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कहानी मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की, जिसकी संस्था से चार बच्चे चोरी हुए हैं

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झारखंड की राजधानी रांची से चार बच्चों को बेचे जाने की खबर सामने आने के बाद रांची के निर्मल हृदय संस्थान की एक कर्मचारी अनिमा इंदिवर और संस्था की एक सिस्टर कोंसिलिया को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इसके बाद से ही निर्मल हृदय संस्था चलाने वाली मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी सवालों के घेरे में है. पुलिस मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की ओर से चलाए जा रहे सभी संस्थाओं की जांच कर रही है, वहीं कुछ लोग इसकी संस्थापक और भारत रत्न के साथ ही नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मदर टेरेसा से उनका पुरस्कार वापस लेने की भी बात कर रहे हैं. पुलिस अब तक बेचे गए तीन बच्चों को बरामद कर चुकी है, जबकि चौथे बच्चे की खोजबीन जारी है.

क्या हुआ?

5 जुलाई 2017. झारखंड की राजधानी रांची की कोतवाली पुलिस ने रांची के ईस्ट जेल रोड पर बने मिशनरीज ऑफ चैरिटी संस्था के निर्मल हृदय की सिस्टर कोंसिलिया को गिरफ्तार कर लिया. ये गिरफ्तारी बाल कल्याण समिति की एफआईआर पर हुई थी, जो 3 जुलाई को कोतवाली पुलिस में दर्ज करवाई गई थी. इसके बाद पुलिस ने इस संस्था की एक कर्मचारी अनिमा इंदीवर को गिरफ्तार कर लिया था. उससे पूछताछ के बाद पुलिस ने सिस्टर कोंसिलिया को गिरफ्तार किया था. एफआईआर में आरोप था कि सिस्टर कोंसिलिया ने मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी होम से चार बच्चे चुराकर बेच दिए हैं. पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद दावा किया कि सिस्टर कोंसिलिया ने पूछताछ में माना है कि उसने चार बच्चे बेचे थे. इसमें से तीन बच्चों को बेचने के लिए उसे पैसे मिले थे जबकि एक बच्चे को मुफ्त में किसी को दे दिया गया था. सिस्टर कोंसिलिया ने गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कहा था कि उससे गलती हो गई, उसने पैसे के लिए बच्चों को बेच दिया.

Police stand outside a home which provides shelter for pregnant unmarried women run by the Missionaries of Charity, a Roman Catholic order founded by Mother Teresa, in Ranchi, India, July 4, 2018. Picture taken July 4, 2018. REUTERS/Stringer - RC188309C2D0निर्मल हृदय संस्थान की देशभर में कई शाखाएं हैं. (फोटोःरॉयटर्स)
निर्मल हृदय संस्थान की देशभर में कई शाखाएं हैं. (फोटोःरॉयटर्स)

कैसे सामने आया मामला?

इस मामले के तार जुड़ते हैं उत्तर प्रदेश के एक जिले सोनभद्र से. सोनभद्र के सौरभ कुमार अग्रवाल को कोई संतान नहीं थी. उन्हें पता चला कि रांची की मिशन ऑफ चैरिटी की संस्था निर्मल हृदय से बच्चे गोद लिए जा सकते हैं. सौरभ और उनकी पत्नी रांची पहुंचे और वहां उन्होंने बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में पूछा. वहां उनकी मुलाकात संस्था की कर्मचारी अनिमा इंदिवर और सिस्टर कोंसिलिया से हुई. इन दोनों ने 1 लाख 20 हजार रुपये में बच्चा देने की बात कही. निसंतान दंपती ने सिस्टर कोंसिलिया और अनिमा इंदिवर को पैसे दे दिए और शपथपत्र देकर एक बच्चा खरीद लिया. इसके कुछ ही दिन के बाद सिस्टर कोंसिलिया और सिस्टर अनिमा इंदिवर ने उनसे बच्चा वापस मांगा औऱ कहा कि कागज़ी कार्रवाई करने के बाद उन्हें बच्चा वापस कर दिया जाएगा. कुछ दिन बीतने के बाद अग्रवाल दंपती ने जब फिर से बच्चे की मांग की, तो सिस्टर कोंसिलिया और अनिमा इंदिवर ने और पैसे की मांग की. जब उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो सिस्टर कोंसिलिया और सिस्टर अनिमा इंदिवर ने बच्चा वापस ले लिया और पैसे भी नहीं लौटाए. इसके बाद अग्रवाल दंपती 30 जून को रांची के बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रूपा कुमारी के पास पहुंचे और उन्हें पूरी बात बताई. इसके बाद सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष रूपा कुमारी ने 4 जुलाई को कोतवाली थाने में केस दर्ज करवाया. पुलिस ने पहले अनिमा इंदिवर और उसके बाद फिर सिस्टर कोंसिलिया को गिरफ्तार कर लिया.

