Submit your post

Follow Us

53 हजार वोटों से सांसदी हारने के बाद UP से विदा हुई थीं 'बहू' शीला दीक्षित

1.73 K
शेयर्स

शीला दीक्षित नहीं रहीं. 20 जुलाई 19 को उन्होंने नई दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में आख़िरी सांस ली. मिरांडा कॉलेज की पढ़ी. मिस मिरांडा रही शीला कपूर कैसे आईं राजनीति में और क्या कुछ ख़ास रहा इस सफ़र में, यहां जानिए.


उन्नाव के एक गांव उगू का लड़का था. उमा शंकर दीक्षित. तहसील में कॉलेज ढंग के नहीं थे. तो कानपुर जाकर पढ़ाई की. मिशनरी वाले कॉलेज में. क्राइस्ट चर्च नाम के. फिर यहीं पढ़त-लिखत के काम में लग गया. कानपुर के क्रांतिकारी पत्रकार और नेता गणेश शंकर विद्यार्थी के संपर्क में आया था. आजादी के आंदोलन से जुड़ गया. विद्यार्थी जी जब कांग्रेस के अध्यक्ष थे शहर में, तब ये लड़का सचिव था. विद्यार्थी जी की हिंदू-मुस्लिम दंगों के दौरान हत्या कर दी गई थी. उमा शंकर उनके बाद भी पार्टी में सक्रिय रहा. नेहरू का करीबी हो गया.

उमाशंकर दीक्षित
उमाशंकर दीक्षित

आजादी मिली तो कांग्रेस के सब नेताओं को मलाई मिली. उमाशंकर दीक्षित को भी. अब स्टोरी कुछ फास्ट फॉरवर्ड करते हैं. नेहरू के बाद इंदिरा राज में भी दीक्षित जी का भौकाल कायम रहा. 1969 में जब इंदिरा को कांग्रेस से निकाल दिया गया, तो दीक्षित उनके साथ हो लिए. नई पार्टी बनी कांग्रेस आर (रूलिंग). जल्द बड़ा इनाम मिला. 1974 में उमा शंकर दीक्षित को देश का गृह मंत्री बना दिया गया. फिर संजय राज आया. बुजुर्गों को कहा गया, गवर्नर हाउस जाकर आराम करिए. दीक्षित जी भी चले गए. कर्नाटक. संजय राज में युवाओं को काम करना था. तो दीक्षित जी की बहू सक्रिय हो गईं. वह पहले भी ससुर का दफ्तर संभालती थीं. इसके अलावा था महिला संगठनों का काम. दिल्ली में. उन दिनों उस लड़की ने वर्किंग वुमन के लिए हॉस्टल बनाने के आंदोलन चलाए. सफल रहीं. दो हॉस्टल बने.

ये लड़की थी शीला कपूर. मिरांडा कॉलेज की पढ़ी. मिस मिरांडा रही. सुंदर, प्रतिभाशाली, तेज तर्रार. पति विनोद दीक्षित आईएएस थे. तो शादी के बाद लड़की हो गई शीला दीक्षित. दोनों के दो बच्चे हुए. संदीप और लतिका. विनोद की अस्सी के दशक में ही अचानक हार्ट अटैक के चलते मौत हो गई. शीला ने बच्चों को संभाला. और ससुर की राजनीतिक विरासत को भी. गांधी परिवार के साथ करीबी राजीव के दौर में भी जारी रही. राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपनी किताब में लिखा है. जब इंदिरा गांधी की हत्या की खबर सुन हम कोलकाता से दिल्ली फ्लाइट से रवाना हुए. तो जहाज में मेरे और राजीव के अलावा उमा शंकर दीक्षित और शीला भी थीं. इन सबकी मौजूदगी में ही राजीव को शपथ दिलाए जाने के प्लान की चर्चा हुई थी.

आगे की कहानी के कुछ मोड़ पहचाने से हैं. राजीव दिल्ली आए. प्रधानमंत्री बने. सिख विरोधी दंगे हुए. फिर राजीव ने नए सिरे से चुनाव का ऐलान किया. दिसंबर 1984 में. शीला दीक्षित भी चुनाव लड़ीं. पंजे के निशान पर. पहली बार. अपनी ससुराल के पास वाले इलाके से. कन्नौज संसदीय सीट. ब्राह्मण बाहुल्य वाली सीट. कभी यहां से मशहूर समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया चुनकर लोकसभा पहुंचे थे. लड़ीं और जीतीं. छोटे सिंह यादव को इंदिरा की हत्या के बाद चली सहानुभूति लहर में बुरी तरह हराकर. सफलता सिर्फ सांसदी तक सीमित नहीं रही. राजीव गांधी ने दो बरस के अंदर ही उन्हें राज्यमंत्री भी बना दिया.

