Submit your post

Follow Us

'लेडी कन्हैया' हुईं साइकिल पर सवार, पर मैं हैरान नहीं हूं

596
शेयर्स

संभावना से कुछ अधिक ही था. हो गया. हैरानी नहीं होनी चाहिए. बहुत मन हो तो वैसा दुख प्रकट कर सकते हैं, जैसा हिंदी की सेमिनारों में भाषा की हालत पर किया जाता है.

उम्मीद का रौशनदान कही जा रही इलाहाबाद यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट ऋचा सिंह सपा में शामिल हो गई हैं. वह सपा समर्थित छात्र संगठन समाजवादी छात्र सभा (SCS) से ही यूनिवर्सिटी इलेक्शन लड़ी थीं. फिर भी सोशल मीडिया पर कुछ लोग दुखी हैं. जैसे उनके क्रांतिकारी पक्ष का एक बड़ा छज्जा टूटकर अभी-अभी गिर पड़ा है.

मेरा संबोधन उनके लिए नहीं, जो इससे दुखी हैं. यह उनके लिए है जो कल तक ऋचा पर मुखर थे, आज इस घटना को इग्नोर कर रहे हैं. जो कह रहे थे कि जेएनयू को छोड़िए, अगली लड़ाई इलाहाबाद कैंपस में लड़ी जा रही है. तुलना के सतही उपमान रचते हुए उन्होंने ऋचा को ‘लेडी कन्हैया’ कह डाला था. ऋचा के हाथ आया यह ऐसा मौका था, जो इस दौर में कोई नहीं छोड़ता. दिल्ली के कुछ वामपंथी आयोजनों में उनकी मौजूदगी से कुछ लोग प्रसन्न जरूर हुए थे, लेकिन वह सपा से अलग कभी थी ही नहीं.

कहानी शुरू यहां से हुई

ऋचा किसी पॉलिटिकल परिवार से नहीं आतीं. पापा रिटायर्ड टीचर हैं. 6 भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. एमफिल गोल्ड मेडलिस्ट हैं और 2008 से एक्टिविज्म कर रही हैं. उनको समाजवादी छात्र सभा (SCS) ने टिकट दिया भी नहीं था. उन्होंने इंडीपेंडेंट पर्चा भरा था. लेकिन यूनिवर्सिटी की एंटी यादव लॉबी SCS कैंडिडेट को हरवाना चाहती थी. ताकि हर हालत में कोई सवर्ण चेहरा जीते. इसके लिए एक ठाकुर लड़के को खड़ा किया गया. ऋचा भी इसी जाति से आती हैं. उनसे नॉमिनेशन वापस लेने को कहा गया. वह नहीं मानीं.

लेकिन किस्मत ही थी कि SCS कैंडिडेट का पर्चा कुछ गलतियों के चलते रिजेक्ट हो गया. SCS के हाथ कुछ नहीं बचा तो उन्होंने ऋचा को समर्थन दे दिया और वह जीत भी गईं.

जहां खुलेआम लहराते हैं झंडे और कट्टे

27 साल की इस लड़की के लिए ये आदर्श शुरुआत थी. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में सिर्फ मर्दों की चलती है. पैसा और जाति, वहां की पॉलिटिक्स के केंद्र में है. वहां चुनावी नियम जूते तले रखे जाते हैं और कैंडिडेट खुलेआम पार्टियों के झंडे लहराते हैं. वहां कट्टा कल्चर है, देसी बम भी कोई बड़ी बात नहीं है. गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तारियां हुआ करती हैं. ऐसी यूनिवर्सिटी में एक महिला छात्र संघ अध्यक्ष बनी. आजादी के बाद से पहली बार. ऋचा सिंह एक ऐसे पांच सदस्यीय छात्र संघ की अध्यक्ष थीं, जिसके बाकी चार सदस्य एबीवीपी से थे.

ऋचा ने फेसबुक पर यह तस्वीर डाली थी.
ऋचा ने फेसबुक पर यह तस्वीर डाली थी.

एबीवीपी के पास चार सीटें थीं. 2017 विधानसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू हो चुकी थी. उन्होंने छात्र संघ उद्घाटन के लिए बीजेपी नेता योगी आदित्यनाथ को बुलाना चाहा. लेकिन ऋचा अड़ गईं और छात्रों को साथ लेकर उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया. काफी बवाल हुआ. वह भूख हड़ताल पर भी बैठीं और आखिर में यूनिवर्सिटी को वो प्रोग्राम कैंसल करना पड़ा. इस तरह वह भगवा ताकतों के खिलाफ एक हिम्मती हिरोइन के तौर पर उभरीं और दिल्ली तक चर्चित हुईं. ऋचा इस एपिसोड की नायिका थीं. एक मेल डॉमिनेटेड स्पेस में एक लड़की इतना कर ले जाए तो वह क्रांतिकारी ही कहलाएगी.

इसलिए दिल्ली में बैठे कुछ अकादमिक कम्युनिस्ट उनके मुरीद हो गए. कुछ उत्साही कॉमरेडों ने उन्हें फेसबुक पर संघर्ष की मिसाल बता दिया. लिखा गया कि देश को अरसे बाद एक विचारशील और हिम्मती युवा महिला नेता मिल गई है. राजनीति में औरत को ताकत मिलने का अप्रतिम उदाहरण!

