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आसमान से प्यार करने वाली वो औरत, जो उसी में खो गई

आपकी पहली फ्लाइट का सबसे नाटकीय पल खिड़की से नीचे नज़र आने वाले बादल नहीं होते. सबसे ज़्यादा थ्रिल होता है टेकऑफ में. रनवे की ओर नाक कर के खड़े होने के बाद प्लेन एक झटके के साथ आगे बढ़ता है. आप कुछ समझें इस से पहले ही आप अपनी सीट से चिपक जाते हैं. और खिड़की से पीछे छूटते नज़ारा देखकर होने वाले रफ्तार के अंदाज़े पर यकीन हो पाए इस से पहले ही प्लेन तिरछा हो जाता है. आप हवा में होते हैं. हवाई यात्रा की दुनिया में सब कुछ इसी नाटकीय तेज़ी से होता है.

अकेले अंटार्कटिक पार करने वाली दुनिया की पहली औरत एमिलिया इयरहार्ट ने अपनी ज़िंदगी इसी नाटकीय तेज़ी से जी. वो एक नर्स, ट्रक ड्राइवर, स्टेनोग्राफर, फोटोग्राफर और एक पायलट रहीं. तब जब उनके अलावा कुल 15 औरतें ही प्लेन उड़ाना जानती थीं. पायलट बनने के बाद उन्होंने ढेरों रिकॉर्ड बनाए और सेलेब्रेटी हो गईं. अमरीकी राष्ट्रपतियों के साथ तस्वीर खिंचाने लगीं. फिर सेलेब्रेटी स्टेटस का इस्तेमाल एविएशन को प्रमोट करने के लिए किया, किताबें लिखीं. और आखिर में दुनिया नापने वाली पहली औरत बनने का रिकॉर्ड बनाने की कोशिश करते हुए प्रशांत महासागर के ऊपर लापता हो गईं. ये सब किया 40 साल की छोटी सी ज़िंदगी में.

24 जुलाई को एमिलिया का बड्डे होता है. 1897 में इसी दिन उस बच्ची ने ज़मीन पर कदम रखा था, जिसका पहला प्यार आसमान था. आज हम एमिलिया को याद करेंगे.

एमिलिया इयरहार्ट
एमिलिया इयरहार्ट

10 डॉलर की राइड ने पायलट बनने का सपना दिखाया

एमिलिया का पूरा नाम एमिलिया मैरी इयरहार्ट था. ये नाम उनकी दादी और नानी का नाम मिला कर बना था. बचपन उनका वैसा ही था जैसा हमारा आपका होता है, कुछ अलग करने की चाहत, बिना ये जाने, कि क्या करना है. लेकिन एक बात थी, एमिलिया का दिल उन्हीं कामों में लगता, जो मर्दों के समझे जाते – फिल्म डायरेक्शन, लॉ, मैनेजमेंट, मेकैनिकल इंजीनियरिंग, वगैरह. पढ़ाई के लिए साइंस चुना. अब तक इस लिस्ट में पायलट बनना नहीं था.

फिर 1917 की क्रिसमस की छुट्टियों में एमिलिया अपनी बहन के पास टोरंटो (कैनडा) गईं. पहला विश्व युद्ध चल रहा था. मोर्चे पर ज़ख्मी हुए फौजी लौट कर अपना इलाज करवा रहे थे. एमिलिया इनकी मदद करने के लिए रेड क्रॉस से ट्रेनिंग लेकर नर्स बन गईं. यहीं रहते हुए उन्होंने पहली बार करीब से एक प्लेन उड़ता हुआ देखा. लेकिन वो लौट गईं. लौट कर मेडिकल स्टडीज़ की पढ़ाई करने लगीं कोलंबिया यूनिवर्सिटी से.

लेकिन किस्मत को मंज़ूर नहीं था कि एमिलिया ज़मीन पर रहें. एमिलिया के मां-बाप जो पिछले कुछ दिनों से अलग थे, साथ आए और कैलिफोर्निया में बस गए. एमिलिया ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी और तय किया कि अब मां-बाप के साथ कुछ दिन चैन से रहेंगी. यहीं 28 दिसंबर, 1920 को पहली बार एमिलिया 10 डॉलर का एक टिकट खरीद कर 10 मिनट के लिए प्लेन में बैठीं. शौकिया. पक्के तौर पर नहीं कह सकता, लेकिन जिस थ्रिल की बात हमने इस लेख की शुरुआत में की, शायद उसी ने एमिलिया को एक पायलट बनने का सपना दिखा दिया.

