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56 कलावंत जो नहीं रहे बीते सालः बस इतना याद रहे, इक साथी और भी था

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वनराज भाटिया
तमस (1987) का रुदिर गान

Vanraj Bhatia (1927 2021) Composed Music For Tamas, Bharaj Ek Khoj, Manthan, Damini, Ghatak, Tarang, Ramayana The Legend Of Prince Rama 1992
Vanraj Bhatia (1927 – 2021) Composed Music For Tamas, Bharaj Ek Khoj, Manthan, Damini, Ghatak, Tarang, Ramayana The Legend Of Prince Rama 1992

“सृष्टि से पहले सत् नहीं था, असत भी नहीं. अंतरिक्ष भी नहीं, आकाश भी नहीं था. छिपा था क्या. कहां. किसने ढका था. उस पल तो अगम अतल जल भी कहा था.” 1988 में दूरदर्शन पर आने वाली श्याम बेनेगल की एपिक सीरीज़ – भारत एक खोज़. उसका ओपनिंग सॉन्ग. उसका साउंडट्रैक आज भी मन में ज़िंदा है. या फिर जाने भी दो यारों का टाइटल ट्रैक. ऐसे बहुत सारे गीतों को कंपोज किया था वनराज भाटिया ने. भारतीय सिनेमा के महान कंपोजर. अपने जैसे अकेले. पहली पंक्ति के. ऑथेंटिक म्यूजिक बनाने वाले. मई 7 कोे वनराज जी का कोविड ने निधन हुआ. 94 की उम्र में.

श्याम बेनेगल की अंकुर में पहली बार उन्होंने म्यूजिक / बैकग्राउंड म्यूजिक दिया. उसके बाद कोई 25 बरस तक दोनों ने साथ काम किया. श्याम की अधिकतर फ़िल्मों का म्यूजिक दिया. मसलन, जुनून (1978), मंथन (1976). उन्होंने घातक (1996), दामिनी (1993), परदेस (1997), बेटा (1992) जैसी कमर्शियल बॉलीवुड फ़िल्मों में भी बैकग्राउंड म्यूजिक दिया. जो आज भी इन फ़िल्मों को अनूठा फील देता है. भारत एक खोज के अलावा वागले की दुनिया, बनेगी अपनी बात जैसे दूरदर्शन के कई क्लासिक्स को संगीतबद्ध किया. बंटवारे की विभीषिका पर बनी गोविंद निहलानी की ‘तमस’ का जिक्र करना बहुत जरूरी. सांप्रदायिक दंगों की उस पैशाचिकता को वनराज के संगीत ने निराली ऑथेंटिसिटी दी. आज भी उसके दोनों-तीनों गीत पुराने न पड़ सके. 1988 में इस कलाकृति के लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक का नेशनल अवॉर्ड प्रदान किया गया. 2012 में पद्मश्री पाया. लंदन के रॉयल एकेडमी ऑफ म्यूजिक से पढ़ाई करने वाले वनराज ने पैरिस से भी वेस्टर्न क्लासिकल सीखा था.

उनके जाने के बाद श्याम बाबू ने एक इंटरव्यू में कहा था – “मैं ऐसे किसी इंसान को नहीं जानता जिसके पास संगीत की ऐसी समझ हो, जैसी उनके (वनराज) पास थी.”

देखें :  सुंदर बातचीत और धुनें. वनराज के म्यूज़िक को लेकर. ज़ुबिन बालापोरिया, श्वेतांत कुमार और कुणाल कपूर के बीच. अंत तक देखें.

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माइकल के. विलियम्स
‘भागो, ओमार आया’

Michael K. Williams (1966 2021) Of Hbo Series The Wire Fame.
Michael K. Williams (1966-2021) Of Hbo Series The Wire Fame.

ब्रुकलिन की ब्लैक रिहाइश में पले बढ़े माइकल के. विलियम्स को पता नहीं था कि नस्ली हत्याओं वाले इस अमेरिका में उनका भविष्य है भी या नहीं. डर-डर कर बड़े हुए. ड्रग्स की संगत भी हो गई. डांस पसंद था. बैकग्राउंड डांसर बन गए. म्यूजिक वीडियो में काम करने लगे. एक दिन क्वीन्स के एक बार में झगड़ा हो गया तो किसी ने मुंह पर ब्लेड मार दी. एक लंबा कट का निशान बन गया. उसके बाद डायरेक्टर्स ने बैकअप डांसर का काम देना बंद कर दिया. अब उनको ठगों-उचक्कों के कैरेक्टर म्यूजिक वीडियोज़ में मिलने लगे. फिर इसी लुक के कारण पहला एक्टिंग रोल मिला. बाद में इसी निशान ने उनको ओमार लिटिल का अमर किरदार दिया. अमेरिकी टेलीविजन का चहेता कैरेक्टर. एंटी-हीरो. 2002 में शुरू हुई आइकॉनिक सीरीज़ द वायर बाल्टीमोर इलाके में सेट थी. पुलिस किस तरह ड्रग माफिया से लड़ने की कोशिश कर रही है और ड्रग्स में फंसे ब्लैक समाज में बच्चों, टीनएजर्स का क्या हाल है, ये इस ड्रामा सीरीज़ में दिखा. अपनी कहानी से बांध देने वाली ये दुनिया की बेस्ट सीरीज में शुमार होती है. मस्ट वॉच.

इसमें विलियम्स ने ओमार का रोल किया. जो जब बाल्टीमोर के मुहल्लों से अपनी शॉटगन लेकर निकलता था जो गलियां-सड़कें खाली हो जाती थीं. सब भाग जाते थे. बच्चे चिल्लाकर सूचना देते थे कि ओमार आ रहा है. ओमार ड्रग माफियाओं से लड़ता था. उनका माल छीनता था. यूं चलता और आता-जाता जैसे कोई युद्धक्षेत्र में हो. उसे बेजां पसंद इसलिए किया गया क्योंकि उसका उसूल था कि कभी उसकी गोली से कोई निर्दोष न मरे. वो समलैंगिक भी था. अमेरिका में 2002-08 में जिस जिस ने इस सीरीज़ को देखा वो कभी ओमार यानी विलियम्स को न भूला. न भूलेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने भी अपनी एक रैली के दौरान कहा कि द वायर उनकी फेवरेट टीवी सीरीज़ है और ओमार उनका फेवरेट कैरेक्टर. विलियम्स 24 सितंबर को ब्रुकलिन के अपने घर में मृत पाए गए. खासे ड्रग ओवरडोज़ के कारण. सिर्फ 54 की उम्र में. ड्रग्स से हमेशा लड़ते रहे लेकिन छोड़ भी नहीं पाए. द वायर में काम कर रहे थे तब भी कमाई ड्रग्स पर खत्म कर देते थे. ब्लैक समाज के लिए विलियम्स ने काफी काम किया. मदद की. हमेशा खुलकर बोले. सुलझे हुए आदमी थे.

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फ़र्रुख़ जाफ़र
अपने ही पानी में पिघल जाना, बर्फ़ का मुकद्दर होता है

Farrukh Jaffar (1933 2021) In A Still From Ritesh Batra's Photograph With Co Actor Nawazuddin Siddiqui.
Farrukh Jaffar (1933-2021) In A Still From Ritesh Batra’s Photograph With Co Actor Nawazuddin Siddiqui.

स्वदेस (2004) में फातिमा बी का उनका ये किरदार जब कहता है कि अपने ही पानी में पिघलना बर्फ का मुकद्दर होता है तो वो जीवन और मृत्यु दोनों संदर्भों में बहुत कुछ कही बात होती है. यही संवाद याद आया जब फ़र्रुख़ जाफ़र 88 की उम्र में चली गईं. दिन था 15 अक्टूबर. जगह लखनऊ स्थित उनका घर. उनकी पैदाइश जौनपुर की थी. शुरुआती पढ़ाई के बाद लखनऊ आ गईं. ऑल इंडिया रेडियो में काम किया. रंगमंच किया. पहली फ़िल्म थी 1981 में आई उमराव जान. इसमें उन्होंने बच्ची अमीरन की मां का रोल किया, जो बाद में उमराव जान बनती है. इसके बाद 23 बरस का लंबा गैप रहा. उनकी दूसरी फ़िल्म साबित हुई स्वदेस. उसके बाद कई रोल किए जिनमें पीपली लाइव (2009), फोटोग्राफ (2019), गुलाबो सिताबो (2020), सुल्तान (2016) और सीक्रेट सुपरस्टार (2017) जैसी फ़िल्मों के पात्र शामिल हैं. 2017 में आई नॉरवेजियन फ़िल्म वॉट विल पीपुल से.. में भी वे नज़र आईं. डायरेक्टर इरम हक की ये फ़िल्म पाकिस्तान में सेट थी और इसे नॉर्वे ने बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फ़िल्म की अपनी नेशनल एंट्री के तौर पर ऑस्कर में भेजा था.

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दिलीप कुमार
अभिनय की मशाल

Dilip Kumar (1922 2021) In Scenes From Film Ram Aur Shayam And Devdas.
Dilip Kumar (1922 – 2021) In Scenes From Film Ram Aur Shayam And Devdas.

07 जुलाई को उनका निधन हुआ. वे 98 साल के थे. एक इंसान जिसने अभिनय कभी सीखा नहीं. जिसे एक्टर कभी बनना नहीं था. बॉम्बे टॉकीज़ की देविका रानी को उनका लुक शार्प और ज़बान साफ (अंग्रेज़ी/उर्दू) लगी. जॉब ऑफर की. मोटी रकम. यूसुफ ख़ान कुछ सोच विचार करके मान गए. फिर उन्हें दिलीप कुमार का नाम दिया गया. अशोक कुमार जिन्हें वो अशोक भैय्या कहते थे उनसे अभिनय की बारीकियां सीखीं. नेचुरल एक्टिंग. फिर लॉन्च हुए. और उत्तरोत्तर निखरते गए. देवदास (1955), नया दौर (1957), मधुमति (1958), मुग़ल-ए-आज़म (1960) उनकी क्लासिक्स मानी जाती ही हैं. लेकिन गंगा जमुना (1961) दर्शकों को रेकमेंड करूंगा. कैसे गांव का मूसळ, भोला गंगाराम धन्नो से झगड़ता है. धूसर, रॉ, अभद्र गाली भी देता है जो किसी दूसरी फिल्म में सुनने में नहीं आती. ये ताज्जुब रहा कि ज़िंदगी में कभी असल गांव न देखने वाला ये युवक कैसे बहुत स्वाभाविक लहजे में अवधी बोलता चला गया.

मनोरंजन के लिहाज से राम और श्याम (1967) अनुपम है. डबल रोल. इंटेंस सीन्स. लोटपोट करने वाले सीन. सबमें वे फबे. मेरे हमनाम गजेंद्र बाबू को हंटर से रेजमाल करने वाला सीन देखें. अपने हमशक्ल की भांजी से श्याम के पहली बार मिलने का सीन देखें जब वो पूछती है रो-रो कि मामा तुम कहां चले गए थे. हंसना है तो वो सीन देखें जब श्याम अंजना के घर जाता है. चुहल करता है. गजेंद्र लेने आता है तो उसका ख़ून जलाते हुए टेबल पर खाना खाता है और छिजाते-छिजाते हुए जाता है. गोपी (1970) एक और प्यारी फ़िल्म है. जो ख़ूब हंसाती-रुलाती है. उसमें गिरधारी भैय्या के साथ गोपी का ट्रैक उत्कृष्ट है. जिसका प्रतिबिंब स्वर्ग (1990) के कृष्णा-साबजी और कभी खुशी कभी ग़म (2001) के यश-राहुल रायचंद वाले ट्रैक तक पड़ता है. अपनी कला-सूची के दूसरे भाग में दिलीप कुमार ने शक्ति (1982), कर्मा (1986) और सौदागर (1991) जैसी फ़िल्में कीं जो यादगार थीं.

