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ये है आसाराम का फिदायीन कार्तिक हलदर, जिसने 'बापू' को बचाने के लिए 3 गवाह मार डाले

#. तारीख 9 जून 2014. जगह गुजरात का राजकोट जिला. पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर अमृत प्रजापति से एक शख्स इलाज कराने आया. जब अमृत अपने क्लीनिक से बाहर निकले, तो उस शख्स ने अमृत के शरीर में तीन गोलियां उतार दीं. करीब 15 दिन बाद अमृत की मौत हो गई.

अमृत प्रजापति
अमृत प्रजापति

#. तारीख 11 जनवरी 2015. जगह उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर जिला. डेयरी कारोबार करने वाले अखिल गुप्ता शाम को जब घर लौट रहे थे, तो बाइक से आए हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी. अखिल को नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

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अखिल गुप्ता

#. तारीख 10 जुलाई 2015. जगह उत्तर प्रदेश का शाहजहांपुर जिला. पेशे से LIC एजेंट कृपाल सिंह बाइक से कहीं जा रहे थे. तभी बाइकसवार हमलावरों ने उन पर गोलियां बरसी दीं. 11 जुलाई को बरेली के हॉस्पिटल में कृपाल सिंह की मौत हो गई.

कृपाल सिंह
कृपाल सिंह

देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तारीखों पर हुईं इन तीन हत्याओं में कॉमन ये है कि मरने वाले तीनों आसाराम पर लगे यौन शोषण और बलात्कार के मामलों में गवाह थे. दूसरी कॉमन बात ये है कि ये तीनों हत्याएं एक ही शख्स के हाथों हुई हैं. नाम- राजू दुलालचंद हलदर उर्फ कार्तिक हलदर. ज़िम्मेदारी- आसाराम का फिदायीन.

25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की कोर्ट ने आसाराम को नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. उसके दो साथियों को 20-20 साल कैद की सज़ा सुनाई गई है. आसाराम के एक कुकर्म का फैसला हो चुका है, लेकिन कार्तिक हलदर के किसी जुर्म का अभी फैसला नहीं हुआ है. यहां बात कार्तिक हलदर की.

सुनवाई पर जाने के दौरान कार्तिक
सुनवाई पर जाने के दौरान कार्तिक

कहां से शुरू होती है कार्तिक हलदर की कहानी

साल 2000. आसुमल थाउमल हरपलानी उर्फ आसाराम 10 सालों तक धार्मिक चैनलों पर कथा बांच-बांचकर प्रात: स्मरणीय परम पूज्य संत आसाराम बापू बन चुका था. देशभर में अपने तमाम आश्रम-स्कूल और हज़ारों करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर चुका था. देशभर के लाखों लोगों की तरह पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का रहने वाला कार्तिक नाम का एक नाबालिग लड़का भी आसाराम के प्रभाव में आ गया. वो दिल्ली में आसाराम से मिला और इतना प्रभावित हुआ कि एक साल के अंदर ही आसाराम के अहमदाबाद वाले आश्रम में साधु बनकर रहने लगा. ये शुरुआत थी उस साधु के शूटर बनने की.

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आसाराम

और फिर वो शूटर बन गया

21 जुलाई 2008 वो तारीख है, जब आसाराम पर पहला कोई बड़ा केस दर्ज हुआ. ये केस आश्रम में तांत्रिक अनुष्ठान कराने के आरोप में तब दर्ज कराया गया था, जब आसाराम के अहमदाबाद वाले आश्रम के हॉस्टल में रहने वाले दो बच्चों- अभिषेक और दीपेश की लाशें मिली थीं. इसके बाद सिलसिला चल निकला. 20 अगस्त 2013 को शाहजहांपुर की एक नाबालिग लड़की ने आसाराम पर बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया. इससे हिम्मत पाकर सूरत की दो लड़कियां सामने आईं, जिन्होंने 6 अक्टूबर 2013 को आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं पर यौन शोषण का केस दर्ज कराया.

