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गनपाउडर: बीबीसी का जो सीरियल देखकर लोग उल्टी कर दे रहे हैं, असल में वो घटना और खौफनाक है

लोग बीबीसी के कान उमेठ रहे हैं. सोशल मीडिया पर खूब बैंड बज रही है उसकी. एक सीरीज के मारे. सीरीज, माने सीरियल समझ लीजिए. तीन एपिसोड का एक सीरियल. जिसका पहला एपिसोड आया और हंगामा हो गया. लगता है पूरा ब्रिटेन इसी बारे में बात कर रहा है. इस सीरीज का नाम है गनपाउडर. हद मार-काट है इसमें. भयंकर खून-खराबा दिखाया है. इतनी हैवानियत दिखाई है कि कइयों को उल्टी आ गई. लोग कह रहे हैं, ये क्या बना दिया! जबरन हैवानियत भर दी है! इस पूरी बहस के बीच हमको याद आया इतिहास. इतिहास तो हद बेरहम है. हमारी-आपकी सोच से भी ज्यादा क्रूर. ऐसे-ऐसे डरावने पन्ने हैं इसके कि पढ़ो और दिमाग घूम जाता है. सोचकर कंपकंपी छूट जाती है. कि जो पढ़ रहे हैं, वो कभी सच में हुआ था. ब्रिटेन वाले भी इसी मारे हलकान हुए जा रहे हैं. क्योंकि जो देख रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा खौफनाक हुआ था. ठीक 412 साल पहले.

गनपाउडर सीरीज का लोग काफी इंतजार कर रहे थे. कई दर्शकों ने तो इसकी तारीफों के पुल भी बांधे हैं. उनका कहना है कि जो दिखाया, वो गलत तो नहीं दिखाया.
गनपाउडर सीरीज का लोग काफी इंतजार कर रहे थे. कई दर्शकों ने तो इसकी तारीफों के पुल भी बांधे हैं. उनका कहना है कि जो दिखाया, वो गलत तो नहीं दिखाया.

लोग कह रहे हैं, इतना वहशीपन नहीं झेल सकते
लोग बहुत दिन से इंतजार कर रहे थे इस सीरीज का. अब जब इसे दिखाया गया, तो चिढ़ गए. कई लोगों ने लिखा कि उन्होंने बीच में ही देखना बंद कर दिया. लोग कह रहे हैं कि इतना वहशीपन नहीं झेला जा रहा. एक ने तो लिख दिया कि इससे ज्यादा दर्दनाक चीज आज तक टीवी पर देखी ही नहीं थी. एक सीन था. इसमें एक कैथलिक पुजारी को फांसी देते हैं. फिर उसकी लाश उतारकर उसके टुकड़े करते हैं. हाथ-पैर काट देते हैं. फिर उसके कटे, खून से लथपथ सिर को भीड़ के सामने दिखाते हैं. जैसे कोई मेडल हो. इसी तरह की हिंसा भरी हुई है इसमें. हालांकि कई दर्शक बीबीसी का बचाव भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि जो था, वो ही तो दिखाया जाएगा. ऐसे दर्शक सीरीज की तारीफ करते अघा नहीं रहे.

गेम्स ऑफ थ्रोन्स ने टीवी का खेल काफी हद तक बदल दिया है. दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. (तस्वीर में: गनपाउडर के पहले एपिसोड का एक दृश्य)
गेम्स ऑफ थ्रोन्स ने टीवी का खेल काफी हद तक बदल दिया है. दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. (तस्वीर में: गनपाउडर के पहले एपिसोड का एक दृश्य)

