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वो जबराट नेता, जिसकी खोपड़ी भिन्नाट हो तो चार-छह आतंकी खुद ही निपटा दे

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पुतिन. एक ऐसा नाम जो रूस का पर्याय बन चुका है. जिसके बारे में कहानियां चलती हैं कि वो डेढ़ सौ साल से जिंदा है. रूस की रक्षा कर रहा है. दुनिया की सबसे ठंडी जगह साइबेरिया में नंगे बदन खड़े पुतिन की फोटो इस बात की गवाह है. सोवियत यूनियन के टूटने के बाद पुतिन से बड़ा नेता रूस में हुआ नहीं है. शायद पूरे ग्लोब पर इतना फेमस नेता नहीं हुआ है. दुनिया में जितने लोग अमेरिका से चिढ़ते हैं, उनको पुतिन में अपना हीरो नजर आता है. सबको यही लगता है कि सिर्फ पुतिन ही अमेरिका को रोक सकते हैं. अमेरिका और यूरोप के धमकाने के बावजूद पुतिन ने अपनी सेना भेज यूक्रेन से क्रीमिया छीन लिया. भारत में भी पुतिन के प्रशंसक बहुत हैं.

और हम आपको बतायेंगे कैसे पुतिन ने अपनी ये इमेज बनाई:

1.


सेंट पीटर्सबर्ग. 18वीं शताब्दी का शहर. पुतिन का शहर. 7 अक्टूबर 1952 को जन्मे पुतिन की दिलचस्पी सिनेमा में हुआ करती थी. खास तौर से फौजियों की फिल्में. पढ़ने में ठीक थे पुतिन. लॉ किये. कराटे, जूडो की ट्रेनिंग लिये. फिर रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी में चुन लिये गये. वहां तेजी से आगे बढ़े. लेफ्टिनेंट कर्नल की पोस्ट तक पहुंच गये. उधर 1990 आते-आते सोवियत यूनियन की वाट लग गई थी. 1991 में ये कई देशों में टूट गया. उस वक्त के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव पर बड़े आरोप लगे कि देश बर्बाद कर दिया. रूस में निराशा फैल गई थी. इन्हीं हालात में पुतिन ने नौकरी से रिजाइन कर दिया. और राजनीति में आ गये.

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इसी राजनैतिक क्राइसिस के दौरान 1994 में रूस में राष्ट्रीयता की भावना बहुत तेजी से बढ़ रही थी. इसी में रूस ने अपने दक्षिण के चेचेन्या पर हमला कर दिया. जिसे डेढ़ सौ साल तक अपने कब्जे में रखने के बाद 1954 में आजाद कर दिया था. 1996 से रूस में पुतिन का कद बढ़ने लगा. क्योंकि पुतिन चेचेन्या वाले मामले को बहुत अच्छे से हैंडल कर रहे थे. 1999 में रूस के प्रेसिडेंट बोरिस येल्तसिन को इस्तीफा देना पड़ा. क्योंकि उन पर कई तरह के आरोप लगे थे. अब रूस में समस्या हो गई कि कौन गद्दी संभालेगा. पुतिन ने यहीं पर अपना अंदाज दिखाया. सबको मैनेज कर लिया. कहा जाता है कि बोरिस के सपोर्टर्स को भी अपनी तरफ कर लिया. क्योंकि उनसे डील हुई थी कि बोरिस पर कोई जांच कमिटी नहीं बैठाई जायेगी. और फिर पुतिन रूस के प्रेसिडेंट बन गये.

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3.


उसके बाद कई तरह के बदलाव लाना शुरू कर दिया. देश में प्रोविंसेज के गवर्नरों को चुनने और डिसमिस करने का अधिकार खुद ले लिया. इसके पहले वो चुन के आते थे. इंटरनेशनल मीडिया ने इस पर बहुत बवाल काटा. कि ये तानाशाही है. पर पुतिन का नसीब अच्छा था. उसी वक्त तेल के दाम बढ़े, फायदा हुआ, खुशहाली आई. इंडिया के लिये भी ये अच्छा रहा. रूस के साथ स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप हुई. जिसके बारे में 2012 में पुतिन ने कहा था कि ये बेस्ट समझौता था.