झारखंड के मुख्यमंत्री पहले ही पत्थलगढ़ी वाले मामले से परेशान चल रहे थे. अब उन्हीं के राज्य में मानव तस्करी का इतना बड़ा मामला सामने आया है. फोटोःरॉयटर्स
झारखंड के मुख्यमंत्री पहले ही पत्थलगढ़ी वाले मामले से परेशान चल रहे थे. अब उन्हीं के राज्य में मानव तस्करी का इतना बड़ा मामला सामने आया है. फोटोःरॉयटर्स

क्या है मिशनरीज़ ऑफ चैरिटीज़?
मिशनरीज़ ऑफ चैरिटीज़ एक एनजीओ है, जिसकी स्थापना मदर टेरेसा ने की थी. भारत रत्न से सम्मानित मदर टेरेसा ने 1950 में कोलकाता में इसकी स्थापना की थी. इसकी मुख्य पदाधिकारी सिस्टर प्रेमा, मदर जनरल ऑफ मिशनरीज ऑफ चैरिटी हैं. इस संस्था की अलग-अलग शाखाएं देश और विदेश के अलग-अलग हिस्सों में खोली गईं. फिलहाल इस संस्था के दुनिया के 120 देशों में 4500 से भी ज्यादा शाखाएं हैं. अकेले झारखंड में ही कुल 12 संस्थाएं हैं. इनमें से दो रांची में हैं, जो ईस्ट जेल रोड और कांके रोड पर हैं. इसके अलावा गोड्डा, पलामू, गुमला, गिरिडीह, दुमका, हजारीबाग, धनबाद और गिरीडीह में भी इसकी शाखाएं हैं.

क्या करती है ये संस्था?
इस संस्था में दुनिया भर के गरीब, बीमार, अनाथ और बेघर बच्चों को मदद मिलती है. किसी रेप पीड़िता और उसके होने वाले बच्चे की देखभाल इस संस्था में की जाती है. अगर कोई रेप पीड़िता गर्भवती होती है और वो अपना बच्चा नहीं चाहती है, तो संस्था उस बच्चे को किसी निसंतान दंपती को भारतीय कानून के तहत गोद लेने का प्रावधान करती है. इसके अलावा मानव तस्करी से छुड़ाई गई लड़कियों और उनके बच्चों को भी इस संस्था में रखा जाता है. संस्था में आने वाली महिलाओं और बच्चों को रहना-खाना दवाइयां और शिक्षा मुफ्त दी जाती है. इसके लिए संस्था को देश-दुनिया की कई संस्थाओं से चंदा भी मिलता है, जो करोड़ों रुपये में होता है. मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के तहत निर्मल हृदय के अलावा भी कई और संस्थाएं हैं. इनमें मिशनरी ऑफ चैरिटी ब्रदर्स, मिशनरीज़ ऑफ द वल्ड, मिशन कोलकाता, मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी फादर्स इंडिया और मिशनरीज़ सिस्टर्स मेरी जैसी कई संस्थाएं हैं.

कलकत्ता का निर्मल हृदय संस्थान. यहां उन बेसहारा लोगों की देखभाल की जाती है जो मौत के करीब होते हैं. फोटोः विकीपीडिया कॉमन्स
कलकत्ता का निर्मल हृदय संस्थान. यहां उन बेसहारा लोगों की देखभाल की जाती है जो मौत के करीब होते हैं. फोटोः विकीपीडिया कॉमन्स

क्या-क्या आरोप हैं?

