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'मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती, मुझे नहीं बनना पीएम-वीएम'

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शंकर दयाल शर्मा जीके का एक सवाल थे. पहले पांच साल. भारत के उप राष्ट्रपति का नाम. फिर अगले पांच साल राष्ट्रपति. उनकी पत्नी का भी नाम याद हो गया था. विमला शर्मा. ममतामयी टीचर सी दिखती थीं. शंकर दयाल शर्मा को एक पैर में तकलीफ थी. कुछ लंगड़ाकर चलते थे. बहुत बाद में बड़े होने पर पता चला. शर्मा ने पीएम की पोस्ट भी लतिया दी थी. ये भी पता चला कि उनकी बेटी-दामाद को आतंकवादियों ने मार दिया था. बाद में इन्हीं पाजियों की अर्जी उनके पास पहुंची.

अरुणा आसफ अली गईं संदेशा लेकर

21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या हो गई. इसके बाद कांग्रेस की सबसे ताकतवर संस्थान वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) की इमरजेंसी मीटिंग हुई. इसमें फैसला लिया गया कि सोनिया गांधी पार्टी की अध्यक्ष बनें. सोनिया ने इनकार कर दिया. कुछ दिनों बाद फिर मीटिंग हुई. फिर इनकार कर दिया. हालांकि एक स्टेटमेंट जारी किया. जिसमें शुक्रिया भी अदा किया.

इसके बाद कांग्रेस के कई नेताओं के बीच अध्यक्ष बनने को लेकर होड़ शुरू हो गई. यह लगभग साफ हो चुका था कि जो इस पद पर कब्जा करेगा, वह सत्ता आने पर पीएम पद का सबसे बड़ा दावेदार होगा. सत्ता आती दिख रही थी क्योंकि राजीव की हत्या के बाद कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर थी.

ताल ठोंक के खड़े थे यूपी से एनडी तिवारी, एमपी से अर्जुन सिंह, महाराष्ट्र से शरद पवार. इसके अलावा कुछ छुटभैये भी जोर लगा रहे थे. कांटा उसकी तरफ झुकना था, जिसे गांधी परिवार का यानी कि सोनिया का आशीर्वाद मिलता. सबकी समझ ये है कि सोनिया गांधी ने परिवार के पुराने वफादार आंध्र प्रदेश के नेता पीवी नरसिम्हा राव के नाम पर मुहर लगाई. मगर ये पूरा सच नहीं है. राव सोनिया की पहली पसंद नहीं थे. पहली पसंद थे उस वक्त के उपराष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा.

इस वाकये को उस वक्त गांधी परिवार के खास रहे नेता नटवर सिंह बयान करते हैं. नटवर के मुताबिक पॉलिटिकल हालात पर चर्चा के लिए सोनिया ने मम्मी के खास रहे बुजुर्ग ब्यूरोक्रेट पीएन हकसर से डिसक्शन किया. हकसर ने शर्मा का नाम सुझाया. नेहरू परिवार की बरसों से दोस्त अरुणा आसफ अली को शर्मा तक सोनिया का संदेश पहुंचाने का जिम्मा दिया गया. शंकर दयाल ने जवाब दिया. मैं इस प्रस्ताव से बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं. मगर मेरी अब उम्र बहुत हो गई है. सेहत भी ऐसी नहीं रहती कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभा पाऊं. मैं न्याय नहीं कर पाऊंगा, इसलिए हां कहने का कोई फायदा नहीं. फिर हकसर ने राव का नाम सुझाया. और राजीव की हत्या के ठीक एक महीने बाद पार्टी के तमाम दावेदारों को चित्त करते हुए 21 जून को नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बन गए. इसके लगभग एक साल बाद 25 जुलाई 1992 को शर्मा देश के नौवें राष्ट्रपति बने.

भोपाल में पैदा हुए शंकर दयाल लॉ के स्टूडेंट और प्रोफेसर रहे. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाया. इंदिरा के दबदबे वाले दौर में 1972 से 1974 तक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. उसके आगे पीछे कैबिनेट में तो रहे ही. राजीव गांधी का दौर आया तो शर्मा जी गवर्नर हाउस में दिन काटने लगे. वह आंध्र प्रदेश के गवर्नर थे. तभी उन्हें बेहद बुरी खबर मिली.

आतंकवादियों ने बेटी दामाद को मार दिया

शंकर दयाल शर्मा की बेटी थीं गीतांजलि. उनके पति थे दिल्ली के तेज-तर्रार युवा कांग्रेस नेता ललित माकन. वह साउथ दिल्ली सीट से लोकसभा सांसद भी थे. उन पर सिख दंगों के दौरान भीड़ को भड़काने का आरोप लगा था. इन दोनों को सिख आतंकवादियों ने मार दिया था. इन आतंकवादियों के नाम थे जिंदा, सुक्खा और कुक्की. पूरे नाम हरजिंदर सिंह जिंदा, सुखदेव सिंह सुक्खा और रंजीत सिंह गिल उर्फ कुक्की. तीनों ने माकन को उनके वेस्ट दिल्ली के कीर्ति नगर वाले घर के बाहर गोलियों से छलनी कर दिया. तारीख थी 31 जुलाई 1985.

माकन अपने मकान से बाहर निकले. सड़क की दूसरी तरफ उनकी कार खड़ी थी. तभी आतंकवादियों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. माकन घर की तरफ लौटे. आड़ के लिए. गोलियों की आवाज सुनकर उनकी पत्नी गीतांजलि और एक कार्यकर्ता बाल किशन भी लपके. मगर जिंदा, सुक्खा रुके नहीं. गोलियों की बौछार ने तीनों को मौके पर ही मार दिया. हमलावर स्कूटर से भाग गए.

बाद में जिंदा और सुक्खा ने ही आर्मी के जनरल अरुण वैद्य की भी हत्या की. ये कत्ल पुणे में हुआ था. जनरल वैद्य ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान सेना के मुखिया थे.

ये आतंकवादी खालिस्तान कमांडो फोर्स से जुड़े हुए थे. इन्हीं आतंकवादियों ने लुधियाना के मिलरगंज इलाके में पीएनबी भी लूटी थी. सोचिए. अस्सी के दशक में 5.70 करोड़ की लूट. बोरा भर ट्रकों में लाद रुपये ले गए थे.

बेटी के हत्यारों की अर्जी बाप के पास

सुक्खा 1986 में पकड़ा गया. अगले साल जिंदा भी दबोच लिया गया. दोनों को जनरल वैद्य की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा दी गई. अपील राष्ट्रपति के पास पहुंची. राष्ट्रपति का नाम- शंकर दयाल शर्मा. बाप बेटी-दामाद के हत्यारों को, देश के जनरल के हत्यारों को माफी कैसे दे देता. 9 अक्टूबर 1992 को जिंदा सुक्खा को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दे दी गई.

तीसरे आतंकवादी रंजीत सिंह गिल को इंटरपोल ने 1987 में अमेरिका में गिरफ्तार किया. 2000 में उसे इंडिया डिपोर्ट किया गया. यहां उसे आजीवन कारावास की सजा मिली. 2009 में वो रिहा हो गया. माकन परिवार ने इसका विरोध नहीं किया.

देखिए इस किस्से का वीडियो:

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