Submit your post

Follow Us

क्या था जज अल्तमस कबीर का आखिरी घंटे में दिया गया 'ऐतिहासिक' फैसला

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर को गंभीर स्वास्थ्य के चलते हस्पताल में भर्ती करवाया गया है. कबीर के कार्यकाल के आखिरी दिन और आखिरी घंटे में मेडिकल की पढ़ाई से जुड़े नीट मामले में फैसला दिया गया था. पढ़िए क्या था नीट का पूरा मामला.

रामराज्य की संकल्पना अगर आंखों के सामने साकार हो जाए तो एक आम इंसान भाव विह्वल होकर निर्निमेष देखने के अलावा क्या कर सकता है. अगर सरकार ने साकार किया है तो एक डर बना रहता है कि कब कोई आ के हड़का दे चल बे हट, साब आ रहे हैं. अगर प्राइवेट कंपनियों ने किया है तो आर्थिक हिंसा होने की संभावना रहती है जो कि भगवा, हरियरी, लाल किसी भी समूह को नहीं गुनती. इसकी मार आंख के नीचे काला और चेहरे का रंग सफ़ेद कर देती है.

नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) जो कि एग्जाम है मेडिकल का. कुछ ऐसे वादे करके लाया गया था सरकार के द्वारा:

1.मेडिकल एडमिशन में भ्रष्टाचार रुकेगा, क्योंकि राज्य संपोषित कॉलेज, प्राइवेट कॉलेज और केंद्र संपोषित कॉलेज सारे एक ही एग्जाम नीट से एडमिशन लेंगे. ऐसे 25-30 एग्जाम होते हैं देश में. और बहुत सारे कॉलेज अपने हिसाब से मैनेजमेंट कोटा तय कर लेते हैं.

2.जनता का बहुत ज्यादा फॉर्म भरने का खर्चा बचेगा.

3. बच्चों पर तनाव कम हो जाएगा. एक एग्जाम दो और एडमिशन लो.

इस सादगी पर कौन ना मर जाए ऐ खुदा!

मेडिकल क्षेत्र की एक और सादगी है जो कातिलाना है:

1. एग्जाम लेने का एक मकसद है काबिल डॉक्टर बनाना.
2. दूसरा मकसद है सुदूर गांव में जहां रोड और बिजली नहीं है, वहां भी मेडिकल फैसिलिटी उपलब्ध कराना.

कितने उच्च विचार हैं! हे महाबाहु! परमपिता! मैं बारम्बार इसी धरा पर यहीं इसी देश में जन्म लेना चाहूंगा. जहां सबको अपने मन के करने की छूट है. रोड मंत्रालय अपने मन से रोड बनाता है. बिजली वाले अपने मन से बिजली भेजते हैं. मेडिकल वाले व्यापमं चलाते हैं. आहा! व्यापमं. वेदों से सीधा आप तक. वेदों के ज्ञान के प्रचार प्रसार में थोड़ा रुधिर ही बहे तो स्यापा कैसा? ज्ञान कुर्बानी मांगता है.

जनता की सुविधाओं का ख्याल करते हुए सरकार ने 2010 में मंत्रणा शुरू की और छात्रों की यंत्रणा शुरू हो गई. वही, कोचिंग वाले डराने लगे. ऐसा करो नहीं तो वैसा हो जाएगा. हमारे पास आओ. भभूत है, घोंटा देंगे. तो माननीयों ने 2012 में लागू कर ही दिया न. बच्चों ने मन बना लिया था. मॉडल क्वेश्चन पेपर सॉल्व करने लगे थे. माता पिता ने आठवीं 9वीं के बच्चों को नीट के बारे में बताना शुरू कर दिया कि बेटा एक ही चांस है. एक बार में निकालना है.

फिर वही. एक सरकार ही बच्चों के बारे में नहीं सोचती है. बड़े-बड़े लोग जिन्होंने कॉलेजों में अथाह पैसा लगाया है, बच्चों की खातिर सुप्रीम कोर्ट गए. यूं ही नहीं. वजह थी. यूं ही कोई बेवफा नहीं होता. इस रुसवाई में बहुत सारे राज्यों ने सुर मिलाया.

प्रतिरोध वाजिब था:

1.पूरे देश में एक पाठ्यक्रम नहीं है. कहीं सीबीएसई तो कहीं स्टेट बोर्ड. कहा ना, इस देश में सबको अपने मन से किसी को कुछ भी सिखाने की छूट है. प्रभो! मैं नतमस्तक हूं. गांव के बच्चे जो मातृभाषा में पढ़ते हैं वो शहरी बच्चों का मुकाबला कैसे करेंगे?

2. हर जगह एडमिशन का अलग तरीका है. केरल और तमिलनाडु में बारहवीं के मार्क्स के आधार पर एडमिशन होता है. फिर कहीं एग्जाम लेकर और कहीं पैसे लेकर.