वो बच्चे, जिनकी लाशें मिली थीं
वो बच्चे, जिनकी लाशें मिली थीं

मुकदमे लदते जा रहे थे. सम्मान नाले में लोटा जा रहा था. हज़ारों करोड़ का साम्राज़्य लड़खड़ाने लगा था. ऐसे हालात में भगवान की छवि रखने वाले आसाराम का आपराधिक चेहरा सामने आने लगा. खुद को फंसता देख आसाराम ने किसी माफिया की तरह बड़ी बेशर्मी से गवाहों पर हमले करवाना शुरू कर दिया. और इन हमलों का… गवाहों की हत्याओं का सबसे बड़ा मोहरा था कार्तिक हलदर.

आसाराम ने जिन गवाहों को मरवाया और जिन पर हमले कराए, उनके बारे में आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं

पर क्या कार्तिक ने ये सब अकेले किया? गवाहों को अपनी प्रेरणा से मारा? नहीं. ये सब आसाराम के इशारे पर हुआ. और कार्तिक को ऐसे तैयार किया गया, जैसे आसाराम इतने सालों से कोई धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि क्राइम सिंडिकेट चला रहा हो. कार्तिक ने जिन तीन गवाहों की हत्याएं कीं, उनमें उसने 10 तमंचों, 12 बोर की तीन पिस्टलों, 9mm की एक पिस्टल, .32 बोर की तीन पिस्टल और 94 कारतूसों का इस्तेमाल किया.

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हमले के बाद ICU में महेंद्र

तीन गवाहों की हत्या के अलावा कार्तिक ने किस-किसकी हत्या की कोशिश की

#. दिसंबर 2009 में अहमदाबाद में बच्चों की मौत के मामले में गवाह राजू चांडक पर जानलेवा हमला किया गया.
#. 13 मई 2015 को पानीपत में आसाराम के पूर्व साधक महेंद्र चावला पर जानलेवा हमला किया गया.
#. 2016 में अहमदाबाद में आसाराम के विरोधी लालाभाई ठाकोर पर हमला हुआ.
#. इसी साल मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम आश्रम के संचालक ओम प्रकाश प्रजापति और सीमा प्रजापति पर भी जानलेवा हमला हुआ. ये दोनों आसाराम के छिंदवाड़ा आश्रम के वॉर्डन थे, जो आसाराम के कई राज जानते थे.

अखिल गुप्ता कौन है

मुजफ्फरनगर की जानसठ रोड पर गीता एनक्लेव में रहने वाले नरेश चंद गुप्ता आसाराम के भक्त थे. पिता की श्रद्धा की वजह से बेटा अखिल गुप्ता भी आसाराम का भक्त बन गया. नरेश ने अपन बेटे को आसाराम की सेवा में भेज दिया. आसाराम अखिल की सेवा से इतना खुश हुआ कि उसने अखिल को अपने अहमदाबाद वाले आश्रम में रसोइया बना दिया. मध्य प्रदेश में आसाराम के ही एक सत्संग में उसकी मुलाकात वर्षा से हुई. अखिल और वर्षा शादी करना चाहते थे. आसाराम ने इजाज़त नहीं दी, तो दोनों ने आश्रम छोड़कर दिल्ली में शादी कर ली.

अखिल की तस्वीर के साथ उनके माता-पिता
अखिल की तस्वीर के साथ उनके माता-पिता

फिर अखिल की हत्या कैसे हो गई

10 साल तक आसाराम का रसोइया रहने के बाद 2008 में अखिल ने अहमदाबाद का आश्रम छोड़ दिया और वापस अपने शहर आकर डेयरी कारोबार शुरू किया. जब अखिल और वर्षा की ज़िंदगी शांत-खुशहाल चल रही थी, तभी सूरत की दो बहनों ने आसाराम और नारायण साईं पर यौन शोषण का केस दर्ज कराया. इस केस की जांच के दौरान जब गुजरात पुलिस ने अखिल से पूछताछ की, तो वो सरकारी गवाह बन गया. इस दौरान आसाराम जोधपुर जेल में बंद था. 11 जनवरी 2015 की शाम डेयरी से लौटते समय अखिल की उसके घर के पास ही गोली मारकर हत्या कर दी गई.

हत्या के बाद पिता नरेश ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कराया. सालभर से ऊपर जांच चलने के बावजूद पुलिस ये केस सॉल्व नहीं कर पाई. फिर मार्च 2016 में जब कार्तिक पुलिस के हाथ लगा, तो पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने ही अखिल की हत्या की थी. इसके लिए कार्तिक ने पहले मीरापुर के नीरज को मुजफ्फरनगर में रखकर अखिल की रेकी कराई थी, फिर हत्या की थी.