बीबीसी की सफाई: जैसा इतिहास था, वैसा ही तो दिखाएंगे
लोगों की खरी-खोटी पर बीबीसी ने सफाई दी. कहा, कुछ गलत नहीं दिखा रहे हैं. इतिहास में जो जैसा था, वैसा ही दिखा रहे हैं. मतलब खून था, सो खून दिखा रहे हैं. इस सीरीज की जो कहानी है, वो सच्ची है. एक बहुत मशहूर घटना हुई थी ब्रिटेन में. साल था 1605 का. तब इंग्लैंड के किंग जेम्स चार्ल्स स्टुअर्ट ‘किंग जेम्स I’ को मारने की एक साजिश बनाई गई थी. बस राजा नहीं, उसके परिवार को भी. और कई बड़े-बड़े लोगों को. इसके पीछे थे कुछ कैथलिक ईसाई. इसका मुखिया था रॉबर्ट कैट्सबे. प्लान बनाया गया. तय हुआ कि 5 नवंबर, 1605 के दिन साजिश को अंजाम देंगे. जब इंग्लैंड की संसद का सत्र शुरू होगा. उसी दिन ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ को उड़ा देंगे. हमारी संसद के दो हिस्से हैं न. लोकसभा और राज्यसभा. ऐसे ही ब्रिटिश संसद के भी दो धड़े हैं. एक है, हाउस ऑफ लॉर्ड्स. दूसरा है, हाउस ऑफ कॉमन्स. इसी हाउस ऑफ लॉर्ड्स को उड़ाने की प्लानिंग थी. ये साजिश मुकम्मल नहीं हो पाई मगर. फेल हो गई. इसी ‘गनपाउडर प्लॉट’ पर बनी है बीबीसी की ये सीरीज.

क्या था ये गनपाउडर प्लॉट?

गेम्स ऑफ थ्रोन्स के स्टार किट हैरिंगटन इस सीरीज में रॉबर्ट कैट्सबे का किरदार निभा रहे हैं. इस गनपाउडर प्लॉट के पीछे सबसे ज्यादा हाथ इसी कैट्सबे का था.
गेम्स ऑफ थ्रोन्स के स्टार किट हैरिंगटन इस सीरीज में रॉबर्ट कैट्सबे का किरदार निभा रहे हैं. इस गनपाउडर प्लॉट के पीछे सबसे ज्यादा हाथ इसी कैट्सबे का था.

ब्रिटेन में कैथलिक ईसाइयों की हालत खराब थी

1570 में पोप ने क्वीन एलिजाबेथ का हुक्का-पानी बंद कर दिया था. इसके बाद ब्रिटेन में कैथलिकों पर खूब छड़ी चली. एकदम सख्ती हो गई. ये दौर बड़ी टेंशन वाला था. धर्म तो एक ही था यहां. ईसाई धर्म. उसके दो हिस्से थे मगर. कैथलिक और प्रोटेस्टेंट. चर्च का प्रभाव कम करने की कोशिश की जा रही थी. उसका दखल घटाने की कोशिश जोरों पर थी. लोगों को कसम खाने पर मजबूर किया जाता. कि वो राजा को ही चर्च का और देश का मुखिया समझते हैं. जो ऐसा करने से इनकार करता, उसकी मरम्मत की जाती. कई बार तो उन्हें सजा-ए-मौत भी हो जाती थी. कैथलिक कट्टर थे. उनकी धर्म में बड़ी दिलचस्पी थी. पोप के आगे राजा-रानी और देश को भी कुछ नहीं समझते थे. सारी आस्था पोप के प्रति थी उनकी. इसी कारण कैथलिक चर्च पर पाबंदियां बढ़ने लगी थीं. फिर भी कैथलिक नहीं मान रहे थे. खुलकर बताते नहीं थे. चुपके-चुपके अपना धर्म मानते थे.

ये ही वो गुमनाम चिट्ठी है, जिसके कारण इस साजिश का भांडा फूट गया था (तस्वीर: विकीपीडिया)
ये ही वो गुमनाम चिट्ठी है, जिसके कारण इस साजिश का भांडा फूट गया था (तस्वीर: विकीपीडिया)

क्वीन एलिजाबेथ के बाद किंग जेम्स I राजा बने थे
क्वीन एलिजाबेथ का कोई बच्चा नहीं था. वो अपना वारिस चुने बिना मर गईं थी. बड़ी कोशिशों के बाद जेम्स चार्ल्स स्टुअर्ट को राजा चुन लिया गया. उनके मरने के बाद. वो एलिजाबेथ की कजन के बेटे थे. ‘मैरी, क्वीन ऑफ स्कॉट्स’ के बेटे. क्वीन मैरी को 1587 में मार दिया गया था. वो खुद कैथलिक ही थीं. सो कैथलिक दिल से चाहते थे कि जेम्स राजा बने. उन्हें किंग जेम्स से बड़ी उम्मीदें थीं. उनको लगता था कि शायद एक दिन किंग जेम्स खुद भी कैथलिक बन जाएं. ये वो दौर था, जब कैथलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच कांटे की टक्कर थी. आगे निकलने की. दूसरे को गिराने की. कैथलिक लगातार ब्रिटेन और यूरोप के कई प्रोटेस्टेंट राजाओं और रानियों को मारने की कोशिश कर रहे थे. बहुत मार-काट मची हुई थी धर्म के नाम पर.

