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पाकिस्तानी 'रमन राघव' जिसने 100 बच्चों का रेप और कत्ल किया था

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अनुराग कश्यप ने बड़ी करारी फिल्म बनाई है. रमन राघव 2.0, इसमें लीड हीरो हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी. 60 के दशक में बंबई के फुटपाथ और झोपड़पट्टी वालों में खौफ कायम करने वाला सीरियल किलर था रमन. उसके बारे में तो सब कुछ जान ही लोगे. या अब तक जान लिया होगा. अब जानो पाकिस्तानी रमन राघव के बारे में. ये 90 के दशक का विलेन था. इसका ‘करियर’ रमन के मुकाबले ज्यादा भरा पूरा था.

100 बच्चों का रेप और मर्डर किया

दिसंबर 1999 में पाकिस्तान के एक उर्दू अखबार को चिट्ठी मिली. चिट्ठी में लिखा था “मैंने 100 बच्चों के कत्ल से पहले उनका रेप किया. फिर उनकी लाश को ढेर सारे तेजाब में गला दिया.” ऐसी ही एक चिट्ठी पुलिस थाने को गई थी. साथ में गया था पार्सल. जिसमें कत्ल के सुबूत और उसका शिकार बने बच्चों की तस्वीरें थीं.

चिट्ठी के बेस पर रावी रोड पर बने उसके घर में सबसे पहले पत्रकार पहुंचे थे. थोड़ी ही देर में पुलिस पहुंची. वहां दो बच्चों की हड्डियों के ढांचे बरामद किए. बगल में बड़ा सा कंटेनर. जिसमें भरा था हाइड्रोक्लोरिक एसिड. मतलब तेजाब. साथ में पड़े थे दो बड़े बैग जिसमें विक्टिम्स के जूते और कपड़े भरे थे.

दीवारों पर प्लकार्ड पिन के सहारे चिपके हुए थे. उन प्लकार्ड्स में लिखा था:

“सारे मर्डर्स की डिटेल एक डायरी और एक 32 पेज की नोटबुक में है. जो मैंने कमरे में रख छोड़ी है. उसकी कॉपी ऑफिसर्स को भेज दी है.”

“जो लाशें पुलिस को मिलेंगी उनको मैं ठिकाने लगाने में कामयाब नहीं हुआ हूं. पुलिस को वो मिलेंगी, मेरी खुदकुशी के बाद.”

“मैं रावी नदी में कूदकर खुदकुशी करने जा रहा हूं.”

पुलिस भागी रावी नदी की तरफ. जैसा कि उसने हिंट दिया था. लेकिन वहां कुछ हाथ नहीं लगा. अगले दिन उसके दो साथी अरेस्ट हो गए. उनसे पूछताछ चल ही रही थी कि उसने खुद सरेंडर कर दिया.

मुकरी. ये नाम दिया गया पाकिस्तान की हिस्ट्री के सबसे खूंखार सीरियल किलर को. कसूर इलाके में बच्चों के साथ रेप और फिर उनका मर्डर करने वाले इस दरिंदे का नाम था जावेद इकबाल. बहुत सिंपल लाइफ जीने वाला जावेद अपने मन में बदले की आग पाले था. जो तब से जल रही थी जब वह 20 साल का था. उसने कुबूल किया था-

“मैं हूं जावेद इकबाल. 100 बच्चों का कातिल…इस दुनिया से नफरत है मुझे. अपने किए पर कोई शर्म नहीं है मुझे और मैं मरने को तैयार हूं. मैं माफी नहीं मांगूंगा. मैंने 100 बच्चे मारे हैं.”

रेप के झूठे आरोप में फंसाया गया था

उसने पुलिस को बयान दिया था. कि जब वह पूरे 20 का भी नहीं था तो उसे पकड़ कर जेल भेज दिया गया था. रेप का इल्जाम लगाकर. वह इल्जाम झूठा था. उसे साजिश के तहत फंसाया गया था. उसकी प्यारी मां ने उसे छुड़ाने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया था.

तमाम कोशिशों के बाद भी उसकी रिहाई नहीं हो सकी. जब वह घर लौट कर आया तो देखा कि सब कुछ खत्म हो चुका है. उसकी मां मर चुकी था उसका इंतजार करते हुए. यहीं से उसके अंदर बदले का पहला अंकुर फूटा. उसने मन ही मन फैसला किया कि वह ऐसे ही कम से कम 100 माओं को रुलाएगा. ताकि उन्हें अंदाजा हो कि बच्चे की तकलीफ क्या होती है.

