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कैसे डिज्नी-मार्वल और सोनी के लालच के कारण आपसे स्पाइडर-मैन छिनने वाला है

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अब तक फैन्स को ये तो पता चल ही गया होगा कि स्पाइडर-मैन मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स से बाहर हो चुका है. वजह ये कि सोनी का डिज्नी से पैसे के मामले में बिगाड़ हो गया है. शेष आपको ये तो पता ही है कि मार्वल का मालिक डिज्नी हो रखा है. इसलिए मार्वल स्टूडियो भी डिज्नी के पाले में ही खड़ा है.

दरअसल स्पाइडर-मैन की फिल्मों के राइट्स सोनी पिक्चर्स के पास हैं. शेष अवेंजर्स और बाकी के सुपरहीरोज मार्वल (अर्थात डिज्नी!) के पास हैं, जिसके चलते ये बिगाड़ हुआ है.

डिज्नी चाहता था कि स्पाइडर-मैन की फिल्मों से उसे मोटी मलाई मिले, वहीं सोनी चाहता था कि मार्वल के प्रेसिडेंट केविन फिआगी का इन फिल्मों में कम हस्तक्षेप हो, यहीं बात बिगड़ी है. ऐसे में स्पाइडर-मैन की आगे आने वाली दो फ़िल्में खटाई में पड़ गईं.


अब थोड़ा मुद्दे से भटक लेते हैं.

स्पाइडर-मैन. मास्क के पीछे वाला सुपरहीरो. याद करें तो दो सीन याद आते हैं.

पहला दृश्य.
Spider-Man 2 से.
ट्रेन रोकने वाला सीन.
साल 2004.
मास्क के पीछे टोबी मैग्वायर.

फैन्स इसे बड़ा पवित्र दृश्य बताते हैं. अपना काम ख़त्म कर जब स्पाइडर-मैन आगे गिरने को होता है, कुछ हाथ आकर उसे रोक लेते हैं. हाथ सीने पर पड़ते हैं. जहां स्पाइडर-मैन का मकडी वाला चिह्न होता है. वहीं कहीं आसपास दिल भी होता है. यही दिल सिद्धार्थ के पास भी रहा होगा, जो देवदत्त के मारे राजहंस को बचा लेना चाहता है. कायदों ने कहा, मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है. अभी स्पाइडर-मैन को बचाने वाले वो लोग थे, जिन्हें कुछ सेकंड पहले स्पाइडर-मैन ने बचाया था. अब बचने वाले बचाने वाले हो रहे थे.

हम क्या चाहते : कोई स्पाइडर-मैन को बचा ले.


 

दूसरा दृश्य.
Spider-Man: Homecoming से.
ट्रैप्ड पीटर पार्कर वाला सीन.
साल 2017.
मास्क के पीछे टॉम होलैंड.

टोनी स्टार्क पीटर की नहीं सुनता. उससे सूट छीना जा चुका है. वो घर पर बनाए सूट से पहचान छुपाता है पीटर की क्रश का पिता, विलेन निकल चुका है. उसे कंक्रीट की एक छत, लोहे के भारी ढांचे के नीचे दबाकर मरने को छोड़ गया है. 15 साल का लड़का, निरा अकेला. पीठ पर टनों का बोझ झेलता मरने के लिए फेंक दिया गया.

पीटर रोता है, चिल्लाता है. ताकि कोई आकर बचा ले. फिर उसे पानी में पड़ा अपना मास्क दिखता है. आधा चेहरा मानो पीटर का और आधा चेहरा स्पाइडर-मैन का नज़र आ रहा हो. टोनी स्टार्क की बात याद आती है. ‘अगर तुम सूट के बिना कुछ नहीं हो, तो सूट तुम्हारे पास नहीं होना चाहिए’. यहां से सब बदल जाता है. हमें शक्तिमान का टाइटल ट्रैक याद आता है. ‘होता है जब आदमी को अपना ज्ञान, कहलाया वो शक्तिमान.’ हीरोज बदलते जाते हैं. आख्यान बदल जाते हैं. लेकिन किसी के भी मानव से महामानव के बनने का प्रोसेस एक ही रहता है, धूल झाड़कर, दम बटोरकर, फिर खड़ा हो जाना. चाहे कोई जामवंत भूली हुई शक्तियां याद दिलाने को हो या न हो. स्पाइडर-मैन फिर खड़ा हो जाता है.