इनमें मशाल (1984) को नहीं भूल सकते. ख़ासकर वो दो सीन. पहला, जब खरे, कट्टर ईमानदार एडिटर विनोद कुमार को बहलाने कारोबारी वर्धान उनके अख़बार के दफ्तर जाता है और तमाचा पाता है. दूसरा वो जब पत्नी सुधा आधी रात को सड़क पर दर्द से कराह रही होती है और विनोद वहां से गुजरती गाड़ी वालों से फरियाद कर रहा होता है और उसका आर्तनाद हम सह नहीं पाते – “ऐ भाईसाब जरा गाड़ी रोको, मेरी बीवी की हालत बहुत ख़राब है, वो मर जाएगी, उसे अस्पताल पहुंचाना है, आपके बच्चे जिएं, इत्ती से मदद कर दो, उसे अस्पताल पहुंचा दो. ऐ भाईसाब.”

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माइकल एप्टेड
द वर्ल्ड इज़ नॉट इनफ (1999) के डायरेक्टर, पर असल परिचय ये नहीं

Michael Apted (1941 2021) Director Of Up Documentary Series.
Michael Apted (1941-2021) Director Of Up Documentary Series.

माइकल एप्टेड की असल पहचान है ‘अप.’ डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों की विरली सीरीज़. जैसी कभी न बनी. न शायद बनेगी. ये डॉक्यूमेंट्री ब्रिटेन के 14 अलग अलग सामाजिक पृष्ठभूमि वाले 7 साल के बच्चों से बातें करती है, उनकी लाइफ को ट्रैक करती है. वो बच्चे 7 से 63 साल के हो जाते हैं तब तक ट्रैक करती जाती है कि आगे जाकर किसकी लाइफ का क्या हुआ. इसमें कुल 9 डॉक्यूमेंट्री बनीं. हर सात साल के अंतराल में. पहली डॉक्यूमेंट्री ‘सेवन अप!’ थी जो 1964 में आई. इसे माइकल ने डायरेक्ट नहीं किया था, वे इसमें असिस्टेंट थे और उन्होंने ही इन 14 बच्चों को देशभर से चुना था. पहली डॉक्यूमेंट्री के बाद हर पार्ट उन्होंने ही डायरेक्ट किया. ‘अप’ विपुल महत्व वाली सीरीज़ है जिसे सर्वकालिक महान फ़िल्मों में गिन सकते हैं. माइकल एप्टेड ने कई फीचर फ़िल्में भी डायरेक्ट कीं. इनमें इनफ (2002) लड़कियों को जरूर देखनी चाहिए. इस साल 7 जनवरी को माइकल का निधन हो गया. लॉस एंजेल्स स्थित अपने घर में. वे 79 के थे.

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सुरेखा सीकरी
किसी के मुंह पे दरवाज़ा बंद करना ठीक नहीं होता…

Surekha Sikri (1945 2021) In Mammo.
Surekha Sikri (1945 – 2021) In Mammo.

दुष्प्राप्य कलाकर्मी. उनका जन्म 1945 में हुआ. दिल्ली में. शुरुआती पढ़ाई संभवतः अल्मोड़ा में हुई. उसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से कॉलेज किया. 1965 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में चयन हुआ. यहां से अभिनय पढ़ने के बाद 15 साल दिल्ली में रहकर रेपरटरी में नाटक करती रहीं. उसके बाद बंबई आना हुआ. 1978 में फीचर फ़िल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ में काम किया. वो पोलिटिकल सटायर जिसे बैन कर दिया गया. उसके बाद गोविंद जी की टेली-सीरीज़ ‘तमस’ में काम किया. ‘तमस’ की वो करुण मगर ज़माने के हिसाब से ‘व्यावहारिक’ मुसलमान महिला जो दंगों के बीच एक बुजुर्ग सिख दंपत्ति को अपने घर में छुपाती है, लेकिन चेता भी देती है कि सेफ्टी की गारंटी नहीं.

उसके बाद सुरेखा जी ने मम्मो, नसीम, सलीम लंगड़े पे मत रो, परिणति, सरदारी बेगम जैसी बहुत सी फ़िल्में कीं. टीवी पर उन्होंने कई कार्यक्रम किए जिनमें जस्ट मोहब्बत (1996) याद है. उन्होंने मिसेज पंडित का रोल किया था. जो अपने समय के हिसाब से कूल प्रिंसिपल थी. उनका सबसे पॉपुलर किरदार बालिका वधू में रहा. मारवाड़ी पृष्ठभूमि वाले इस टीवी सीरियल में उनका लहजा भी संतुलित रूप से स्थानीय-हिंदी वाला था. फ़िल्म बधाई हो (2018) उनकी आखिरी परियोजनाओं में से थी. इसमें उनका बहू का पक्ष लेने वाला सीन और आखिरी अस्पताल वाला सीन, अमिट हैं. सुरेखा जी 76 की आयु में चली गईं. 16 जुलाई को उन्हें दिल का दौरा पड़ा था.

मुझे हमेशा याद रहेगा कबाड़ (1999) का उनका पात्र. इसमें एक बुजुर्ग महिला और एक कबाड़वाले का मानवीय रिश्ता दिखाया गया है. गली से गुजरते एक कबाड़वाले (रघुबीर यादव) को वो महिला रोकती हैं. बुलाती हैं. उन्हें पहली मुलाकात में वो कबाड़वाला खूसट बुढ़िया कहता है लेकिन अंत में वो उनको याद करके बस रोता ही जाता है. शुरू के दृश्यों में एक दृश्य है. एक दिन वो कबाड़ उठाकर जाने को होता है. पीछे मुड़ता है कि ताई वहीं खड़ी हैं. इस पर वो कहता है – “अरे दरवाजा तो बंद कर लो माताजी”. जिस पर वो जो कहती हैं वो मैं इतने बरस बाद भी नहीं भूला – “अरे तू जा तो सही, किसी के मुंह पे दरवाजा बंद करना ठीक नहीं होता. आज कल के लोगों में तो सबर ही नहीं है, दहलीज से पांव निकाला नहीं कि पीठ पे धड़ाम से दरवाजा बंद करते हैं.” उस दिन से ये विचार मेरे अवचेतन में शामिल है. गली से ओझल न हो जाने तक इंसान को देखते रहना.

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जॉन पॉल बेलमॉन्डो
फ्रांस की राष्ट्रीय धरोहर

Jean Paul Belmondo(1933 2021) In A Scene Of That Man From Rio, And The Poster Of Pierrot Le Fou.
Jean Paul Belmondo (1933-2021) In A Scene Of That Man From Rio, And The Poster Of Pierrot Le Fou.

फ्रेंच एक्टर जॉन पॉल बेलमॉन्डो ने 1960 के बाद कमाई के लिहाज से और कला आलोचना के लिहाज से सर्वोत्कृष्ट फिल्मों में काम किया. वे अपने देश के टॉप सुपरस्टार्स में से थे. और कला के चरम फ्रेंच न्यू वेव के मुख्य लोगों में से थे. दो फ़िल्में इस संबंध में देखी जा सकती हैं. दोनों ही ज्यां लूक गोदार की हैं – ब्रेथलेस (1960) और पियेरो ल फू (1965). उन्होंने फ्रांसुआ ट्रुफो, लुई माल, विट्टोरियो डी सीका, क्लॉड चेबरोल और एग्नेस वरदा जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया. 6 सितंबर को पेरिस स्थित अपने घर में वे गुजरे. उनकी आयु 88 थी.

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श्रवण राठौड़
“जब से तुमको देखा है सनम, क्या कहें… “

Shravan Rathod (1954 2021)(right) With Music Partner Nadeem Saifi, Anil Kapoor And Vijayata Pandit In The 80s.
Shravan Rathod (1954-2021)(right) With Music Partner Nadeem Saifi, Anil Kapoor And Vijayata Pandit In The 80s.

सिरोही, राजस्थान में जन्मे थे श्रवण. 13 नवंबर 1954. पांच भाई. पिता पंडित चतुर्भुज राठौड़. चतुर्भुज जी वहां के रोहुआ गांव के थे. उन्होंने संगीत सीखा अपने पिता धुराजी राठौड़ से, जो कच्छ-भुज के उस्ताद हसन खां के शिष्य थे. मां चंपाबाई 90 की उम्र तक गाती थीं, कहते हैं साज़कार तब भी उनसे ख़ौफ खाते थे. 12 साल के थे तब चतुर्भुज केशव संगीत विद्यालय, जामनगर भेज दिए गए. वहां पंडित बलदेव जय शंकर भट्ट के शिष्य बनकर रहे. आठ साल. शिक्षा पूरी करके बंबई चले गए. वहां आदित्य संगीत विद्यालय खोला. बाद में बंबई की फैलोशिप स्कूल में संगीत शिक्षक का काम किया. वहां 30 साल संगीत आचार्य का काम कया. कहते हैं कि 30,000 छात्रों को संगीत सिखाया. इन शिष्यों में कल्याणजी (कल्याण-आनंद, हिंदी फ़िल्मों के नामी कंपोजर) भी थे. चतुर्भुज जी को बेहद क्लिष्ट ध्रुपद धमार गायकी का सम्राट कहा जाता था. बच्चों ने उन्हीं से सीखा. वे गाते थे, श्रवण हारमोनियम बजाते थे और छोटे भाई रूप कुमार तबला. बाद में जब चतुर्भुज परफॉर्म करते थे तो उससे पहले श्रवण और रूप को कुछ मिनट मिल जाते थे. जहां वो तबलों पर जुगलबंदी करते थे.

नदीम से श्रवण की मुलाकात 1972 में हुई. दिसंबर में. उनके पिता के एक शिष्य ने कॉलेज फंक्शन में अपना परफॉर्मेंस देखने श्रवण को बुलाया था. वहां नदीम भी एक साज़ पर बैठे थे. आकर्षक. उस लड़के ने मिलवाया. नदीम-श्रवण दोनों ने एक दूसरे को गाकर सुनाया. अगले साल दोनों ने बतौर कंपोज़र जोड़ी म्यूजिक बनाना शुरू कर दिया. हालांकि 1973 से लेकर 1989 तक वे सफल नहीं हो पाए. न गाने हिट हुए, न नाम चमका. 17 साल होने को आए थे. करियर छोड़ने पर भी विचार करने लगे. फिर गुलशन कुमार ने उनके गाने सुने. पकड़ लिया. कहा एलबम बनाते हैं. फिर महेश भट्ट को सुनाए. उन्होंने कहा इन गानों पर फ़िल्म बनाऊंगा. वो फ़िल्म थी – आशिकी. उसके बाद बैक टू बैक हिट्स. आने वाला दशक नदीम श्रवण का हो चुका था.

