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गुजरात का यह मंदिर कैसे सूबे की सियासत का सबसे बड़ा अखाड़ा बन गया है

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गुजरात में एक जिला है खेड़ा. यहां की तहसील कठलाल का एक गांव फागवेल. तारीख थी, आठ सितम्बर 2002. गुजरात में दंगों को छह महीने होने जा रहे थे. मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव आयोग को राज्य में नए सिरे से चुनाव करवाने के लिए अर्जी भेज चुके थे, हालांकि अभी सरकार का कार्यकाल पूरा होने में साल भर का वक़्त बचा हुआ था. उन्हें पता था कि जल्द ही चुनाव की घोषणा हो सकती है. ऐसे में उन्होंने “गुजरात गौरव यात्रा” के नाम से प्रचार अभियान शुरू किया. कहने के लिए यह यात्रा गोधरा दंगे के बाद खराब हुई सांप्रदायिक स्थिति को सुधारने और गुजरात के खोए हुए गौरव को लौटाने के लिए थी लेकिन सब जानते थे कि यह दरअसल आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी है.

नरेंद्र मोदी को 2002 में अपने लिए जनादेश की तलाश थी
नरेंद्र मोदी को 2002 में अपने लिए जनादेश की तलाश थी.

फागवेल गांव में लोकदेवता भाथीजी का मंदिर है. इसी मंदिर के चौक से इस यात्रा की शुरुआत होनी थी. 1100 क्षत्रिय युवकों द्वारा स्वागत के बाद नरेंद्र मोदी ने मंदिर के चौक पर जुटे करीब 40 हजार लोगों को संबोधित करना शुरू किया,

“कुछ दिन पहले इसी स्थान पर शंकर सिंह वाघेला द्वारा आयोजित एक यात्रा का अंत हुआ था और आज यहां से एक यात्रा प्रारंभ होने जा रही है. जहां कांग्रेस का अन्त है, वहीं से भाजपा के कामों की शुरुआत होती है.”

गुजरात में कांग्रेस 1995 के साल से ही घुटनों के बल थी. 1998 के चुनाव में भी 117 सीटों के साथ बीजेपी सत्ता पर काबिज रही. 2002 के विधानसभा चुनाव ने कांग्रेस को हाशिए पर लगा दिया. 182 में से 127 सीट के साथ नरेंद्र मोदी सत्ता पर काबिज हुए. 2007 में 117 और 2012 में 116 सीट के साथ वो सूबे के मुख्यमंत्री बने रहे. इस लिहाज से देखें तो आठ सितंबर 2002 को नरेंद्र मोदी द्वारा कही गई बात एक हद तक सही साबित हुई.

अब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी एक महीने में दूसरे गुजरात दौरे पर हैं. वो 9, 10 और 11 अक्टूबर को गुजरात में रहेंगे. इस दौरान वो फागवेल के भाथीजी महाराज के मंदिर भी जाएंगे. आखिर यह मंदिर क्यों इतना ख़ास है?

कौन है भाथीजी महाराज 

मध्यकाल के किसी दौर में फागवेल गांव पर तख्त सिंह राठौड़ का शासन हुआ करता था. उनके दूसरे लड़के का नाम था भाथीजी. भाथीजी जब जवान हुए तो उनके पिता तख्त सिंह ने उनका विवाह कुंकूबेन के साथ नक्की किया. तय दिन उनकी शादी हुई. शादी का चौथा फेरा पूरा ही हुआ था कि भाथीजी को सूचना मिली कि कपडवंज के मुस्लिम शासक कासिम खान ने उनके खिलाफ हुई शिकायत के चलते गांव की गायों को ज़ब्त करने का आदेश दिया है. कासिम खान के कारिंदे गायों को हांककर कपडवंज ले जा रहे हैं.

भाथीजी की प्रतिमा
भाथीजी की प्रतिमा

भाथी जी को जब यह बात पता चली तो उन्होंने चलती शादी छोड़कर गायों को बचाने का निर्णय लिया. वो हाथ में नंगी तलवार लेकर अपने सफेद घोड़े पर अकेले युद्ध करने पहुंच गए. लड़ाई के दौरान दुश्मन की तलवार से उनकी गर्दन धड़ से अलग हो गई. दंतकथाएं हैं कि आखिरी दुश्मन को मारने तक उनका बिना सिर वाल धड़ लड़ता रहा. सफ़ेद घोड़े पर नंगी तलवार लिए भाथीजी की मूर्ति आज भी सौराष्ट्र के हर गांव में मिल जाएगी.

भाथीजी भले ही राठौड़ राजपूत रहे हो लेकिन उनमें श्रद्धा रखने वाले ज्यादातर लोग पिछड़े वर्ग और दलित समुदायों से आते हैं. दरअसल बहादुरी के अलावा उन्हें इसलिए भी पूजा जाता है क्योंकि उन्हें सांप का जहर उतारने वाले देवता के रूप में जाना जाता है. भाथीजी से जुड़ी लोककथा में नाग देवता एक अहम किरदार हैं. दूसरा वो मवेशियों को चंगा करने वाले देवता भी हैं. ऐसे में पारम्परिक तौर पर खेती और पशुपालन से जुड़ी जातियां उन्हें पूजती आई हैं. यही वजह है कि खेड़ा जिले के छोटे से गांव फागवेल में बना भाथीजी का मंदिर गुजरात में ओबीसी जातियों को लुभाने का अखाड़ा साबित होता है.

