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कोर्ट के फैसले को हमें ऑपरा सुनते एंड्र्यू के कमरे तक ले जाना है

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Judge – In this courtroom, Mr Miller, justice is blind. To matters of race, creed, colour, religion. And sexual orientation.
JOE – With all due respect, Your Honor… We don’t live in this courtroom, do we?

Philadelphia Judge Scene

जब सब लोग होमोसेक्शुअलिटी की बात कर रहे हैं, मैं जाकर फ़िलाडेल्फ़िया के एक सीन पर अटक जाता हूं, असल ज़िंदगी के मुद्दों को फिल्मों में तलाशना मुझे बहुत बचकाना लगता है, लेकिन अभी मुझे इसके अलावा कुछ समझ नहीं आ रहा. मुझे लगता है, होमोसेक्शुअलिटी पर मैंने जितना देखा-पढ़ा है, उसमें ये सबसे इम्पैक्टफुल चीज है, जो मुझे छू गई है.


टॉम हैंक्स, एंड्र्यू बैकेट बने थे. एंड्र्यू फ़िलाडेल्फ़िया की एक लॉ फर्म में सीनियर एसोसिएट था. एक दोस्त कुछ दिन पहले फेसबुक पर पूछ रहा था. पार्टनर, तुम्हारा प्रिविलेज क्या है? एंड्र्यू का प्रिविलेज ये था कि वो मर्द था. श्वेत था. पैसे वाला, काम वाला था. पीछे अमीरों की बैकिंग थी. संस्थान में ऊंचा रुतबा था. कॉन्फिडेंट था, चंट था. दोस्त होता तो प्रिविलेज और बेनीफिट्ज़ की बहस शुरू कर देता, मैं कहता. जो भी हो, एंड्र्यू के काम में कोई उसका हाथ नहीं पकड़ सकता था.

Tom Hanks in Philadelphia

सामने डेंज़ल वाशिंगटन थे, मतलब जो मिलर. दुखियारे का जो मिले, वो केस उठा लेने वाले पर्सनल इंजरी लॉयर. क्रांतिकारी टाइप्स. जो मिलर अश्वेत है, कैरेक्टर अश्वेत हो तो तल के नीचे एक संकेत बहता रहता है.

Denzel Washington in Philadelphia

एक दिन पता चलता है, एंड्र्यू को एड्स है. एंड्र्यू समलैंगिक है. उसकी फर्म उसे नौकरी से निकाल देती है, बहाना मार के. उस बहाने के भी तले हैं, गला पकड़ के पूछो तो वो ये मानने के लिए तैयार भी हो जाएंगे कि एड्स के कारण निकाला, लेकिन ये नहीं मानेंगे कि गे होने के कारण निकाला.

एंड्र्यू उनके खिलाफ मुकदमा करना चाहता है. यहां से प्रिविलेज धराशायी हो जाते हैं. एंड्र्यू को एड्स है, वो गे है, अब सोसायटी में निचले दर्ज़े का नागरिक है. जिस कंपनी के मालिक उसके साथ छुट्टियां बिताते, मज़ाक में पिछवाड़े पर थपकियां देते. अब उसके साथ एक कमरे में भी बैठते तो मीलों की दूरी बना लेना चाहते. एंड्र्यू जो मिलर की मदद चाहता है. प्रिविलेज जगह बदलते हैं. अब जो मिलर एक मर्द है. वकील है. भले ब्लैक है लेकिन स्ट्रेट है. टीवी पर बोलता है, लोग उसे जानते हैं. जो मिलर, होमोफोबिक है. वो एंड्र्यू का केस लड़ने से मना कर देता है.

Tom hanks office scene

ये लोग जिन्होंने एंड्र्यू को नौकरी से निकाला, ये हम हैं. जो समलैंगिकता पर चुटकुले बनाते हैं. उनसे डरते हैं. उन्हें कुछ और समझते हैं. समलैंगिकता को पाप मानते हैं. अब उसमें एड्स और जुड़ जाए तो कोढ़ में खाज़. एंड्र्यू तक एड्स शायद किसी सस्ते मूवी थिएटर में किये असुरक्षित सेक्स से पहुंचा था. तीसरा पाप– कि पार्टनर तक बदल लिया. आप होते तो कह देते, अय्याशी का फल मिल गया.