वो 17 साल बुरे साल नहीं थे. वे ही सबसे उपयोगी साल थे. क्योंकि इन 17 ‘फ्लॉप’ सालों में दोनों धुनें सोचते रहे, बनाते रहे. करीब 5000 गाने उनके पास इन बरसों में जमा हुए. और 1990 के बाद हमने जो सुना उनमें से बहुत सारे इन 17 सालों में रचे गए थे. बोल थे समीर के. अधिकतर. कितनी तरंगें श्रवण-नदीम ने बनाईं और हमें दीं. ताउम्र के लिए. नज़र के सामने जिगर के पास, तुम रहते हो – जियें तो जियें कैसे बिन आपके – जब से तुमको देखा है सनम, क्या करें, कितने हैं, बेचैन – तेरे दर्द से दिल आबाद रहा – दो दिल मिल रहे हैं, मगर चुप के चुप के – देखा है पहली बार, साजन की आंखों में प्यार – कितनी बेचैन होके, तुमसे मिली – गवाह हैं चांद तारे गवाह हैं – घूंघट की आड़ से दिलबर का दीदार अधूरा रहता है – कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया, जी करे देखता रहूं – दिल चुरा ले, ओ चांद से चेहरे वाले – जीता था जिसके लिए, जिसके लिए मरता था – पायलिया हो हो हो हो – सोचेंगे तुम्हे प्यार करें के नहीं. नदीम तो म्यूजिक इंडस्ट्री छोड़ ही चुके. श्रवण भी चले गए. 22 अप्रैल की रात को निधन हुआ. कोविड हुआ था. 66 की उम्र थी. 90 के दशक पर राज करने वाले श्रवण जहां म्यूजिक अरेंजमेंट का सारा काम संभालते थे, वहीं नदीम कंपोजिशन पर काम करते थे. फ़िल्म इंडस्ट्री में श्रवण अपनी गुडविल के लिए जाने जाते थे.

उन्हें डिफाइन करने के लिए लोग एक ही शब्द इस्तेमाल करते हैं – अच्छे इंसान. इनकी जोड़ी में नदीम तेज़ और मुंहफट थे, वहीं श्रवण शिष्ट. वो बिगड़ी बात को प्यार से संवार लिया करते थे.

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हैलन मेक्रॉरी
“God takes the best first”- Polly Gray

Helen Mccrory (1968 2021) In 2015 Movie Bill As Queen Elizabeth I And In Bbc Tv Series Peaky Blinders.
Helen Mccrory (1968 – 2021) In 2015 Movie Bill As Queen Elizabeth I And In BBC Tv Series Peaky Blinders.

मुकम्मल एक्ट्रेस. बड़ी एक्ट्रेस. पैडिंगटन, लंदन की पैदाइश. हैलन मेक्रॉरी. 1990 के दौर में स्टेज एक्टिंग करने लगीं. क्लासिक किरदारों को प्ले किया. 1994 में एक फीचर से डेब्यू किया जिसमें टॉम क्रूज़ और ब्रैड पिट पिशाच बने थे. 2022 में रिलीज़ होने जा रही एनिमेशन फ़िल्म शार्लट उनकी आखिरी प्रस्तुति होगी. इस बीच लंबी यात्रा रही. टीवी, फ़िल्म और रंगमंच तीनों में खूब काम किया. उनको ब्रेस्ट कैंसर हो गया था. लेकिन किसी को बताया नहीं. काम करती रहीं. सिर्फ उनके पति डेमियन लुइस (बिलियन्स, होमलैंड) जानते थे, या फिर बहुत करीबी लोग. 16 अप्रैल को सो गईं. 52 साल की थीं. मृत्यु से कुछ दिन पहले संभवतः एक चैरिटी के लिए कोई टीवी इंटरव्यू लिया जा रहा था तो बीमारी चेहरे पर दिख रही थी. एंकर ने पूछा, आप ठीक तो हैं, मांदी सी लग रही हैं? इस पर हैलन ने बहुत चातुर्य से जवाब दिया – I’ve got kids. और सब हंस पड़े. लेकिन वे जानती थीं कि अब कुछ दिन ही बचे हैं. लेकिन पछतावा न था, परिवार को कह गईं कि मैं खुश हूं, आप सब आगे बढ़ो.

हैलन के बिना विश्वदर्शकों का सिनेमा संसार पूरा नहीं हो सकता. वे पीकी ब्लाइंडर्स और हैरी पॉटर वाली एक्ट्रेस थीं. हैरी पॉटर एंड द डेथली हैलोज़ 1-2 व हाफ ब्लड प्रिंस में वे नारसिसा मेलफॉय बनी थीं. हाउस ऑफ ब्लैक से आने वाली जादूगरनी. बहुत चालाक. वो, जिसने वॉल्डेमोर्ट से झूठ बोला कि हैरी मर चुका है. जिसके फैसलों को फैन आज भी उथल पुथल के देखते हैं. बीबीसी की सीरीज़ पीकी ब्लाइंडर्स (2013-18) उनका सबसे ठोसरूप में रह गया काम है. पॉली ग्रे का रोल किया था उन्होंने. 1918-19 के दौर में बर्मिंघम में एक्टिव गैंग पीकी ब्लाइंडर्स की संरक्षक. टॉमी शेल्बी की मौसी. गैंग की अकाउंटेंट. मजबूत किरदार. हिज़ डार्क मटीरियल्स (2019) में वे हिम तेंदुआ बनी थीं. लॉर्ड एज़रियल की सोल/जीव, स्टेलमारिया के किरदार की आवाज़ थीं वे. ये एचबीओ-बीबीसी की सीरीज़ थी. ब्रिटिश क्राइम थ्रिलर सीरीज़ फीयरलेस (2017) की चर्चा ज्यादा नहीं होती लेकिन ये भी ठीक काम था. इसमें उनका लीड रोल था. एक ह्यूमन राइट्स लॉयर जो एक हत्या के आरोपी का कैसे लेती है.

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सतीश कौल
‘दिल दिया है जां भी देंगे’

Satish Kaul (1945 2021) In Hindi Film Karma With Nutan.
Satish Kaul (1945 – 2021) In Hindi Film Karma With Nutan.

पंजाबी सिनेमा का बड़ा नाम रहे सतीश कौल 10 अप्रैल को गुजर गए. उन्हें कोविड हुआ था. 73 साल के थे. एफटीआईआई से एक्टिंग पढ़े सतीश जी ने हिंदी में भी फ़िल्में की थीं. जैसे 1986 में आई सुभाष घई की कर्मा. इसमें दिलीप कुमार, नूतन के बेटे का रोल किया. “दिल दिया है, जां भी देंगे, ऐ वतन तेरे लिए” – गाने से वो याद हैं. उन्होंने बीआर चोपड़ा की महाभारत में इंद्र का रोल किया. टीवी सीरीज़ विक्रम बेताल में भी दिखे.

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पुनीत राजकुमार
कन्नड़ फ़िल्म इंडस्ट्री का पावर स्टार

Puneeth Rajkumar (1975 2021) In A Scene Of Telugu Film Anjani Putra (2017) With Ramya Krishnan.
Puneeth Rajkumar (1975 – 2021) In A Scene Of Telugu Film Anjani Putra (2017) With Ramya Krishnan.

पुनीत राजकुमार उन्हीं लैजेंड्री डॉ. राजकुमार के बेटे हैं जिनको वीरप्पन ने साल 2000 में किडनैप कर लिया और 108 दिन अपने पास रखा था. ये तब दुनिया की बड़ी खबर थी. डॉ. राजकुमार न सिर्फ कन्नड़ सिनेमा के शिखर पुरुष हैं बल्कि भारतीय सिनेमा के सबसे कद्दावर एक्टर्स में से हैं. उन्हें हमारे यहां सिनेमा का शीर्ष पुरस्कार दादा साहेब फाल्के मिला. पद्म भूषण भी. उनके छोटे बेटे थे पुनीत. उनको कन्नड़ सिनेमा का पावर स्टार बोलते थे. सुपरस्टार बोलते थे. 29 अक्टूबर को हार्ट अटैक और वे नहीं रहे. उनकी उम्र 46 साल थी.

जब छोटे थे तो ‘बेट्टाडा हूवु’ नाम की फिल्म में रामू नाम के गरीब लड़के का रोल किया. 1985 में आई इस फिल्म के लिए मास्टर पुनीत को बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया. ये अभिनय के लिए पुरस्कार था. बाद के जीवन में वे बॉक्स ऑफिस का पुरस्कार जीतते रहे. जैसे, उनकी 2017 की रिलीज़ ‘राजकुमार’ कन्नड़ सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म थी, के.जी.एफः चैप्टर 1 की रिलीज से पहले तक. पावर (2014) पहली कन्नड़ फ़िल्म थी जिसने छह दिन में 22 करोड़ से ज्यादा कमाई कर ली थी. हुडुगारू, जैकी, राम, अरसु, मिलाना, अजय उनकी अन्य चर्चित फ़िल्में थीं.

[12]
नॉर्मन लॉयड
अमेरिकन सिनेमा के चलते फिरते इतिहास

Norman Lloyd (1914 2021) In Film Dead Poets Society With Robin Williams. Seen In Other Photo With Alfred Hitchcock.
Norman Lloyd (1914 – 2021) In Film Dead Poets Society With Robin Williams. Seen In Other Photo With Alfred Hitchcock.

अतिदुष्प्राप्य व्यक्ति. अपार एनर्जी के धनी. 106 की उम्र में सो गए. अमेरिकी सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख नामों में एक. सबकुछ देखा. उतार चढ़ाव. सब. उन्हें हॉलीवुड या अमेरिकी सिनेमा का चलता फिरता इतिहास कहते थे. ऑरसन वेल्स (सीज़र, थियेटर प्रोडक्शन, 1938), एल्फ्रेड हिचकॉक (सेबोट्वार, 1942), जॉन रेनुआर (द सदर्नर, 1945 ), चार्लिन चैपलिन – बस्टर कीटन (लाइमलाइट, 1952) सब दिग्गजों के साथ काम करते रहे. सहभागी. उन्हें डेड पोएट्स सोसायटी (1989) से भी याद रखेंगे. रॉबिन विलियम्स स्टारर इस कल्ट फ़िल्म में वे हेडमास्टर नोलन के रोल में नज़र आए.

[13]
शशिकला सहगल
“दादीमां दादीमां, प्यारी प्यारी दादीमां…”

Shashikala (1932 2021) Seen With Co Actors Ashok Kumar, Meena Kumari And Sharmila Tagore.
Shashikala (1932 – 2021) Seen With Co-Actors Ashok Kumar, Meena Kumari And Sharmila Tagore.

डायरेक्टर कल्पतरू की 1988 में आई फ़िल्म – घर घर की कहानी. इसमें सास का किरदार था. जो अपनी विधवा बहू गंगा पर ज़ुल्म करती है. जब पति धनराज (कादर खान) पिटाई करता है तो रूठ जाती है. फिर घर के लोग खाना खाने के लिए मनाते हैं और पोता-पोती गाते हैं – “दादीमां दादीमां, प्यारी प्यारी दादीमां, देखो जरा इधर देखो, गुस्सा छोड़ो दादीमां.”