 

हम क्या चाहते : स्पाइडर-मैन फिर खड़ा हो जाए.


 

इमोशंस को किनारे रखकर बताएं,

स्पाइडर-मैन के MCU से बाहर जाने में क्या बुरा है?

दर्शक के तौर पर बुरा ये है कि स्पाइडी सबको पसंद है. बच्चे-बूढ़े-जवान सबको. वो सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले सुपरहीरोज में से है. उसकी मर्चेंडाइज सबसे ज़्यादा बिकती हैं. दर्शकों का इमोशनल कनेक्ट है उससे. इनफिनिटी वॉर में लोकी भी मरा था. विजन भी मरा था. आधे सुपरहीरो हवा में घुल गए थे, लेकिन लोग सबसे ज़्यादा कब रोए? जब टोनी की गोद में पीटर पार्कर मर गया. ऊपर से एंड गेम में टोनी के जाने के बाद स्पाइडर-मैन का इमोशनल कनेक्ट और बढ़ गया है. फार फ्रॉम होम के बाद से तो और भी ज़्यादा.

 

ये लालची कंपनियां स्पाइडर-मैन को MCU में रहने क्यों नहीं देतीं?

वजह है. ये रायता आज का नहीं फैला है. शुरुआत 80 के दशक में हुई थी. तब सुपरहीरोज की फिल्म्स के लिए मार्केट उतना सही नहीं था. जैसे अभी चल रहा है. डीसी के सुपरमैन की फ़िल्में आती, जिससे लोग काफी उकता चुके थे. ऐसे में मार्वल ने स्पाइडर-मैन की फिल्मों के राइट्स बेचना चाहे. कोई स्टूडियो था, कैनन फिल्म्स. उसने स्पाइडर-मैन के राइट्स ले लिए. लेकिन जल्द ही कैनन फिल्म्स दीवालिया हो गई. जिसके बाद स्पाइडर-मैन की कहानी परदे पर नहीं कोर्ट में चली.

सोनी तब से ही स्पाइडर-मैन को अपने पाले में लेना चाहता था. 1989 से वो हाथ-पैर मारने लग गया था.

इसी सब के बीच नब्बे के दशक में जेम्स कैमरून स्पाइडर-मैन की फिल्म डायरेक्ट करने चले थे. स्क्रिप्ट भी लिखी गई. तय था कि लियोनार्डो डीकैप्रियो स्पाइडर-मैन बनते. पर वो भी नहीं हो सका.

James Cameron का Spider-man ऐसा होता.
James Cameron का Spider-man ऐसा होता.

 

1999 में मार्वल ने मुकदमेबाजी के बाद स्पाइडर-मैन की फिल्मों का अधिकार वापस पाया. लेकिन यहां भी एक पेच था. साल 1996 आते-आते मार्वल की हालत इतनी खराब हो गई थी कि वो डूबने को थी. इसलिए डूबने से बेहतर उसने कैरेक्टर्स बेचना समझा. 1999 में 7 मिलियन डॉलर में उसने स्पाइडर-मैन की फिल्मों के राइट्स सोनी पिक्चर्स को बेच दिए. तंगी से निकलने के चक्कर में मार्वल ने अपने कई बड़े कैरेक्टर्स को सोनी को बेचना चाहा था. कुल कीमत तय की 25 मिलियन डॉलर. लेकिन बड़े कैरेक्टर्स में सिर्फ स्पाइडर-मैन बेच पाया. स्पाइडर-मैन के साथ ही, स्पाइडर-मैन से जुड़े दूसरे कैरेक्टर्स भी बिके थे.

यही वो दौर था, जब मार्वल के हाथ से एक्स-मेन और फैंटास्टिक फोर निकलकर फॉक्स के पास चले गए थे और हल्क यूनिवर्सल स्टूडियोज.

याद ये भी रहे कि स्पाइडर-मैन के अलावा भी दूसरे कैरेक्टर्स हैं, जिनको लेकर मार्वल के अन्य स्टूडियोज से विवाद चले. वांडा का भाई याद है, क्विकसिल्वर. और एक्स-मेन का क्विकसिल्वर? दोनों के किरदारों के दो वर्ज़न इन्हीं सब कारणों से नज़र आए.


 

इसके बाद मार्वल के दिन फिरे.

