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मादी शर्मा: पीएम के साथ तस्वीर से लेकर कश्मीर में विवादित डेलिगेशन भेजने तक

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यूरोपियन यूनियन (EU) के 23 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल 29 अक्टूबर को कश्मीर पहुंचा. अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी किए जाने के बाद ये पहला हाई-लेवल विदेशी डेलिगेशन है, जिसे कश्मीर जाने की इजाज़त मिली. हालांकि EU ने कहा है कि ये डेलिगेशन EU का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं है. जो भी हो, मोदी सरकार की तरफ से इस डेलिगेशन को कश्मीर जाने की इजाज़त मिली, ये बड़ी बात है. खासकर ये देखते हुए कि कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार काफी सतर्कता बरत रही है और कई विपक्षी नेताओं को कश्मीर जाने से रोका गया है.

और ठीक इसी वजह से डेलिगेशन की कश्मीर यात्रा को लेकर कई गंभीर आपत्तियां उठाई गई हैं. और इसी संदर्भ में मादी शर्मा नाम की एक महिला का नाम सामने आया है. मादी का एक NGO है- WESTT. कहा जा रहा है कि EU डेलिगेशन के इस कश्मीर दौरे के पीछे इसी WESTT का हाथ है. इस बात के सामने आने के बाद से दो सवाल सभी की ज़बान पर हैं –

>> मादी शर्मा कौन हैं?

>> कोई एनजीओ विदेशी सांसदों का एक ऐसा कश्मीर दौरा कैसे आयोजित करा सकता है जिसे सरकार का पूरा सहयोग मिले?

ब्रिटेन के एक नेता के बयान से शुरू हुई बात
क्रिस डेविस. ये जनाब नॉर्थ वेस्ट इंग्लैंड से लिबरल डेमोक्रैट्स पार्टी के EU सांसद हैं. 29 अक्टूबर को इनका बयान आया. इनके मुताबिक, उन्हें भी जम्मू-कश्मीर का दौरा करने का न्योता मिला था. 7 अक्टूबर को WESTT नाम के एक संगठन ने उन्हें ये न्योता भेजा. WESTT का पूरा नाम है- Women’s Economic and Social Think Tank. इस न्योते के जवाब में क्रिस ने कश्मीर जाने पर अपनी रज़ामंदी दी. मगर अपनी शर्त भी रखी. कहा, वो बिना सेना या पुलिस या सुरक्षाबल के रहेंगे. खुलकर कश्मीर देखना चाहेंगे. अपनी मर्ज़ी से जहां चाहें, वहां जाना चाहेंगे. लोगों से बात करना चाहेंगे.

क्रिस डेविस यूरोपियन संसद के सदस्य हैं. MEP यूरोपियन पार्लियामेंट के निर्वाचित सदस्य होते हैं. ये क्रिस के ट्विटर हैंडल का स्क्रीनशॉट है.
क्रिस डेविस यूरोपियन संसद के सदस्य हैं. MEP यूरोपियन पार्लियामेंट के निर्वाचित सदस्य होते हैं. ये क्रिस के ट्विटर हैंडल का स्क्रीनशॉट है.

क्रिस के मुताबिक, 7 अक्टूबर को भेजे मेल पर अगले दिन, यानी 8 अक्टूबर को उन्होंने ये जवाब दिया. क्रिस के मुताबिक, ये शर्त रखने के दो दिन बाद यानी 10 अक्टूबर को WESTT ने न्योता वापस ले लिया. ‘इंडिया टुडे’ को भेजे जवाब में क्रिस ने कहा-

मैं मोदी सरकार के लिए किए जा रहे किसी PR स्टंट में हिस्सा लेने और ये जताने को तैयार नहीं कि सब ठीकठाक है. ये साफ है कि कश्मीर में लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्वस्त कर दिया गया है. दुनिया को इसपर ध्यान देना शुरू करना चाहिए. ऐसा क्या है जिसे भारत सरकार छुपा रही है? क्यों वो वहां आ रहे पत्रकारों और राजनेताओं को स्थानीय लोगों से खुलकर बात नहीं करने दे रही है? मुझे आशंका है कि चीजें सही दिशा में नहीं जा रही हैं. लोगों की आज़ादी छीनकर और सेना का राज कायम करके सरकार लोगों का दिल-दिमाग नहीं जीत सकती. ऐसे में हिंसक प्रतिक्रिया का काफी जोखिम है.

