Submit your post

Follow Us

मुख्तार अंसारी बनाम ब्रजेश सिंह: यूपी का सबसे बड़ा गैंगवार

46.05 K
शेयर्स

गैंगस्टर से पॉलिटिशियन बने मऊ से बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी बांदा जेल में बंद थे. 9 जनवरी को जेल में ही दिल का दौरा पड़ने की बात सामने आई. उनसे मिलने पहुंची उनकी पत्नी अफसा अंसारी को भी ठीक उसी वक्त दिल का दौरा पड़ गया. दोनों को इलाज के लिए पहले जिला अस्पताल और फिर वहां से कानपुर के हैलट अस्पताल लाया गया. वहां भी इलाज नहीं हो सका, जिसके बाद दोनों को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में भर्ती करवाया गया. वहां डॉक्टरों ने सारी जांचें कर लीं. कुछ भी नहीं निकला. डॉक्टरों ने कहा कि मुख्तार अंसारीर पूरी तरह से ठीक हैं. इसके बाद उन्हें वापस बांदा जेल भेज दिया गया. वहीं उनके घरवालों ने सरकार पर आरोप लगाए कि कुछ लोगों के दबाव में मुख्तार को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है. अब मुख्तार का इलाज बांदा अस्पताल में ही होगा.


गैंग्स ऑफ़ वासेपुर तो आपने देखी ही होगी. उतने ही खतरनाक तरीके से काम करने वाले गैंग्स बनारस, मऊ, गाजीपुर और जौनपुर में 2009-10 तक पूरी पॉलिटिक्स पर हावी थे. ये वो दौर था, जब मुख़्तार अंसारी का कारवां निकलता था तो लाइन से 19-20 SUV गुज़रती थीं. सारी गाड़ियों के नंबर 786 से ख़तम होते थे. किसी की क्या मजाल कि पूरे शहर का भारी ट्रैफिक उन्हें 2 मिनट भी रोक सके. इन इलाकों में पान, चाय की दुकान पर बैठे चचा लोग बता देंगे कि मुख़्तार अंसारी जब चलता था, तो बॉडीगार्ड समेत अपने पूरे गैंग में सबसे लंबा दिख जाता था.

अब मुख़्तार अंसारी की फैमिली हिस्ट्री सुनेंगे तो 2 मिनट बाद पता चलेगा कि आपका मुंह खुल गया था. इनके दादाजी थे कांग्रेस के कभी प्रेसिडेंट रह चुके मुख़्तार अहमद अंसारी. इनके भाई अफज़ल 4 बार कम्युनिस्ट पार्टी से MLA रह चुके हैं और एक बार समाजवादी पार्टी से. अंसारी का कहना है कि इनके अब्बा और दादाजी फ्रीडम फाइटर थे. साथ ही चाचा और दादाजी नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस और गांधीजी के भी काफ़ी करीब थे. चाचा हामिद अंसारी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी भी रह चुके थे.

मुख़्तार को हॉकी, फुटबॉल और क्रिकेट बहुत पसंद है. पहाड़ों में घूमना पसंद है और लगभग पूरा हिमालय घूम चुके हैं. फ़िल्में भी देख लेतें हैं बस फुर्सत ज़्यादा नहीं मिल पाती. गुलज़ार की ‘माचिस’ काफी पसंद आई थी. ‘कंपनी’ देखना चाहते थे, सिनेमा हॉल के मालिक से बतिया के हॉल 4-5 बार ‘खाली’ भी करवा चुके थे, लेकिन टाइम ही नहीं मिला देखने का.

mukhtar
मुख्तार फिलहाल मऊ की घोसी सीट से बीएसपी विधायक हैं.