फिर एमिलिया ने वो सारे काम किए जो हमने आपको ऊपर बताए, ताकि फ्लाइंग ट्रेनिंग की फीस चुका सकें. गुरू बनाया अनीता स्नूक को. एक और औरत, जिसने मर्दों की समझी जाने वाली इस दुनिया में पैर जमा लिए थे.

प्लेन उड़ाना सीखा तो एमिलिया ने उन दिनों की महिला पायलट का स्टाइल स्टेमेंट भी अपना लिया. बाल कटवा लिए, लैदर जैकेट पहनना शुरू किया. पैसे जोड़कर एक सेकेंड हैंड बाइप्लेन खरीदा. नाम रखा कैनेरी. इसी में बैठकर 22 अक्टूबर 1922 को आसमान में 14000 फीट की ऊंचाई तक गईं. ये उनका बनाया पहला वर्ल्ड रिकॉर्ड था. दुनिया में सबसे ऊंचे उड़ी औरत का.

 

लॉकहीड वेगा 5 बी. एमिलिया का प्लेन.
लॉकहीड वेगा 5 बी. एमिलिया का प्लेन.

ज़िंदगी ने ज़ोर कसा लेकिन फ्लाइंग नहीं छोड़ी 

लेकिन ज़िंदगी ने करवट ली और एमिलिया को फ्लाइंग से दूर होना पड़ा. माता-पिता का तलाक हो गया. एमिलिया की साइनस की दिक्कत बढ़ गई, ऑपरेशन फेल हो गया. पैसों की कमी हो गई. प्लेन बेच देना पड़ा. एमिलिया अपनी मां को लेकर बॉस्टन आ गईं. पढ़ा कर, एविएशन पर अखबारों में लेख लिख कर वक्त काटा. एक एविएटर की अपनी छवि को मरने नहीं दिया. वो जानती थीं कि उनका वक्त आएगा.

और वक्त आया. 1928 में एक फोन कॉल पर उनसे पूछा गया कि क्या वो अटलांटिक पार करने वाली पहली औरत बनना चाहेंगी? ये एमिलिया के दिल की बात थी. वो चाहकर ऐसा नहीं कर पा रही थीं क्योंकि उनके पास ज़रूरी संसाधन और ट्रेनिंग नहीं थे. तो उन्होंने पायलट विलमर स्टुल्ट्ज़ के साथ उड़ान भरी. एमिलिया को प्लेन नहीं उड़ाना था, बस लॉग मेंटेंन करने थे. फिर भी अटलांटिक पार करने वाली पहली महिला पायलट बनने का ऑफर बुरा नहीं था. 18 जून, 1928 को एमिलिया और विलमर पौने इक्कीस घंटे लगातार प्लेन उड़ा कर अमेरिका से ब्रिटेन पहुंचे. वापस लौटने पर एमिलिया के दिन पलट गए. उन्हें लोगों ने पलकों पर बैठा लिया. तब के अमरीकी राष्ट्रपति कूलिज उनसे वाइट हाउस में मिले. वो रातों-रात स्टार बन गईं.

एमिलिया. राष्ट्रपति कूलिजऔर हूवर के साथ
एमिलिया. राष्ट्रपति कूलिजऔर हूवर के साथ

भटककर वहां पहुंची जहां कोई नहीं पहुंच पाया था

उन्होंने ढेर सारे लेक्चर दिए और किताबें लिखीं. बैग्स से लेकर स्पोर्ट्स वियर बनाने वाली कंपनियों ने उन्हें अपना ब्रैंड एम्बैसेडर बनाया. कभी खुद कपड़े सिल कर पहनने वाली एमिलिया के नाम से क्लोदिंग लाइन चलने लगीं. उन्हें ‘क्वीन ऑफ द एयर’ कहा जाने लगा. इस शोहरत का इस्तेमाल एमिलिया ने फ्लाइंग में औरतों को बढ़ावा देने के लिए किया. मशहूर पायलट चार्ल्स लिंडबर्ग के साथ मिल कर एयरलाइन भी शुरू की.