‘प्रतिरोध’ के मंच पर वामपंथियों के साथ

फिर इधर जेएनयू कांड हो गया. कन्हैया जेल से लौटे और एक अप्रत्याशित जानदार भाषण ने उन्हें हीरो बना दिया. दिल्ली में ‘प्रतिरोध-2’ नाम से एक सेमिनार बुलाई गई, जिसमें ऋचा, कन्हैया और उमर खालिद एक मंच पर दिखे और प्रतिरोध के अपने अनुभव साझा किए.
इस मंच पर उन्होंने जो कहा उसका सार था कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की राजनीति पॉलिटिकल बैकिंग वाली राजनीति थी, लेकिन उनका केस इससे अलग था. उनके भाषण का बड़ा हिस्सा योगी आदित्यनाथ को कैंपस में न घुसने देने के अनुभव पर टिका रहा. योगी के विरोध की जो वजहें उन्होंने बताईं, वे थीं, ‘वो हेट स्पीच देते हैं, एंटी माइनॉरिटी (मुस्लिम विरोधी) हैं, एंटी दलित बातें करते हैं, एंटी-विमेन हैं.’

लेकिन क्या सपा लीडरान इससे मुक्त हैं? ऋचा जिस पार्टी में गई हैं, उसके मुखिया कहते हैं कि रेप के मामलों में फांसी नहीं होनी चाहिए. बल्कि वह आश्चर्य के पुट के साथ पूछते हैं, ‘बताइए अब रेप के लिए भी फांसी होगी? लड़के हैं गलती हो जाती है.’ वह रेप के कड़े कानूनों को बदलना चाहते हैं. लेकिन ऋचा को अपने ‘नेताजी’ का बयान एंटी-विमेन नहीं लगता है. नहीं लगेगा.

और मुजफ्फरनगर में कौन कम्युनल था?

उन्होंने शिवपाल यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ली. फिर कहा कि सिर्फ सपा विचारधारा वाली सेक्युलर पार्टी है. ऐसा कहते हुए मुजफ्फरनगर दंगों की स्मृति उनसे स्किप हो गई, क्योंकि वह एक पुरानी बात थी. ऐसा कहते हुए वह मुजफ्फरनगर में ताकतवर सपा नेताओं की संदिग्ध भूमिका पर कुछ नहीं बोलीं. उन्होंने नहीं बताया कि क्या उनका समाजवाद भी सैफई का समाजवाद है? वही समाजवाद जो कैंपों में 36 बच्चों की मौत की अनदेखी करके नाच-गाने का महोत्सव करवाता है. वही जो उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी का दूसरा नाम है.

उन्होंने नहीं बताया क्योंकि जरूरत नहीं थीं. चुनाव नजदीक हैं पर उन्होंने कहा है कि उन्हें टिकट की बहुत अपेक्षा नहीं है. वह बस महिलाओं और युवाओं के लिए काम करने आई यहां हैं. आप लेफ्ट पार्टियों से क्यों नहीं जुड़ी, पूछने पर कहा कि लेफ्ट अपना जनाधार खो चुका है और वह भी राइट वालों की तरह अतिवादी हो सकता है. जबकि सपा मजबूत पार्टी है.

सपा मजबूत पार्टी है, यही बात अंडरलाइन कर लें

इस दौरान ऋचा को मजबूती ही दिखनी थी, दिखी. इसमें हैरत किस बात की है? और इसमें भी क्या हैरत है कि उन्हें अपने नेता अबू आजमी का वह बयान नहीं दिखा जो शादी के बाहर सेक्स करने वाली औरतों को फांसी चढ़ा देने के हिमायती हैं. आजमी का ‘एंटी-विमेन’ योगी के ‘एंटी-विमेन’ से ज्यादा पाक है.

इसी साल फरवरी में ऋचा ने एक अखबार से कहा था, ‘पॉलिटिक्स में न्यूट्रल महिलाओं के लिए स्पेस नहीं है. उन्हें या तो स्मृति ईरानी की तरह जिद्दी होना होगा या मायावती और ममता बनर्जी की तरह ऑटोक्रेटिक. शुरुआती महीनों में मुझे ये बात साफ समझ आई है. कि बतौर महिला आप अपने घर से बाहर आ सकते हैं, आप काम पर जा सकते हैं, लेकिन आपको सत्ता पाने की इजाजत नहीं है.’

एक बत्ती लाल बैरवा हुआ करते थे. वामपंथी छात्र संगठन SFI JNUSU के दो बार अध्यक्ष चुने गए थे. 17 बार उन्होंने जनरल बॉडी मीटिंग करवाईं, जो उस वक्त तक सबसे ज्यादा थीं. लाल परचम के तले उन्हें उम्मीद की नजरों से देखा जाता था. फिर एक दिन वह कांग्रेस में चले गए. वहां ने उन्हें ऑल इंडिया एससी-एसटी-ओबीसी यूथ कांग्रेस का चेयरमैन बना दिया. अभी वह अरबिंदो कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर हैं. राजस्थान में कांग्रेस के लिए प्रचार करने भी गए थे.

इसलिए मैं हैरान नहीं हूं. हमारे ज्यादातर छात्र नायकों की नियति यही निकलती है. संभावना से कुछ अधिक ही था. हो गया. हैरानी नहीं होनी चाहिए. दुख प्रकट कर सकते हैं.

मैं तब तक हैरान नहीं होऊंगा जब तक कन्हैया कुमार हाथ के साथ नहीं हो जाते. वैसे राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उनकी भी 84 की नजर धुंधली होने लगी है.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

हिमा दास, आदि

खचाखच भरे स्टेडियम में भागने वाली लड़कियां जो जीवित हैं और जो मर गईं.

अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

'मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है.'

ब्लॉग: शराब पीकर 'टाइट' लड़कियां

यानी आउट ऑफ़ कंट्रोल, यौन शोषण के लिए आमंत्रित करते शरीर.

औरतों को बिना इजाज़त नग्न करती टेक्नोलॉजी

महिला पत्रकारों से मशहूर एक्ट्रेसेज तक, कोई इससे नहीं बचा.

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.