चार बच्चे बेचे जाने के बाद इस संस्था की एक सिस्टर और उसकी एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस की जांच के दौरान इस संस्था पर कई गंभीर आरोप लगे हैं –

1. इस संस्था की सिस्टर कोंसिलिया और कर्मचारी अनिमा इंदिवर ने पैसों के लिए चार बच्चों को बेचा है. एक बच्चे को बेचने के लिए सिस्टर कोंसीलिया को 90 हजार रुपये मिले थे.

2. बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रूपा कुमारी ने बताया है कि इस संस्था के पास दो रजिस्टर हैं. एक रजिस्टर वो है, जिसमें वो कानूनी तरीके से काम करते हैं. जब भी कोई जांच होती है, वो सही रजिस्टर सामने रखते हैं. उसमें दर्ज महिलाओं और बच्चों का आंकड़ा सही होता है, जो संस्था में मौजूद होते हैं. अगर कोई जांच के लिए जाता है, तो उसे कोई खामी नहीं मिलती है. वहीं एक और रजिस्टर है, जिसमें वो गैरकानूनी तरीके से लाए गए और बेचे गए बच्चों का आंकड़ा दर्ज करते हैं. ये रजिस्टर संस्था के बाहर के किसी को भी नहीं दिखाया जाता है.

निर्मल हृदय संस्थान के रांची कैंपस में प्रसव से पहले माओं से एक फॉर्म पर दस्तखत कराकर तय किया जाता था कि वो बच्चे पर अपना हक छो़ड़ रही है.
निर्मल हृदय संस्थान के रांची कैंपस में प्रसव से पहले माओं से एक फॉर्म पर दस्तखत कराकर तय किया जाता था कि वो बच्चे पर अपना हक छो़ड़ रही है.

 

3. मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी संस्था के अलग-अलग जगहों से जांच के दौरान 280 महिलाओं के बच्चों के रेकॉर्ड नहीं मिले हैं.

4. पुलिस का दावा है कि मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के अलग-अलग होम्स में साल 2015 से 2018 के बीच 450 गर्भवती महिलाओं को भर्ती करवाया गया था. इनमें से 170 नवजातों के बारे में जानकारी मिली है.

5. पुलिस का दावा है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी की निर्मल ह्रदय संस्था से पिछले 16 महीनों में 58 बच्चे गायब हुए हैं. निर्मल ह्रदय से जब्त किए गए रजिस्टर के अनुसार मार्च 2016 से जून 2018 के बीच 110 बच्चों का जन्म हुआ. इनमें से बाल कल्याण समिति को 52 बच्चों की जानकारी दी गई है, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार 58 बच्चे गायब हैं.

Sister Mary Prema, Superior General of Missionaries of Charity, lights a candle on the tomb of Saint Mother Teresa on her death anniversary in Kolkata, India September 5, 2017. REUTERS/Rupak De Chowdhuri - RC114C4910B0
मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की सुपीरियर जनरल. संस्था का कहना है कि मामला उन्हें बदनाम करने की साज़िश है लेकिन अगर अनियमितताएं हैं तो वो जांच कराने को तैयार हैं. (फोटोःरॉयटर्स)

क्या कह रही है पुलिस?

पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है. अभी तक संस्था से गायब चार बच्चों में से तीन बच्चों को बरामद कर लिया गया है. एक बच्चा रांची के मोरहाबदी में 50,000 रुपये में बेचा गया था, जिसे पुलिस ने 8 जुलाई को बरामद कर लिया था. एक और बच्ची को 11 जुलाई को सिमडेगा से बरामद किया गया है, जिसकी उम्र 1 साल से भी कम है. इससे पहले जिस अग्रवाल दंपती को एक बच्चा 1.20 लाख रुपये में बेचा गया था था, उसे 14 मई को ही वापस ले लिया गया था. चौथे बच्चे के बारे में पुलिस का दावा है कि उसे भी रांची के कांटाटोली में बेचा गया है, जिसकी तलाश की जा रही है. वहीं जांच के लिए सीआईडी को भी लगाया गया है. इसके अलावा झारखंड के डीजीपी डीके पांडेय ने गृह विभाग के मुख्य सचिव एसकेजी रहाटे को पत्र लिखकर कहा है कि मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी समेत सभी 12 संस्थाओं के बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएं. डीजीपी ने अपने पत्र में कहा है कि जांच के दौरान पता चला है कि मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी को मिले पैसे का इस्तेमाल कहीं और भी हुआ है लेकिन इसकी जांच भारत सरकार के निर्देश पर ही की जा सकती है. ऐसे में अब इसपर फैसला केंद्र सरकार को लेना है. डीजीपी के पत्र में द फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन ऐक्ट (एफसीआरए) के तहत विदेशों से पिछले 11 साल में करीब 927.27 करोड़ रुपये मिलने की बात कही गई है. डीजीपी के पत्र में ये साफ कहा गया है कि चूंकि मामला एक करोड़ रुपये से ज्यादा का है, इसलिए अब इस मामले की जांच सीबीआई ही कर सकती है.