पैसा आया, तो एमिलिया ने अपनी कसक पूरी करने की ओर फिर कदम बढ़ाए. अकेले अटलांटिक पार करने की तैयारी फिर शुरू की. 20 मई 1932 को अपने लॉकहीड वेगा 5 बी में टेलिग्राफ जर्नल लेकर चढ़ीं. इस बात का सबूत कि अमरीका से चली हैं. 14 घंटे 56 मिनिट की फ्लाइट में अटलांटिक के ऊपर बहने वाली तेज़ हवाओं ने उन्हें रास्ते से भटका दिया. लेकिन वो यूरोप पहुंची. अपनी असल मंज़िल पैरिस की जगह आयरलैंड के एक गांव में. लेकिन भटकने के बावजूद एविएशन की दुनिया में एमिलिया वहां पहुंच गई थीं जहां उनसे पहले कोई औरत नहीं पहुंची थी. उन्हें दर्जनों इनाम मिले. एलेनॉर रूज़वेल्ट तक उनकी दोस्ती हो गईं. इसके बाद उनका स्टारडम जहां पहुंचा, वो इतिहास में दर्ज है. एमिलिया ने इस प्रभाव का इस्तेमाल औरतों के हक के लिए बोलने में किया. अमरीका में चले इक्वल राइट्स मूवमेंट में उनकी भागीदारी रही.

इयरहार्ट के फैशन स्टेटमेंट को अमरीका भर में पसंद किया जाता था
इयरहार्ट के फैशन स्टेटमेंट को अमरीका भर में पसंद किया जाता था

फिर दुनिया नापने निकल गईं

लेकिन एमिलिया को और लंबी उड़ान भरनी थी. उन्होंने इक्वेटर के रास्ते दुनिया का चक्कर लगाने की ठान ली. लॉकहीड एयरक्राफ्ट कंपनी से इसके लिए एक खास प्लेन बनवाया, जिसमें एक बड़ा सा फ्यूल टैंक था.

दुनिया का चक्कर लगाने के लिए आपको प्रशांत महासागर के ऊपर से उड़ान भरनी होती है. पूरा समंदर एक बार में पार नहीं कर सकते. इसलिए बीच के किसी द्वीप पर उतर कर फ्यूल और सर्विसिंग का जुगाड़ करना पड़ता है. और समंदर के बीच एक द्वीप ढूंढना आसान नहीं. तो एमिलिया ने अपने साथ एक अनुभवी नैविगेटर फ्रेड नूनन को रखा. पहली बार में असफल रहने के बाद एमिलिया और नूनन दूसरी बार में न्यू गिनिआ पहुंचे. यहां तक आने में तीन चौथाई रास्ता पूरा हो गया था. यहां से उन्हें 11000 किलोमीटर प्रशांत महासागर पर उड़ान भरनी थी. तय किया गया कि होनुलुलु के रास्ते में हाउलैंड द्वीप पर उतर कर सप्लाई ली जाएगी. हाउलैंड तक का रास्ता बताने के लिए वहां अमरीकी कोस्ट गार्ड का एक जहाज़ खड़ा था.

2 जुलाई, 1937 को एमिलिया और नूनन न्यू गिनिआ से हाउलैंड के लिए चले. रास्ते में अमरीकी कोस्ट गार्ड के जहाज़ से उनकी बात होती रही. लेकिन एक दिक्कत हो गई. एमिलिया के भेजे रेडियो मैसेज कोस्ट गार्ड को तो मिल रहे थे लेकिन कोस्ट गार्ड के मैसेज एमिलिया को नहीं मिल रहे थे. एमिलिया और नूनन कोशिश कर के भी पता नहीं कर पा रहे थे कि हाउलैंड कहां है. बादलों की छांव में एमिलिया आंखों से नीचे देख कर पक्का नहीं कर सकती थीं कि हाउलैंड कहां था. घंटों तक एमिलिया के मैसेज कोस्ट गार्ड को मिलते रहे. कुछ मैसेज एमिलिया को भी मिले, लेकिन काम नहीं बना. प्लेन का ईंधन खत्म होने लगा. एमिलिया और नूनन लापता हो गए.

