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प्रतिरोध की कविता का सबसे नया रूप है 'जमाला'

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14 मई, स्टॉकहोम. यूरोप से सबसे बड़े म्यूजिक कॉम्पटीशन यूरोविज़न के नतीजे आने वाले थे. कॉन्टेस्टेंट में यूक्रेन की सिंगर जमाला भी थीं. नतीजों का इंतजार कर रहीं थीं. अपनी ओर बढ़ाए गए माइक पर उन्होंने कहा, ‘आज अगर मैं ये शो जीत गई, तो ये इस बात का सबूत होगा कि यूरोप भी हम लोगों का दर्द समझता है.’

जमाला के गाने पर विवाद था. क्योंकि उनके गाने को ‘पॉलिटिकली चार्ज्ड’ माना गया. यानी राजनैतिक रूप से संवेदनशील. लेकिन जीतता जमाला का ही गीत है. गीत का नाम है ‘1944’.

1944 सुन कर एक ही बात याद आती है. वो है दूसरा विश्व युद्ध. इससे पहले हम आपको जमाला का गीत पढ़ाएं और सुनाएं, हम आपको बताएंगे कि ऐसा क्या हुआ था 1944 में, जिस वक़्त जमाला पैदा भी नहीं हुई थीं, जो उनसे इस कदर जुड़ा है कि उन्होंने इसपर ‘पॉलिटिकली चार्ज्ड’ गीत लिख डाला.

जमाला एक क्रीमियन तातार हैं. क्रीमिया यूरोप के ईस्ट में एक छोटा सा उपद्वीप यानी पेनिनस्युला है. लगभग पूरा ही समुद्र से घिरा हुआ. क्रीमियन तातार यहां पर रहने वाला एक बड़ा समुदाय है. यूक्रेन, रशिया और टर्की इसके पड़ोसी क्षेत्र हैं.

CRIMEA

अपने समुदाय का नाम इन्हें अपनी भाषा से मिला है. ‘क्रीमियन तातार’ या ‘क्रीमियन’ एक ‘टर्किक’ भाषा है. दुनिया में कुल 35 टर्किक भाषाएं हैं. जो यूरोप से ले कर चाइना तक बोली जाती हैं. एक और भाषा है, जिसे रशिया में बोला जाता है, ‘तातार’. लेकिन ‘क्रीमियन तातार’ और ‘तातार’ दो अलग अलग भाषाएं हैं. जिसमें समानताओं से ज्यादा फर्क हैं.

बात 1944 की

क्रीमियन तातार हमेशा से क्रीमिया में रहते आए थे. क्रीमिया एक ऑटोनॉमस क्षेत्र था. यानी अपने फैसले खुद लेने का अधिकार रखता था. किसी भी समृद्ध देश की तरह क्रीमियन तातारों के स्कूल-कॉलेज थे, म्यूजियम, लाइब्रेरी और थिएटर हुआ करते थे. फिर तानाशाह स्टालिन आया. और सब कुछ उसी की मर्जी से होने लगा.

सोवियत रशिया हिटलर और एक्सिस देशों के खिलाफ लड़ रहा था. जर्मनी की सेना सोवियत रशिया की ओर बढ़ती चली जा रही थी. और धीरे धीरे उन्होंने क्रीमिया पर कब्ज़ा जमा लिया. इधर स्टालिन की सरकार मजबूत होती जा रही थी. कम्युनिस्ट पार्टी ने जर्मनी के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया. स्टालिन ने बनाई अपनी ‘लाल सेना’. जिसमें एक भी क्रीमियन तातार को नहीं लिया. इस डर से, कि जर्मनी के कब्ज़े के बाद क्रीमिया के लोग जर्मनी वालों के साथ मिल गए होंगे. ‘लाल सेना’ ने सबसे पहले क्रीमियन गांवों को अपना निशाना बनाया. ये कहकर कि क्रीमियन लोग जर्मन सेना से मिले हुए हैं. लेकिन ये महज संदेह तो नहीं हो सकता, कि पूरे के पूरे क्रीमियन गांव तबाह कर दिए जाएं. कम्युनिस्ट सरकार को तातारों से नफरत थी. जैसे हिटलर को यहूदियों से.