सरकार क्या कह रही है?

झारखंड की रघुबर दास सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. झारखंड पुलिस के साथ ही अब सीआईडी भी इस मामले की जांच कर रही है. वहीं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने झारखंड सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. राज्य के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में एनसीपीसीआर ने यह भी कहा है कि राज्य में सभी बाल गृहों की जांच कराई जाए ताकि यह पता किया जा सके कि कहीं और ऐसी गतिविधि तो नहीं चल रही है. इसके बाद सरकार ने राज्य के 10 जिलों के एसपी को ये आदेश दिया है कि वो जिलों में चल रहे ऐसे संस्थाओं की तहकीकात करें. 12 जुलाई को सीएम रघुबर दास ने गृह सचिव एसकेजी रहाटे, डीजीपी डीके पांडेय, रांची डीसी राय महिमापत रे, सीडब्ल्यूसी के अधिकारियों के साथ बैठक की और खुद पूरे मामले की जांच जल्दी पूरी करने के आदेश दिए. वहीं निर्मल हृदय को सील करने के बाद पुलिस ने वहां से 15 गर्भवतियों को सरकारी शेल्टर होम में भिजवा दिया है. इनकी उम्र 13 से 36 साल है.

RANCHI, INDIA - MARCH 20: Tribal youths with their traditional dresses take part in Sarhul Festival procession on March 20, 2018 in Ranchi, India. The festival marks the beginning of New Year and is celebrated by the Oraon, the Munda and the Ho tribes, of the Jharkhand region. (Photo by Parwaz Khan/Hindustan Times via Getty Images)
झारखंड की मुंडा जनजाति. जनजातियों के बच्चों की ट्रैफिकिंग का मामला बनने से ये मुद्दा और गंभीर हो जाता है. (फोटोःगेटी)

 

क्या हो रही है राजनीति?

झारखंड 15 नवंबर 2000 से अस्तित्व में है. ये एक आदिवासी बहुल राज्य है, जिसका बड़ा हिस्सा मुंडा, हो और संथाल जनजातियों का है. झारखंड के इस इलाके में 1845 में अंग्रेजों के आने के बाद इस आदिवासी बहुल राज्य की एक बड़ी आबादी ने ईसाई धर्म अपना लिया. अब पूरी राजनीति ईसाई धर्म के ईर्द-गिर्द हो रही है.

1. संस्था का मुख्यालय कोलकाता में है, जिसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक ट्वीट कर संस्था का बचाव किया है. उन्होंने लिखा है कि कमजोर लोगों की सेवा मदर टेरेसा का धर्म रहा है. मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना खुद मदर टेरेसा ने की थी, लेकिन अब उन्हें भी नहीं बख्शा जा रहा है. उन्होंने लिखा है कि मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी को बदनाम न किया जाए और उन्हें गरीबों के हक में काम करने दिया जाए.

ममता बैनर्जी का ट्वीट
ममता बैनर्जी का ट्वीट

2. बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा है कि मदर टेरेसा से भारत रत्न वापस ले लेना चाहिए. स्वामी ने तर्क देते हुए कहा कि ब्रिटिश लेखक क्रिस्टोफर हर्चेंस ने अपनी किताब द मिशनरीज़ पोजिशन : मदर टेरेसा इन थ्योरी एंड प्रैक्टिकल में मदर टेरेसा के किए फ्रॉड दर्ज हैं.