उनके आखिरी मैसेज के बाद जब एक घंटे तक उनका कोई नामोनिशान नहीं मिला, तो उन्हें ढूंढा जाने लगा. उन्हें ढूंढने के लिए शुरू किया सर्च ऑपरेशन तब का सबसे महंगा सर्च ऑपरेशन था. लेकिन वो नहीं मिलीं. 2 साल बाद उन्हें कानूनी तौर पर मृत घोषित कर दिया गया.

हाउलैंड द्वीप के बीकन का नाम एमिलिया इयरहार्ट के नाम पर रखा गया है
हाउलैंड द्वीप के बीकन का नाम एमिलिया इयरहार्ट के नाम पर रखा गया है

लोगों ने जासूस भी बताया उन्हें

लापता होते वक्त एमिलिया की प्रसिद्धी चरम पर थीं. तो उनके लापता होने ने कई कॉन्सपिरेसी थ्योरी जनीं. ये शक किया गया कि एमिलिया और उनके नैविगेटर फ्रेड नूनन अमरीका के लिए जासूसी कर रहे थे, खासतौर पर रूज़वेल्ट के लिए. कहा जाने लगा कि इसी के चलते उन्हें जापान ने युद्धबंदी बनाकर मार डाला था. कुछ लोगों ने इसमें ये भी जोड़ दिया कि दोनों जापान के चंगुल से बच निकले थे और लौट कर न्यू जर्सी में रहने लगे. इस थ्योरी सबसे को सबसे ज़्यादा प्रचार सीबीएस के लिए काम करने वाले पत्रकार फ्रेड गोर्नर की किताब ‘द सर्च फॉर एमीलिया इयरहार्ट’ से मिला. लकिन इस थ्योरी में ज़्यादा दम नहीं है क्योंकि एमिलिया का प्लेन जब गुम हुआ, तब दूसरा विश्व युद्ध चल तो रहा था लेकिन जापान और अमेरिका की सीधी लड़ाई में तकरीबन साढ़े चार साल बाकी थे.

दूसरी थ्योरी के मुताबिक एमिलिया निकुमारोरो पर लैंड कर गई थीं, जहां वो कई दिन ज़िंदा रहीं और फिर मदद न मिलने पर उनकी जान गई. लेकिन इस बात को कभी साबित नहीं किया जा सका.

एमिलिया के खोने को लेकर सच के सबसे करीब थ्योरी एल्गेन लॉन्ग ने दी. एल्गेन लॉन्ग आर्कटिक और आंटार्कटिक के ऊपर से उड़ान भरने वाले दुनिया के पहले पायलट और नैविगेटर थे. उनका मानना है कि इयरहार्ट हॉनोलूलू के रास्ते में हाउलैंड द्वीप पर प्लेन रिफ्यूल करने वाली थीं. लेकिन उस दिन प्रशांत महासागर के आसमान से एमिलिया और नूनन मिल कर भी हाउलैंड को ढूंढ नहीं पाए. प्लेन का फ्यूल का खत्म हो गया और वो क्रैश कर गया. एमीलिया, नूनन और उनका प्लेन एक राज़ बन कर समंदर में दफन हो गए.

एमिलिया की ज़िंदगी में लोगों की रुचि ऐसी रही कि लोग कभी यकीन नहीं कर पाए कि वो नहीं रहीं. इसी के चलते उनकी ज़िंदगी और मौत को लेकर दर्जनों फिल्में, नॉवेल और सीरियल बने. कई हिट भी रहे. द इंटरनेशनल ग्रुप फॉर हिस्टॉरिक एयरक्राफ्ट रिकवरी 2017 में भी उन्हें ढूंढने की कोशिश कर रहा है.

एमिलिया कहां हैं, हम नहीं जानते. लेकिन उनकी कहानी हमारे पास है. ये कहानी अपने सपने पूरे करने की ज़िद का बयान है, जिसे पढ़कर लाखों औरतें (और मर्द भी) अपनी ज़िंदगी में कुछ नया करने का अहद करते हैं.   

*सभी तस्वीरें विकिमीडिया कॉमन्स से


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