EU डेलिगेशन के कश्मीर पहुंचने के बाद क्रिस ने कहा, वो मोदी सरकार के लिए होने वाले किसी PR स्टंट में हिस्सा लेने को तैयार नहीं. क्रिस के कहे का सीधा एन्टरप्रेटेशन ये है कि वो कश्मीर गए EU डेलिगेशन को PR इवेंट बता रहे हैं.
EU डेलिगेशन के कश्मीर पहुंचने के बाद क्रिस ने कहा, वो मोदी सरकार के लिए होने वाले किसी PR स्टंट में हिस्सा लेने को तैयार नहीं. क्रिस के कहे का सीधा एन्टरप्रेटेशन ये है कि वो कश्मीर गए EU डेलिगेशन को PR इवेंट बता रहे हैं.

 

ये वो मेल बताया जा रहा है, जो मादी ने क्रिस को भेजा था. क्रिस का दावा है कि उन्होंने कश्मीर जाकर वहां लोगों से बात करने और ख़ुद इलाके में जाकर हालात देखने की बात कही थी. इसके बाद उन्हें दिया गया आमंत्रण वापस ले लिया गया.
ये वो मेल बताया जा रहा है, जो मादी ने क्रिस को भेजा था. क्रिस का दावा है कि उन्होंने कश्मीर जाकर वहां लोगों से बात करने और ख़ुद इलाके में जाकर हालात देखने की बात कही थी. इसके बाद उन्हें दिया गया आमंत्रण वापस ले लिया गया.

क्रिस को PM मोदी से मिलवाने और कश्मीर बुलाने का न्योता किसने भेजा?
क्रिस का बयान आने के बाद मीडिया में वो ईमेल भी आया. जिसमें क्रिस को भारत आकर नरेंद्र मोदी से VIP मुलाकात करने और कश्मीर जाने का आमंत्रण दिया गया था. 7 अक्टूबर, 2019 को रात 09.19 बजे का ईमेल है ये. भेजने वाली की ईमेल आईडी है- madi@madisharma.org ये मेल संबोधित किया गया है डेविस को. अंग्रेजी में लिखे गए इस मेल का हिंदी तर्जुमा कुछ यूं है-

मैं भारत के प्रधानमंत्री ‘हिज़ एक्सेलेंसी’ नरेंद्र मोदी के साथ एक VIP मुलाकात का आयोजन कर रही हूं. इसके लिए आपको आमंत्रित करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है. आपको मालूम होगा कि हाल ही में भारत में हुए चुनावों में PM मोदी को भारी जीत मिली. वो भारत के विकास और वहां के लोगों की तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहे हैं. इसी सिलसिले में वो यूरोपियन यूनियन के कुछ प्रभावी लोगों से मुलाकात करना चाहते हैं. इसी संबंध में मैं आपसे जानना चाह रही हूं कि क्या आप दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री मोदी से मिलने में इच्छुक हैं. PM मोदी के साथ ये मुलाकात 28 अक्टूबर को होनी है. 29 अक्टूबर को कश्मीर का दौरा होगा और 30 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी.

इस दौरे में अलग-अलग पार्टियों के लोगों का एक समूह जाएगा. इस ग्रुप में यूरोप भर के नेता शामिल होंगे, जो तीन दिन के दौरे पर भारत जाएंगे. आने-जाने के लिए विमान का ख़र्च और रहने का इंतज़ाम, सारी चीजों की व्यवस्था होगी. इसे स्पॉन्सर करेगा इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट फॉर नॉन-अलाइन्ड स्टडीज़. इस दौरे में आप बतौर हमारे VIP गेस्ट हिस्सा लेंगे. न कि आधिकारिक प्रभाव में. यूरोपियन पार्लियामेंट के सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल के तौर पर. मेरा संस्थान, WESTT (विमिन्स इकॉनमिक ऐंड सोशल थिंक टैंक) यूरोपियन संसद और दुनियाभर के सरकारी व गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करता आया है. ख़ासतौर पर दक्षिण एशिया में.