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धर्म की आड़ में कुकर्म करने वाला आसाराम

पुलिस के हाथ कैसे लगा कार्तिक हलदर

गुजरात पुलिस जब कई महीनों तक अखिल के हत्यारे को पकड़ने में नाकाम रही, तो ये केस गुजरात ATS और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के हाथ में दे दिया गया. इनके जॉइंट ऑपरेशन में जानकारी मिली कि कार्तिक छत्तीसगढ़ चला गया है. जनवरी 2016 में उसने अपनी पत्नी रेशू को रायपुर भेजा था. रेशू ने रायपुर के पहंदा गांव में किराए पर एक मकान लिया. फिर मार्च के पहले सप्ताह में कार्तिक भी पहंदा गांव में पत्नी के साथ जाकर रहने लगा.

गांव में डॉ. रंजीत साहू के अलावा कोई भी कार्तिक को नहीं जानता था. यहां वो घर में ही छिपा रहता था, बाहर भी नहीं निकलता था. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच पहले से रेशू पर निगाह रखे हुए थी. जैसे ही उन्हें कार्तिक के आने की भनक लगी, उन्होंने रायपुर पुलिस के साथ ऑपरेशन चलाकर कार्तिक को अरेस्ट कर लिया. उसे 13 मार्च 2016 को रायपुर के सरोना बाज़ार से अरेस्ट किया गया. उस समय वो नक्सलियों से हथियार खरीदने के लिए निकला था, जिन्हें वो और गवाहों की हत्या में इस्तेमाल करने वाला था.

अखिल की गिरफ्तारी के बाद की पहली तस्वीर
अखिल की गिरफ्तारी के बाद की पहली तस्वीर

कार्तिक के लिए गवाहों की हत्या का इनाम थी रेशू

जैसे अखिल और वर्षा की शादी आसाराम की वजह से हुई थी, वैसे ही कार्तिक और रेशू की शादी भी आसाराम की वजह से हुई थी. फर्क इतना है कि अखिल और वर्षा एक-दूसरे से प्यार करते थे, जबकि रेशू कार्तिक को गवाहों की हत्या का इनाम थी. 17 मार्च 2016 को पुलिस ने कार्तिक से पूछताछ के आधार पर बताया कि जब कार्तिक गवाहों की हत्या करता था, तो आसाराम खुश होता था. दो बच्चों की मौत के केस में गवाह राजू चांडक पर हमले से आसाराम बहुत खुश हुआ.

एक बार आसाराम ने कार्तिक से पूछा कि गवाहों की हत्या के बदले में कार्तिक को क्या चाहिए, तो उसने कहा कि वो शादी करना चाहता है. इस पर आसाराम ने उससे कहा कि सामने बैठी किसी भी साधिका को चुन लो. कार्तिक ने रेशू को चुना और आसाराम ने दोनों की शादी करा दी. पूछताछ में कार्तिक ने कहा कि वो आसाराम का विरोध कर रहे हर शख्स को खत्म कर देना चाहता है.

आसाराम के लिए खास जोधपुर जेल के अंदर कोर्ट बैठी. कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए एहतियात बरतते हुए जेल के अंदर ही सजा सुनाई गई.
आसाराम के लिए खास जोधपुर जेल के अंदर कोर्ट बैठी. कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए एहतियात बरतते हुए जेल के अंदर ही सजा सुनाई गई.

कार्तिक के अरेस्ट होने पर रेशू ने क्या कहा

कार्तिक की गिरफ्तारी के बाद जब अखबार ‘हरिभूमि’ ने रेशू से बात की, तो उसने कहा, ‘मेरा पति गुनहगार है, तो मेरी क्या गलती? मुझे अपने पति की करतूतों की कोई जानकारी नहीं थी. उन्हें अपने किए का फल भुगतना होगा. अगर मुझसे बताया होता, तो मैं उन्हें कभी इतना बड़ा गुनाह नहीं करने देती. कुछ भी हो, वो मेरा जीवनसाथी है, तो मैं उसका साथ दूंगी.’ कार्तिक और रेशू ने आसाराम के आश्रम में कई साल गुजारे हैं. अखबार से बातचीत में उसने कहा कि उसकी कार्तिक के साथ अरेंज मैरिज हुई थी.