Tom hanks In Law Firm

यहीं बुद्धि खुलनी चाहिए, समलैंगिकता हम पर कहीं से असर भी नहीं डालती, जैसे लॉ फर्म को एंड्र्यू के समलैंगिक होने से तब तक फ़र्क़ नहीं पड़ता, जब तक कि उन्हें एड्स का पता नहीं चल गया. गे होने का पता नहीं चल गया. अब इस बात को कॉन्स्टेंट रखिए, अगर उन्हें इस बात का कभी पता ही नहीं चलता कि एंड्र्यू गे है तो उनके लिए कुछ कभी नहीं बदलता.अब इस चीज को कॉन्स्टेंट रखते हुए, इस फैक्ट को पूरी दुनिया पर फैला दीजिए कि अगर हम लोगों कि सेक्शुअल ओरिएंटेशन से सहज हो जाएं तो किसी को कभी फ़र्क़ नहीं पड़ता. कभी कुछ नहीं बदलता.

लॉ फर्म इस कहानी का केंद्र है, वो हम हैं. लॉ फर्म को लगता है कि कर्मचारी की सेक्शुअल ओरिएंटेशन उनकी कंपनी को नुकसान पहुंचाएगी. जैसे हमें लगता है कि किसी का गे या लेस्बियन होना सोसायटी को नुकसान पहुंचाएगा. कंपनियां या समाज हमेशा पुरातनपंथी दिखने में सुख पाते हैं. कंपनियों के नियम और तौर-तरीके देख लीजिए, बहुत वाहियात और पुराने ढंग के हैं. साइकोलॉजी ये है कि एक ग्रुप के तौर पर आप जितना ‘जो चलता आ रहा है, वैसा’ व्यवहार करेंगे. क्लाइंट उतना ही सहज होगा, उतना ही सिंसियर समझेगा. समाज के तौर पर ये बात, ‘समाज उतना बेहतर होगा’ कहलाती है. मूलत: हम ग्रुप्स/कंपनी/ सोसायटी इसलिए बनाते आए हैं क्योंकि हमें हमेशा से डर लगता रहा है. अब जब जंगल और जानवरों का डर ख़त्म हुआ तो हमने नए डर बना लिए हैं.

इन सबसे इतर, जो मिलर वो आदमी है. जो एड्स का पता चलने पर एंड्र्यू से हाथ मिलाने में भी हिचकता है. उसे डर लगता है, कहीं ये बीमारी एंड्र्यू के हाथों उसके घर तक, उसकी बच्ची तक न पहुंच जाए. जो मिलर भी हमारे जैसा है, जिन्हें नई चीजें असहज करती है. जो बातें उसे पता नहीं होती उससे जो मिलर डर जाता है. वो होमोफोबिक है और इस हद तक कि केस लड़ने से मना करते हुए ये स्वीकारने से भी नहीं हिचकता कि ये निजी कारणों से है.

philadelphia Joe Refuse

लेकिन जो बुरा आदमी नहीं है. जैसे हम सब बुरे लोग नहीं हैं. हमें अच्छा-बुरा समझ आता है. जो को क़ानून समझ आता है. उसे ये समझ आता है कि एक आज़ाद देश में हर कोई बराबर होता है. लाइब्रेरी में लोग एंड्र्यू को अलग नज़र से देखते हैं. एक आदमी आता है, एंड्र्यू को सलाह देता है कि वो अलग कमरे में बैठ जाए. वो मना करता है तो ज़ोर देता है. उसके ज़ोर देने का कारण अब भी एड्स ही था लेकिन जो मिलर को यही बात सबसे बुरी लगती है. इसी बात के बाद वो उसका केस लेता है. यहीं आपके सवाल का जवाब मिलता है. अगर कोई होमोसेक्शुअल है, अगर कोई किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है. अगर आपकी नज़रों में वो बदचलन है. विवाह संस्था में भरोसा नहीं रखता है. उसने कुछ ऐसे काम किए, जो उसे नहीं करने चाहिए. फिर भी उसे जीने का हक़ है, बराबरी का हक़ है. जो मिलर ये बात 1993 में समझ गया था.