फिर तलाश शुरू हुई मादी शर्मा की
क्रिस के बयान और मेल के बाहर आने के बाद दो चीजों की तलाश शुरू हुई. पहला, मादी शर्मा कौन हैं? दूसरा, ये WESTT क्या चीज है? इसी क्रम में मोदी के एक तस्वीर भी शेयर होने लगी. इसमें उनके बगल में एक महिला खड़ी है. बताया गया कि यही हैं मादी शर्मा. ये 28 अक्टूबर को ली गई प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की तस्वीर है. इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने EU सांसदों के डेलिगेशन से मुलाकात की थी.

क्रिस को भेजे मेल में भी 28 अक्टूबर को मोदी से मीटिंग की बात लिखी है. EU सांसदों का जो डेलिगेशन कश्मीर गया, उसने 28 अक्टूबर को दिल्ली में PM मोदी से मुलाकात की भी. मेल में हुए ज़िक्र के मुताबिक ही 29 अक्टूबर को ये डेलिगेशन कश्मीर घाटी भी पहुंचा. मेल में लिखे गए प्रोग्राम के ही मुताबिक इस डेलिगेशन ने 30 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. यानी चीजों का घटनाक्रम वही है, जो मेल में लिखा गया है.

ये है मादी उर्फ़ मधु शर्मा का ट्विटर हैंडल. वैरिफाइड नहीं है. ख़ुद के परिचय में लिखा है- इंटरनैशनल बिज़नस ब्रोकर. 
ये है मादी उर्फ़ मधु शर्मा का ट्विटर हैंडल. वैरिफाइड नहीं है. ख़ुद के परिचय में लिखा है- इंटरनैशनल बिज़नस ब्रोकर.

मादी शर्मा कौन हैं? उनके बारे में क्या मालूम है?
इनका नाम है मादी शर्मा उर्फ मधु शर्मा. इनके ट्विटर हैंडल में परिचय लिखा है- सोशल कैपिटलिस्ट. इंटरनैशनल बिज़नस ब्रोकर. इनकी वेबसाइट है- madisharma.org इसमें लिखा है कि ये इंटरनैशनल स्पीकर हैं. इनकी कंपनी की लिस्ट में एक नाम है- I3I. इसका काम बताया गया है बिज़नस ब्रोकरेज. मादी शर्मा ‘यूरोपियन इकॉनमिक ऐंड सोशल कमिटी’ (EESC)की सदस्य हैं. साल 2012 से. अपनी वेबसाइट पर एक EESC से अपने असोसिएशन पर अलग सेक्शन बनाया हुआ है इन्होंने. EESC यूरोपियन यूनियन की एक कन्सलटेटिव बॉडी है. EESC की वेबसाइट पर मेंबर्स की लिस्ट है. इसमें मादी शर्मा का भी प्रोफाइल है. ये ‘यूनाइटेड किंगडम’ को रेप्रजेंट करती हैं.

EESC की वेबसाइट पर उसके सदस्यों और डेलिगेट्स की जानकारी दी हुई है. वहां हमें मादी शर्मा का ब्योरा भी मिला. ये उसी पेज का स्क्रीनशॉट है.
EESC की वेबसाइट पर उसके सदस्यों और डेलिगेट्स की जानकारी दी हुई है. वहां हमें मादी शर्मा का ब्योरा भी मिला. ये उसी पेज का स्क्रीनशॉट है.

मादी शर्मा का NGO क्या करता है?
मादी उर्फ़ मधु शर्मा का ट्विटर हैंडल वैरिफाइड नहीं है. ये ख़बर लिखे जाने तक मादी शर्मा के ट्विटर पर कुल फॉलोअर हैं 3,103. ये बस 98 लोगों को फॉलो करती हैं. जिन्हें ये फॉलो करती हैं, उनमें ज़्यादातर EU और ब्रिटेन से जुड़े नेता और सांसद हैं. इन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर ही अपनी वेबसाइट का लिंक दिया है- http://madisharma.org

मादी शर्मा की वेबसाइट पर WESTT का ज़िक्र मिलता है. लिखा है कि उन्होंने ही इसकी शुरुआत की. अपने कामकाज का ब्योरा देते हुए इन्होंने अपनी एक कंपनी 'I31' का भी नाम लिखा है, जो कि एक बिज़नस ब्रोकरेज कंपनी है (फोटो: madisharma.org)
मादी शर्मा की वेबसाइट पर WESTT का ज़िक्र मिलता है. लिखा है कि उन्होंने ही इसकी शुरुआत की. अपने कामकाज का ब्योरा देते हुए इन्होंने अपनी एक कंपनी ‘I31’ का भी नाम लिखा है, जो कि एक बिज़नस ब्रोकरेज कंपनी है (फोटो: madisharma.org)