Ständige Freundschaft mit Stalin. "Freundschaft mit Stalin ist die Gewähr des Sieges, des Friedens und der Zukunft" heißt es in dem Aufruf der Regierung der Deutschen Demokratischen Republik zum 70. Geburtstag von Generalissimus Stalin am 21.12.39. UBz: I.W. Stalin am Schreibtisch Aufn.: Illus-SNB 5.12.49 4636-49
स्टालिन

इधर जर्मनी भी अपने खेल खेल रहा था. 1942 में जर्मन सरकार ने क्रीमियन लोगों को अपनी खुद की सेना बनाने का ऑफर दिया. लाल सेना से प्रताड़ित क्रीमियन तातार हजारों की संख्या में सेना में शामिल होने लगे. कुछ तो सिर्फ इसलिए सेना में शामिल हो गए, क्योंकि वो जर्मन सेना के युद्ध बंदी थे. जर्मनी और सोवियत रशिया के बीच इसी तरह क्रीमिया पिसता रहा. कुछ क्रीमियन लोग लाल सेना के सदस्य थे. कुछ को जर्मनी ले जाकर बंधुआ मजदूर बना दिया गया था.

सोवियत सरकार अपने नए प्लान को अंजाम देने वाली थी. प्लान, क्रीमियन तातारों के सफाए का. इसको करने का एक तरीका था. पहले सेना के बल से उन्हें देश के बाहर खदेड़ दो. फिर उनपर लगा दो देश से गद्दारी करने का आरोप. क्रीमियन तातार लोग मूल रूप से तुर्की से आए थे. सोवियत हमेशा से तुर्की में अपने नेवी के बेस बनाना चाहता था. जिसकी वजह से उनकी तुर्की से लड़ाई थी. सोवियत सरकार के क्रीमियन तातारों को उनके मूल पर सवाल उठाते हुए उनकी वफादारी पर सवाल उठाए. और उनका सफाया करने की ठान ली.

1944 में 2 लाख क्रीमियन तातारों को देश छोड़ने का आदेश मिला. और देश छोड़ने के लिए वक़्त मिला आधे घंटे का.

क्रीमियन तातारों को यूक्रेन और दूसरे पड़ोसी देशों की ओर रवाना कर दिया गया. ट्रेन से इन जगहों में जाते हुए लगभग 8 हजार क्रीमियन तातारों की जानें गईं. क्रीमियन तातारों को ऐसी गाड़ियों में भेजा गया, जिनके दरवाजे सील थे. हजारों लोग केवल प्यास से ही मर गए. इन गाड़ियों को नाम दिया गया, ‘पहियों पर शमशान’. इन गाड़ियों में हवा नहीं आ सकती थी. कोई डॉक्टर नहीं था. खाना नहीं था. मरे हुए लोगों को रास्ते में पड़ने वाली रेलवे लाइन पर फेंकते हुए गाड़ी आगे बढ़ जाया करती थी.

इन गाड़ियों के अंदर औरतों और मर्दों को साथ में ठूंसा गया था. इसलिए जब टट्टी-पेशाब करना होता, तो लोग शर्मिंदा हो जाते. रिपोर्ट्स में ये पढ़ा गया कि एक लड़की टट्टी करने में इतनी शर्म महसूस कर रही थी, कि लगातार रोक के रखने से उसकी आंतें फट गई थीं. कुछ अमीर क्रीमियन तातार सोना ले कर चले थे. जो पूरा रास्ते में खाना खरीदने में बिक गया था.

deportation 2

और फिर शुरू हुआ तातारों के होने के सबूत का खात्मा. क्रीमिया में बने सभी तातार स्मारक, तातार किताबें, और सभी चीजें जो क्रीमियन तातारों के होने का सबूत थीं, नष्ट कर दी गईं. तातार मस्जिदों को सिनेमाघरों में तब्दील कर दिया गया. तातारों के मकबरों को तोड़कर उनसे दूसरी बिल्डिंगें बना दी गईं. जिन जिन किताबों में, जहां कहीं भी क्रीमियन तातारों का ज़िक्र आता था, वो पन्ने गायब कर दिए गए. क्रीमियन तातार लोगों की नागरिकता ख़त्म हो गई. और उनके नाम के पासपोर्ट इशू होना बंद हो गए.

deportation 1

***

कोई राजा कितना भी ताकतवर हो, मौत को नहीं हरा सकता. 1953 में स्टालिन मर गया. और उसके बाद क्रीमियन तातारों की स्थिति में थोड़ा सा सुधार हुआ. उन्होंने सोवियत सरकार से अपने अधिकारों की मांग करनी शुरू की. 1966 में क्रीमियन तातार सड़कों पर उतर आए. विरोध प्रदर्शन करने लगे. लेकिन सोवियत सरकार ने सारे आंदोलन दबा दिए. अगले साल सोवियत सरकार ने वादा किया कि क्रीमियन तातारों की उनके अधिकार मिलेंगे. लेकिन ये झूठा वादा निकला.