शशिकला सहगल की विपुल कला सूची में ऐसी फ़िल्में बहुत सी रही हैं, जहां उनको ‘बुरी महिलाओं’ के रोल करने को मिले. भारतीय सिनेमा के हर सुपरस्टार, हर उतार चढ़ाव को उन्होंने देखा. बिमल रॉय की सुजाता से लेकर आरती, आई मिलन की बेला, पत्थऱ के सनम, वक्त, खूबसूरत, छोटे सरकार, सरगम, चोरी चोरी, नील कमल, अनुपमा कई फ़िल्मों में दिखीं. इस साल 4 अप्रैल को वे गुज़र गईं. बीमार थीं. आयु 88 वर्ष थी.

शशिकला जी महाराष्ट्र के सोलापुर में जन्मी थीं. 1932 में. पांच बरस की थीं तब से गाना-डांस करना पसंद रहा. परफॉर्म भी करती थीं. लेकिन आगे का जीवन आसान नहीं रहा उनके लिए. बरसों बरस कमाई करके परिवार की बेहतरी करती रहीं. 1947 के बाद से उन्होंने हिंदी सिनेमा से सभी टॉप एक्टर्स, डायरेक्टर्स के साथ काम किया. अपनी कला सूची के आखिरी दौर में अभी के सितारों के साथ भी. बादशाह (1999) में शाहरुख के हंसोड़ डिटेक्टिव की मां का रोल किया. जो बादशाह की हरकतों से तंग आकर उसे झाड़ू से पीटती है. मुझसे शादी करोगी (2004) में समीर (सलमान) की दादी का रोल जिसे ठीक से दिखता नहीं है और वो कर्नल (अमरीश पुरी) की बीवी का रिश्ता मांगने पहुंच जाती है.

कभी खुशी कभी गम (2001) में बड़ी अम्मी का किरदार किया. कॉमिक कैरेक्टर जिसे ऊंचा बोलने पर सुनाई पड़ता है. उस उम्र में भी उन्होंने रस लेकर ये किरदार किया. उन्होंने परदेस और चोरी चोरी जैसी फ़िल्में भी कीं. स्टार प्लस पर 2000 में शुरू हुए बच्चों के लोकप्रिय शो ‘सोनपरी’ में फ्रूटी की दादी बनी थीं.

[14]
नेड बेट्टी
करप्ट नेताओं वाले रोल

Ned Betty (1937 2021) With Tom Hanks In Charlie Wilson's War.
Ned Betty (1937 – 2021) With Tom Hanks In Charlie Wilson’s War.

मार्क वॉलबर्ग वाली शूटर (2007) अगर देखी हो तो नेड बेट्टी ने उसमें करप्ट सेनेटर चार्ल्स मीचम का रोल किया था जो ऑयल कंपनी के साथ मिलकर नरसंहार करवाता है. अमेरिका के जाने-पहचाने एक्टर नेड ने कई दशकों तक अभिनय किया. नेटवर्क, ऑल द प्रेसिडेंट्स मेन जैसी फ़िल्मों में भी वे दिखे थे. 13 जून को निधन.

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जयंति
अभिनय की मां शारदा

Jayanthi (1945 2021) In Kannada Film Kula Gourava With Actor Rajkumar, And A Still From Other Movie.
Jayanthi (1945 – 2021) In Kannada Film Kula Gourava With Actor Rajkumar, And A Still From Other Movie.

बुलंदी आज भी याद है. 2000 में आई पारंपरिक मानसिकता वाली कामयाब एंटरटेनर फ़िल्म. उसमें गजराज ठाकुर (रजनीकांत) अपने बड़े बेटे धर्मराज (अनिल कपूर) के लिए लड़की (रेखा) देखने जाते हैं. साथ में होती है गजराज की बहन (अरुणा ईरानी). हंसी, चंचलता भरा सीन था. बुलंदी दरअसल 1995 में आई तेलुगु ब्लॉकबस्टर पेदरायुडू की रीमेक थी. पेदरायुडू में इसी सीन में अरुणा वाला रोल जयंती ने किया था. साउथ की फ़िल्मों में उनका मुकाम वैसा ही था जैसा अपने यहां रेखा, वैजयंतीमाला, हेमा मालिनी वगैरह का रहा है. कन्नड़ फ़िल्म जगत में उनको ‘अभिनया शारदे’ पुकारा जाता था.

बच्ची थीं तो एनटीआर की गोद में बैठीं. एक्ट्रेस बनीं तो एम.जी. रामचंद्रन, जेमिनी गणेसन, विष्णुवर्धन, अंबरीश के साथ काम किया. कन्नड़ सिनेमा के शिखर और सबसे सफल सुपरस्टार राजकुमार के साथ 40 के करीब फ़िल्में कीं. सब हिट. साउथ की चारों भाषाओं में करीब 500 से ज्यादा फ़िल्में उन्होंने कीं. इंदिरा गांधी के हाथों उनको अभिनय का राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था. वे बताती थीं कि अवॉर्ड देने के बाद इंदिरा ने उनको वापस बुलाया, उनको किस किया और गुड लक कहा. उस फ़िल्म में उनका बड़ा ग्लैमरस रोल था. स्कर्ट, स्विमसूट, नाइटीज़ में वो किरदार दिखा. कन्नड़ सिनेमा में ये पहली बार था संभवतः. जयंति बोल्ड, ब्रेव, बारीक और कामयाब एक्टर थीं. जीवन में इतनी ऊंचाई पर गईं जितनी पर कोई जा सकता है. 26 जुलाई को उन्होंने नींद में शरीर छोड़ा. वे 76 की थीं.

[16]
घनश्याम नायक
निराले नटू काका

Ghanashyam Nayak (1944 2021) In Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah With Co Actor Dilip Joshi.
Ghanashyam Nayak (1944 – 2021) In Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah With Co Actor Dilip Joshi.

दसवीं पास घनश्याम नायक मेहसाणा, गुजरात के उथाई गांव से थे. बच्चे थे तबसे अभिनय करने लगे. 1960 में आई मासूम फ़िल्म से डेब्यू किया. 100 से ज्यादा गुजराती और हिंदी फिल्में कीं. खूब टीवी शो भी. तिरंगा, बेटा, आंखें, क्रांतिवीर, आंदोलन, बरसात, चाहत, घातक, इश्क, चाइना गेट, हम दिल दे चुके सनम, तेरा जादू चल गया, ख़ाकी, तेरे नाम जैसी फ़िल्मों में हवलदार, पेशेंट, नौकर, प्रोफेसर, मुहल्ले वाला, मैनेजर, चायवाला, दुकानवाला ऐसे किरदार निभाए. एक कम चर्चित फ़िल्म अंडरट्रायल में ऐसे कैदी का रोल किया जो जेल में बैठे बैठे जेलर से अपना खेत जुतवा लेता है. 3 अक्टूबर को 77 की उम्र में उनका निधन हो गया. कैंसर का इलाज चल रहा था. जीवन के आखिरी 12 बरसों में घनश्याम जी को अभिनय तपस्या का असली फल मिला. जब उन्होंने तारक मेहता का उल्टा चश्मा में काम करना शुरू किया. इसमें वे नटू काका का ख़ुशदिल, आनंदित किरदार निभाते हैं जो जेठालाल की शॉप संभालता है. जीवन के 60 से ज्यादा बरस एक्टिंग को समर्पित इंसान.

[17]
चंद्रशेखर
रामायण के सुमंत

Chandrashekhar (1922 2021) In Hum Diwane (1965) With Bagwan Dada And Mumtaz, And In Tv Series Ramayan As Sumant.
Chandrashekhar (1922 – 2021) as Sumant in TV serial Ramayan, and in Hum Diwane (1965) with Bagwan Dada And Mumtaz.

वो हैदराबाद से थे. भारत भूषण की फ़िल्म में जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू किया 1950 में. 1964 में उन्होंने चा चा चा लिखी, डायरेक्ट की, लीड रोल किया. इसे वेस्टर्न डांस वाली पहली फ़िल्म कहते हैं. इसी डांस फॉर्म में चंद्रशेखर को इंग्लैंड से डिप्लोमा मिला हुआ था. फिल्म में हेलेन, ओमप्रकाश और टुनटुन भी थे. फिल्म सराही गई. कहते हैं कि तब के बॉलीवुड को चा चा चा डांस वाला नशा यहीं से लगा था. बाद के बरसों में वे कटी पतंग, शंकर दादा, द बर्निंग ट्रेन, नमक हलाल, डिस्को डांसर, शराबी, हुकूमत जैसी फ़िल्मों में कई भूमिकाओं में दिखे. शराबी में जब विक्की बाबू (अमिताभ) का कैरेक्टर ऑफिस सीन में बोल रहा होता है – “मूंछें हों तो नत्थूलाल जी जैसी हो, वरना ना हों..” तब चंद्रशेखर पास ही में खड़े होते हैं, सक्सेना जी के रोल में. नमक हलाल में मेहता जी बने होते हैं. ट्रस्टी, वकील, मैनेजर इन्हीं किरदारों में सारा काम संभालने वाले किरदार. रामानंद सागर की रामायण (1987) में वे आर्य सुमंत बने, दशरथ के मंत्री. चंद्रशेखर जी का 16 जून को निधन हो गया. वे 98 वर्ष के थे. सुमंत के किरदार में उनकी छवि हमारी उनकी अंतिम स्मृतियों में से है.

[18]
क्रिस्टोफर प्लमर
बिगिनर्स का बुजुर्ग गे, हैल

Christopher Plummer(1929 2021).
Christopher Plummer (1929 – 2021).

वे कैनेडा से थे. इस साल फरवरी 5 को उनके जाने की सूचना आई. 91 की आयु. विपुल कला सूची. 1958 में फ़िल्म डेब्यू किया. उससे पहले थियेटर की दुनिया में शीर्ष किरदार निभाए. आखिरी वर्षों तक उन्होंने पहचान वाले रोल किए. ऑल द मनी इन द वर्ल्ड (2017) का जब ट्रेलर आने वाला था तो बड़ी प्रतीक्षा था, अरबपति तेल कारोबारी जे. पॉल गेटी की कहानी जिसके पोते को किडनैप कर लिया जाता है और वो फिरौती देने से इनकार कर देता है. केविन स्पेसी ने ये रोल किया था. लेकिन फिर उन पर यौन शोषण के आरोप लगे और बनी हुई फ़िल्म में से उन्हें निकाला गया. अब दिक्कत थी कि उनकी जगह किसे लें और फिल्म में जो बहुत से सीन पॉल गेटी सीनियर के हैं उन्हें कैसे रीशूट करें. और बनी हुई फ़िल्म, आए हुए ट्रेलर और हाउस ऑफ कार्ड्स जैसी सीरीज के पक्के चेहरे स्पेसी के ये किरदार ट्रेलर में स्थापित कर चुकने के बाद जिस एक्टर को लेकर आश्वस्त हुआ गया, वे थे क्रिस्टोफर प्लमर. जिनका स्थिर चेहरा, गहरी आंखें और न्यूट्रल होठ किसी फ्रेम में रख देने मात्र से कोई भी रोल प्ले हो जाता था. ख़ैर, फिल्म के वो सीन दोबारा शूट हुए. ट्रेलर फिर आया. और अब स्पेसी की कमी नहीं खल रही थी. इस फ़िल्म के लिए उन्हें ऑस्कर नॉमिनेशन मिला. 88 की उम्र में सबसे उम्रदराज आर्टिस्ट थे वो ऐसा नॉमिनेशन पाने वाले.

