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अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

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मैं आपकी नज़र में एक ऐसा आदमी हूं, जिसे आप हिजड़ा नाम से पुकारते हैं. मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है. बस यही बात भारत में रहने वाले लोग पसंद नहीं करते. इसीलिए मैं खुदकुशी कर रहा हूं. मेरे मरने का आरोप किसी भी व्यक्ति या मेरे परिवार, मेरे रिश्तेदारों या दोस्तों पर मत लगाइएगा.

19 साल के अविंशु पटेल ने फेसबुक पर ये पोस्ट डाली. फिर जैसा कि उसने अपनी पोस्ट में लिखा था, आत्महत्या कर ली.

आप सबसे विनती है …. मेरे मरनेका कार कीसी भी व्यक्ती ओर मूझसे जूडे कोईभी कंपनी या शहर को ना ठेराए …. मे आपकी नजर …

Posted by Avi Patel on Tuesday, 2 July 2019

महाराष्ट्र के शहादा में था अविंशु का घर. अभी वो घर से दूर चेन्नै में रह रहा था. यहां नौकरी करता था. 2 जुलाई की रात करीब साढ़े 10 बजे अविंशु ने ये पोस्ट डाली. फिर उसने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया. अगले दिन अविंशु की लाश समंदर के किनारे मिली. ऊपर जो पोस्ट है, उसे पोस्ट करने के करीब 45 मिनट पहले भी उसने एक पोस्ट की थी. लंबी-चौड़ी. टूटी-फूटी अंग्रेजी में. इसमें लिखा था-

आपका बहुत-बहुत शुक्रिया. उनका भी जिन्होंने मुझे प्यार दिया. उनका भी, जिन्होंने मुझसे नफ़रत की. मैं समलैंगिक हूं. मेरा परिवार भी जानता है कि मैं बस लड़कों को पसंद करता हूं. मगर बाकी लोग मुझसे नफ़रत करते हैं. मैं कुणाल से प्यार करता था. वो ‘नॉर्मल’ है. उसकी शादी हो चुकी है. मैं प्यार का भूखा हूं, मगर सारे लोग मेरा बस इस्तेमाल करते हैं.

Thanks u so much guys loved me and hate also
I’m gay
That’s way I don’t for myself
And my family also know I liked…

Posted by Avi Patel on Tuesday, 2 July 2019

अविंशु की कमज़ोर अंग्रेजी, उसके गड़बड़ व्याकरण के कारण आपको उसकी लिखी पंक्तियां समझने में कुछ मुश्किल आ सकती हैं. उसने खुद पोस्ट में लिखा भी है कि उसकी अंग्रेजी कमज़ोर है. इसके लिए उसने अपने स्कूल के टीचर से मुआफ़ी भी मांगी है. उसने लिखा है कि टीचर तो अच्छा पढ़ाते थे, मगर उसका दिमाग तब काम नहीं करता था. क्योंकि साथ के लोग उसे ‘हिजड़ा’ कहकर चिढ़ाते रहते थे. अगर ग़ौर से पढ़िएगा, तो उसके कहे का भाव, उसकी तकलीफ़ अंदर उतरती जाएगी. मसलन, उसने इस पोस्ट में एक जगह लिखा है-

मैंने ईश्वर से प्रार्थना की है. कि या तो वो लोगों को प्रॉपर लड़का बनाकर पैदा करे. या फिर प्रॉपर लड़की बनाकर.

उस 19 साल के लड़के ने कितना झेला होगा कि वो खुद को मारने से पहले ये लाइन लिखकर छोड़ गया! पोस्ट में अविंशु बार-बार लिखता है. कि उसकी आत्महत्या का दोष किसी के माथे न मढ़ा जाए. न उसके दोस्त, न रिश्तेदार, न परिवार, न उसकी कंपनी, न शहर के लोग, कोई नहीं जिम्मेदार. उसे शायद अपने जाने के बाद परिवार को होने वाली आर्थिक तंगी की भी चिंता होगी. शायद इसीलिए उसने कुछ जगह पोस्ट पढ़ने वालों से उसके परिवार का खयाल रखने की भी अपील की है. वो पोस्ट में बताता है कि वो गरीब है. उसके कंपनी वाले बैंक खाते में बस 9 हज़ार रुपये हैं. फिर वो लोगों से ये भी अपील करता है कि-

प्लीज प्लीज, भगवान से प्रार्थना कीजिए कि वो मेरे स्तर का, मेरे टाइप का किसी को न पैदा करें.

अविंशु का ये अंग्रेजी वाला पोस्ट आपको पढ़ना ही पढ़ना चाहिए. उसके दिमाग में कितनी बातें होंगी. कितना कुछ लिखना होगा उसे, आपको ये पढ़कर समझ आता है. वो चीजें रिपीट करता है. कभी अपने समलैंगिक होने की मुआफ़ी मांगता है. क्योंकि उसके दिमाग में ये बात बैठा दी गई है कि समलैंगिक होना बेहद घटिया, बेहद छी बात है.

सोचिए. आपके हाथ जैसे हैं, वैसे क्यों हैं? अगर ये कहकर आपको सताया जाए, आपको इसका ताना दिया जाए, आपको नीचा दिखाया जाए, इस कदर कि आपको अपने हाथों से नफ़रत हो जाए, तो? अविंशु का गे होना उसकी ग़लती नहीं थी. ये कोई बीमारी नहीं थी. मगर 19 साल की छोटी ज़िंदगी में उसे बस इस बात के लिए इतना टॉर्चर किया गया कि उसे अपने गे होने पर पछतावा होने लगे. ये उसके लिए शर्मिंदगी की बात हो गई. वो इतना अपमानित महसूस करने लगा कि मर जाना बेहतर लगा. आखिरी में अविंशु की पोस्ट का एक हिस्सा पढ़ते जाइए, ताकि हम सब समलैंगिकों के प्रति अपनी सोच, अपने बर्ताव को खुद ही घूर सकें. खुद को जज कर सकें कि क्या हमने कभी किसी को ऐसा महसूस करवाया है? ये हिस्सा है-

मरने के बाद मैं भगवान के घर जाऊंगा. मैं उनसे पूछूंगा कि आपने ऐसा क्यों किया? शरीर मुझे लड़के का दिया, मगर मेरी सोच और मेरी भावनाएं लड़कियों सी दे दीं. क्यों उसने उन लोगों को पैदा किया, जो मुझसे नफ़रत करते हैं? जो मुझ जैसे लोगों के परिवार, उनके पिताओं, उनकी मांओं को दोष देते हैं. 


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