क्रीमियन तातारों के निर्वासन की 70वीं बरसी पर उजाला करते क्रीमियन तातार
क्रीमियन तातारों के निर्वासन की 70वीं बरसी पर उजाला करते क्रीमियन तातार

सालों तक चलने वाली राजनैतिक उथल-पुथल के बाद 1991 में एक रेफ्रेंडम के बाद क्रीमिया यूक्रेन के अंदर ही एक स्वायत्त यानी ऑटोनोमस गणतंत्र बन गया.

लेकिन कुछ सालों बाद, 2014 में रशिया के सैनिकों ने क्रीमिया पर अटैक कर उसपर कब्ज़ा कर लिया. ऐसा कब्ज़ा, जिसे गैरकानूनी माना गया.

***

जमाला, जिनका असली नाम सुसाना जमालादिनोवा है, 2014 से अपने घर वालों से नहीं मिली हैं. यानी दो साल से घर से दूर हैं. उन्होंने अपनी दादी से 1944 के नरसंहार की कहानियां सुनी हैं. दादी 5 बच्चों के साथ निकली थीं. एक बेटी राह में खो दी. जमाला को 1944 की गूंज 2014 में फिर से सुनाई दी. इसलिए उन्होंने निकाला गीत, ‘1944’. गीत का कोरस क्रीमियन तातार भाषा में है. जो उनके एक लोकगीत से लिया गया है.

पढ़िए गीत के बोल:

When strangers are coming
They come to your house
They kill you all
And say
We’re not guilty
Not guilty

Where is your mind?
Humanity cries
You think you are gods
But everyone dies
Don’t swallow my soul
Our souls

I couldn’t spend my youth there
Because you took away my peace
I couldn’t spend my youth there
Because you took away my peace

We could build a future
Where people are free
To live and love
The happiest time

Where is your heart?
Humanity rise
You think you are gods
But everyone dies
Don’t swallow my soul
Our souls

I couldn’t spend my youth there
Because you took away my peace
I couldn’t spend my youth there
Because you took away my peace

गीत में जमाला कहती हैं:

‘वो आते हैं, तुम्हारे घरों में घुसते हैं
वो तुम्हें मार डालते हैं
वो खुद को भगवान समझते हैं
लेकिन असल में वो लोगों को मार डालते हैं

हमारी आत्माओं को मत निगलो’

जाहिर सी बात है, रशियन सरकार को इस गीत से तकलीफ थी.

Crimean Tatar singer Susana Jamaladinova, known as Jamala, who won the Eurovision Song Contest, attends a news conference in Kiev, Ukraine, May 17, 2016. REUTERS/Gleb Garanich - RTSENMN

ये गाना 2014 के लिए है. ये दो साल मेरे लिए सबसे दुखी साल रहे हैं. सोचिए, आप एक रचनात्मक इंसान हों, एक सिंगर हों, लेकिन दो साल तक अपने घर न जा सकें. आप स्काइप पर अपने दादा को देखते हैं. वो 90 साल के हैं. लेकिन आप उनसे मिल नहीं सकते. तो ऐसी स्थिति में मैं खुशी भरे गीत कैसे लिखूं? जो हुआ उसे भूल जाऊं? जाहिर है, ऐसा होना नामुमकिन है.’

और कला तो वही होती है जो बुरे समय में सबसे ज्यादा खिलती है. जैसे जलती हुई धूप और लू में खिलता है अमलतास. नेरूदा से लेकर ब्रेख्त तक, फैज़ से लेकर प्रेमचंद तक, सबने कलम को अपना हथियार बनाया है. जमाला, ऐसे ही और गीत गाओ. गीत जो खूबसूरत न हों. जो छालों और नालों की बातें करते हों.

***

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here is the history behind the eurovision contest winner song 1944 by jamala

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