इन सबके बीच एक दृश्य है. एंड्र्यू, जो मिलर की तरफ पढ़ते हुए एक किताब सरकाता है, आंखों में शंका रहती है कि वो किताब लेगा भी या नहीं. जो मिलर कंधे झटकता है, किताब पढ़ना शुरू कर देता है. कंधा झटकने में खुद को दिलासा है. स्वीकार्यता है. हमें जो मिलर जैसे अपनाना आना चाहिए.
Book scene

सब नहीं अपना पाते. जैसे वॉल्टर केंटन और चार्ल्स व्हीलर नहीं अपना पाए. चार्ल्स के डर अलग थे, उसे डर था कि एंड्र्यू उसके ऑफिस, उसके बाथरूम यहां तक कि उनके घर के जलसों तक एड्स ले आया. वाल्टर के तरीके दूसरे थे. वो होमोसेक्शुअलिटी को अपराध मानता था, ‘अपराध की सज़ा देने में यकीन रखता था, सबक सिखाने में यकीन रखता था. जैसे उसने नाविक रखते हुए किया था. एक समलैंगिक का सिर इस्तेमाल किए हुए टॉयलेट में डाल दिया. एंड्र्यू नौकरी पर मिला तो उसे नौकरी से निकाल दिया, सबक सिखा दिया. 377 भी बर्बर धारा थी, उसे किसी वॉल्टर केंटन ने बनाया होगा. ‘ऐसे लोगों को सबक सिखाओ, इनका सिर टॉयलेट के पॉट में डाल दो. हमारी अदालत स्वच्छ भारत अभियान की ब्रांड एम्बेस्डर बनी.

पर बात उस सीन की, जो रूह के भीतर धंस कर होमोफोबिया का शिकार करता है. पूरा साढ़े चार मिनट का सीक्वेंस है. ये सीन घूल बन सकता है, मैं नहीं कहता कि आप होमोफोबिक हैं लेकिन अगर आप बर्बर हैं. आपने कुछ गलत किया है, किसी के भी साथ! तो ये सीन आपको किरचेगा, वैसे जैसे गलत तरीके से पियो तो सुबह का पहला पानी कलेजे को चीर देता है. मैंने नोएडा के एक घर में अकेले बैठकर फिल्म का ये हिस्सा देखा था. मुझे महसूस हुआ मैं कितना गलत आदमी हूं. जो मिलर, एंड्र्यू के साथ बैठा है. बाहर कहीं पार्टी चल रही है. ऑपरा बजता है. एंड्र्यू जो से पूछता है, उसे ऑपरा पसंद है? जो मिलर की असहमति आती है.

यहां से मैंने अगले साढ़े चार मिनट तीन तरीके से देखे.


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एंड्र्यू उसे गाने के अपने पसंदीदा हिस्से पर ध्यान देने को कहता है. जो मिलर को घर जाने की जल्दी है, वो घड़ी देखता है. गाना तेज़ होता है, एंड्र्यू गाने का अर्थ समझाता जाता है. एंड्र्यू कमरे की चीजें छूता जाता है, उसका हाथ कमजोरी से कांपता है. हाथ में ड्रिप लगी है और वो स्टैंड पकड़े कमरे में फिरा जा रहा है. एंड्र्यू, जो से पूछता है, क्या वो गाने को महसूस कर पा रहा है. सहमति आती है. सहमति से ज़्यादा एंड्र्यू की इस हालत पर जो का दुःख दिखता है. फिर एंड्र्यू एक स्ट्रिंग की बात कहता है, जो गाने में सबकुछ बदल के रख देगा. कैमरा जो मिलर के चेहरे पर रुक जाता है, पीछे आग जल रही है.

Joe miller

जो के अंदर कुछ पिघल रहा है. कमरा रंग बदलना शुरू करता है. जो मिलर का चेहरा अंधेरे में छुप जाता है. गाने में आवाज़ तेज़ होती जाती है और जो मिलर की आंखों में नमी बढ़ जाती है. कमरा लाल हो चुका है, जो मिलर जड़ हो चुका है. गाना बज रहा है, एंड्र्यू कांपा जा रहा है. लेकिन शायद जो मिलर के लिए उस कमरे में कुछ नहीं है. वो किसी और दुनिया में है. ऐसे ही मौकों पर पूरी ज़िंदगी आंखों के सामने एक रील में दौड़ जाती है. एंड्र्यू का गाना ख़त्म होता है, जो मिलर धरातल पर आ जाता है. कमरे में लाइट जलती है और देखने वाला भी महसूस करता है वो उस कमरे में जो मिलर के साथ नहीं था.


2

एंड्र्यू गाने का अर्थ समझाता है कि ये मेडेलिन है. जो बता रही है कि फ़्रेंच रिवॉल्यूशन के दौरान कैसे एक भीड़ उसके घर को जला देती है. उसकी मां उसे बचाते हुए मर जाती है.