2009 में डिज्नी ने उसे खरीदा. आयरन-मैन मार्केट में आ चुका था. भौकाल बन चुका था, 2012 में अवेंजर्स आई, तब तक फिल्मों की दुनिया ही बदल चुकी थी. आज ये टाइम आ गया है कि फिल्म शुरू होते समय लाल पट्टी पर मार्वल लिखा दिख जाए तो आदमी कुछ भी देखने को तैयार हो जाता है.

वहीं सोनी का क्या हुआ? 2002 में टोबी मैग्वायर वाली स्पाइडर-मैन आई. उस सीरीज की तीन फ़िल्में अच्छी चलीं. बाद में 2012 में एंड्रयू गारफील्ड वाली अमेजिंग स्पाइडर-मैन आई. फिल्म कागजों के हिसाब से तो ठीक चली. लेकिन उतनी नहीं जितनी टोबी मैग्वायर वाली स्पाइडर-मैन चली थी. नतीज़ा ये कि सोनी का मन उचटने लगा.

दरअसल तब तक सोनी के लिए स्पाइडर-मैन सफेद हाथी जैसा हो गया था. सोनी का हाल बिलकुल होमकमिंग के पीटर जैसे हो गया था. जिसके पास चितौरी आर्मी का ग्रेनेड (पावरकोर) होता है, उसे वो साथ लिए घूमता है, बिना ये जाने कि वो कितना पावरफुल है. और बाद में वही उसके लिए मुसीबत का कारण बनता है. सेम सोनी के साथ है. उनके पास स्पाइडर-मैन से बड़ा कुछ नहीं था. इसलिए उसे वो जाने भी नहीं देना चाहते. लेकिन उनमें वो बूता नहीं था कि इस कैरेक्टर के साथ न्याय कर सकें. 2014 तक सुपरहीरोज की दुनिया बहुत ज़्यादा बदल गई थी. अब जनता ग्राफिक्स या कूद-फांद से इम्प्रेस होना बंद हो गई था. सुपरहीरो फिल्म्स में भी फील तलाशा जाने लगा था. सोनी वो फील नहीं दे पा रही थी और शायद आगे भी न दे पाए. ये बात उसे समझ आ चुकी थी.


 

स्पाइडर-मैन, लिटरली होमकमिंग 

यहीं से वो वापस मार्वल के पास भागे. ये कहने कि फ़िल्में आप बनाइए. क्रिएटिव कंट्रोल, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन हमको करने दीजिए. 5 फिल्मों का करार हुआ. इसमें सोनी पिक्चर्स के प्रेसिडेंट, सीईओ और डिज्नी के सीईओ का बड़ा रोल रहा. 2015 में केविन फिआगी से बातचीत के बाद तय हुआ कि फिआगी सोनी की स्पाइडर-मैन फिल्मों का क्रिएटिव डायरेक्शन करेंगे. उसे मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स में इस्तेमाल कर पाएंगे. सोनी क्या करेगा? पैसा लगाएगा, कास्टिंग वाला काम देखेगा. मार्वल को स्पाइडर-मैन की फिल्मों की कमाई का 5% मिलना तय हुआ था. मार्वल जब स्पाइडर-मैन को अपनी फिल्मों में इस्तेमाल करता तो बदले में सोनी को कुछ न मिलना भी तय हुआ था. ये बात भी तय हुई कि स्पाइडर-मैन के एक्शन फिगर्स और मर्चेंडाइज बेचने का अधिकार डिज्नी के पास रहेगा. इस सबके बाद स्पाइडर-मैन पहली बार ‘कैप्टन अमेरिका : सिविल वॉर’ में नज़र आया.

ये डील वीडियोगेम्स तक पहुंची. तय था कि वीडियोगेम्स की कमाई भी डिज्नी को ही मिलेगी. लेकिन सोनी को इसमें अपना हिस्सा निकालने में बहुत दिक्कत नहीं हुई क्योंकि रिलीज तो उन्हें सोनी के सिस्टम्स पर होना था.

यदि आपको याद हो तो ये वही समय था, जिसके बाद थॉर: रैग्नारॉक और ब्लैक पैंथर के आने की तारीखें आगे खिसक गईं थीं, क्योंकि बीच में स्पाइडर-मैन होमकमिंग के लिए जगह बनाई गई.