मुझे वे द गर्ल विद द ड्रैगन टैटू (2011) से भी याद आते हैं. इंटेंस-बांधने वाली फिल्म. उन्होंने स्वीडन के धनी व्यक्ति हैनरिक वैंगर का रोल किया था जो अपने परिवार की जांच करवाने के लिए बदनाम जर्नलिस्ट ब्लोमकविस्ट को हायर करता है. बिगिनर्स (2010) उनकी सबसे अलहदा फ़िल्म थी. जिसका उन्हें खासा सुकून भी था. इसके लिए उन्हें 82 की उम्र में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का ऑस्कर तो मिला ही, लेकिन किरदार इससे भी ज्यादा खास था. एक बुजुर्ग आदमी की कहानी जो अपने बेटे के सामने स्वीकारता है कि वो समलैंगिक है, और वो गे के तौर पर खुलकर जीना शुरू करता है और मरने से पहले प्यार पाता है. गैर-पारंपरिक किरदार.

[19]
नरेंद्र चंचल
चलो, बुलावा आया है…

Narendra Chanchal (1940 2021) Young, With Raj Kapoor.
Narendra Chanchal (1940 – 2021) Young, With Raj Kapoor.

पंजाब में जन्में. नरेंद्र खरबंदा नाम था. लेकिन स्कूल में बदमाशियां बहुत करते थे इसलिए नाम नरेंद्र चंचल हो गया. अमृतसर में भजन मंडलियों में गाते थे. फ़िल्मों का कोई सपना न था. एक बार मुंबई में किसी बैसाखी के प्रोग्रैम में गाने गए तो वहां राज कपूर ने सुन लिया. अगले दिन उन्होंने स्टूडियो बुलाकर ‘बॉबी’ में गाना ऑफर किया – “बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो, पर प्यार भरा दिल कभी न तोड़ो. जिस पलड़े में तुले मुहब्बत, उसमें चांदी नहीं तोलना… तौबा मेरी ना ढोलणा, मैं नी बोलना.” 1973 में फिल्म आई तो चंचल हिट हो गए. अलग आवाज़ थी. लोगों को जंच गई. बाद में उनके शोज़, प्रोग्रैम, भजन इवेंट्स देश-विदेश में बढ़ गए. उनको दो फ़िल्मी गाने रहे जिन्होंने न चंचल को कभी छोड़ा, न चंचल ने उन्हें. पहला “तूने मुझे बुलाया शेरांवालिए” जो फ़िल्म आशा (1980) में जीतेंद्र और रामेश्वरी पर फिल्माया गया था. दूसरा, अवतार (1983) का “चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है” जिसमें राजेश खन्ना और शबाना आज़मी के किरदार दिखते हैं. भजन सम्राट रहे नरेंद्र चंचल की टी-सीरीज़ की आरतियां, चालीसा अपरिहार्य रूप से रोज़ अनेक लोगों के घरों में बजती हैं. 22 जनवरी को वे गुज़र गए. उनकी आयु 80 वर्ष थी.

[20]
विवेक
कव्वा बिरयानी वाली कॉमेडी

Actor Vivek (1961 2021) With Friend And Co Actor Vijay.
Actor Vivek (1961 – 2021) With Friend And Co Actor Vijay.

विजयराज के वो कव्वा बिरयानी और छोटी गंगा बोलके नाले में कुदा दिया वाले कॉमेडी सीन याद हैं? इन सीन्स में विजयराज के किरदार को डेढ़ दशक से देखा और मिमिक किया जा रहा है. इस किरदार को मूल रूप से विवेक ने किया था. अभिषेक बच्चन वाली हिंदी ‘रन’ (2004) दो साल पहले रिलीज हुई तमिल ‘रन’ का रीमेक थी. मूल तमिल फ़िल्म में विवेक ने ही उस मूर्ख, बड़बोले युवक का कैरेक्टर किया था जो पिता से बद्तमीजी करता है, इतराता है और शहर जाने पर लोग कव्वा बिरयानी भी खिला देते हैं और नाले में भी कुदा देते हैं. साउथ के टॉप कॉमेडी एक्टर्स में उनका नाम आता है. विजय, विक्रम, सूर्या, रजनीकांत, धनुष साउथ के हर बड़े-छोटे एक्टर के साथ उन्होंने काम किया था. नाम लेंगे, फ़िल्म मिलेगी. अपरिचित (2005) में वे ही कॉमिक रिलीफ थे और कहानी भी आगे बढ़ाते थे. अंबी (विक्रम) के दोस्त बनकर भी और शहर में हो रही हत्याओं के इनवेस्टिगेटिंग ऑफिसर डीसीपी प्रभाकर (प्रकाश राज) के सहयोगी पुलिसवाले के रूप में भी. शिवाजी द बॉस (2007) में सिवाजी के मामा का रोल. फ़िल्म फुली एक्शन मोड में आती है उससे पहले विवेक और रजनीकांत मिलकर हंसाते जाते हैं. साउथ में अनेक-अनेक फ़िल्में करने वाले विवेक अचानक चले गए. 17 अप्रैल को उन्हें हार्ट अटैक आया था. वे 59 बरस के थे. उनके जाने पर तो हंसमुख वडिवेलु भी रोए.

[21]
रॉजर मिचेल
नॉटिंग हिल

Roger Michell (1956 2021) With Julia Roberts And Hugh Grant On The Sets Of Notting Hill.
Roger Michell (1956 – 2021) With Julia Roberts And Hugh Grant On The Sets Of Notting Hill.

ब्रिटिश रंगकर्मी और फ़िल्म डायरेक्टर रॉजर मिचेल अपनी फ़िल्म नॉटिंग हिल से याद रहेंगे. 1999 में आई इस मशहूर रोमैंटिक कॉमेडी में ह्यू ग्रांट और जूलिया रॉबर्ट्स ने लीड रोल किए थे. बीबीसी के लिए उनकी टेली-सीरीज़ भी उल्लेखनीय है – द बुद्धा ऑफ सबर्बिया (1993). इसमें रोशन सेठ लीड रोल में थे.

[22]
रामलक्ष्मण
बेचैन है, मेरी नज़र – है प्यार का, ऐसा असर

Raamlaxman (1942 2021) In A Music Sitting With Director Sooraj Barjatya And Singer Alka Yagnik For Hum Saath Saath Hain.
Raamlaxman (1942 – 2021) In A Music Sitting With Director Sooraj Barjatya And Singer Alka Yagnik For Hum Saath Saath Hain.

उनका नाम विजय पाटिल था. पियानो और दूसरे साज़ बजाते थे. खुद का ऑर्केस्ट्रा था. दादा कोंडके ने अपनी कॉमेडी फ़िल्म पांडु हवलदार (1975) में म्यूजिक देने के लिए उनको कहा था. विजय ने अपने दोस्त राम के साथ मिलकर म्यूजिक दिया और वो जबरदस्त हिट रहा. यहीं से उनकी जोड़ राम-लक्ष्मण नाम से हिट हो गई. वे इस जोड़ी में लक्ष्मण थे. बाद में जब राम गुजर गए तो विजय ने राम-लक्ष्मण नाम लिए रखा. वे म्यूजिक कंपोज कर रहे थे लेकिन उनको अपनी आइडेंटिटी मिली सूरज बड़जात्या की मैंने प्यार किया (1989) से. इसने कैसेट सेल का अपना रिकॉर्ड बनाया. प्रियदर्शन की फ़िल्म मुस्कुराहट (1992) का म्यूजिक भी अच्छा था, हालांकि जिक्र कम होता है. सूरज बड़जात्या की हम आपके हैं कौन (1994) में उनका म्यूजिक भी नहीं भुलाया जा सकता. खासकर टाइटल ट्रैक – बेचैन है मेरी नज़र, है प्यार का ऐसा असर, हम आपके हैं कौन. मेरी स्मृतियों का ऐसा हिस्सा जिसे वर्णन कर पाना मुश्किल. अजनबी तौर पर ही सही विजय जी से ये एक अनूठा धागा जुड़ा हुआ था. 22 मई को उन्हें हार्ट अटैक आया था. नागपुर स्थित घर में वे शांत हुए. 78 की आयु थी.

[23]
जॉन मार्क वैले
सही मैसेजिंग वाला डायरेक्टर

Jean Marc Vallée (1963 2021).
Jean Marc Vallée (1963 – 2021).

25 दिसंबर को वर्ल्ड सिनेमा को जॉन मार्क वैले के न रहने की खबर मिली. कैनेडा मूल के वैले अपने प्रोजेक्ट्स की सोच और संदेश के लिए जाने जाते थे. उन्होंने एचबीओ की सीरीज़ बिग लिटिल लाइज़ (2017) डायरेक्ट की थी जो खासी पसंद की गई. क्रिटिकल अक्लेम मिला. डलास बायर्स क्लब (2013) भी उन्होंने ही बनाई थी जिसे तीन ऑस्कर मिले थे.

[24].
अरविंद त्रिवेदी
बेस्ट रावण

Arvind Trivedi (1938 2021) On A Lighter Note With Ramayan Co Actor Arun Govil, And In Another Still From The Tv Series.
Arvind Trivedi (1938 – 2021) On A Lighter Note With Ramayan Co Actor Arun Govil, And on set with director Ramanand Sagar and Dipika Chikhlia.

अरविंद त्रिवेदी का 5 अक्टूबर को निधन हुआ. 82 की आयु. गुजराती फ़िल्मों का वे बड़ा नाम थे. हिंदी में बलराज साहनी की फ़िल्म ‘पराया धन’ (1971) से डेब्यू किया. कुछ और हिंदी फ़िल्में भी कीं. लेकिन उन्हें अपनी निर्विवाद पहचान मिली रामानंद सागर की रामायण (1987) से. इस टेली-सीरीज़ में उन्होंने रावण का रोल किया था. रावण को प्ले करना बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन वे उसका निर्वाह कर ले गए. उनके बाद अभिनय जगत में कोई दूसरा रावण नहीं आ पाया.

[25]
किशोर नंदलास्कर
गंगा का दोस्त सन्नाटा

Kishore Nandlaskar (1940 2021) In Stills From 2000 Comedy Jis Desh Mein Ganga Rehta Hai With Govinda And Others.
Kishore Nandlaskar (1940 – 2021) In Stills From 2000 Comedy Jis Desh Mein Ganga Rehta Hai With Govinda And Others.

