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ओमप्रकाश चौटाला नहीं जानते कि बसपा से कितनी सीटों पर गठबंधन है: दुष्यंत चौटाला

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दुष्यंत चौटाला. हरियाणा का एक परिचित नाम. हरियाणा से बाहर वालों के लिए हम उनका ब्रीफ इंट्रो दे देते हैं. दुष्यंत हरियाणा के सबसे कद्दावर राजनैतिक परिवार से आते हैं. दुष्यंत के परदादा देवीलाल वी.पी सिंह और चंद्रशेखर सरकार (1989-91) में भारत में भारत के उप-प्रधानमंत्री रहे. दो बार हरियाणा के सीएम भी रहे. दुष्यंत के दादा (देवीलाल के बेटे) ओमप्रकाश चौटाला चार बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. दुष्यंत के चाचा (ओमप्रकाश चौटाला के छोटे बेटे अभय सिंह चौटाला) हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. दुष्यंत के पिता अजय चौटाला भी विधायक-मंत्री रहे हैं. दुष्यंत फिलहाल खुद हिसार लोकसभा सीट से सांसद हैं. जब चुनाव जीते थे तो इंडियन नेशनल लोकदल के साथ थे. फिर अक्टूबर 2018 को गोहाना में हुई एक रैली में चाचा अभय चौटाला से उनके मतभेद न सिर्फ सामने आएबल्कि उनके अपने परदादा की पार्टी से अलग होने की भूमिका भी तैयार हो गई. दुष्यंत ने बाद में अलग जननायक जनता पार्टी बना लीजिसे वो जन जन पार्टी‘ भी कहते हैं. जन जन पार्टी की पैदाइश का किस्सा आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

जन-जन पार्टी की बात इसलिए कि ये पार्टी 28 जनवरी, 2019 को जींद विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में अपनी ताकत दिखा सकती है. ये सीट लोकदल के विधायक डॉ. हरिचंद मिड्ढा के निधन के बाद खाली हुई है. उपचुनाव के नतीजे आएंगे 31 जनवरी को. तब तक आप पढ़िए दुष्यंत चौटाला से हमारी खास बातचीतजिसमें उन्होंने ये भी बताया कि कैसे कुछ लोगों के चलते उन्हें लोकदल से निकाला गया.

दुष्यंत चौटाला.
दुष्यंत चौटाला.

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>> दुष्यंत जीक्या हुआ था गोहाना रैली मेंमंच पर ओमप्रकाश चौटाला ने आपको क्या कहा था?

जवाब- जहां तक गोहाना की बात हैवहां 75-75 साल के बुजुर्गों ने नारे लगाए थे. कोई हूटिंग नहीं हुई थी. लोकतंत्र में सबको अपनी राय रखने का अधिकार है. बार-बार ये बात कही जाती है कि हमें चौटाला साहब से माफ़ी मांगनी चाहिए. 17 अक्टूबर को हम चौटाला साहब के पास गए थे. हमने अपना पक्ष रखा और कहा कि अगर हमारी कोई गलती है तो उसके लिए माफ़ी भी चाहते हैं.

>> नहींवो मंच पर क्या बात हुई थी आपकी ओमप्रकाश चौटाला से?

जवाब- उन्होंने मुझसे पूछा था कि ये जो नारे लग रहे हैंये किस कारण हैंमैं आपके साथ एक वाकया साझा करना चाहूंगाजब 1988 में देवीलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे. उस वक़्त भी बोट क्लब में एक रैली हुई थी. वहां भी ऐसी ही घटना हुई थी. जब रणजीत सिंह (ओमप्रकाश चौटाला के बड़े भाई) मंच पर भाषण देने चढ़े तो ओमप्रकाश चौटाला समर्थकों ने नारे लगाए थे. इसके बाद चौधरी देवीलाल ने ओमप्रकाश चौटाला को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. लेकिन प्रदेश का जनाधार ओमप्रकाश चौटाला के साथ था. जिस प्रकार हमें पार्टी से निकाला गया वो एक पहलू है. लेकिन इसके बाद डॉक्टर अजय चौटाला को भी पार्टी से निकाला गया. ये उनकी सोच को दिखाता है कि कहीं न कहीं अभय चौटाला संगठन को हथियाना चाहते थे. चौधरी ओमप्रकाश चौटाला पर भी निरंतर दबाव बनाया गया. कई निर्णय उनसे बिना पूछे लिए गए और फिर जाकर उनकी मोहर लगवाई गई.