3.फिर केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों के कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण एक नई परेशानी हुई. केंद्र ने पूछा भी नहीं था किसी राज्य से. तुगलकी फरमान आया. दिल्ली से दौलताबाद करो.

तब 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. ऐतिहासिक इसलिए कि मुद्दे पर सारे जजों से बिना बहस किए माननीय मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर के कार्यकाल के आखिरी दिन के आखिरी घंटों में नीट को रद्द कर दिया गया. कहा गया कि ये असंवैधानिक है. केंद्र और राज्य सरकार के रिश्तों को खराब करता है. इस बात पर कहने वालों ने बहुत कुछ कहा था. मुंह नहीं छेक सकते. पर साबित कुछ नहीं हो पाया था. आपके कहने से थोड़ी ना मान लेंगे कि पैसों का लेन-देन हुआ था. साबित करो.

सरकार ने चैलेंज स्वीकार किया और सुप्रीम कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका डाली. जनाब, फिर देखिए. बहुत मेहनत से तैयार किया गया था. एग्जाम पूर्ववत पद्धति से होते रहे बिना नीट के. 2015 में कोर्ट ने फिर इस मामले पर सोचना शुरू किया. 2016 में कोर्ट का फैसला आया अपने ही पुराने फैसले को बदलते हुए कि अब तो एग्जाम नीट से ही होंगे. दो फेज में. 1 मई को पहला फेज और 24 जुलाई को दूसरा फेज. 1 मई को AIPMT का एग्जाम था, उसका नाम बदलकर नीट फेज 1 कर दिया गया.

सरकार को तो अब खुश होना चाहिए था. मगर ऐसा नहीं हुआ!

सरकार ने ये एग्जाम कराने में अपनी असमर्थता जताई. साथ ही ये कहा कि राज्य सरकारों के एग्जाम को इस से अलग रखा जाए. पर कोर्ट ने ना कर दिया. ना मतलब ना. सरकार कहां माननेवाली थी. तुरंत अध्यादेश लाया गया. हालांकि बीच का रास्ता खोजा गया. न तेरी न मेरी. थोड़ा तुम चलो, थोड़ा हम. राज्य सरकारों के एग्जाम को इस बार नीट से अलग रखा जाए. अगले साल से शामिल करेंगे. प्राइवेट वालों को सरकार ने क्या दिया? उनकी सीटें जो राज्य सरकार के डोमिसाइल से भरी जाती हैं, वो नीट से मुक्त रहेंगी. बाकी नीट से ही भरेंगी.

तो नीट का जिन्न वापस आ गया है. चिराग कभी कोर्ट के पास रहता है और कभी सरकार के पास. जिसको मर्जी वो चिराग रगड़ देता है. बहुत लोगों के पास नहीं है. वो मायूस हैं. देखते हैं इतनी उठा पटक के बाद छात्र अपना मानसिक डैमेज का इलाज कराने कहां जाते हैं. सबसे बुरा यही है कि कोई छात्रों के बारे में नहीं सोच रहा है. वो रोज किसी न किसी के आदेश का इंतजार कर रहे हैं. बच्चों की दुनिया पहले ही स्याह-सफ़ेद हो गई है. अब तो बख्श दो.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

अपने गांव की बोली बोलने में शर्म क्यों आती है आपको?

अपने गांव की बोली बोलने में शर्म क्यों आती है आपको?

ये पोस्ट दूर-दराज गांव से आए स्टूडेंट्स जो डीयू या दूसरी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं, उनके लिए है.

बहू-ससुर, भाभी-देवर, पड़ोसन: सिंगल स्क्रीन से फोन की स्क्रीन तक कैसे पहुंचीं एडल्ट फ़िल्में

बहू-ससुर, भाभी-देवर, पड़ोसन: सिंगल स्क्रीन से फोन की स्क्रीन तक कैसे पहुंचीं एडल्ट फ़िल्में

जिन फिल्मों को परिवार के साथ नहीं देख सकते, वो हमारे बारे में क्या बताती हैं?

चरमसुख, चरमोत्कर्ष, ऑर्गैज़म: तेजस्वी सूर्या की बात पर हंगामा है क्यों बरपा?

चरमसुख, चरमोत्कर्ष, ऑर्गैज़म: तेजस्वी सूर्या की बात पर हंगामा है क्यों बरपा?

या इलाही ये माजरा क्या है?

राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे शख्स से बच्चे ने पूछा- मैं सबको कैसे बताऊं कि मैं गे हूं?

राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे शख्स से बच्चे ने पूछा- मैं सबको कैसे बताऊं कि मैं गे हूं?

जवाब दिल जीत लेगा.

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

Lefthanders Day: बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

Lefthanders Day: बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मेरा बाएं-हत्था होना लोगों को चौंकाता है. और उनका सवाल मुझे चौंकाता है.

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.