अब आप यहां एक बात समझिए. सोनी और डिज्नी दो स्टूडियो हैं. विरोधी स्टूडियो हैं. एक-दूसरे को ज़्यादा कमाते नहीं देख सकते. जो कि वाजिब बात भी है. लेकिन दोनों का ऐसे साथ आना बहुत ही बड़ी बात थी. फिल्मों के इतिहास में ऐसा नहीं होता. ये डील दोनों के लिए तलवार की धार पर चलने जैसा था.

इसके बाद दर्शकों की अलग उम्मीदें थीं. जब सोनी की ‘वेनम’ आई तो वो उम्मीद लगाए बैठे कि अब बड़ा स्पाइडरवर्स आएगा. शायद ‘वेनम’ में टॉम होलैंड के दर्शन हो जाएं. Sony’s Universe of Marvel Characters जैसे नए-नए शब्द सामने आए. दो स्टूडियोज के बीच सेम कैरेक्टर लेकिन दो दुनिया बनाने जैसी भी बातें आईं. फैन्स हैं, कल्पना का विस्तार कहीं से कहीं तक करते रहते हैं.



स्पाइडर-मैन फार फ्रॉम होम : दोबारा 

अंत में ये सब नहीं हो सका. 20 अगस्त को ख़बर आई कि डील रद्द हो रही है. जिसके बाद एक ही सवाल उठा कि भविष्य में टॉम होलैंड के साथ दो नई स्पाइडर-मैन वाली फ़िल्में आने को थीं, उनका क्या होगा. अनुमान जताया जा रहा है कि उनमें MCU का कोई कनेक्शन नहीं बताया जाएगा. हर वो बात, हर वो डीटेल्स हटा दी जाएगी, जो कहानी को डिज्नी से जोड़ती है. ये सब कैसे हो पाएगा. समय बताएगा. हो पाएगा या नहीं हो पाएगा, ये समय बताएगा.



तो ग़लती किसकी है, सोनी की या डिज्नी की?

हमारी आपकी तरह वो मौज लेने बैठे नहीं हैं. पैसे कमाने बैठे हैं. जो बेस्ट बन पड़ा, वो किया. इसके पहले 2015 वाला समझौता भी परफेक्ट तो नहीं था, लेकिन स्पाइडर-मैन को बचाए रखने के लिए जो कर सकते थे दोनों ने किया. अभी ज़्यादातर लोग सोनी की ग़लती बता रहे हैं. कह रहे हैं, सोनी को स्पाइडर-मैन को डिज्नी को दे देना चाहिए. इस बहस में भी डिज्नी के समर्थक ज़्यादा हैं. कई एक्टर्स जो डिज्नी के साथ कॉन्ट्रैक्ट में हैं, डिज्नी और मार्वल के पक्ष से बोल रहे हैं. इसलिए माहौल डिज्नी के पक्ष में आसानी से बन रहा है. लेकिन सोनी को दिख रहे हैं पैसे, और वो उस पैसे में मोटा से मोटा हिस्सा कभी डिज्नी को नहीं देना चाहेगा.

हमें क्या? हम तो फैन्स हैं. हमें चिढ़ होती है जब हमारा दिमाग सुपरहीरोज को लेकर एक दिशा में सोचे और बीच में चावल में ऐसे कंकड़ फंसे. ये पैसे की मारामारी, प्रतिशतों में उलझना. फिल्मों का आगे-पीछे होना. मूल कहानी से बिल्कुल अलग हो जाना. ये सब उलझाता है. हम वो जानें जो इलेक्ट्रो, कैमरून की न बन सकने वाली फिल्म में स्पाइडर मैन से कहना चाह रहा था. ये इन कंपनियों पर फिट बैठता है.

“लोग अपनी आदत से मजबूर हैं. वहशी, बेवकूफ, कन्फ्यूज, लालची लोग. जो तुम्हारे मास्क को फटते हुए देखना चाहते हैं, तुम्हें कीचड में रेंगते हुए देखना चाहते हैं. इकलौती चीज जो इनको एक हीरो से ज़्यादा पसंद है, वो है एक हीरो को गिरते हुए देखना. उसे हारते-टूटते देखना. ये उसे किसी स्कैंडल में फंसते देखना चाहते हैं, रंगे हाथों पकड़ाते देखना चाहते हैं. जानते हो क्यों? क्योंकि तब उन्हें अपनी कीड़े-मकोड़ों जैसी जिंदगी बेहतर लगने लगेगी.”

सब लालची हैं. सबको सिर्फ पैसा चाहिए.

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