3. आरएसएस के नेता राजीव तुली ने भी मांग की है कि अगर मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो मदर टेरेसा को दिया गया भारत रत्न छीन लेना चाहिए. तुली ने कहा है कि मदर टेरेसा का काम ही सिर्फ धर्मांतरण था, उन्होंने जनहित का कोई काम नहीं किया है.

क्या कह रहा है चर्च?

कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया को भारत में कैथोलिक चर्च की आधिकारिक संस्था के तौर पर देखा जाता है. धर्म के अलावा और भी मुद्दों पर कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया का दखल रहता है. मदर टेरेसा की ओर से स्थापित मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी भी कैथोलिक संस्था है, इसलिए इसपर सफाई देने के लिए कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) को आगे आना पड़ा. संस्था के महासचिव थेडॉर मासकेयरहेन्स ने कहा है कि चैरिटी को बदनाम करने के लिए कुछ लोग इसे निशाना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की सीबीआई से जांच होनी चाहिए और चर्च इसके लिए तैयार है. उनका कहना है कि संस्था पर एफआईआर होने के बाद भी पुलिस ने उन्हें एफआईआर की कॉपी नहीं दी. जब वो लोग कोर्ट गए, तो कोर्ट के आदेश पर एफआईआर की कॉपी मिली है. उनका कहना है कि सिस्टर कांसीलिया पर दवाब बनाकर उनसे जुर्म कबूल करवाया गया है. वहीं उन्होंने सिस्टर अनिमा इंदवार को दोषी ठहराते हुए कहा कि एक आदमी की गलती की सजा पूरी संस्था को नहीं दी जानी चाहिए. थेडॉर मासकेयरहेन्स ने ये भी कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के कई बड़े नेताओं से उनके रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन यहां के कुछ लोग बदनाम करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं.

Nobel peace laureate Mother Teresa speaks at a meeting held by Indian Christians in New Delhi on November 18. The meeting marked the beginning of a campaign for government job reservations for socially and economically backward Christians - PBEAHUNEXAU
कुछ लोगों ने मांग की है कि मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी पर लगे आरोप सही पाए जाएं तो मदर टेरेसा को मिला भारत रत्न वापस लिया जाए. (फोटोःरॉयटर्स)

सरकारी अधिकारी ने भी दी थी क्लीन चिट

रांची की डिस्ट्रिक्ट एग्जिक्यूटिव मैजिस्ट्रेट श्वेता कुमारी गुप्ता ने 23 जून को निर्मल हृदय संस्था के शिशु भवन का निरीक्षण किया था. उस वक्त वहां के रजिस्टर में मैजिस्ट्रेट गुप्ता ने लिखा था-

‘मैं यहां आधिकारिक निरीक्षण के लिए आई थी. बच्चों की देखभाल के लिए उत्तम माहौल है. मैं यहां बार बार आना पसंद करूंगी.’

2014 में भी सामने आया था मामला

रांची के बाल कल्याण समिति के पूर्व डायरेक्टर रहे डॉ ओपी सिंह ने 2014 में भी इस मामले को उठाया था. जनवरी 2014 में उन्होंने आरोप लगाया था कि मिशन ऑफ चैरिटी के निर्मला शिशु भवन से बच्चे बेचे जा रहे हैं. उनका दावा है कि उन्होंने मिशन ऑफ चैरिटी की संस्था का खुद दौरा किया था, लेकिन संस्था की ओर से उन्हें जांच नहीं करने दिया गया. इस बारे में उन्होंने 22 जनवरी 2014 को निर्मला शिशु भवन की संरक्षिका नीमा रोज को पत्र भी लिखा था. इस पत्र का जवाब देते हुए नीमा रोज ने 24 जनवरी को लिखा था कि जिस सिस्टर ने उन्हें जांच करने से रोका था, उसने माफी मांग ली है. हालांकि इसी दौरान 29 तारीख को पत्र लिखकर बाल कल्याण समिति ने निर्मला शिशु भवन को अगले आदेश तक बच्चों के गोद लेने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी. डॉ. ओपी सिंह का दावा है कि संस्था को बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया रोकने के बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया और एक जांच करने के बाद निर्मला शिशु भवन को क्लीन चिट दे दी गई.