कुछ समय पहले तक जब मुख़्तार का इंटरव्यू लेने के लिए मीडिया की लाइन लगी रहती थी, तब मुख़्तार सुनहरे फ्रेम का चश्मा लगाए हाज़िर होता. इंटरव्यू के दौरान जेब से दो बंदूकें निकाल के उनसे खेलना शुरू कर देता था, फिर बताता था कि उसे सिर्फ ‘टॉप’ क्वालिटी की चीज़ें पसंद हैं. कपड़े, बंदूकें…सब कुछ टॉप क्वालिटी. रिवॉल्वर 957 मैग्नम और राइफल 975 मैग्नम की पसंद हैं. मुख़्तार इंटरव्यू देने के लिए जल्दी तैयार नहीं होता था. क्योंकि उसे लगता है अगर वो बोलना शुरू किया तो सब बोल देगा. क्योंकि वो दूसरे नेताओं जैसा नहीं बल्कि जनता, खासतौर पर गरीबों का सेवक है. आगे उसका ये भी कहना था कि मीडिया अफवाह फैलाती है कि मैं जेल के अंदर शराब पीता हूं, जबकि मैं तो चाय और सिगरेट तक नहीं पीता, पान मसाला भी नहीं खाता.

पॉलिटिकल करियर की बात करें तो मुख़्तार की शुरुआत भी गैंग्स ऑफ़ वासेपुर टाइप ही थी. कोयला, रेलवे, शराब का ठेका, गुंडा टैक्स यही सब. जब पूर्वांचल में 1970 के दौर में कई सरकारी योजनाएं लाईं गईं, तो उनके ठेके हथियाने की होड़ में कई गैंग भी उभरने लगे. मुख़्तार मकनु सिंह के गैंग से ताल्लुकात रखता था. दूसरी तरफ साहिब सिंह का गैंग था. सैदपुर में एक प्लॉट को लेकर दोनों गैंग्स की भिड़ंत हुई और यहीं से यह दुश्मनी शुरू हो गई.

मुख्तार अंसारी निर्दलीय विधायक रहने के बाद सपा और बीएसपी में भी शामिल हुए थे. फिलहाल वो बीएसपी से विधायक हैं.

उधर साहिब सिंह गैंग से अलग होकर ब्रजेश सिंह गाजीपुर में ‘फ्रीलांस’ ठेकेदारी और गुंडागर्दी करने लगा. यहां फिरौती, रंगदारी, किडनैपिंग, और करोड़ों की ठेकेदारी को लेकर मुख़्तार और ब्रजेश सिंह के गैंग में भिड़त होती रही. 1995 के करीब मुख़्तार अंसारी पॉलिटिक्स में उतर आया और चार बार मऊ से MLA बना. पहला चुनाव बसपा से और आगे दो निर्दलीय. 1990 से 2008 के करीब तक बनारस, गाजीपुर और जौनपुर दोनों गैंग की दुश्मनी के बीच अपराध का गढ़ बन गया. उस ज़माने में बनारस-जौनपुर के लोगों को क्राइम के मामले में बॉम्बे की फीलिंग आती थी. और तो और कई कहानियां स्कूली लड़कों के जाने-अनजाने इस गैंगवार में घुस जाने और यहां तक कि कट्टा-वट्टा रखने
की भी है.

‘रॉबिनहुड’ मुख्तार अंसारी…?

अब बताते हैं मुख़्तार अंसारी की ‘रॉबिनहुड’ इमेज के बारे में. लड़की की शादी के लिए पैसा चाहिए, लड़के को सरकारी नौकरी दिलानी हो या कोई सरकारी ऑफिस में बार-बार दौड़ा रहा हो, तो आम आदमी मुख़्तार के पास जा सकता था. और तो और लड़की की शादी में दूल्हा कतरा रहा हो तो दूल्हा उठवाने तक का काम मुख्तार से हाथ जोड़कर करवा सकता था.