WESTT क्या है? क्या करती है?
मादी की वेबसाइट पर एक सेक्शन है- द ग्रुप इन्क्लूड्स. इसमें मादी ने अपने काम और अपनी कंपनियों का ब्योरा दिया है. यहीं पर ज़िक्र है WESTT का. ये एक NGO है, जिसे बनाया है मादी शर्मा ने ही. ये उनकी कंपनी ‘मादी ग्रुप’ की कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्स्बिलिटी का हिस्सा है. WESTT का पूरा नाम है, Women’s Eco-nomic and Social Think Tank. डिस्क्रिप्शन में लिखा है कि ये NGO इंटरनैशनल कम्यूनिटी में महिलाओं के विकास और तरक्की को लेकर जो मुद्दे हैं, उनका ठोस समाधान निकालने का काम करती है. काम का परिचय देते हुए लिखा गया है कि ये महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े विकास पर फोकस करने वाला थिंक-टैंक है. महिलाओं से जुड़े मुद्दों के अलावा बच्चों से जुड़े मसलों पर काम करने की भी बात लिखी गई है.

WESTT: क्या करता है, कैसे करता है, अबूझ पहेली
इंडिया टुडे के मुताबिक, WESTT को रजिस्टर करवाया गया था सितंबर 2013 में. EU के ‘थिंक टैंक्स ऐंड रिसर्च इंस्टिट्यूशन्स’ कैटगरी के सेक्शन 4 के अंतर्गत इसे पंजीकृत करवाया गया. EU के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष में WESTT को करीब 19 लाख रुपये का फंड मिला. ये सारा डोनेशन एक ही डोनर से आया. ‘इंडिया टुडे’ के मुताबिक, WESTT के पास बस पांच लोगों की टीम है. इनमें से बस एक ही फुल-टाइम काम से जुड़ा है. बाकी चार वॉलेंटियर बेसिस पर साथ हैं. ऐसे में WESTT का ये दावा कि बेल्जियम, क्रोएशिया, फ्रांस, पोलैंड, ब्रिटेन, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, भारत, नेपाल, पाकिस्तान, तुर्की समेत कई देशों में इसके सदस्य और प्रतिनिधि हैं, मेल नहीं खाता. WESTT रजिस्टर्ड है इंगलैंड के नॉटिंघम के एक पते पर. ‘इंडिया टुडे’ की टीम इस पते पर पहुंची. वहां उन्हें WESTT का कोई नामो-निशान नहीं मिला. जिस घर के पते पर WESTT रजिस्टर्ड है, वहां रहने वाले शख्स का कहना है कि उनके यहां पर कोई NGO काम नहीं करती.

ये स्क्रीनशॉट है इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट फॉर नॉन-अलाइन्ड स्टडीज़ (IINS) की वेबसाइट का. कश्मीर में हालात का जायजा लेने पहुंचे EU डेलिगेशन के दौरे को ऑर्गनाइज़ करने में IINS का भी नाम आया है.
ये स्क्रीनशॉट है इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट फॉर नॉन-अलाइन्ड स्टडीज़ (IINS) की वेबसाइट का. कश्मीर में हालात का जायजा लेने पहुंचे EU डेलिगेशन के दौरे को ऑर्गनाइज़ करने में IINS का भी नाम आया है.

मादी शर्मा के मेल में एक और संगठन का नाम है
इस ऑर्गनाइजेशन का नाम है- इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट फॉर नॉन-अलाइन्ड स्टडीज़. इसकी वेबसाइट बताती है कि ये गुटनिरपेक्ष आंदोलन से जुड़ा एक थिंक-टैंक हैं. 1980 में शुरू हुआ था. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने कश्मीर विजिट पर गए EU डेलिगेशन के एक सदस्य बर्नहार्ड ज़िमोनियोक से बात की. इवेंट किसने स्पॉन्सर किया, इसका जवाब देते हुए उन्होंने International Institute for Non-Aligned Studies का नाम लिया.