मैं उस जगह को देखती हूं, जिसने मुझे पाला. वो जगह जल रही है.
इस दुःख के दौरान, प्यार मेरे पास आया.
प्यार भरी एक आवाज़ आई, जिसने कहा, अभी तुम्हें जीना है. मैं जीवन हूं.
मैं एक भगवान हूं, जो स्वर्ग से जमीन पर, जमीन को स्वर्ग बनाने उतरा हूं.
मैं एक भुलावा हूं, मैं ही सुख हूं, मैं ही प्यार हूं.


3

भीड़ फैसले लेती है, सही या गलत समझ कर. तटस्थ लोग तब तक इंतज़ार करते हैं, जब तक उन्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता. हर किसी में एक बच्चा होता है, एंड्र्यू बैकेट या मेंडेलिन जैसा, जिसने चीजें चुनी नहीं होतीं. वो किसी पाले में नहीं होते. घटनाएं उनके साथ घटती हैं, समाज उन्हें मैन्युफैक्चर्ड हुआ मिलता है.

नियम बने हुए मिलते हैं, कौन रहेगा कौन जाएगा, कौन जिएगा, कौन मरेगा? ये कोई और ही तय करता है. वो अकेले पड़ जाते हैं, खुद को समझने में. उन्हें बस ये समझ आता है कि बाहर चीजें वैसी नहीं हैं. जो उन्हें स्वीकारें. दुःख सिर्फ दुःख से जुड़ पाता है, असमानता-असमानता से. फिर चाहे वो अश्वेत जो मिलर एंड्र्यू से जुड़ा महसूस करे या एंड्र्यू किसी मेडेलिन से.

Andrew Beckett Opera Scene

नतीज़ा ये कि वो अपराधबोध में घिर जाते हैं, उन्हें लगता है कि अपने चाहने वालों पर वो भार हैं. मिलर प्रतीक है कि इंसान इंसान को नहीं जान पाया. जिस पल कैमरा उसके चेहरे पर रुकता है, उसके चेहरे पर यही दुःख है. दुनिया की इकलौती दिक्कत यही है कि किसी स्कूल में इस बात पर नंबर नहीं काट जाते कि कोई इंसान दूसरे की बात समझ क्यों नहीं पा रहा. हमने तमाम भाषाएं सिखाईं, लिखना-पढ़ना-बोलना सिखाया. बस इंसान को इंसान ने कभी नहीं समझा. हमने जो सीखा, उससे अपने आसपास दीवारें खड़ी कर लीं. जबकि समाज तो बस इसीलिये बने थे कि हर कोई साथ रहे.

Joe miller Andrew Beckett

रहे तो एक-दूसरे को जान समझ ले. दर्शन/धर्म/सत्य/भगवान की खोज सब लफ़्फ़ाज़ी है. सच ये है कि हमें हमारे जैसे ही लोगों के साथ ज़िंदगी बितानी है और बस ये जान लेना है कि कैसे वो एक-दूसरे को समझकर और बेहतर हो जाती है. प्यार के नाम पर जितने पन्ने काले किए, उनसे आख़िरी निष्कर्ष यही निकला कि प्यार इतना पवित्र होता है कि इंसान एक-दूसरे को समझने लग जाता है और इस क्रम में खुद और बेहतर होता जाता है.
ऑपरा में बजता गाना भी अंत में यही कहता है,

तुम अकेले नहीं हो.
मैं तुम्हारे आंसुओं को समेटूंगा.
मैं तुम्हारे साथ चलूंगा, तुम्हारा साथ दूंगा.
मुस्कुराओ.
उम्मीद रखो,
मैं प्यार हूं.
हम सब ख़ून और गंदगी से भरे हुए हैं, सिर्फ प्यार है जो दिव्य है.

उस कमरे में बैठे जो मिलर की तंद्रा टूटी तो उसे यही महसूस हुआ, उजाला फैलते ही, उसे अपने इर्द-गिर्द सिर्फ़ खून और गंदगी नज़र आई. प्यार और समानता नहीं.
इसीलिये जब जज़ उससे कहते हैं कि इस कोर्ट में सब बराबर हैं, जाति-रंग-पंथ-धर्म और लैंगिकता से ऊपर उठके हैं तो जो कहता है, We don’t live in this courtroom, do we?
हम भी उस कोर्ट रूम में नहीं रहते जहां 6 सितंबर को फैसला आया है, पर हमें ऑपरा सुनते एंड्र्यू के कमरे तक का सफ़र तय करना है, जहां प्यार स्वर्ग से उतर कर आया है.


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A scene from the movie Philadelphia taught me what homosexuality was

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