गोहाना रैली में ट्रैक्टर से पहुंचे थे दुष्यंत.
गोहाना रैली में ट्रैक्टर से पहुंचे थे दुष्यंत.

>> आपने भी एक बयान दिया था कि आपके निष्कासन के कागज़ पर ओपी चौटाला के दस्तखत नहीं थे.

जवाब– बिल्कुल. ये बात तो चंड़ीगढ़ में साफ़ हो गई थी. 15 अक्टूबर की मोहर लगवाई गई, 12 के दस्तखत करवाए गए जबकि11 को निर्णय लिया गया था. ये दिखाता है कि ऐसे बहुत से निर्णय लिए गए जिसमें चौटाला साहब से राय नहीं ली गई. और उनके नाम का इस्तेमाल किया गया. प्रदेश में तो लोगों द्वारा ये बात भी कह दी जाती है कि चौटाला साहब को तो ये भी नहीं पता कि बसपा के साथ कितनी सीटों पर अलायंस किया गया है. लोग उनको ये भी नहीं बताते कि वो अगला कदम क्या उठाने वाले हैं. आप खुद सोचिए अगर एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अंधेरे में रखने का काम किया जाता है तो उससे पार्टी में कितनी कमजोरी आती है.

>> क्या ओपी चौटाला ये जानते हैं कि उनके नाम का इस्तेमाल हो रहा हैअगर ऐसा हैतो वो आपके साथ क्यों नहीं आए?

जवाब- देखिएउनकी उम्र मेरे से तीन गुणा है. उन्होंने 60 साल राजनीति की है. आनाना आना उनका अपना निर्णय है. मैं एक ही बात कहूंगा कि ये परिस्थितियां हैं और इनमें निर्णय लेने पड़ते हैं. राजनीतिक तौर पर मैं जब चौधरी देवीलाल की बात करता हूं तो उन्होंने कभी अपने झंडे और डंडे की कद्र नहीं की. उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं का साथ देखा. जब भीचाहे वो जनता पार्टी की बात होलोक दल होसमता पार्टी हो. जब भी उन्हें लगा कि हरियाणा की जनता के हित को दबाया जा रहा है तो उन्होंने उस दल को छोड़ा.

>> जब घर टूटता हैपार्टियां ऐसे बनती-बिगड़ती हैं तो उसे बचाने की कोशिश की जाती है. क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ कि आपको रोकने की कोशिश की गई?

जवाब- कोशिशें बिल्कुल की गईं. लोकदल पक्ष की तरफ से भी की गईं और हमारी तरफ से भी. मगर कई बार विज़न में क्लैशेस आ जाते हैं. डॉक्टर अजय चौटाला ने कहा कि यथास्थिति बहाल की जाए. और उसमें यही था कि इंडियन नेशनल स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन (इनसो) को बहाल किया जाए. इसके साथ जो दो जिलाध्यक्ष बदले गए थे और प्रदेश कार्यकारिणी के 4 लोग जो बर्खास्त किए गए थेउनको बहाल किया जाए. लेकिन जहां अहंकारी सोच बीच में आ जाती है वहां मांगें पूरी नहीं की जा सकतीं.

अपने दादा ओमप्रकाश चौटाला के साथ दुष्यंत चौटाला.
अपने दादा ओमप्रकाश चौटाला के साथ दुष्यंत चौटाला.

>> ऐसा लगता है कि विचारधारा से कहीं ज्यादा अहंकार की लड़ाई है. कौन हैजो नहीं चाहता कि आप सीएम फेस बनें?

जवाब- मैंने ये नहीं कहा कि मुझे सीएम बनना है. मैंने तो उस वक़्त भी यही कहा था कि मुझे हिसार से लोकसभा का चुनाव लड़ना है. मेरा जो काम हैवो एकतरफा पार्लियामेंट्री वर्किंग है. मैंने तो कभी चंडीगढ़ जाकर भी काम करने की कोशिश नहीं की. लेकिन कई बार लोगों के मन में असुरक्षा आ जाती है.

>> किनके मन में आ जाती हैं?

जवाब- आप मेरे से ज्यादा जानते हैं.

>> तो क्या ये संकेत हैं कि आगे चलकर जब मतभेद दूर हो जाते हैं तो दोनों संगठन एक हो सकते हैं?