भाथीजी मंदिर फागवेल
भाथीजी मंदिर फागवेल

वाघेला के जाने से फायदे में कांग्रेस

शंकर सिंह वाघेला का जाना कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान था, लेकिन इससे कांग्रेस को एक फायदा हुआ. शंकर सिंह वाघेला के गुट के बागी विधायक और नेता उनके साथ पार्टी से बाहर हो गए. इससे ताकत घटने के बावजूद कांग्रेस उस गुटबंदी से बाहर निकलने में कामयाब रही जो उसे अंदर से खोखला कर रहा था. कांग्रेस अब नए अनुशासन में दिख रही है. अमित शाह की तमाम घेरेबंदी के बावजूद अहमद पटेल के राज्यसभा सदस्य बनने ने भी कांग्रेस के आम कार्यकर्ता में नया उत्साह भरा है.

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शंकर सिंह वाघेला

15 दिन में दूसरा दौरा

15 साल बाद गुजरात में बीजेपी के पास नरेंद्र मोदी जैसा करिश्माई चेहरा नहीं है. इसके अलावा बीजेपी 22 साल बाद सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है. ऐसे में राहुल गांधी को पता है कि गुजरात में बीजेपी की हार का दूरगामी परिणाम 2019 के लोकसभा चुनावों पर पड़ा है. वो इस मौके को भुनाने में कोई कसर छोड़ना नहीं चाह रहे हैं. वो 25 और 26 सितम्बर को गुजरात के दौरे पर थे. इसके बाद वो 9 से 11 अक्टूबर तक फिर से तीन दिन के गुजरात दौरे पर रहेंगे.

विकास पागल हो गया है

अपने इस तीन दिवसीय दौरे के दौरान राहुल गांधी ने पहली सभा को संबोधित किया खेड़ा में. अपने भाषण में उन्होंने नोटबंदी, भूमि अधिग्रहण कानून, बड़े उद्योग घरानों और बीजेपी की साठ-गांठ पर हमला बोलने के बाद अपना भाषण खत्म किया. वो नमस्कार और जय हिन्द बोलने के बाद मंच छोड़ ही रहे थे कि एक बार फिर से पलटकर माइक के पास आए. उन्होंने बोलना शुरू किया-

राहुल गांधी गुजरात में कांग्रेस की नैय्या पार करवाने के लिए हर चंद कोशिश कर रहे हैं
राहुल गांधी गुजरात में कांग्रेस की नैय्या पार करवाने के लिए हर चंद कोशिश कर रहे हैं

“अच्छा भैया एक और बात बताइए, गुजरात में विकास को क्या हो गया है?”

इसके बाद तेज़ आवाज में जवाब पाने की गरज में उन्होंने अपना कान भीड़ के तरफ घुमा दिया. भीड़ से जवाब आया है, “विकास पागल हो गया है.” राहुल गांधी ने फिर से बोलना शुरू किया-

“ये कैसे पागल हुआ? कैसे पागल हुआ ये?”

इसके बाद उन्होंने अपनी दाहिनी आस्तीन ऊपर की तरफ खींची और फिर से बोलना शुरू किया-

“ये झूठ सुन-सुन कर पागल हो गया है.”

दरअसल “विकास पागल हो गया है.”, ये वो जुमला है जिससे बीजेपी अभी सबसे ज्यादा परेशान है. कांग्रेस ने साफ़ कर दिया है कि वो अपना चुनाव इसी एक लाइन के इर्द-गिर्द लड़ने जा रही है. बीजेपी के पास फिलहाल इसका कोई माकूल जवाब नहीं है. सोशल मीडिया में इस तर्ज पर बहुत सारे चुटकुले बनाए जा रहे हैं, जोकि बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं.

कांग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व

माधव सिंह सोलंकी 1980 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए एक जिताऊ फार्मूला लेकर आए थे. इस फार्मूले का नाम था “खाम”. खाम माने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम. इसी फार्मूले के चलते गुजरात 1980 के चुनाव में 182 में से 141 और 1985 के चुनाव में 149 सीट हासिल करने में कामयाब हुई थी. 149 का आंकड़ा आज भी गुजरात में कीर्तिमान है.

1990 में राम मंदिर आंदोलन के बाद गुजरात की सियासत पूरी तरह बदल गई. यहां जाति के बजाय ध्रुवीकरण का मुख्य आधार धर्म हो गया. जाहिर है कि इसका फायदा बीजेपी को हुआ. आदिवासी, मुस्लिम और दलित आज भी कांग्रेस के परम्परागत वोटर माने जाते हैं.

राहुल गांधी अपने दोनों दौरों में कई सारे मंदिरों के दर्शन करने जा रहे हैं. यह अब तक सिर्फ बीजेपी के चुनाव प्रचार का तरीका रहा है. अपने पिछले दौरे की शुरुआत उन्होंने द्वारिका में कृष्ण भगवान के मंदिर के दर्शन से की थी. इस बार भी भाथीजी मंदिर के अलावा संतराम मंदिर भी जाने वाले हैं. जानकार मानते हैं कि कांग्रेस सूबे में सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रही है.

भले ही 22 साल बाद सत्ता विरोधी लहर बीजेपी के खिलाफ हो. भले ही नरेंद्र मोदी सूबे की राजनीति में सीधे तौर पर शामिल न हो लेकिन नरेंद्र मोदी के करिश्मे को चुनौती देना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती होगा. ख़ास तौर पर तब जब वो “गुजराती गौरव” को अपने झोले में लेकर चलते हैं. गुजरातियों की भाषा में देश का “बड़ा प्रधान” उनके गृह राज्य का है. गुजराती अस्मिता बीजेपी के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकती है.


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