मऊ, बनारस और गाजीपुर में बुनकर उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी भारी बिजली कटौती. मुख़्तार ने इस मामले को सीरियसली लिया और कुछ ही दिनों में ये समस्या काफी हद तक सुलझ गई. इसके अलावा इसमें भी चचा लोग की राय जानना चाहें तो मुख़्तार बड़ा क्रिमिनल था, मार-काट करता था, लेकिन आम आदमी का कुछ नहीं बिगाड़ता था, बल्कि बड़े पॉलिटिकल दांव-पेच के बीच उनका भला ही हो जाता था. इसी वजह से मुख्तार अंसारी की पॉलिटिकल ताकत बढ़ती गई.

Brijesh Mukhtar
पूर्वांचल में बृजेश सिंह (बाएं) और मुख्तार अंसारी की अदावत के किस्से खूब सुनने को मिलते हैं.

2002 में ब्रजेश सिंह और मुख़्तार अंसारी की भयानक लड़ाई में मुख़्तार गैंग के तीन लोग मारे गए. ब्रजेश सिंह ज़ख़्मी हो गया और उसके मरने की खबर आई. लेकिन महीनों तक किसी को कानोंकान खबर नहीं हुई कि ब्रजेश सिंह ज़िन्दा है. और उसके वापस न आने तक मुख़्तार का वर्चस्व पूरा था. फिर ब्रजेश सिंह के वापस आने के साथ इस कहानी में एक तीसरी कड़ी जुड़ गयी, जो थी बीजेपी MLA कृष्णानंद राय की. जिन्होंने मुख़्तार और उसके भाई को 2002 में उत्तर प्रदेश चुनाव में हरा दिया. इसमें ब्रजेश सिंह ने उनको समर्थन दिया. अब गाजीपुर-मऊ इलाके में हिंन्दू-मुस्लिम वोट बैंक बनने लगे और आए दिन सांप्रदायिक लड़ाइयां होने लगीं. ऐसे ही एक मामले में मुख़्तार गिरफ़्तार हो गया.

2005 में मुख़्तार जेल में था, जब कृष्णानंद राय को उसने खुली सड़क पर मरवा दिया. AK-47 से करीब 400 गोलियां चलीं और, कृष्णानंद राय समेत सात लोग मारे गए. उन सात लाशों पर 67 गोलियों के निशान थे. दिन-दहाड़े ऐसी घटना से बीजेपी के खेमे में दहशत फैल गई. FIR दर्ज हुई, लेकिन वहां के SP ने इस मामले में कुछ भी करने से इनकार कर दिया. और तो और बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं की मांग के बावजूद सरकार CBI जांच कराने से कतरा रही थी. हमारे क्या, सबके चचा की हालत ख़राब हो गई थी. CBI ने बढ़ते दबाव के जवाब में केस को छोड़ दिया. फिर कृष्णानंद राय की पत्नी ने दोबारा FIR फाइल की और 2006 में जांच शुरू हो पाई. 2006 में ही शशिकांत राय की हत्या कर दी गई, जो इस मामले में गवाह थे. शशिकांत राय ने मुख़्तार और उसके साथी मुन्ना बजरंगी के गुर्गों की पहचान कर ली थी. पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया और मामला रफ़ा दफ़ा हो गया.

KN Rai Mukhtar 1
बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय (बाएं) की हत्या में मुख्तार अंसारी का नाम सामने आया था.

कृष्णानंद राय की हत्या के बाद ब्रजेश सिंह गाजीपुर-मऊ इलाके से फ़रार हो गया. 2008 में वह ओडिशा से गिरफ़्तार कर लिया गया और कुछ समय बाद प्रगतिशील मानव समाज पार्टी का हिस्सा बन गया. 2008 में मुख़्तार अंसारी ने बसपा की ओर वापस रुख़ किया और दावा किया कि उसे अपराध के केस में फंसाया गया था. मायावती ने मुख़्तार को ‘गरीबों का मसीहा’ बताया और ज़ोर-शोर से चुनाव प्रचार शुरू हो गया.