पूर्व में भी बच्चे गोद लेने में मानव तस्करी के मामले सामने आए हैं. फोटोःरॉयटर्स
पूर्व में भी बच्चे गोद लेने में मानव तस्करी के मामले सामने आए हैं. फोटोःरॉयटर्स

भारत में बच्चों को गोद लेने के लिए क्या है कानून?

एक आंकड़े के मुताबिक भारत में गोद लेने के लिए सिर्फ 1700 बच्चे ही उपलब्ध हैं, जबकि गोद लेने वाले परिवारों की संख्या 12,400 है. 2015-16 में कुल 3010 बच्चे गोद लिए गए थे. देश में बच्चों को गोद लेने की एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है.
बच्चा गोद लेने से जुड़े सवाल-

# क्या कोई भी इंसान बच्चा गोद ले सकता है?

इंडिया में कोई भी भारतीय, एनआरआई और विदेश नागरिक बच्चा कानूनी तौर से गोद ले सकता है. सिंगल महिला या फिर शादीशुदा जोड़ा बच्चा गोद ले सकते हैं. मगर कुछ खास परिस्थितियों में ही सिंगल पुरुषों को बच्चा गोद दिया जाता है. मगर पुरुष अभिभावक एक लड़के को ही गोद ले सकते हैं.

# क्या शर्तें हैं?

बच्चा गोद लेने की इच्छा रखने वालों को सेहतमंद और आर्थिक रूप से इतना संपन्न होना जरूरी है कि बच्चे की अच्छे से देखभाल कर सकें. गोद लेने वाले इंसान की कम से कम उम्र 21 साल हो. इसके लिए कोई अपर एज लिमिट नहीं है, मगर एक साल के बच्चे के लिए दोनों पेरंट्स में से किसी की भी उम्र 45 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. मगर बच्चे की उम्र के हिसाब से पेरंट्स की उम्र में भी छूट दी जाती है. वहीं विकलांग बच्चों के मामले में ये लिमिट 55 साल तक की भी हो सकती है. भारत में 15 साल की उम्र तक के बच्चों को ही अडॉप्ट करने का प्रावधान है.

भारत में बच्चे गोद लेने को लेकर बड़े सख्त नियम हैं. फोटोःरॉयटर्स
भारत में बच्चे गोद लेने को लेकर बड़े सख्त नियम हैं. फोटोःरॉयटर्स

# पूरा प्रोसेस क्या है?

हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध धर्म के लोगों को हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट 1956 के हिसाब से बच्चा गोद दिया जाता है. इसमें इन्हीं धर्मों के लोगों में बच्चा गोद लिया जा सकता है. वहीं मुस्लिम, पारसी और ईसाई धर्मों के लोगों और विदेशी नागरिकों समेत एनआरआई लोगों को गार्डियन एंड वार्ड्स एक्ट 1980 के मुताबिक बच्चा गोद दिया जाता है. इसके तहत बच्चा जब तक 18 साल का नहीं हो जाता है, तब तक कानूनी तौर पर गोद लेने वाला महज एक गार्डियन ही रहेगा. 2017 तक ये होता था कि अलग अलग संस्थाएं लोगों के आवेदन लेतीं थीं और फिर लोगों की मांग के हिसाब से बच्चे ढूंढती थीं. इसमें महीनों लग जाते थे. मगर अब सभी संस्थाओं को केंद्र सरकार की सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA)के पास जानकारियां जमा करनी पड़ती हैं. इसके लिए www.cara.nic.in पर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है. इसके बाद अथॉरिटी देश भर से अडॉप्शन के लायक बच्चों को जरूरत के हिसाब से कानूनी तौर पर गोद देती है.

बच्चे को लेकर फरमाइश चलती है?

बच्चे की उम्र, लिंग (अगर घर में पहले से कोई और बच्चा नहीं है), रंग, धर्म और किसी खास शारीरिक हालत के बारे में चॉइस बताई जा सकती है. बच्चे को लेकर जितनी ज्यादा शर्तें होंगी, अडॉप्शन में उतना ही ज्यादा समय लगेगा.


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