इस संस्थान की वेबसाइट पर नई दिल्ली के सफदरजंग का पता दिया हुआ है. मादी के संगठन की तरह ये भी छोटा संगठन है. मादी की ही वेबसाइट की तरह इसकी वेबसाइट पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने की बातें लिखी हुई हैं. लिखा है कि IINS के दफ़्तर हैं न्यू यॉर्क, जिनीवा और वियना में. पांच और देशों में ऑफिस होने की बात लिखी हुई है. इसकी गवर्निंग बॉडी में सांसद, अकादमिक लोग, विशेषज्ञ, राजनयिक और पत्रकारों के शामिल होने की बात लिखी गई है. इनका दावा है कि इनके पब्लिकेशन द्वारा निकाली गई किताबें और जरनल्स वगैरह को सौ से भी ज़्यादा देशों में नियमित तौर पर सब्सक्राइब किया जाता है. वेबसाइट पर एक सेक्शन है- इवेंट्स. इसमें ‘पार्टिशिपेशन’, ‘ऐक्टिविटीज़’ और ‘प्रपोज़्ड प्रोग्राम्स’ के तीन टैब्स हैं. हमनें ‘पार्टिशिपेन’ वाला सेक्शन देखा. इसमें उन बैठकों, सम्मेलनों और कॉन्फ्रेंसेज़ का ज़िक्र है, जिसमें IINS ने हिस्सेदारी की. कुल 29 मौकों का ज़िक्र है यहां. पहला साल 1981 में. आख़िरी अगस्त 2012 में आयोजित 16वां गुटनिरपेक्ष सम्मेलन.

ये स्क्रीनशॉट है 'पार्टिशिपेशन' सेक्शन का. यहां उन सारी बैठकों और सम्मेलनों का नाम बताया गया है, जिनमें IINS ने हिस्सा लिया. आख़िरी इवेंट 2012 का है (फोटो: IINS.ORG)
ये स्क्रीनशॉट है ‘पार्टिशिपेशन’ सेक्शन का. यहां उन सारी बैठकों और सम्मेलनों का नाम बताया गया है, जिनमें IINS ने हिस्सा लिया. आख़िरी इवेंट 2012 का है (फोटो: IINS.ORG)

वेबसाइट देखकर लगता है, नियमित अपडेट नहीं होती
वेबसाइट देखकर लगता है कि ये काफी समय से अपडेट नहीं हुई. या फिर बहुत रेगुलर अपडेट नहीं होती. मसलन, ‘प्रपोज़्ड प्रोग्राम्स’ के सेक्शन में आने वाले पब्लिकेशन्स की जानकारी दी गई है. यहां लिखा है कि IINS कौन से पब्लिकेशन छापने वाला है. इसके अंतर्गत दो नाम हैं. पहला- फरवरी 2006 में आने जा रहा ‘साउथ एशिया पीस प्रोसेस’. दूसरा- मार्च 2006 में छपने जा रहा ‘नॉन अलाइन्ड मूवमेंट- अ लुक अहेड’. ‘ऐक्टिविटीज़’ सेक्शन में भी आख़िरी ऐक्टिविटी फरवरी 1998 की बताई हुई है.

ये IINS की वेबसाइट के 'ऐक्टिविटीज़' सेक्शन का स्क्रीनशॉट है. आख़िरी ऐक्टिविटी 1998 बताई गई है इसपर. इसके बाद कोई अपडेट नहीं मिलता (फोटो: IINS.ORG)
ये IINS की वेबसाइट के ‘ऐक्टिविटीज़’ सेक्शन का स्क्रीनशॉट है. आख़िरी ऐक्टिविटी 1998 बताई गई है इसपर. इसके बाद कोई अपडेट नहीं मिलता (फोटो: IINS.ORG)

मोदी से पहले भी मिल चुकी हैं मादी शर्मा?
मादी शर्मा के ट्विटर हैंडल की खुदाई से कुछ पुराने ट्वीट मिले. 30 मार्च, 2016 को किए गए एक ट्वीट में मादी ने लिखा है-

आज रात ब्रसल्स में नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात को लेकर बहुत उत्साहित हूं.