Russian President Vladimir Putin waves at the end of a two-day visit in Tripoli, Libya Thursday, April 17, 2008. Russia said Thursday that it will write off US$4.5 billion in Libyan debt in exchange for multibillion dollar deals for its firms, Russian news agencies reported. (AP Photo/Abdel Magid Al Fergany)
(AP Photo)

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किसी नेता के लिये अपने देश पर हमला होना या किसी भी तरह का मिलिट्री खतरा होना उसके लिये सबसे बड़ा मौका होता है अपने आप को स्थापित करने का. पुतिन के पास भी मौका आया. जब दूसरा चेचेन वॉर शुरू हुआ. रूस में फिर से टूटने की बात होने लगी. पर इस बार पुतिन ने चेचेन्या को एकदम से ठेल दिया. इसी बीच 2004 में चेचेन्या के आतंकवादियों ने बेसलान के एक स्कूल में बच्चों को बंधक बना लिया. पुतिन ने उनसे किसी भी तरह की बात नहीं की. मिलिट्री एक्शन लगा दिया. इसमें 126 बच्चे मारे गये. इंटरनेशनल मीडिया ने पुतिन की खूब आलोचना की. पर जनता में पुतिन का रुतबा बढ़ गया. यही नहीं बाकी दुनिया में भी पुतिन को इज्जत से देखा जाने लगा. इंडिया में भी इस बात की चर्चा हुई कि आतंकवाद से निपटने के लिये ऐसा ही एटिट्यूड रखना चाहिये.

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5.


वहीं अमेरिका की नजर में पुतिन समस्या बनते जा रहे थे. क्योंकि पुतिन का रूस अब अमेरिका को टक्कर दे रहा था. इसी बीच पुतिन पर एक आरोप लगा. 2006 में रूस से भागे जासूस अलेक्जेंडर लिटिवेंको को ब्रिटेन में जहर दे दिया गया. वो जासूस रूस और पुतिन के खिलाफ बोल रहा था. आरोप लगा रहा था कि विपक्षी नेताओं का कत्ल हो रहा है. इसी जासूस ने सबसे पहले माफिया शब्द बोला था. ब्रिटेन ने उसे शरण दी थी.

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6.


पुतिन ने अमेरिका से अपनी अदावत कम करने की कोशिश नहीं की. 2007 में ईरान गये. उसी वक्त ईरान का अमेरिका से पंगा चल रहा था. इराक के बाद अब ईरान पर अमेरिका आरोप लगा रहा था कि वहां पर एटम बम बनाये जा रहे हैं. वहीं 1943 के बाद ईरान जाने वाले पहले रूसी प्रेसिडेंट थे पुतिन.
रूस में इस बात से खुशी ही थी. फिर 2008 में पूरी दुनिया में इकॉनामिक क्राइसिस आ गई थी. और उसी वक्त पुतिन को गद्दी छोड़ना पड़ा. क्योंकि नियम के मुताबिक रूस में कोई इंसान लगातार दो बार से ज्यादा प्रेसिडेंट नहीं बन सकता था.

2008 में एक फ्रेंच डिप्लोमेट के मुताबिक पुतिन ने कहा था जार्जिया के प्रेसिडेंट को टट्टों से लटकाकर मार दूंगा.

पुतिन नाम है हमारा. बता दीजियेगासबको. (1)

 

7.


अब रूस में बड़ा बदलाव हुआ. दिमित्री मेदवेदेव प्रेसिडेंट बने और पुतिन बने प्रधानमंत्री. रूस में पहली बार ऐसा हुआ कि प्रधानमंत्री प्रेसिडेंट से ज्यादा ताकतवर था. पुतिन ने इस मोर्चे पर भी जनता को निराश नहीं किया. 2008 में जब पूरी दुनिया इकॉनमिक क्राइसिस से जूझ रही थी तब रूस आराम से था. इसके अलावा पुतिन ने रूस की एक और बड़ी समस्या को सुलझाया. 1990 से ही वहां पर आबादी घट रही थी. पुतिन ने नये नये नियम बनाये. 2008 से 2011 के बीच आबादी में काफी बदलाव आया. इसके साथ ही सिक्योरिटी, मिलिट्री, पुलिस रिफॉर्म भी हुये. ये चीजें जनता के मन पर बड़ा प्रभाव डालती हैं. इससे पुतिन की इमेज काफी बदली. वो अपनी पार्टी यूनाइटेड रशिया के प्रेसिडेंट बन गये.

