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मालदीव्ज़ के पूर्व उपराष्ट्रपति चोरी से भारत में क्यूं घुस रहे थे?

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मालदीव्ज़
सितंबर, 2015.
महीने की 28 तारीख.

राष्ट्रपति थे अब्दुल्ला यामीन. एक स्पीडबोट में कहीं जा रहे थे. बोट में धमाका हो गया. तीन लोग घायल हुए. राष्ट्रपति की पत्नी समेत. यामीन सही-सलामत रहे. बात आई कि इसके बाद के हफ़्तों में भी राष्ट्रपति की हत्या के लिए कई साज़िशें रची गईं. कि सुरक्षा बलों को छुपे हथियार मिले कहीं. कहीं हैंड ग्रेनेड और बारूद.

ये सच में साज़िश थी या नौटंकी थी?
ये साज़िश वाले ऐंगल को लेकर बड़ी बातें हुईं. कइयों ने कहा, यामीन खुद ही सब करवा रहे हैं. विरोधियों को फंसाने और किनारे लगाने के लिए. इसका एक आधार FBI भी थी. जिसे मालदीव्ज़ ने राष्ट्रपति की नाव में हुए धमाके की जांच के लिए बुलाया था. FBI ने जांच के बाद बताया कि उसे नाव में बम रखे होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला. मगर सरकार अड़ी हुई थी. कि हो-न-हो ये यामीन को मारने की ही साज़िश थी. श्रीलंका और सऊदी अरब से भी फॉरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया गया. श्रीलंका वालों ने कहा, कोई तो विस्फोटक यंत्र था नाव पर. उसी से धमाका हुआ. सऊदी के विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे कि RDX का इस्तेमाल हुआ है. मालदीव्ज़ सरकार के लिए ये रेफरेंस हो गया.

28 सितंबर, 2015 को अब्दुल्ला यामीन इसी स्पीडबोट में बैठे थे, जब इसके अंदर धमाका हुआ. ये ब्लास्ट के बाद की तस्वीर है. अधिकारी एक घायल महिला को लेकर जा रहे हैं (फोटो: रॉयटर्स)
28 सितंबर, 2015 को अब्दुल्ला यामीन इसी स्पीडबोट में बैठे थे, जब इसके अंदर धमाका हुआ. ये ब्लास्ट के बाद की तस्वीर है. अधिकारी एक घायल महिला को लेकर जा रहे हैं (फोटो: रॉयटर्स)

…और धर लिए गए यामीन के करीबी अहमद अदीब
हमले के कुछ ही दिनों बाद उंगली उठी अहमद अदीब पर. 33 बरस की उम्र. जुलाई 2015 में यामीन ने उन्हें उपराष्ट्रपति नियुक्त किया था. सबसे युवा वाइस प्रेज़िडेंट. यामीन के करीब माने जाते थे वो. इन्हीं अदीब पर हमले की साज़िश रचने का इल्ज़ाम लगा. गिरफ़्तार कर लिए गए. देशद्रोह का इल्ज़ाम लगा. मालदीव्ज़ की संसद ने उनपर महाभियोग लगाया. राष्ट्रपति की हत्या की साज़िश रचने का केस चला उनपर. सज़ा मिली 15 साल की जेल. फिर उनके ऊपर आतंकवाद और भ्रष्टाचार के भी इल्ज़ाम लगे. दोषी पाए गए. कुल मिलाकर सज़ा मुकर्रर हुई 33 बरस. अदीब के ऊपर हुई कार्रवाई की विदेशों में कई जगह आलोचना हुई. कहा, राजनैतिक कारणों से उन्हें निशाना बनाया गया है.

फिर 2018 में मालदीव की सत्ता बदली
जेल भेजे जाने के बाद अदीब ने यामीन को हटाने में विपक्ष का साथ देने की कोशिश की. इल्ज़ाम लगाया कि यामीन ने मालदीव का अनगिनत पैसा विदेश ले जाकर जमा किया है. अदीब के मुताबिक, जब वो (यानी अदीब) उपराष्ट्रपति थे, तब भी ये सब हुआ. 2018 में सत्ता बदलने के बाद अदीब को जेल से हटाकर उनके घर में नज़रबंद कर दिया गया. 2019 में मालदीव्ज़ की एक अदालत ने उनपर लगे आरोपों में नए सिरे से ट्रायल का आदेश दिया. इस समय तक अदीब तीन साल जेल काट चुके थे. उन्हें मिली पिछली सज़ाएं रद्द हो गईं. इसके पीछे वजह गिनाई गई- राजनैतिक हस्तक्षेप. कहा गया कि पिछली बार हुआ ट्रायल पॉलिटिकली मोटिवेटेड हो सकता है.

यही अहमद अदीब 1 अगस्त को भागकर भारत पहुंचे
कोई वीज़ा नहीं. इजाज़त नहीं. एक नाव में बैठकर वो तमिलनाडु के तूतूकुड़ी बंदरगाह पर आ लगे. रॉयटर्स के मुताबिक, अदीब के यहां पहुंचने की जानकारी उस कंपनी ने दी भारत को जो उस टगबोट की मालिक है जिसमें अदीब बैठे थे. भारत ने उन्हें हिरासत में ले लिया. कहा, अवैध तरीके से देश में घुस आए हैं. ख़बर है कि अदीब ने भारत से शरण मांगी है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा-

चूंकि अदीब तयशुदा एंट्री पॉइंट्स से और वैध कागज़ात के साथ भारत में नहीं घुसे, इसीलिए उन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई.

