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भजन गाने के लिए मशहूर अनुराधा पौडवाल ने माधुरी का 'धक धक' गाकर सबको चौंका दिया था

वो वाली कैसेट याद है ना, जिसमें पतली सी काली रील लगी होती थी. टेप रिकॉर्डर में बजती थी. उलट पलट के लगाते थे. कभी रील फंस जाती तो गाने रंभाने लगते थे. ऐसा लगता सिंगर उल्टी करने की भूमिका बना रहा है. कभी आवाज़ ऐसे भागती कि पता करना मुश्किल होता कि कोई गा रहा है या गा रही है.

ये सब चीजें बेसिकली हमें नॉस्टैल्जिक करने के लिए बनी हैं. तो इन कैसेटों की दुनिया में एक कंपनी का भौकाल था. यानी एकछत्र राज. कंपनी का नाम है टी-सीरीज. जो लोग कस्बों में रहे हैं, वो जानते होंगे कि हर कस्बे में इन कैसेटों की एक फैक्ट्री हुआ करती थी. छोटी सी दिखने वाली बड़ी दुकान. इनका नाम ज्यादातर केस में ‘सोनू कैसेट सेंटर’ हुआ करता था. सोनू उस दौर का पॉपुलर नाम है. सोनू निगम का असर रहा होगा. रफ़ी की आवाज़ डिट्टो कॉपी करता था सोनू निगम. रफ़ी के नाम पर हमको खूब लल्लू बनाया सोनू ने. निगम वाले नहीं, कैसेट सेंटर वाले सोनू ने.

रफ़ी के पैकेट में सोनू निगम को पकड़ा देता था और हमें उसकी ‘साफ नीयत’ पर कोई शुबहा न था. सोनू हमें किशोर कुमार के नाम पर कुमार सानू को, मुकेश के नाम पर बाबला मेहता को पूरे सेवा-भाव और समर्पण से सुनवाता रहा. जब हमें ओरिजिनल-डुप्लीकेट का ब्रह्मज्ञान मिला तब पता चला कि ये लोग कौन हैं. इनके असली फिल्मी गाने भी रगड़ के सुने. तभी ये पता चला कि जो लता के अवतार में थीं, उनका नाम अनुराधा पौडवाल है.

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अनुराधा पौडवाल

अनुराधा पौडवाल. उनके गाने सुनते ही ज्यादातर लोग भक्ति भाव में बहने लगते हैं. भजन, आरती, मंत्र खूब गाती थीं. तीन और फेमस सिंगर होते थे धार्मिक चेहरे वाले- ‘अरे द्वार पालों’ वाले लखबीर सिंह लक्खा, ‘चलो बुलावा आया है’ वाले नरेंद्र चंचल और माता के जगरातों वाले सुखविंदर सिंह.

लेकिन जिन्हें इस जॉनर में सबसे ज्यादा पॉपुलरिटी मिली वो हैं अनुराधा पौडवाल. लोगों ने इन्हें कैसेटों पर छपी तस्वीरों से पहचाना. नीचे कोने में बनी होती थी हाथ जोड़े हुए. बीच में जिन भगवान के भजन होते थे उनकी फोटो होती थी. कभी-कभी टीका लगाये टी-सीरीज वाले गुलशन कुमार भी बने होते थे, चुनरी ओढ़े. मंद-मंद मुस्काते थे.