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8.


2012 में पुतिन ने फिर चुनाव लड़ा. जीत गये. पर आरोप खूब लगे थे कि धांधली हुई है. उसी साल वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन में रूस शामिल हुआ. ये एक संकेत था कि रूस अब अमेरिका का छोटा भाई बन के रहना चाहता है. क्योंकि कॉल्ड वॉर से चलकर अब रूस अमेरिका की चौधराहट वाले संगठन में शामिल हो गया था. पर ये एक छलावा था.

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9.


2011 में मिडिल ईस्ट के देशों में डेमोक्रेसी को लेकर बहुत विद्रोह हुआ था. इस चीज को अमेरिका और यूरोप ने बड़ा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था. पूरी कोशिश की जा रही थी कि जहां भी तानाशाही है, डेमोक्रेसी लाई जाय़े. दिक्कत ये थी कि ये लोग पुतिन को भी तानाशाह मानते थे. रूसी शतरंज खिलाड़ी गैरी कॉस्परोव ने भी पुतिन को डिक्टेटर कहा था. इससे पहले पुतिन लीबिया भी गये थे. जहां अमेरिका ने बम गिराकर डेमोक्रेसी लाने की बात की थी. फिर पुतिन ने अमेरिका को मौका दे भी दिया.

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10.


2013-14 में यूक्रेन पर हमला कर क्रीमिया पर कब्जा कर लिया. ये हिस्सा रूस ने 1954 में ही यूक्रेन को सौंप दिया था. पर फिर मुकर गये. क्योंकि इस हिस्से में अमेरिका का प्रभाव बढ़ रहा था. नाटो देश इस क्षेत्र के देशों को अपने में शामिल कर रहे थे. रूस को चारों तरफ से घेरा जा रहा था. पर ये हमला हैरान करने वाला था. क्योंकि जहां एक तरफ मिडिल ईस्ट के देशों पर माहौल खराब करने का आरोप लग रहा था, वहीं रूस जैसे बड़े देश का ऐसा करना माहौल को और खराब करने वाला था.

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11.


फिर पुतिन ने 2000 से ही सीरिया को हथियार बेचना शुरू कर दिया था. और 2015 में सीरिया की लड़ाई में बशर अल असद को सपोर्ट किया जिसको अमेरिका गद्दी से उतारना चाहता था. पुतिन ने इराक वॉर में भी अमेरिका को सपोर्ट नहीं किया था. तब तक एक और घटना हो गई. अमेरिका के एडवर्ड स्नोडेन ने लीक कर दिया कि अमेरिकी सरकार दुनिया भर के नेताओं की बातें सुनता है. सबकी जासूसी करता है. इसके बाद अमेरिका की बड़ी थू थू हुई. स्नोडेन को देश छोड़कर भागना पड़ा. दुनिया में कहीं भी उसे जगह नहीं मिल रही थी. पुतिन के यहां मिली. पुतिन के अलावा कोई और नहीं कर सकता था ये.

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12.


पुतिन के सपोर्टर्स ने उनको एक ऐतिहासिक इंसान बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा है. उनके नाम पर कई तरह के गाने बने हैं. सुपर हीरो की इमेज है. टफ गॉय. Be Like Putin मूवमेंट भी चलाया गया. कभी-कभी पुतिन फेन्या बोलते हैं. वहां की बंबईया भाषा. भाई लोगों की भाषा. पुतिन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है. मिलिट्री जेट उड़ाना, मॉर्शल आर्ट, घोड़ा, रैफ्टिंग, फिशिंग, साइबेरिया में नंगे बदन घूमना, भालू मारना, मोटरबाइक, फाटरफाइटिंग, व्हेल पकड़ना सब करते हैं. सबकी फोटो मीडिया में आती है. इनके नाम पर जोक भी बने हैं: Before Putin there was no orgasm.

Russia's President Vladimir Putin lies on the snow during a walk with dogs in Moscow Region

Photo Credit: Reuters


 

 

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