यही वो वक्त था, जब मुख़्तार की ‘रॉबिनहुड’ इमेज पर बसपा ने बहुत ज़ोर दिया. 2009 के लोक सभा चुनाव में मुख़्तार बनारस से खड़ा हुआ और बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी से हार गया. लेकिन गज्जब बात तो यह है कि मुख़्तार ने ये पूरा चुनाव जेल के अंदर से ही संभाल लिया. मुख़्तार जब गाजीपुर के जेल में था तभी एक दिन पुलिस रेड में पता चला कि उसकी ज़िंदगी बाहर से भी ज़्यादा आलीशान और आरामदायक चल रही है. अंदर फ्रिज, टीवी से लेकर खाना बनाने के बर्तन तक मौजूद थे. तब उसे मथुरा के जेल में भेज दिया गया.

afjal

2010 में बसपा ने मुख़्तार के आपराधिक मामलों को स्वीकारते हुए उसे पार्टी से निकाल दिया. अब मुख़्तार ने अपने भाइयों के साथ नयी पार्टी बनाई, कौमी एकता दल. जिससे वह 2012 में मऊ चुनाव जीत गया. 2014 में मुख़्तार ने ऐलान किया कि वह बनारस से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेगा, लेकिन बाद में उसने ये कह कर आवेदन वापस ले लिया कि इससे वोट सांप्रदायिकता के आधार पर बंट जाएंगे. 2016 में जब मुख्तार अंसारी को सपा में शामिल करने की बात आई, तो उस वक्त मुख्यमंंत्री अखिलेश यादव ने अपने मंत्री बलराम यादव को मंत्रीमंडल से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया. किसी तरह से मुलायम सिंह से कह सुनकर बलराम यादव तो वापस आ गए, लेकिन मुख्तार अंसारी को पार्टी में शामिल न करने की बात पर अखिलेश यादव अड़े ही रहे. इसके बाद विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी ने अपनी पार्टी कौमी एकता दल का मायावती की पार्टी बीएसपी में विलय कर दिया.

फिलहाल मुख़्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह, दोनों जेल में हैं और बाहर पूर्वांचल इलाके में थोड़ी शांति है. हालांकि चचा लोग की लोक कथाओं के अनुसार, दोनों जेल में अपनी मर्ज़ी से टिकें हैं, 2008-09 के करीब दुश्मनी अपनी चरम सीमा पर थी, इसलिए जेल सुरक्षित जगह बन गई. गैंगस्टर की कहानी बड़े चटखारे ले कर सुनाने वाले लोग, एक्सपर्ट सा चेहरा बना कर बताते तो यही थे कि उस दौरान अगर कहीं कोई एक बाहर आ जाता तो दूसरा उसे पक्का ठुकवा देता. मार्च 2016 में ब्रजेश सिंह रिकॉर्ड वोटों से जीतकर यूपी में MLC हो गया. उधर मुख्तार अंसारी कौमी एकता दल का बीएसपी में विलय कर विधायक बन गए. भले ही मुख्तार फिलहाल अस्पताल में हों, लेकिन उनकी ताकत का अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि एसजीपीजीआई जैसे अस्पताल में तीमारदारों की कुर्सियों पर मुख्तार अंसारी का कब्जा बताया जा रह है. 


(ये स्टोरी पारुल ने लिखी है.) 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

हिमा दास, आदि

खचाखच भरे स्टेडियम में भागने वाली लड़कियां जो जीवित हैं और जो मर गईं.

अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

'मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है.'

ब्लॉग: शराब पीकर 'टाइट' लड़कियां

यानी आउट ऑफ़ कंट्रोल, यौन शोषण के लिए आमंत्रित करते शरीर.

औरतों को बिना इजाज़त नग्न करती टेक्नोलॉजी

महिला पत्रकारों से मशहूर एक्ट्रेसेज तक, कोई इससे नहीं बचा.

हीरो की हिंसा और शोषण को सहने वाली बेवकूफ नायिकाएं

हमें क्रोध और हिंसा क्यों रोमैंटिक लगते हैं?

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.