जवाब- हमने जननायक जनता पार्टी बनाई है. हम जन-जन का एक मूवमेंट इस प्रदेश में चलाएंगे. ऐसे लोगजिनका विज़न और सोच चौधरी देवीलाल के काम से जुड़ी रही हैउन्हें एक मंच पर लाएंगे. इनेलो से बहुत से साथी छोड़कर आए हैं. भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के लोग पार्टी छोड़कर आए हैं. जल्द ही कांग्रेस और अन्य दलों के लोग भी हमें जॉइन करेंगे. अभी तो एक संगठन की शुरुआत है. और संगठन बनाने के बहुत जोर लगता है.

>> क्या दुष्यंत को ये भ्रम हो गया है कि वो बहुत बड़े मास लीडर हैं?

जवाब- अगर दुष्यंत में अहंकार होता तो वो लोकदल कैप्चर करता. अगर मेरे अन्दर अहंकार होता तो मैं पार्टी की दूसरी इकाइयों में काम क्यों नहीं कर रहा था? मैंने कहीं से भी पार्टी को हथियाने की कोशिश नहीं की.

>> ओपी चौटाला को एक क्रूर‘ राजनेता समझा जाता है जो अपने विरोधियों को माफ़ नहीं करते. इस छवि से इनेलो को कितना नुकसान होगा और जेजेपी को कितना फायदा होगा?

 जवाब- ओमप्रकाश चौटाला मेरे दादाजी हैं. और उन्होंने हमेशा अपने लोगों के लिए स्टैंड लिया है. जहां तक जेजेपी की बात है. हमारा लक्ष्य केवल ग्रामीण लोग नहीं हैं. हरियाणा का 33 फीसदी इलाका अर्बन या सब अर्बन हो चुका है. लेकिन उन लोगों को आवाज़ नहीं मिलती. हम इनके लिए काम करेंगे.

>> दुष्यंत चौटाला वो कौनसे 5 मुद्दे लेकर आएंगे जो बाकी पार्टियों के पास नहीं हैं ?

 जवाब- सबसे पहला मुद्दा रोज़गार मेरा अधिकार‘ है. प्राइवेट सेक्टर में भी हरियाणा के युवाओं को रोज़गार नहीं मिलता. एक नया ही ट्रेंड शुरू हुआ है जहां पहले इंटर्नशिप पर रखते हैंफिर तीन महीने के लिए कच्चे रखते हैं और जब पक्के करने की बात आती है तो उनको निकाल देते हैं. अनस्किल्ड और सेमी स्किल्ड लेबर ने हौंसला छोड़ दिया है कि उसे किसी प्रकार की नौकरी मिलेगी. हमारा पहला निर्णय यही होगा कि किसी भी प्राइवेट फैक्ट्री में 75 फीसदी रोज़गार हरियाणा के युवा को दिया जाए. इसके अलावा हरी चुनरी की चौपालएक बूथ 10 यूथ जैसे कार्यक्रम भी होंगे.

जैसे पंजाब में अकाली सरकार ने हर घर में साफ पानी पहुंचने के लिए RO प्लांट लगाए थेहम भी लगाएंगे. खेती में कर्जमाफी के अलावा हम ये करेंगे कि कोई भी उत्पादजिसकी कीमत हज़ार रूपये से ज्यादा हैउसपर हम 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देंगे. गन्ने की कीमत में जो भी रेट केंद्र सरकार तय करेगीउससे 10 परसेंट एक्स्ट्रा हम देंगे.

 हम दिल्ली की तर्ज पर स्कूलों में फी कैपिंग‘ शुरू करेंगे. जिससे अगर गरीब आदमी अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाना चाहे तो उसे दिक्कत का सामना ना करना पड़े. आज-कल गुडगांव में ऐसे-ऐसे स्कूल हैं जो 8-9 लाख रूपए सालाना लेते हैं.

>> बीजेपी से इनेलो के संबंध खराब हुए हैं. क्या आने वाले लोकसभा चुनाव में और उसके बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव में जेजेपी बीजेपी के साथ कोई गठबंधन करेगी?

 जवाब- जहां तक जेजेपी की बात हैतो ये अभी पैदा हुआ संगठन है. अपना संगठन मजबूत करने के बाद पहले लोकसभा और उसके बाद विधानसभा चुनाव में जितनी मजबूती के साथ लड़ पाएं वही हमारी प्राथमिकता है. हमारा लक्ष्य है कि जनवरी के अंत तक एक मजबूत संगठन खड़ा करें.