हत्याओं के चक्कर में कार्तिक ने पत्नी को भी खूब घुमाया

अखबार से बातचीत में रेशू ने बताया वो दोनों पहले अहमदाबाद में रहते थे. फिर जब मीडिया में कार्तिक के बारे में खबर आई, तो पूरा परिवार गाज़ियाबाद शिफ्ट हो गया. वहां से ये सारे कोलकाता गए. फिर दिसंबर 2015 में कार्तिक ने ठिकाना बदलने के लिए अपने एक दोस्त से संपर्क किया, जिसने कार्तिक की बात डॉ. रंजीत साहू से कराई. रंजीत से बात होने के बाद रेशू अपने दो बच्चों के साथ छत्तीसगढ़ चली गई, जबकि कार्तिक फरारी काटता रहा. फिर जब वो रायपुर आया, तो पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया.

आसाराम पर अभी दो मामलों में फैसला बाकी है.
आसाराम पर अभी दो मामलों में फैसला बाकी है.

आसाराम को अरेस्ट करने वाली ऑफिसर को मारना चाहता था कार्तिक

मई 2016 में कार्तिक के अहमदाबाद पुलिस को दिए 30 पन्ने के बयान में खुलासा हुआ कि कार्तिक जोधपुर की ACP चंचल मिश्रा को मारने की प्लानिंग कर रहा था. चंचल ही वो ऑफिसर हैं, जो आसाराम को उसके इंदौर आश्रम से अरेस्ट करके जोधपुर लाई थीं. चंचल और दूसरे गवाहों की हत्या के लिए कार्तिक AK47 खरीदने वाला था और इसके लिए उसने आसाराम के भक्तों से चंदा करके 25 लाख रुपए इकट्ठे किए थे.

इन 25 लाख में से 15 लाख रुपए उसने झारखंड के दामोदर सिंह नाम के किसी शख्स को दिए थे. दामोदर AK47 तो नहीं दिला पाया, लेकिन 12 बोर की एक बंदूक ज़रूर दिला दी. रेकी के बाद उसने चंचल को बम से मारने का प्लान बनाया था.

आसाराम के बगल में जो महिला लाल रंग के कपड़े में लिपटी फाइल थामे दिख रही हैं, वो हैं चंचल मिश्रा. 2013 में जब आसाराम को इंदौर से अरेस्ट किया गया, तब चंचल मिश्रा जोधपुर पुलिस की ACP थीं.
आसाराम के बगल में जो महिला लाल रंग के कपड़े में लिपटी फाइल थामे दिख रही हैं, वो हैं चंचल मिश्रा. 2013 में जब आसाराम को इंदौर से अरेस्ट किया गया, तब चंचल मिश्रा जोधपुर पुलिस की ACP थीं.

गिरफ्तारी के बाद क्या कानूनी कार्रवाई हुई

गिरफ्तारी के 6 महीने बाद तक अहमदाबाद पुलिस ने कई बार कार्तिक के वारंट लिए, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया. इस दौरान पानीपत में एक और गवाह पर हमले के मामले में पानीपत पुलिस वारंट पर कार्तिक को करनाल जेल ले आई. चूंकि अखिल की हत्या का केस मुजफ्फरनगर में दर्ज हुआ था, तो 21 सितंबर 2017 को पानीपत पुलिस ने कार्तिक को करनाल जेल से मुजफ्फरनगर कोर्ट में पेश किया था. यहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

दिसंबर 2017 में पुलिस ने मुजफ्फरनगर CJM कोर्ट में कार्तिक के खिलाफ चार्जशीट दायर की. जनवरी 2018 में हरियाणा पुलिस ने कार्तिक को कृपाल सिंह की हत्या के मामले में शाहजहांपुर की कोर्ट में पेश किया. जनवरी 2018 में ही कार्तिक ने मुजफ्फरनगर CJM कोर्ट में ज़मानत की अर्जी डाली थी, जिसे खारिज कर दिया गया था.

सितंबर 2017 में जब कार्तिक को मुजफ्फरपुर की कोर्ट में पेश किया गया था, तब अखिल की पत्नी वर्षा ने पुलिस के सुरक्षा-घेरे में घुसकर उसे चप्पलों से पीटा था. कार्तिक पर कोर्ट का फैसला आना अभी बाकी है.


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