अनुराधा पौडवाल की आवाज़ मीठी थी. लता जैसी. इसकी वजह भी वो बताती हैं. उन्होंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली म्यूजिक की. लता को सुनती थीं. उन्हें कॉपी करने की कोशिश करती थीं. इसीलिए उनका असर आ गया. ऐसा नहीं कि उन्होंने सिर्फ भजन गाये. फिल्मों में भी खूब गाया. इनके फिल्मी कैरियर की शुरुआत भी बड़ी धार्मिक रही. अमिताभ और उनकी वाइफ की एक फिल्म आई थी – अभिमान. दोनों लोग सिंगर होते हैं. पहली बार जब अमिताभ, जया की आवाज़ पहली बार सुनते हैं तालाब के पास, तब जया जो सुर लगाती हैं, उसके पीछे अनुराधा ही थीं. ये एक श्लोक था-

ओमकारं बिंदुसंयुक्तं नित्यं घायंति योगिन:
कामदं मोक्षदं चैन ओमकाराय नमो नम:

फिर बड़ा ब्रेक मिला ख़ामोश कहने वाले शॉटगन की फिल्म ‘कालीचरण’ में. पहला सोलो गाना गाया फिल्म ‘आपबीती’ में. दूसरी भाषाओं मराठी, पंजाबी, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ में भी बहुत से गाने गाए. उनके नाम एक राष्ट्रीय पुरस्कार, 4 फिल्मफेयर, 15 फिल्मफेयर नॉमिनेशंस दर्ज हैं. एस डी बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल से लेकर नदीम-श्रवण, जतिन-ललित तक की कंपोजीशंस पर अपने सुर लगाये.

अनुराधा के दौर की ही गायिका अलका यागनिक से इनका पंगा रहा. आनंद-मिलिंद ने ‘दिल’ फिल्म के गाने की डबिंग अलका यागनिक की जगह अनुराधा से करवा ली थी. इसके बाद फिल्म ‘इतिहास’ में भी कुछ ऐसा ही हुआ. दोनों तब से एक दूसरे को फूटी आंख भी नहीं सुहातीं.

अनुराधा लता की फैन थीं लेकिन बोलती थीं कि इंडस्ट्री में लता, आशा दोनों की बहुत चलती है. उनके कुछ गाने लता को मिल गये थे. तो कहते हैं कि इसीलिए फिल्म नगीना का गाना ‘मैं तेरी दुश्मन, दुश्मन तू मेरा’ लता को दे दिया गया था.

बाद में टी-सीरीज के कर्ता-धर्ता गुलशन कुमार के करीब आयीं और कहा अब सिर्फ टी-सीरीज के लिए काम करेंगी. जब गुलशन कुमार की हत्या हुई तब संगीतकार नदीम-श्रवण की जोड़ी वाले नदीम के ऊपर आरोप लगे. इसमें डी-कंपनी का भी नाम आया था. नदीम ने खुद को बेगुनाह बताया और कहा गुलशन के खिलाफ अनुराधा ने माहौल खराब किया.

उनकी शादी अरुण पौडवाल से हुई थी जो एस डी बर्मन के असिस्टेंट थे. 2010 में उन्हें लता मंगेशकर अवॉर्ड, 2011 में मदर टेरेसा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला.

अस्सी और नब्बे के दशक के कुछ बेहद हिट गाने भी उनके नाम हैं. फिलहाल तो उनके गाने-वाने सुनाई नहीं देते लेकिन सिंगर अच्छी थीं. भजन में तो कोई तोड़ नहीं था. आज उनका बड्डे है. चलते-चलते अनुराधा पौडवाल के ये गाने  सुनिए और नॉस्टैल्जिक हो लीजिए:

1. बेटा (1993)- दिल धक धक करने लगा

 

2. राम लखन (1990)- तेरा नाम लिया

3. आशिकी (1991) के गाने तो बड़े हिट हुए थे. एक गाने के लिए उन्हें फिल्मफेयर मिला. गाना था- नज़र के सामने

4. दिल (1991)- मुझे नींद न आये

5. दिल है कि मानता नहीं (1992)– दिल है कि मानता नहीं

6. साजन (1992)- बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम

7. मन (1999) का ये गाना सुनिए. अच्छा है. अनुराधा पौडवाल के साथ उदित नारायण हैं- चाहा है तुझको, चाहूंगा हरदम

8.  हीरो (1983)- तू मेरा हीरो है


ये स्टोरी निशांत ने की है.

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