हालांकि पांच बरस बाद ही जनता पार्टी और अब जनता दल के मंझे नेता बन चुके छोटे सिंह यादव ने अपना बदला लिया. शीला ने ये सीट छोटे सिंह से ही छीनी थी. और 1989 के चुनाव में बोफोर्स तोप घोटाले के हल्ले के बीच कांग्रेस की हवा टाइट थी. कन्नौज में शीला दीक्षित 53 हजार वोटों से हारीं. उनकी बुरी लहर में हवा चलाने का काम किया बीजेपी कैंडिडेट और बाद में कल्याण सरकार में काबीना मंत्री रहे जनसंघी नेता राम प्रकाश त्रिपाठी ने. जिन्हें 90 हजार वोट मिले थे. वैसे त्रिपाठी 77 में जनता पार्टी के टिकट पर यहां से सांसद रह चुके थे.

हार से हारी शीला UP नहीं लौटीं

89 के इस दौर में ऐसा नहीं कि यूपी में सिर्फ शीला ही हारी थीं. पास के फर्रुखाबाद से सलमान खुर्शीद को पत्रकार संतोष भारतीय ने पटखनी दी थी. शाहजहांपुर से कुंवर जितेंद्र प्रसाद भी धड़ाम हुए थे. इलाहाबाद से हेमवती नंदन बहुगुणा की वारिस कमला को जनेश्वर मिश्र ने पटखनी दी थी.

इस हार के बाद शीला दीक्षित ने पलटकर यूपी का रुख नहीं किया. पति की पहले ही मौत हो चुकी थी. 1991 में ससुर उमा शंकर दीक्षित का भी देहांत हो गया. शीला अपनी पंजाबी जड़ों की तरफ लौटने लगीं. दिल्ली में रहतीं थीं. ज्यादा सक्रिय नहीं थीं. कांग्रेस में नरसिम्हा राव का दौर चल रहा था. गांधी परिवार के करीबियों की ज्यादा पूछ नहीं थी. मगर 1998 में हालात बदले. सोनिया गांधी लौटीं. और लौटे तमाम वफादार.

अब देखिए तमाशा किस्मत का. 1998 की फरवरी में देश में लोकसभा चुनाव हुए. इन चुनावों में शीला दीक्षित ईस्ट दिल्ली से चुनाव लड़ीं. उन्हें बीजेपी के लाल बिहारी तिवारी ने बुरी तरह से हराया. और इसके कुछ महीनों बाद दिसंबर 1998 में हुए दिल्ली में विधानसभा चुनाव. सरकार थी बीजेपी की. सीएम थीं सुषमा स्वराज. और बढ़ गए थे बेतहाशा प्याज के दाम. इन सबके चलते बीजेपी चुनाव हार गई. कांग्रेस की सत्ता वापसी हुई. और सीएम बनाई गईं शीला दीक्षित. लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी शीला कमजोर नहीं पड़ी थीं. वह गोल मार्केट विधानसभा से चुनकर पहुंची थीं.

फोटो क्रेडिट: REUTERS
फोटो क्रेडिट: REUTERS

इसके बाद का इतिहास सब जानते हैं. लगातार तीन चुनावों में कांग्रेस की जीत. अपने दम पर. शीला दीक्षित के नेतृत्व में. शीला दो बार गोल मार्केट से विधायक रहीं और 2008 में तीसरी बार नई दिल्ली सीट से. और फिर पांच साल बाद इसी सीट पर उन्हें आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने हराया.

इस हार के बाद शीला की दिल्ली की राजनीति से लगभग विदाई हो गई. उनके बेटे संदीप दीक्षित जो कांग्रेस के सांसद थे. वह भी 2014 के लोकसभा चुनाव में जमींदोज हो गए. शीला को दिल्ली की हार के बाद केरल के राज्यभवन भेज दिया गया था गवर्नर बनाकर. मगर बीजेपी राज आने के बाद उन्होंने पूरी गरिमा के साथ इस्तीफा दे दिया.

 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

हिमा दास, आदि

खचाखच भरे स्टेडियम में भागने वाली लड़कियां जो जीवित हैं और जो मर गईं.

अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

'मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है.'

ब्लॉग: शराब पीकर 'टाइट' लड़कियां

यानी आउट ऑफ़ कंट्रोल, यौन शोषण के लिए आमंत्रित करते शरीर.

औरतों को बिना इजाज़त नग्न करती टेक्नोलॉजी

महिला पत्रकारों से मशहूर एक्ट्रेसेज तक, कोई इससे नहीं बचा.

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.