इस ट्वीट से साफ नहीं है कि मादी निजी तौर पर मोदी से मिली थीं या ब्रसल्स पहुंचे नरेंद्र मोदी ने जब वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को संबोधित किया, उस समूह का हिस्सा थीं. हां, 16 मार्च 2016 को किए एक ट्वीट में उन्होंने modiinbrussels.org/register का ये लिंक दिया हुआ है. इस लिंक पर रजिस्ट्रेशन करके नरेंद्र मोदी के प्रोग्राम में शिरकत की जा सकती थी.

ये तब का ट्वीट है, जब मोदी ब्रसल्स गए थे. ट्वीट में मोदी के प्रोग्राम के लिए रजिस्ट्रेशन करने वाला लिंक दिया गया है (फोटो: Madi Sharma, ट्विटर)
ये तब का ट्वीट है, जब मोदी ब्रसल्स गए थे. ट्वीट में मोदी के प्रोग्राम के लिए रजिस्ट्रेशन करने वाला लिंक दिया गया है (फोटो: Madi Sharma, ट्विटर)

3 सितंबर, 2019 को मादी ने कश्मीर में आर्टिकल 370 खत्म किए जाने पर एक ट्वीट किया है. EU पार्लियामेंट के एक सदस्य ने भारत सरकार द्वारा आर्टिकल 370 हटाए जाने का समर्थन दिया था. तर्क गिनाए थे मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हुए. इसी आर्टिकल का लेख पोस्ट करते हुए मादी ने लिखा था-

पाकिस्तान की तरफ से होने वाला क्रॉस बॉर्डर आतंकवाद जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ी चुनौती है. EU पार्लियामेंट के टॉम ज़ेकोवस्की लिखते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पर कार्रवाई करनी ही थी.

इस ट्वीट में एक आर्टिकल का लिंक है. EU पार्लियामेंट के एक सदस्य के लिखे इस लेख में आर्टिकल 370 हटाए जाने के पक्ष में तर्क दिए गए हैं (फोटो: Madi Sharma, ट्विटर)
इस ट्वीट में एक आर्टिकल का लिंक है. EU पार्लियामेंट के एक सदस्य के लिखे इस लेख में आर्टिकल 370 हटाए जाने के पक्ष में तर्क दिए गए हैं (फोटो: Madi Sharma, ट्विटर)

 

ये उस लेख का स्क्रीनशॉट है, जिसका लिंक ट्वीट किया था मादी शर्मा ने. यूरोपियन पार्लियामेंट की मंथली न्यूज़ मैगजीन वेबसाइट पर है ये लेख.
ये उस लेख का स्क्रीनशॉट है, जिसका लिंक ट्वीट किया था मादी शर्मा ने. यूरोपियन पार्लियामेंट की मंथली न्यूज़ मैगजीन वेबसाइट पर है ये लेख.

एक और आर्टिकल का कनेक्शन है इस इवेंट में
डेलिगेशन के एक सदस्य- बर्नहार्ड ज़िमोनियोक ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए ऑर्गनाइज़ करने वालों में मादी शर्मा का भी नाम लिया. एक और नाम का ज़िक्र किया बर्नहार्ड ने- हेनरी मलोसी. EESC के पूर्व प्रेज़िडेंट हैं हेनरी. इन्होंने 26 अगस्त को यूरोपियन पार्लियामेंट की मैगजीन में आर्टिकल 370 ख़त्म किए जाने के फैसले का समर्थन किया था. इस लेख में एक लाइन थी-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने देश की हिफ़ाजत के लिए हाल ही में कश्मीर से जुड़े आर्टिकल 370 में संवैधानिक तौर पर जो हालिया बदलाव किए, उसकी पश्चिमी मीडिया के कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं. उन्हें देखना चाहिए कि किस तरह यूरोपियन लीडर्स ने स्पेन की सरकार द्वारा कैटोलिना की स्वायत्तता ख़त्म करने के फैसले का समर्थन किया. EU ने पाकिस्तान को फेवर्ड ट्रेडिंग पार्टनर का दर्जा दिया हुआ है. EU को पाकिस्तान के लिए चिंतित होना चाहिए.