पूरे ब्रिटेन में 5 नवंबर को बोनफायर डे मनाया जाता है. ये इसी गनपाउडर प्लॉट की यादें हैं, जिसका इस दिन जश्न मनाया जाता है (तस्वीर: विकीपीडिया)
पूरे ब्रिटेन में 5 नवंबर को बोनफायर डे मनाया जाता है. ये इसी गनपाउडर प्लॉट की यादें हैं, जिसका इस दिन जश्न मनाया जाता है (तस्वीर: विकीपीडिया)

कैथलिकों ने राजा से जो उम्मीद लगाई थी, वो टूट गई
शुरुआत में किंग जेम्स चार्ल्स स्टुअर्ट कैथलिकों के लिए ठीक रहे. बहुत दरियादिली तो नहीं दिखाई. मगर ले-देकर ठीक ही था व्यवहार. उन्होंने वादा किया कि अगर कैथलिक ठीक से रहें, तो उनके साथ सख्ती नहीं की जाएगी. धीरे-धीरे समय बीतता गया. कैथलिक अधीर होने लगे. उन्होंने राजा से जो उम्मीद लगाई थी, वो टूटने लगी. जो सोचा था, वैसा बिल्कुल नहीं हो रहा था. कैथलिक बिल्कुल खुश नहीं थे.

ये मास्क गाय फाउक्स का प्रतीक है. भले ही लोग उसे बहुत बड़ा विलेन मानते हों, लेकिन कइयों के लिए वो शख्स सत्ता के विरोध का भी प्रतीक है.
ये मास्क गाय फाउक्स (Guy Fawkes) का प्रतीक है. भले ही लोग उसे बहुत बड़ा विलेन मानते हों, लेकिन कइयों के लिए वो शख्स सत्ता के विरोध का भी प्रतीक है.

नाराजगी में राजा को मारने की साजिश रची गई
इसी नाराजगी में राजा को खत्म करने का फैसला लिया गया. पोल खुल गई मगर. किसी भेदी ने चुगली कर दी. हुआ यूं कि एक अधिकारी के पास एक गुमनाम चिट्ठी पहुंची. इसमें सारी साजिश का भांडा फोड़ दिया गया था. ये तारीख थी 26 अक्टूबर, 1605 की. 4 नवंबर की रात हाउस ऑफ लॉर्ड्स की तलाशी हुई. वहां मिला 36 गैलन गनपाउडर यानी बारूद. इतना विस्फोटक पूरे हाउस ऑफ लॉर्ड्स को मिट्टी में मिला देता. इस गनपाउडर के साथ पकड़ा गया गाय फाउक्स (Guy Fawkes). पुलिस ने उसको पकड़ा और जेल में डाल दिया. साजिश में शामिल ज्यादातर लोग रफूचक्कर हो गए. उनकी तलाश होती रही. कैट्सबे मारा गया. उसे गोली लग गई थी. बाकी कुछ लोग पकड़े गए. कुल आठ थे ये. इनके खिलाफ मामला चला. सबको दोषी पाया गया.

ऐसी सजा सुनाई गई कि सुनकर जी खराब हो जाएगा
केस की सुनवाई के दौरान ही साफ हो गया था. सजा बहुत वीभत्स मिलने वाली है. अटॉर्नी जनरल सर एडवर्ड कोक ने सजा दिए जाने का तरीका बताया. कहा, सभी दोषियों को मुंह के बल घसीटते हुए फांसी वाली जगह पर लाया जाएगा. घोड़े की पीठ से रस्सी बांधी जाएगी. इसी रस्सी में बांधकर दोषियों को घसीटा जाएगा. उनके लिंग काटकर जला दिए जाएंगे. फिर उनका दिल और अंतड़ियां निकाली जाएंगी. तब बारी आएगी उनका सिर काटने की. फिर शरीर के टुकड़े किए जाएंगे और उसकी नुमाइश लगाई जाएगी. ताकि लोग देखें और जानें कि ऐसी साजिश रचने वालों का अंजाम कितना भयंकर होता है.