अभिनय में पूरा पकाव. विपुलता. गहराई. लेकिन किशोर जी को जो भी काम मिला, खासकर जो हमें व्यापक रूप से देखने को मिला उसके दो ही चरम रहे – पहला, वेदना और दूसरा हास्य. वे महाराष्ट्र से थे. वहां नाटकों और फ़िल्मों का परिचित नाम. मराठी फ़िल्मों से संभवतः 1989 में शुरुआत की. हिंदी में भी कई फ़िल्में कीं. कुरुक्षेत्र (2000) में ऐसे पिता का रोल किया जिसकी बेटी के साथ यौन अपराध होता है, और वो उसकी अस्थियां समंदर में बहाने के बाद एसीपी से बिलखते हुए कहता है कि उसने सुसाइड नहीं किया. इसमें इंटेंस थे वो. लंबे स्ट्रेच में अपनी तरफ से वैरायटी रखने की कोशिश की. इससे एक साल पहले आई वास्तवः द रिएलिटी में उन्होंने एक शराबी पिता की रोल किया, जो जब अपनी पत्नी से धक्का मुक्की करता है और बेटा डेढ फुटिया उससे हाथापाई करता है तो मां उसे ही पीटती है कि पति वो मेरे, तेरी हिम्मत कैसे हुई. किशोर जी 20 अप्रैल को गुजर गए. उन्हें कोविड-19 संक्रमण हो गया था. वे ‘जिस देश में गंगा रहता है’ (2000) के लिए सबसे ज्यादा याद रहेंगे. इसमें उनका किरदार सबसे लोकप्रिय रहा. जो हमारे चेहरों पर मुस्कान ले आया. सन्नाटा. एक फकीर आदमी. जो हरदम भोले गंगाराम के साथ रहता है. जैसे जैसे वो करता है वो परछाई की तरह अनुसरण करता है. बोलता गंगा है और वो सिर्फ मौन प्रतिक्रिया देता है. सन्नाटा.

[26]
रॉबर्ट जॉन डाउनी
आयरन मैन के पापा

Robert Downey Sr. (1936 2021).
Robert Downey Sr. (1936 – 2021).

7 जुलाई को गुज़रे रॉबर्ट जॉन को रॉबर्ट डाउनी सीनियर भी कहा जाता था. वे आयरनमैन का रोल प्ले करने वाले एक्टर रॉबर्ट डाउनी जूनियर के पिता थे. हॉलीवुड की मेमथ फ़िल्मों के उलट उन्होंने अपना रचनात्मक जीवन एंटी-एस्टेबलिश्मेंट वाली और एबसर्डिस्ट फ़िल्में बनाते हुए शुरू किया. अंडरग्राउंड, स्मॉल बजट. इस संदर्भ में ‘पुटनी स्वोप’ (1969) आला है. जिसे अमेरिका की नेशनल फ़िल्म रजिस्ट्री ने प्रिज़र्व किया है और इसे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, सौंदर्यबोधक रूप से एक महत्वपूर्ण फ़िल्म माना है.

[27]
अनुपम श्याम
वो आंखें

Anupam Shyam (1957 2021) In A Scene Of Hazaaron Khwaishein Aisi With Chitrangada Singh.
Anupam Shyam (1957 – 2021) In A Scene Of Hazaaron Khwaishein Aisi With Chitrangada Singh.

जाने-माने अभिनेता अनुपम श्याम ने हाल के वर्षों में टेलीविजन पर ही काम किया था. स्टार के शो ‘मन की आवाज़ प्रतिज्ञा’ में सज्जन सिंह के रोल में वे लोकप्रिय रहे. फ़िल्मों में उनकी कला सूची में कई महत्वपूर्ण नाम रहे हैं – बैंडिट क्वीन, स्लमडॉग मिलियनेयर, लज्जा, नायक, हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, दिल से, सत्या, ज़ख्म, कच्चे धागे, संघर्ष, लगान व अन्य. उनकी आंखें बोलती थीं. उनसे ख़ौफ झलकाना उनके लिए आसान था. बस एकटक देखना भर था. साथ में असर होता था उनकी आवाज़ का. उनके काम का एक नमूना देखना हो तो कृष्णा वाम्सी की शक्तिः द पावर (2002) देखें. इसमें उन्होंने महाराज नाम के बर्बर गुंडे का रोल किया. जिसके भाई बीजा (विजय राज) को नरसिम्हा (नाना पाटेकर) मार देता है और शव भेज देता है. और उसके बाद महाराज का रिएक्शन देखें, या बाद के भी सीन्स. आसिफ कपाड़िया ने उन्हें अपने इंटरनेशनल प्रोजेक्ट द वॉरियर (2001) में लिया था. इस पीरियड ड्रामा में अनुपम ने एक जागीरदार का रोल किया था जिसके कहने पर उसका आदमी (इरफान) एक गांव वाले का सिर काट देता है. 8 अगस्त को अनुपम का निधन हो गया.

[28]
श्रीप्रदा
श्रीदेवी+जयाप्रदा

Sriprada (1967 2021) In A Scene Of 1989 Film Batwara With Dharmendra And Vinod Khanna. Also Seen With Gulshan Grover.
Sriprada (1967 – 2021) In A Scene Of 1989 Film Batwara With Dharmendra And Vinod Khanna. Also Seen With Gulshan Grover.

उनका असल नाम ईशा नायडू था. लेकिन उनकी पहली फ़िल्म के प्रोड्यूसर ने उनका नाम श्रीप्रदा रख दिया – श्रीदेवी और जयाप्रदा के नामों को जोड़ते हुए. फिर वे उसी नाम से काम करने लगीं. वो फ़िल्म थी दिलरूबा तांगेवाली जो संभवतः 1987 में आई थी. उसके बाद उन्होंने कई तरह की फिल्मों में काम किया. बंटवारा (1989) में वे धर्मेंद्र और विनोद खन्ना के साथ एक गाने में नजर आईं. मैंने उनकी भाग्यवान (1994) भी देखी थी. जिसमें गोविंदा उनको को-स्टार थे. श्रीप्रदा ने गोविंदा की भाभी का रोल किया था जो खुद अपने कपड़े फाड़कर उस पर झूठा इल्ज़ाम लगाती है ताकि उसे घर से बाहर निकाल सके. मेरी ललकार (1990) में उनका बबली टाइप रोल था जैसा जूही चावला, ममता कुलकर्णी वगैरह ने किया और कामयाब हुईं. लेकिन श्रीपदा कभी यूं हिट नहीं हुईं. उसी साल ‘ख़ून की प्यासी’ जैसी चलताऊ फ़िल्म भी की. बाद में उन्होंने भोजपुरी और साउथ में कुछ काम किया. ‘अभिमान एक रिश्ता’ जैसे टीवी प्रोग्रैम्स किए. कोविड में कोई 5 मई को उनका निधन हुआ. उनका कैंसर का इलाज भी जारी था.

[29]
अमित मिस्त्री
‘देवलिन’ बनाने वाले देवेंद्र राठौड़

Amit Mistry(1974 2021) In Amazon Prime Series Bandish Bandits With Co Actor Naseeruddin Shah, Rajesh Tailang, Sheeba Chaddha And Ritwik Bhowmik.
Amit Mistry(1974 – 2021) In Amazon Prime Series Bandish Bandits With Co Actor Naseeruddin Shah, Rajesh Tailang, Sheeba Chaddha And Ritwik Bhowmik.

बतौर एक्टर दो दशक लंबा करियर. वे एमेज़ॉन की सीरीज़ बंदिश बैंडिट्स (2020) में देवेंद्र राठौड़ के रोल में दिखे. जो वॉयलिन की तर्ज पर देवलिन वाद्य बनाते हैं. हल्का, खुशनुमा किरदार. सदा याद रह जाने वाला. क्या कहना, एक चालीस की लास्ट लोकल, शोर इन द सिटी, यमला पगला दीवाना जैसी फ़िल्में कीं. उनकी आखिरी फ़िल्म 2021 में आई भूत पुलिस थी. सैफ-अर्जुन कपूर स्टारर इस फ़िल्म में उन्होंने यामी-जैकलीन की इस्टेट के मैनेजर का रोल किया था. अमित अपने कॉमिक रोल्स से याद हैं. 23 अप्रैल को निधन.

[30]
रिचर्ड डॉनर
सुपरमैन के डायरेक्टर

Richard Donner (1930 2021) With The Stars Of Lethal Weapon Films, Mel Gibson And Danny Glover.
Richard Donner (1930 – 2021) With The Stars Of Lethal Weapon Films, Mel Gibson And Danny Glover.

5 जुलाई को अमेरिकी फ़िल्म डायरेक्टर रिचर्ड डॉनर गुजर गए. हॉलीवुड का बहुत बड़ा नाम. उन्होंने मॉडर्न सुपरहीरो फ़िल्मों की नींव मजबूत की थी अपनी 1978 में आई फ़िल्म सुपरमैन से, जो ब्लॉकबस्टर रही थी. लीथल वैपन सीरीज़ (1987-98) की फ़िल्मों के साथ बडी-कॉप एक्शन कॉमेडी मूवीज़ को रीइन्वेंट किया. इस सीरीज़ में मेल गिब्सन और डैनी ग्लोवर जोड़ीदार पुलिसवालों के हंसाने, एक्शन करने वाले रोल में दिखे. इन फ़िल्मों से 90 के दौर की अक्षय-सैफ की बडी-कॉप एक्शन-कॉमेडीज़ भी कहीं कहीं प्रेरित थीं.

[31]
सिद्धार्थ शुक्ला
टीवी का सितारा

Sidharth Shukla (1980 2021) With Varun Dhawan In Humpty Sharma Ki Dulhania.
Sidharth Shukla (1980 – 2021) With Varun Dhawan In Humpty Sharma Ki Dulhania.

उभरते हुए एक्टर थे सिद्धार्थ. टीवी के लोकप्रिय नाम. 2 सितंबर को हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया. इससे पहले वे ‘बिग बॉस 13’ जीते थे. 2012 में ‘बालिका वधू’ में उन्होंने काम किया था. टीवी पर सावधान इंडिया, झलक दिखला जा जैसे शो भी किए. एक फ़िल्म भी की थी. वरुण धवन स्टारर ‘हम्पटी शर्मा की दुल्हनिया.’

[32]
आर.एस.जी. चेल्लादुराई
फ़िल्म थेरी का दिल, वो बुजुर्ग

R. S. G. Chelladurai, Ayya (1936 2021) With Actor Vijay In A Gripping Emotional Scene Of Theri (2016).
R. S. G. Chelladurai, Ayya (1936 – 2021) With Actor Vijay In A Gripping Emotional Scene Of Theri (2016).

2016 में आई तमिल फ़िल्म थेरी बेजां पॉपुलर हुई थी. मानवीय कहानी. पकड़ करने वाली. उसका सबसे ताकतवर सीन वो जिसमें एक लड़की गायब हो जाती है और उसका बूढ़ा पिता मुंह को आते कलेजे के साथ डीसीपी विजय कुमार के पास आता है. और आंसुओं की धाराएं बहाते हुए बिनती कहता है कि मेरी बेटी तीन दिन से लापता है, प्लीज मदद कीजिए. पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की. ये सीन फ़िल्म के सबसे प्रभावोत्पादक सीन्स में से है, दूसरा वो जब ये बुजुर्ग अपनी बेटी को दफनाता है और डीसीपी से कुछ कहता है. ये बुजुर्ग न होता तो थेरी बेजान फ़िल्म साबित होती, विजय का नायकत्व और एटली का समां बंध नहीं पाता. ये बुजुर्ग एक्टर थे आर.एस.जी. चेल्लादुराई. सिनेमा जगत के ऐसे अनमोल रत्नों में से एक जो कथित कैरेक्टर रोल्स में इतनी ओरिजिनैलिटी डाल देते हैं कि वो मैन्युफैक्चर्ड कहानियां सच्ची लगती हैं. दिल बींध जाती हैं. इन्हीं चेल्लादुराई का 29 अप्रैल को निधन हो गया था. वे 84 बरस के थे. उन्होंने रजनीकांत की सिवाजी द बॉस, धनुष की मारी और विजय की कत्थी में भी काम किया था. उन्होंने दर्जनों फ़िल्मों में काम किया और हर रोल का ग्राफ ऊंचा ही किया. वे गुजरे तो सितारों और फैन्स ने समान रूप से चेल्लादुराई अय्या को याद किया.