डेलिगेशन की डिटेल्स
EU सांसदों के इस प्रतिनिधिमंडल में 27 लोग थे. इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चेक रिपब्लिक और पोलैंड से. 28 अक्टूबर को ये डेलिगेशन दिल्ली पहुंचा. यहां इनकी PM मोदी और NSA अजित डोभाल से मुलाकात हुई. 29 अक्टूबर की सुबह 27 में से 23 सदस्य कश्मीर पहुंचे. बाकी चार घाटी न जाकर वापस लौट गए. क्यों, ये कारण अभी पता नहीं चल सका है. कश्मीर में तनाव बना हुआ है. स्थानीय लोगों के सुरक्षा बलों के साथ भिड़ने की ख़बरें आ रही हैं. 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर का विभाजन करके दो केंद्र शासित प्रदेश (UT)बनाए जाने की आधिकारिक तारीख है. लद्दाख अलग UT बनेगा. जम्मू-कश्मीर अलग UT. इस माहौल में घाटी पहुंचे EU डेलिगेशन को सरकार की तरफ से एक पांच पन्नों का ब्रीफ दिया गया. पिछले तीन महीनों में जम्मू-कश्मीर की स्थिति से जुड़ी जानकारियां थीं इसमें. आर्टिकल 370 का इतिहास भी बताया गया इसमें. सरकार और प्रशासन की तरफ से डेलिगेशन को कुछ प्रेजेंटेशन भी दिए गए.

29 अक्टूबर को भी घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं. विरोध जताने के लिए कई इलाकों में बाज़ार भी बंद रहे. ऐसे में EU डेलिगेशन की तस्वीरें आईं. डल लेक में शिकारे पर बैठकर नज़ारों का लुत्फ लेते हुए. इसकी आलोचना होने लगी. कहा गया कि कश्मीर के हालात देखने गया है डेलिगेशन कि साइट सीइंग करने. फिर इस डेलिगेशन के सदस्यों की राजनैतिक विचारधारा पर भी सवाल उठने लगे. ऐसा इसलिए कि इसके कुछ सदस्य दक्षिणपंथी पॉलिटिक्स करने वाली पार्टियों के हैं. जैसे- बर्नहार्ड ज़िमनियोक. जो कि जर्मनी की फार-राइट पार्टी ‘ऑल्टरनेटिव फॉर डॉयशेलैंड’ (AFD) के सदस्य हैं.

ये EU सांसदों का आधिकारिक दौरा नहीं है
यूरोपियन यूनियन का मिशन है दिल्ली में. इसने ख़ुद को इस डेलिगेशन के दौरे से अलग कर लिया है. इनकी तरफ से बताया गया है कि यूरोपियन सांसदों का ये दौरा आधिकारिक नहीं है. कि EU के जो सांसद दौरे पर आए हैं, वो निजी तौर पर आए हैं. निजी क्षमता में आए हैं. वो ऑफिशल EU डेलिगेशन नहीं है.

डेलिगेशन ने कश्मीर पर क्या कहा?
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने अपनी एक ख़बर में बताया है कि कश्मीर गए EU सांसदों के डेलिगेशन ने घाटी से लौटने के बाद कहा कि आर्टिकल 370 भारत का आंतरिक मामला है. उन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लड़ाई को भी समर्थन दिया. डेलिगेशन ने बताया कि उन्हें आर्मी और पुलिस ने ब्रीफिंग दी. इसके अलावा उन्होंने युवा ऐक्टिविस्ट्स से भी बातचीत की बात कही. ToI ने अपनी रिपोर्ट में डेलिगेशन की एक मेंबर Ryszard Czarnecki का बयान यूं लिखा है-

कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज़ पक्षपाती दिखती है.

ये बयान न्यू यॉर्क टाइम्स और अल जज़ीरा की कुछ रिपोर्ट्स रिमाइंड करवाती है. कश्मीर के हालात को लेकर इनकी कुछ रिपोर्ट्स भारत सरकार के स्टैंड से मेल नहीं खा रही थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर को लेकर जो सवाल उठने लगे, उनमें इन रिपोर्ट्स की भी भूमिका थी. जबकि डेलिगेशन के इस सदस्य का बयान केंद्र सरकार के साथ खड़ा दिखता है.