इस प्रिंट में उस दिन की तस्वीरें हैं, जब दोषियों को घसीटकर फांसी देने के लिए ले जाया जा रहा था (तस्वीर: विकीपीडिया)
इस प्रिंट में उस दिन की तस्वीरें हैं, जब दोषियों को घसीटकर फांसी देने के लिए ले जाया जा रहा था (तस्वीर: विकीपीडिया)

बहुत भयंकर थी वो मौत, जो इन लोगों को मिली
30 जनवरी, 1606. पहले चार दोषियों को फांसी मिली. उन्हें लकड़ी के पटरों पर बांधा गया. लंदन की गलियों से घसीटते हुए सेंट पॉल चर्चयार्ड लाया गया. सबसे पहले जिसे फांसी चढ़ाया गया, उसका नाम था इवरार्ड डिग्बी. उसके कपड़े उतरवा दिए गए. उसका लिंग काटा गया. उसकी अंतड़ियां निकाली गईं. शरीर के चार टुकड़े कर दिए गए. बाकी तीनों का भी ये ही हश्र हुआ. अगले दिन यानी 31 जनवरी को बाकी चार दोषियों को सजा दी गई. उन्हें भी फांसी दी गई. फिर उनके शरीर के टुकड़े कर दिए गए. गाय फाउक्स की बारी दूसरे दिन आई थी. वो फांसी के तख्ते से कूद गया. उसकी गर्दन टूट गई.

ब्रिटेन आज भी ‘गनपाउडर प्लॉट’ की नाकामी का जश्न मनाता है
हर साल 5 नवंबर को ब्रिटेन इस साजिश की नाकामयाबी का जश्न मनाता है. इसकी शुरुआत हुई थी 5 नवंबर, 1605 को. जिस दिन ये साजिश नाकाम हुई थी. किंग जेम्स I ठीक-ठाक हैं, इसकी खुशियां मनाई गईं. पूरे इंग्लैंड में लोगों ने जगह-जगह बोनफायर किया. वही, रात के समय आग जलाकर उसके इर्द-गिर्द हंसी-ठिठोली करना. खाना-पीना. नाचना. पटाखे चलाना. इसके बाद इसकी परंपरा बन गई. हर साल 5 नवंबर को ये दोहराया जाता. इसे ‘बोनफायर नाइट’ कहा जाने लगा. लोग अब भी इसे मनाते हैं. इसे ‘गाय फाउक्स डे’ भी कहते हैं.

गाय फाउक्स कभी इस साजिश का सबसे अहम किरदार नहीं रहा. इसके बावजूद लोगों की यादों में वो इस पूरी घटना का सबसे बड़ा खलनायक है. तभी तो, हर साल 5 नवंबर को उसका पुतला बनाकर आग के हवाले कर दिया जाता है. ये तस्वीर भी उसी बोनफायर जश्न की है.
हर साल 5 नवंबर को गाय फाउक्स का पुतला बनाकर आग के हवाले कर दिया जाता है. ये तस्वीर भी उसी बोनफायर जश्न की है.

400 साल से ज्यादा हो गया, तब भी सुर्खियों में है
इस ‘गनपाउडर प्लॉट’ के पीछे असली दिमाग गाय फाउक्स का नहीं था. सबसे ज्यादा कुख्यात उसका ही नाम हुआ मगर. विलन बन गया वो लोगों की नजर में. लोग उसका पुतला बनाते हैं. फिर उसे बोनफायर पर जला देते हैं. 400 साल से ज्यादा का समय गुजर चुका है. फिर भी इंग्लैंड ने इस घटना को बराबर याद रखा हुआ है. इसी का नतीजा है कि गाय फाउक्स की गिनती ब्रिटिश इतिहास के सबसे बड़े खलनायकों में होती है. कहते तो हैं कि समय के साथ याद्दाश्त धुंधली पड़ जाती है. सोचिए, कितनी बड़ी थी ये घटना. 412 साल हो गए, लेकिन याद रत्तीभर भी मिटी नहीं है.

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