान की PR यानी पब्लिक रिलेशन टीम बहुत अच्छी है. सलमान ही एक ऐसा नाम हैं, जो देश की जनता इतनी आत्मीयता से लेती है, कि उन्हें ‘भाई’ बुलाती है. सलमान के ऊपर चले कोर्ट केसेज़ की तो मैं बात ही नहीं कर रही हूं. और मैं दावे के साथ ये भी नहीं कह रही कि ऐश्वर्या राय का लगाया हुआ हर आरोप सच होगा. मगर सलमान नशे में उनके घर पहुंचे और उनका दरवाजा पीटते रहे, ये बात उन्होंने खुद मीडिया में स्वीकार की थी. उसके बाद उन्होंने ये नहीं कहा कि उनका किया हुआ गलत था. उन्होंने ये कहा कि वो और ऐश्वर्या रिलेशनशिप में हैं और एक रिश्ते में तो इस तरह की लड़ाइयां चलती ही रहती हैं. सलमान ने किस तरह एक ही वाक्य में स्टॉकिंग, हिंसा और मानसिक टॉर्चर को ‘प्रेम की छोटी-मोटी’ लड़ाई में तब्दील कर दिया, ये कमाल है. और ये ‘भाई’ की ‘मर्दानगी’ का इकलौता नमूना नहीं था.

फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' के एक सीन में सलमान खान और ऐश्वर्या राय बच्चन.
फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के एक सीन में सलमान खान और ऐश्वर्या राय बच्चन.

वो शायद साल 2005 था, जब एक प्रमुख न्यूज़ चैनल ने एक स्टिंग ऑपरेशन में एक्टर अमन वर्मा को कास्टिंग काउच, यानी फिल्म में काम दिलाने का वादा कर लड़की को सेक्स के लिए मजबूर करते देखा गया था. तब सलमान ने उनके बचाव में मीडिया से कहा था कि जब अमन वर्मा ने न अपनी पैंट की ज़िप खोली, न ही शर्ट के बटन खोले, तो इस बात को इतना बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है. क्या जबतक पैंट न खोली जाए तबतक यौन शोषण के होने को न होना मानना चाहिए?

अमन वर्मा.
अमन वर्मा.

ये न भूलें कि ‘सुल्तान’ फिल्म के लिए ट्रेनिंग करते समय वो सलमान ही थे, जिन्होंने खुद को रेप हुई औरत सा बताया था. मैं सलमान से पूछना चाहती थी कि क्या उन्हें भी ट्रेनिंग के बाद जीवन भर के लिए ट्रॉमा और डिप्रेशन हो गया था? क्या वो भी अपना जीवन खत्म करना चाहते थे? क्या उनको लोग बुरी नजरों से देखते थे क्योंकि उनकी ‘इज्ज़त’ लुट गई थी? क्योंकि लड़कियों के साथ रेप के बाद ऐसा ही होता है.

हम पौरुष को स्त्रीत्व का उल्टा मानते हैं. जैसे अंधेरे की पहचान रौशनी के बिना नहीं होती, पौरुष स्थापित करने के लिए स्त्रीत्व को नुकसान पहुंचाना ज़रूरी हो जाता है. इसलिए कपिल को ये कहते हुए ज़रा भी बुरा नहीं लगता कि वो किसी की मां का रेप करेंगे. पर कपिल ने अभी तक पैंट की ज़िप या शर्ट के बटन नहीं खोले हैं.


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