विपक्ष ने क्या कहा? 
कांग्रेस का कहना है कि इस डेलिगेशन को कश्मीर जाने की इजाज़त देकर मोदी सरकार ने बड़ी भूल की है. उसका आरोप है कि ऐसा करके सरकार ने कश्मीर पर भारत के पारंपरिक स्टैंड का उल्लंघन किया है. वो स्टैंड, जिसमें भारत कहता आया है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है. कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा-

कश्मीर के ज़मीनी हालात का जायजा लेने के लिए एक तीसरे पक्ष को सामने लाकर, वो भी एक अनजान थिंक टैंक के माध्यम से, मोदी सरकार ने भारी ग़लती की है. ऐसा करके सरकार ने जम्मू-कश्मीर पर भारत के संप्रभु अधिकार का अपमान किया है. हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे आएं और भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीय संसद के अपमान से जुड़े इन सवालों पर जवाब दें. ये दौरा बीजेपी सरकार द्वारा किया गया बेहद अपरिपक्व और बेकार PR एक्सरसाइज़ है. 

वो सवाल, जिनके जवाब अब बड़ी शिद्दत से खोजे जाएंगे

1. भारत के प्रधानमंत्री के साथ बैठक और मौजूदा हालात में विदेशी सांसदों को कश्मीर दौरे पर ले जाने का वादा कोई बिना सरकारी आश्वासन के नहीं कर सकता. कश्मीर पहुंचे EU सांसदों का पूरा दौरा EU सांसद क्रिस को भेजे न्योते में छपे कार्यक्रम से हूबहू मेल खाता है. क्या मादी के पास भारत सरकार की तरफ से आश्वासन था? अगर था, तो वो किसने दिया था?

2. मादी शर्मा की भूमिका अहम है. आश्वासन के साथ या बिना उन्होंने डेलिगेशन कश्मीर क्यों भिजवाया? किसके कहने पर भिजवाया और डेलिगेशन भेजने के पीछे की मंशा क्या थी?

3. दौरा सांसदों ने अपनी निजी क्षमता में किया और खर्च भी एक एनजीओ ने उठाया. तो एक गैर सरकारी दौरे को सरकारी अमले से इतना असाधारण सहयोग कैसे मिला? क्या इसके लिए लिखित आदेश हुए थे? वो आदेश किसने दिए थे?

 

4. इस डेलिगेशन की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं. दावा था कि ज़मीनी हालात देखने जा रहे हैं. लेकिन तस्वीरें डल झील से आईं. क्या सांसदों ने आम लोगों के बीच भी कोई बैठक की? अगर हां, तो उसे प्रेस ने कवर क्यों नहीं किया?

5.  सबसे बड़ा सरकार कश्मीर नीति से जुड़ा है. क्या सरकार 70 सालों से चली आ रही लीक छोड़ रही है? क्या भारत के एक अभिन्न अंग से जुड़ी आंतरिक समस्या पर कोई तीसरा पक्ष सरकारी या गैर सरकारी दौरा करके अपनी राय दे सकता है? क्या भारत सरकार इस राय को स्वीकार करेगी?


EU का डेलिगेशन जम्मू-कश्मीर की ज़मीनी हकीकत जानने पहुंचा तो मोदी सरकार की मंशा पर सवाल क्यों उठे?

लोकसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल पास, आर्टिकल 370 पर भी फैसला

आर्टिकल 370, जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल और लद्दाख के केंद्रशासित राज्य बनने की पूरी कहानी

जम्मू कश्मीर में कैसे मनाई गई ईद, दुनिया भर की मीडिया में शुक्रवार की क्या ख़बरें चल रही हैं?

कश्मीर में पैलेट गन चल रही है फिर हालात सामान्य कैसे? ज़्यादती के आरोप सच हैं क्या?

जम्मू कश्मीर: जिस आर्टिकल 35A को लेकर इतनी अटकलबाज़ी, वो है क्या?

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गंदी बात

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

हिमा दास, आदि

खचाखच भरे स्टेडियम में भागने वाली लड़कियां जो जीवित हैं और जो मर गईं.

अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

'मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है.'

ब्लॉग: शराब पीकर 'टाइट' लड़कियां

यानी आउट ऑफ़ कंट्रोल, यौन शोषण के लिए आमंत्रित करते शरीर.

औरतों को बिना इजाज़त नग्न करती टेक्नोलॉजी

महिला पत्रकारों से मशहूर एक्ट्रेसेज तक, कोई इससे नहीं बचा.

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.