[33]
सिस्ली टाइसन
कद्दावर अभिनेत्री, एक्टिविस्ट

Cicely Tyson (1924 2021) With Co Actor Viola Davis In A Scene Of Legal Thriller Series How To Get Away With Murder.
Cicely Tyson (1924 – 2021) With Co Actor Viola Davis In A Scene Of Legal Thriller Series How To Get Away With Murder.

वे 96 की थीं. 28 जनवरी को चली गईं. अमेरिका की दिग्गज अदाकारा और एक्टिविस्ट. लंबी कला सूची. 100 से ज्यादा रोल किए. अपने पूरे करियर में वो ही रोल किए जो ब्लैक कम्युनिटी को मजबूत करते हों, बाकी कोई रोल नहीं किए. इसका बड़ा असर पड़ा आने वाली पीढ़ियों पर. 2018 में ऑनररी ऑस्कर मिला. चाहे राजनीति हो या कला क्षेत्र जैसे अभिनय, सबमें आज जो ब्लैक लोग शिखर पर हैं, सिस्ली उनकी आदर्श रही हैं. रीसेंट काम की बात करें तो आपने उन्हें टीवी सीरीज़ ‘हाऊ टु गेट अवे विद मर्डर’ (2014-20) में देखा होगा, जिसमें उन्होंने वायोला डेविस की करारी, सख्त मां का रोल किया था.

[34]
मुश्ताक मर्चेंट
जय-वीरू की बाइक का मालिक

Mushtaq Merchant (1954 2021) With Kamal Haasan, Dimple Kapadia And Kiran Vairale In O Maria.. Song Of Saagar (1985).
Mushtaq Merchant (1954 – 2021) With Kamal Haasan, Dimple Kapadia And Kiran Vairale In O Maria.. Song Of Saagar (1985).

हिंदी फ़िल्मों के सीनियर एक्टर मुश्ताक मर्चेंट 70 और 80 के दौर में एक्टिव थे. उन्होंने हाथ की सफाई, सीता और गीता, ख़ून भरी मांग, जवानी दीवानी, नसीब वाला, बलवान, सागर, गंगा जमुना सरस्वती जैसी कई फ़िल्मों में अभिनय किया. उनके किरदार अक्सर हंसाने वाले होते थे. उन्होंने शोले (1975) में भी काम किया था लेकिन लंबाई के कारण उनके हिस्से एडिट में काट दिए गए थे. वे फ़िल्म में ट्रेन ड्राइवर भी थे और जय वीरू जिस बाइक पर गाना गाते हैं – “ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे”, वो बाइक जिस आदमी से चुराकर भागे होते हैं वो मुश्ताक का किरदार ही होता है. 27 दिसंबर को उन्होंने आखिरी सांस ली.

[35]
हैल हॉलब्रुक
डीप थ्रोट

Hal Holbrook (1925 2021) With Young Actor Emile Hirsch In 2007 Adventure Drama Into The Wild.
Hal Holbrook (1925 – 2021) With Young Actor Emile Hirsch In 2007 Adventure Drama Into The Wild.

मशहूर अमेरिकी एक्टर हैल हॉलब्रुक ने जर्नलिज़्म पर बनी कद्दावर फ़िल्म ऑल द प्रेसिडेंट्स मेन (1976) में वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकारों के सोर्स, डीप थ्रोट का रोल किया था जो उनको सलाह देता है – Follow the money. वे अपने वन-मैन स्टेज शो से भी जाने गए जिसमें उन्होंने मार्क ट्वेन का रोल किया, करीब 50 बरस. 23 जनवरी को निधन.

[36]
राजीव कपूर
राम तेरी गंगा मैली

Rajiv Kapoor (1962 2021) In His Debut Film Ek Jaan Hain Hum (1983).
Rajiv Kapoor (1962 – 2021) In His Debut Film Ek Jaan Hain Hum (1983).

हिंदी फ़िल्मों के एक्टर और राज कपूर के छोटे बेटे राजीव कपूर 9 फ़रवरी को गुज़र गए. वे सबसे ज्यादा जाने जाते हैं 1985 में आई अपनी फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली में नरेन के किरदार से. फ़िल्म राज कपूर ने ही डायरेक्ट की थी. उन्होंने 1996 में आई हिट प्रेमग्रंथ भी डायरेक्ट की थी जिसमें ऋषि कपूर, माधुरी ने लीड रोल किए थे. ऋषि की डायरेक्टोरियल डेब्यू – आ अब लौट चलें (1999) के एडिटर भी वे रहे हैं.

[37]
मेल्विन वैन पीबल्स
गॉडफादर ऑफ ब्लैक सिनेमा

Melvin Van Peebles (1932 2021).
Melvin Van Peebles (1932 – 2021).

जब 21 सितंबर को मेल्विन वैन पीबल्स गुजरे तो ब्लैक सिनेमा के कद्दावर नाम स्पाइक ली ने कहा, कि “वे अपनी ऐतिहासिक फ़िल्म स्वीट स्वीटबैक्स बैडएस सॉन्ग (1971) के साथ इंडिपेंडेंट ब्लैक सिनेमा को आगे लेकर आए थे. मेल्विन मेरे फ़िल्म करियर के बड़े सपोर्टर थे. वे मेरी फ़िल्म डू द राइट थिंग के सेट पर भी आए. उफ्फ! हमने एक और जायंट खो दिया!” कुछ ऐसा ही मूनलाइट वाले डायरेक्टर बैरी जेन्किन्स और आवा डुवॉर्ने का कहना था. पीबल्स ने तब मजबूत ब्लैक किरदारों वाली फ़िल्में बनाईं जब हॉलीवुड स्टूडियो सिस्टम में ऐसा करना मुश्किल था. 1970 में कोलंबिया पिक्चर्स ने उनको तीन फ़िल्मों का कॉन्ट्रैक्ट दिया. लेकिन उनकी अगली कहानी से ये स्टूडियो बिदक गया. इस कहानी में एक ब्लैक आदमी दो वाइट पुलिसवालों को मार देता है और बचकर निकल जाता है. ऐसे में पीबल्स ने इधर उधर से पैसे जुटाकर पूरी तरह खुद ये फिल्म बनाई. और स्वीट स्वीटबैक्स बैडएस सॉन्ग न सिर्फ बड़ी हिट रही, बल्कि इसने ब्लैक्सप्लॉयटेशन जॉनर का आगाज़ कर दिया.

[38]
बिक्रमजीत कंवरपाल
सेना से अभिनय तक

Bikramjeet Kanwarpal (1968 2021) With Parents And Brother, And In A Scene From Shaurya (2008) With Javed Jaffri, Rahul Bose.
Bikramjeet Kanwarpal (1968 – 2021) With Parents And Brother, And In A Scene From Shaurya (2008) With Javed Jaffrey, Rahul Bose.

1 मई को वे नहीं रहे. बिक्रमजीत कंवरपाल हिमाचल से थे. आर्मी में मेजर थे, रिटायरमेंट के बाद फ़िल्मों में आए. हाल में स्पेशल ऑप्स, अवरोधः द सीज विदिन जैसी सीरीज़ में दिखे. अनिल कपूर के साथ टीवी सीरीज़ ’24’ में एजेंट प्रधान बने थे. बिक्रमजीत ने डॉन, पेज 3, मर्डर 2, कॉरपोरेट, थैंक्स मां, रॉकेट सिंह सेल्समैन ऑफ द ईयर, जब तक है जान, शौर्य, 2 स्टेट्स जैसी कई प्रमुख फ़िल्में कीं. 2021 के आखिर में नेटफ्लिक्स पर आई सिवकार्तिकेयन की तमिल फ़िल्म डॉक्टर में भी उन्होंने काम किया.

[39]
डेविड गलपिलिल
ऑस्ट्रेलियन सिनेमा को आकार दिया

David Gulpilil (1953 2021).
David Gulpilil (1953 – 2021).

ऑस्ट्रेलियाई सिनेमा के महान कलाकार रहे. आदिवासी/Aboriginal लोगों का सिनेमाई परदे पर अभूतपूर्व प्रतिनिधित्व किया. भीमकाय हस्ती. मुझे वे फ़िल्म रैबिट प्रूफ फेंस (2002) से याद रहेंगे. (29 नवंबर)

[40]
लैरी किंग
मशहूर टीवी होस्ट

Larry King (1933 2021) Interviewing Sacha Baron Cohen As The Dictator.
Larry King (1933 – 2021) Interviewing Sacha Baron Cohen for The Dictator.

अमेरिकी टीवी के मशहूर टॉक शो – लैरी किंग लाइव के एंकर. फोर्ड से ओबामा तक हर राष्ट्रपति का इंटरव्यू लेने वाले. 23 जनवरी को निधन. पॉप कल्चर में भी उनका खासा असर था कि बहुत सारी फ़िल्मों और टीवी सीरीज़ में वे फीचर हुए. अपने ही रोल में. मसलन, द डिक्टेटर (2012) फ़िल्म में एडमिरल जनरल अलादीन बने साशा बैरन कोहेन का इंटरव्यू उन्होंने लिया था.

[41]
राज कौशल
‘प्यार में कभी कभी’ के डायरेक्टर

Raj Kaushal (1970 2021).
Raj Kaushal (1970 – 2021).

डायरेक्टर और प्रोड्यूसर राज कौशल का 30 जून को निधन हुआ. वे मंदिरा बेदी के पति थे. ‘प्यार में कभी-कभी’ (1999) उनका डायरेक्टोरियल डेब्यू थी जिसमें संजय सूरी, रिंकी खन्ना और डीनो मोरिया लीड थे. संजय दत्त और अरशद वारसी स्टारर कॉमेडी ‘एंथनी कौन है’ (2006) भी उन्होंने डायरेक्ट की थी. बतौर प्रोड्यूसर उनकी फ़िल्म माई ब्रदर.. निखिल (2005) की खासी प्रशंसा हुई थी.

[42]
टुमेन
चंगेज़ ख़ान

Actor Tu Men (1960 2021) In Old Beast And In The Poster Of Genghis Khan.
Actor Tu Men (1960 – 2021) In Old Beast And In The Poster Of Genghis Khan.

वे चीनी एक्टर थे. 1960 में अंदरूनी मंगोलिया के हुलुनबिर इलाके में जन्मे. उनके वंशज इवेंकी राष्ट्रीयता वाले थे जो अपने पूरे-पूरे जीवन घास के मैदानों में घोड़ों पर बिता देते थे. टुमेन जब 6 साल के थे तब उन्हें घोड़े पर बैठा दिया गया. 1985 में जब वे शंघाई थियेटर एकेडमी में पढ़ रहे थे तो वे पहली फ़िल्म – चंगेज़ ख़ान का हिस्सा बने. बाद में चंगेज़ का किरदार उन्होंने भी निभाया. दो बार. पहली बार फ़िल्म चंगेज़ ख़ान (1998) में, दूसरी बार एन एंड टू किलिंग (2013) में. 2018 में भी उन्होंने चंगेज़ ख़ान शीर्षक वाली चाइनीज़ हिस्टोरिकल फैंटेसी एपिक में भी काम किया. चंगेज़ के अलावा भी उन्होंने कुछ और मंगोल किरदार निभाए. 2017 में उन्होंने ओल्ड बीस्ट नाम की फ़िल्म में एक आम चीनी बुजुर्ग का रोल किया था जिसे काफी सराहा गया. 12 दिसंबर को टुमेन का निधन हो गया.