>> एक बूथ दस यूथ की तर्ज पर ही आपने जींद रैली में एक वोट एक नोट की बात कही थी. कौनसा नोट है वो?

जवाब- हमारा लक्ष्य ये नहीं है कि बीजेपी और कांग्रेस की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों को साथ लेकर चुनाव लड़ें. हम चौधरी देवीलाल के विचारों से जुड़े हुए हैं. नोट तो एक रूपये का भी होता है और 2000 का भी. चुनाव में पैसा खर्च होता है. हम जनता के पास जा रहे हैं. वो हमें चुनाव लड़ाएगी और चुनाव जितावाएगी. 

दुष्यंट चौटाला ने जींद में ही जन-जन पार्टी बनाने की घोषणा की थी.
दुष्यंट चौटाला ने जींद में ही जन-जन पार्टी बनाने की घोषणा की थी.

>> हरियाणा में चौधरी देवीलाल के बहुत से किस्से हैं. जब आप बड़े हो रहे थेतो देवीलाल के साथ आपका क्या अनुभव था?

जवाब- उनके साथ मुझे रोहतक बेल्ट में घूमने का मौका मिला. देवीलाल जितने चुनाव जीते नहीं उससे कहीं ज्यादा हारे थे. लेकिन जब भी वो चुनाव हारते तो अगले दिन का नाश्ता जीतने वाले के यहां करते थे. और कहते थे तुमने चुनाव बेशक जीत लिया लेकिन दिल तो देवीलाल ने ही जीता है. वो उनकी आर्ट थी. जो उनसे मिला वो देवीलाल का हो गया.

>> लेकिन आपके दादा ओमप्रकाश चौटाला देवीलाल से एकदम उलट व्यक्तित्व रखते हैं.

 जवाब- खरे व्यक्ति हैं. और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है. उनके फैसले कठोर होते थे. उनके मुख्यमंत्री रहते हुए भी बहुत काम हुआ. आने वाले समय में परिस्थितियां बदलेंगी.

>> परिस्थितियां बदलेंगीमतलब वो आपके साथ आएंगे?

 जवाब- मैं इसपर कुछ नहीं कहूंगा. आज वो हमारे विरोधी दल के नेता हैं. अगर वो इस्तीफ़ा देते हैं तो निश्चित ही हम उनकी फोटो भी अपने पोस्टर में लगाएंगे.

>> आपसे ये कहा गया कि आप हिसार से इनेलो के सांसद हैं. लेकिन अब आपने पार्टी छोड़ दी है तो आपको संसद से भी इस्तीफ़ा देना चाहिए.

जवाब- पार्टी ने मुझे प्राइमरी मेंबरशिप से निष्कासित कर दिया गया है. मैंने लोकसभा स्पीकर को लिखित में ये दिया है कि अब मैं इनेलो का हिस्सा नहीं हूं. तो मुझे इस्तीफ़ा क्यों देना चाहिएमुझे हिसार की जनता ने चुनकर भेजा है. मेरा दायित्व है कि मैं अपनी ज़िम्मेदारी निभाऊं. इनेलो इस बात का जवाब दे जब मुझे निकाल ही दिया तो मैं इस्तीफ़ा क्यों दूंअगर वो मुझे सस्पेंड करते और इस्तीफ़ा देने के लिए कहते तो मैं सोचता भी. अब जब मैं उनकी पार्टी का हिस्सा ही नहीं हूं तो वो किस अधिकार से मेरा इस्तीफ़ा मांग रहे हैं?

>> राजनीति के आलावा और क्या करते हैं?

 जवाब- जब पार्लियामेंट का सेशन चल रहा होता है तो बैडमिंटन खेल लेते हैं. हमारा ग्रुप हैं यहां. टूर्नामेंट्स भी होते हैं. जब संसदीय क्षेत्र में होता हूं तो सैर कर ली जाती है. परिवार के साथ होते हैं तब फिल्म देख ली जाती है. किताबें आजकल बहुत कम पढ़ पाता हूं. पहले तो महीने में 2 से 3 किताबें पढ़ ली जाती थीं. अब तो बस सफ़र में दौरान कोई ऑडियोबुक सुनने का ही समय मिल पाता है.


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