नाव भारत से चली थी, भारत को लौटी
जिस टगबोट में बैठकर अदीब भारत पहुंचे, उसका नाम है- Virgo 9. ये 11 जुलाई को तूतूकोड़ी से ही रवाना हुआ था. फिर 13 जुलाई को पहुंचा मालदीव की राजधानी माले. ये टगबोट 27 जुलाई को माले से तूतूकोड़ी के लिए रवाना हुआ. इसके क्रू-सदस्यों में एक भारतीय भी था. शायद उसी ने टगबोट की मालिक कंपनी को अदीब के मौजूद होने की खबर दी. और फिर कंपनी ने इंडियन अथॉरिटीज़ को सतर्क किया.

वादा किया था- नहीं भागेंगे, तोड़ दिया
अदीब कुछ दिनों पहले अपने इलाज के लिए भी भारत आए थे. यहां से लौटने के बाद जून में उन्हें नज़रबंद कर दिया गया. फिर उन्हें रिहा भी कर दिया गया. ये आशंका थी कि शायद वो भागने की कोशिश करें. 6 जुलाई को फिर अदीब ने एक ट्वीट करके लिखा कि-

मैं अच्छे समय में तुम्हारे साथ रहा. मैं मुश्किल समय में भी तुम्हारे साथ रहा. मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा. मैं तुम्हारी जांच का सामना करूंगा. मैं कभी अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भागूंगा. कोई कुछ भी कहे, मेरे वतन मालदीव्ज़ मुझे तुमसे मुहब्बत है. मालदीव्ज़, मेरा प्यारा और खूबसूरत देश.

अदीब की क्या ज़रूरत है अभी मालदीव में?
मालदीव्ज़ के वर्तमान राष्ट्रपति हैं इब्राहिम मुहम्मद सालेह. सितंबर 2018 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में सालेह ने अब्दुल्ला यामीन को हराया. यामीन चीन के समर्थक थे. सालेह भारत सपोर्टर माने जाते हैं. यामीन के प्रो-चाइना कार्यकाल में मालदीव ने भारत को दूर कर दिया था. सालेह के आने से फिर भारत करीब हो गया है. यामीन के कार्यकाल में चीन के साथ हुई कई डील्स की जांच भी करवा रहे हैं सालेह. सालेह के ऊपर मनी-लाउंड्रिंग का भी केस है. वो इन आरोपों से इनकार करते हैं. उनके ऊपर चल रहे इस केस में मुख्य चश्मदीद हैं अदीब. इसीलिए मालदीव में फिलहाल उनकी काफी ज़रूरत है.

मालदीव अदीब को वापस लाने में जुट गया है
मालदीव्ज़ पुलिस कह रही है कि 1 अगस्त को सरकारी पैसे के गबन के मामले में अदीब से पूछताछ होनी थी. उसी से बचने के लिए वो देश से भागे हैं. अदीब के पास पासपोर्ट भी नहीं है. क्योंकि उनका पासपोर्ट अदालत ने ज़ब्त कर लिया था. अब भारत अदीब को उनके वतन डिपोर्ट करने जा रहा है कि नहीं, ये अभी पता नहीं. हां, मालदीव पुलिस ने ज़रूर कहा कि वो अदीब को वापस लाने पर काम कर रहे हैं. मालदीव पुलिस ने एक बयान भी जारी किया. इसमें कहा गया है-

जिन-जिन लोगों ने देश से भागने में अहमद अदीब की मदद की, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने उनके ऊपर ट्रैवल बैन लगाया हुआ है. उनके ऊपर सरकारी पैसे के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और मनी लाउंड्रिंग से जुड़े आरोप हैं. 

अदीब के मुल्क छोड़कर भागने पर मालदीव पुलिस ने ये बयान जारी किया (फोटो: ट्विटर)
अदीब के मुल्क छोड़कर भागने  और भारत में पकड़े जाने की खबर पर मालदीव पुलिस ने ये बयान जारी किया (फोटो: ट्विटर)

क्या भारत आकर कहीं और चले जाने वाले थे अदीब?
यामीन के खिलाफ चल रहे मामले के अंदर गवाही देने में नई सरकार का सहयोग कर रहे थे अदीब. मगर शायद फिर उन्हें लगा हो कि वो खुद भी नप जाएंगे. शायद उन्हें फिर से सज़ा हो जाएगी. इसीलिए वो भागे हों. लगता तो नहीं कि भारत उन्हें शरण देगा. हां, मगर शरणागत और वो भी राजनैतिक शख्सियत, कुछ मर्यादाएं तो होती हैं उस देश की जिससे असाइलम मांगा जाता है.

भारत सरकार हर हाल में सालेह सरकार की मदद करना चाहेगी. शायद अदीब को जल्द ही डिपोर्ट भी कर दिया जाए. ऐसा नहीं कि अदीब को ये पता नहीं होगा. वो जानते रहे होंगे कि भारत में पकड़े जाने पर ऐसा ही हो. फिर भी वो मालदीन से भागकर भारत क्यों आए, यही सवाल है. हो सकता है भारत बस एक स्टॉप रहा हो. क्योंकि वो टगबोट, जिसमें बैठकर भागने का मौका मिला अदीब को वो भारत आ रही थी. हो सकता है वो यहां से आगे कहीं और जाने वाले थे. मतलब उनके नज़रिये से देखें, तो लॉजिकल तो यही लगता है.


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