[43]
के. शिवशंकर
मास्टरजी

K. Sivasankar (1948 2021).
K. Sivasankar (1948 – 2021).

साउथ की फ़िल्मों के जाने-माने कोरियोग्राफर. शिव शंकर मास्टर गारू. 28 नवंबर को निधन. डायरेक्टर एसएस राजामौली की 2009 में आई फैंटेसी एक्शन फ़िल्म मगधीरा का नृत्य निर्देशन उन्होंने किया था. इसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था. बाहुबलीः द बिगिनिंग भी कोरियोग्राफ की. डायरेक्टर बाला की फिल्म परदेसी (2013) में अभिनय भी किया था.

[44]
जॉर्ज सीगल
हल्की फुल्की कॉमेडीज़ के फेस

George Segal (1934 2021) Right, In A Scene Of American Sitcom The Goldbergs.
George Segal (1934 – 2021) Right, In A Scene Of American Sitcom The Goldbergs.

हॉलीवुड के जाने-माने एक्टर जॉर्ज सीगल. 87 की उम्र में निधन. उन्होंने अधिकतर लाइट-हार्टेड कॉमेडीज़ ही कीं. हू’ज़ अफ्रेड ऑफ वर्जिनिया वूल्फ? (1966) के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का ऑस्कर नॉमिनेशन मिला. एनबीसी के फेमस सिटकॉम जस्ट शूट मी! के सात सीज़न्स (1997-2003) में काम किया. खूब हंसाया. एक मीडिया पब्लिशर का रोल किया था.

[45]
सागर सरहदी
कहो न प्यार है

Sagar Sarhadi (1933 2021) With Garm Hava Director M. S. Sathyu.
Sagar Sarhadi (1933 – 2021) With Garm Hava Director M. S. Sathyu.

गंगा सागर तलवार उनका पैदाइश का नाम था. एबटाबाद (पाकिस्तान) के छोटे से गांव बाफ्फा में जन्मे थे. सन् 1933 में. बंटवारा हुआ तो जान बचाते हुए परिवार के साथ भारत आ गए. तब सिर्फ 12 साल के थे. श्रीनगर और दिल्ली के शरणार्थी शिविरों में रहे. जीवन कष्टों में बीता. फ़िल्में देखने में मज़ा आता था. साहित्य में भी रुचि थी. खुद उर्दू लेखन करने लगे. कहानियां, नाटक लिखने लगे. अच्छे-अच्छे. फिर बड़े भाई के साथ बंबई चले गए. प्रगतिवादी लेखक संघ से जुड़े. ख़्वाजा, अहमद अब्बास, कैफ़ी आज़मी, कृश्न चंदर, राजिंदर सिंह बेदी, सरदार जाफरी जैसे आला लेखकों के संपर्क में आए. फ़िल्मों में भी रुचि थी. पत्नी, अनुभव जैसी फ़िल्में पहले लिखी. लेकिन खास पहचान नहीं मिली.

एक बार डायरेक्टर यश चोपड़ा ने उनका प्ले ‘मिर्जा साहिबां’ देखा, बंबई के तेजपाल ऑडिटोरियम में. उन्हें सरहदी का डायरेक्शन और डायलॉग इतने अच्छे लगे कि उन्हें अपनी अगली फ़िल्म ऑफर की. ये फ़िल्म थी – ‘कभी कभी’. सागर सरहदी ने इसका स्क्रीनप्ले, डायलॉग्स लिखे. 1976 में फिल्म आई और बड़ी हिट हुई. फ़िल्म का लेखन जादू कर गया. उसके बाद नूरी (1979), सिलसिला (1981) लिखी. फिर एक कहानी पर फ़िल्म बनाना चाहते थे. लेकिन कोई और नहीं मिला तो खुद ही वो फ़िल्म डायरेक्ट की. ये फ़िल्म थी – बाज़ार (1982). इसे उनका बेस्ट काम माना गया. फ़िल्म में नसीरुद्दीन शाह, सुप्रिया पाठक के साथ काम करने वाली स्मिता पाटिल ने कहा कि उन्होंने जितने डायरेक्टर्स के साथ काम किया उनमें सागर सबसे श्रेष्ठ थे. बाज़ार महिला विषयों पर बनी बेस्ट फ़िल्मों में से है.

90 के दौर की फ़िल्मों में चांदनी (1989), दीवाना (1992) जैसी फ़िल्में अलग ताज़गी वाली थीं. इनके डायलॉग भी उन्होंने ही लिखे. यहां तक कि ऋतिक रोशन की डेब्यू फ़िल्म कहो न प्यार है (2000) के डायलॉग भी सागर जी ने ही लिखे, जिस फिल्म को नई सदी के रंग ढंग वाली माना गया था. 21 मार्च की रात मुंबई में उनका निधन हो गया. वे 88 साल के थे.

[46]
राजा बाबू
नंदी अवॉर्ड

Senior Telugu Actor Raja Babu
Senior Telugu Actor Raja Babu.

जाने-माने तेलुगु अदाकार. प्रतिष्ठित नंदी अवॉर्ड मिला प्राप्त. 24 अक्टूबर को देहांत. 64 की आयु. कई दशकों का करियर. महेश बाबू की ‘भारत अने नेनू’, ‘ब्रह्मोत्सवम’ और रवि तेजा की ‘सिंदूरम’ में काम किया था.

[47]
वेन्नेलाकंटी राजेश्वर प्रसाद
परदे के पीछे रहने वाला आर्टिस्ट

Vennelakanti Rajeswara Prasad (1957 2021).
Vennelakanti Rajeswara Prasad (1957 – 2021).

तेलुगु फिल्मों के मशहूर गीतकार और डायलॉग राइटर. 2000 से ज्यादा गीत लिखे. कमल हसन की दसावतारम, मुंबई एक्सप्रेस के तेलुगु डब्ड वर्जन के डायलॉग लिखे थे. 5 जनवरी को निधन.

[48]
माधवी गोगटे
टीवी की मां

Actress Madhavi Gogate.
Actress Madhavi Gogate.

टीवी की वरिष्ठ अदाकारा. कोई अपना सा, कहीं तो होगा, अनुपमा (रूपा गांगुली की मां का रोल) जैसे टीवी सीरियल में नजर आईं. मराठी इंडस्ट्री में भी काम किया. अशोक सर्राफ के साथ मराठी फ़िल्म घनचक्कर में अभिनय किया. 21 नवंबर को निधन.

[49]
पांडु
हंसने का नहीं

Pandu (1947 2021).
Actor Pandu (1947 – 2021).

तमिल एक्टर-कॉमेडियन. 1981 से नजरों में आए. उसके बाद लगातार काम करते रहे. कांचणा-2 (2015, राघव लॉरेंस), सिंघम (2010, सूर्या), गिल्ली (2004, विजय) में आपने उन्हें देखा होगा. 6 मई को निधन, कोविड से.

[50]
एस. पी. जननाथन
तमिल डायरेक्टर

S. P. Jananathan (1959 2021) With Vijay Sethupathi At An Event.
S. P. Jananathan (1959 2021) With Vijay Sethupathi At An Event.

तमिल फिल्ममेकर. 14 मार्च को निधन. उनकी डेब्यू फ़िल्म ईयरकाई (2003) को नेशनल अवॉर्ड मिला. उनके डायरेक्शन में बनी पुरमपोक्कू इंगिर पोदूवुडमई (2015) में आर्या और विजय सेतुपति ने लीड रोल किए थे.

[51]
नितीश वीरा
कुछ ठोस फ़िल्में

Actor Nitish Veera (l) With Dhanush And Vijay Sethupathi In A Scene Of Selvaraghavan 2006 Film Pudhupettai.
Actor Nitish Veera (Left) With Dhanush And Vijay Sethupathi In A Scene Of Selvaraghavan 2006 Film Pudhupettai.

तमिल एक्टर नितीश वीरा 17 मई को गुजर गए. कोविड. 45 की उम्र. पा. रंजीत की काला (2018) में रजनीकांत के बड़े बेटे का रोल किया. वेत्रीमारन की असुरन (2019) में पांडियन का रोल किया. वो जिसकी धनुष मदद करता है लेकिन वो बाद में बुरा आदमी निकलता है. सेल्वाराघवन की चर्चित फ़िल्म पुडू पेट्टई में वो धनुष के लीड कैरेक्टर के दोस्त बने थे. इसमें यंग विजय सेतुपति भी दिखते हैं.

[52]
एड एस्नर
हमारा कार्ल

Ed Asner (1929 2021) With His Animated Character Carl From 2009 Movie Up.
Ed Asner (1929 – 2021) With His Animated Character Carl From 2009 Movie Up.

एक्टर. जर्नलिज़्म पर बने मैराथन सिटकॉम ‘द मैरी टाइलर मूर शो’ (1970-) में लू ग्रांट का एक प्रमुख रोल. पिक्सर की कमाल एनिमेटेड फ़िल्म ‘अप’ में कार्ल के लीड कैरेक्टर को आवाज़ दी. (29 अगस्त)

[53]
सोनी चीबा
सामुराई-एक्टर

Sonny Chiba (1939 2021) With Uma Thurman In Tarantino Film Kill Bill Volume 1. Also Seen Performing Martial Arts At An Event.
Sonny Chiba (1939 – 2021) With Uma Thurman In Tarantino Film Kill Bill Volume 1. Also Seen Performing Martial Arts At An Event.

जापानी एक्टर. मार्शल आर्ट्स में दक्ष. लंबी कला सूची. अपरंपार फ़िल्में. डायरेक्टर टैरेंटीनो ने किल बिलः वॉल्यूम 1 (2003) में उनको एक रिटायर्ड सामुराई का खास रोल दिया.

[54]
हैलिना हचिन्स
काबिल डीओपी

Halyna Hutchins (1979 2021), Ukranian Cinematographer.
Halyna Hutchins (1979 – 2021), Ukranian Cinematographer.

सिनेमैटोग्राफी वर्ल्ड की उभरती आर्टिस्ट. द मैड हैटर जैसी फिल्मों की डीओपी रहीं. एलेक बॉल्डविन की चलाई प्रॉप गन से मृत्यु हुई.

[55]
पॉल रिटर
नींव का पत्थर

Paul Ritter (1966 2021) In A Still From Hbo Series Chernobyl (2019).
Paul Ritter (1966 – 2021) In A Still From HBO Series Chernobyl (2019).

ब्रिटिश एक्टर. याद रह जाने वाला चेहरा रहे. बॉन्ड मूवी क्वॉन्टम ऑफ सॉलेस (2008), हैरी पॉटर एंद द हाफ ब्लड प्रिंस (2009) और एचबीओ की सीरीज़ चर्नोबिल (2019) में किरदार निभाए.

[56]

एवं, वे बाकी सभी कलाकार जो 2021 में विदा ले गए.

*** ***

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