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फंसाने, मारने और सुबूत मिटाने का एक्सपर्ट था

पाकिस्तान के अखबार डेली डॉन को उसने स्टेटमेंट दिया था सन 2001 में. जिसमें बताया था कि उसने पहले बेहतरीन वीडियो गेम्स शॉप खोली. शादबाग मोहल्ले में ऐसा किसी ने नहीं किया था. इसमें बहुत कम रेट्स पर टोकन देता था. लालच बढ़ाने और बच्चों को बुलाने के लिए कभी कभी फ्री कर देता था.

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अंदर दुकान में 100 का नोट फेंक देता था. जब कोई बच्चा उठा लेता तो सबको लाइन से खड़ा करता. तलाशी लेने के लिए. जिसके पास निकल आता उसे ले जाता एक छिपे कमरे में. वहां उसके साथ रेप करता. कई बार वह वापस लाकर उनको 100 रुपए दे देता था. उनके ‘अच्छे व्यवहार’ के लिए. जब लोगों ने उसकी दुकान पर बच्चों को जाने से मना किया तो उसने मछली दिखाने वाला एक्वेरियम खोल लिया. उसके कुछ वक्त बाद जिम चलाने लगा.

उसकी नजर रहती थी हमेशा गली में घूमने वाले बच्चों पर. या घर से भागे बच्चों पर. उनको लाहौर के शादबाग वाले घर में लाता था. फिर उनके साथ बुरी तरह बलात्कार करता और गला घोंट कर मार देता. गला घोंटने के लिए लोहे की एक जंजीर का इस्तेमाल करता था. जो पुलिस ने उसके घर से बरामद की थी. दीवारों पर खून के निशानों और मारे गए बच्चों की फोटोज के साथ.

मर्डर करने के बाद लाश को छोटे छोटे टुकड़ों में काटता. उन टुकड़ों को एसिड में डुबो कर पूरी तरह गला देता. उसके बाद अगर कुछ बचता तो सब ले जाकर नदी में फेंक देता था.

जज ने 20 बार गला घोंटने की सजा सुनाई थी

16 मार्च सन 2000. जज अल्लाह बख्श की अदालत. फैसला सुनाया गया. “जावेद इकबाल को 100 कत्लों का जिम्मेदार पाया गया है. उसका गला 20 बार घोंटने की सजा दी जाती है. फिर इसकी लाश 100 टुकड़ों में काटी जाए. जैसा इसने उनके साथ किया.”

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फैसला हुआ कि मुकरी की फांसी पर लटकाया जाएगा. लेकिन वह दिन कभी नहीं आया. उसने जेल के अंदर ही खुदकुशी कर ली. साथ ही उसके एक और साथी साजिद अहमद ने. जो उसके जुर्म में भागीदार था. 8 अक्टूबर 2001 की सुबह कोट लखपत जेल में उनकी लाश मिली.

हालांकि जिन हालात में उनकी लाशें मिलीं, लोगों ने शक जताया कि उनका भी मर्डर किया गया है. बेड शीट के सहारे छत में लगी सरिया से लटक रही थीं उनकी लाशें. हाथ पैर और नाखून नीले पड़ गए थे. नाक और मुंह से खून निकल रहा था. जावेद के पूरे जिस्म में धारदार हथियार से काटे निशान थे.

जावेद की फैमिली का कोई आदमी उसकी लाश लेने नहीं आया. उसके भाई परवेज मुगल ने बताया “हमारे लिए तो ये तभी मर गया था जब इसने 100 बच्चों का कत्ल कुबूल किया. हम उसका क्या करेंगे.”

जेल के ऑफिसर्स ने बताया कि उसने दर्जनों बार खुदकुशी की कोशिश की थी. उसका व्यवहार एकदम अजीब सा हो गया था. जेल स्टाफ की नाक में दम कर रखा था. कभी रात में दूध मांगता. कभी कहता कि ये फल लाकर दो. जो साला मार्केट में मिलता ही नहीं क्योंकि उसका सीजन नहीं होता था.

इस तरह एक पगलाए सीरियल किलर का खात्मा हो गया. आगे इस पर कोई फिल्म आएगी. इसकी उम्मीद कर सकते हो. बस उस पर किसी अनुराग कश्यप या रामगोपाल वर्मा की नजर पड़ जाए.

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