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'डीडीएलजे' की 32 बातेंः क्या आपको पता है बलदेव सिंह लंदन क्यों आया था, उसके साथ क्या बुरा हुआ था?

फिल्म में राज और सिमरन के प्यारे रोल करने वाले शाहरुख़ और काजोल ने 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' की रिलीज के 23 बरस पूरे होने पर इस जर्नी को याद किया है. बात इस एपिक फिल्म की मेकिंग से जुड़े किस्सों और तथ्यों की.

//1.  ज्यूरिख़ में शराब के नशे में ‘ज़रा सा झूम लूं मैं’ गाना गाने के बाद सुबह जब सिमरन जागती है तो शाहरुख का कैरेक्टर राज कहता है कि रात को उनके बीच सबकुछ हो गया और वे किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे. सिमरन रोने लगती है, फिर राज बताता है कि वो मज़ाक कर रहा था. इस फेमस सीन में शाहरुख के सीने पर लिपस्टिक वाले होठों के निशान होते हैं. असल में ये निशान ख़ुद काजोल ने बनाए थे.

2.  शाहरुख़ ने फिल्म में लेदर का काला जैकेट पहना था जो युवाओं के बीच फैशन बन गया था. इसे डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा के छोटे भाई और फिल्म के एसोसिएट प्रोड्यूसर उदय चोपड़ा ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में हार्ले-डेविडसन के एक स्टोर से 400 डॉलर में ख़रीदा था. बाद में शाहरुख ने इसे संभालकर रखा.

3.  सितंबर 1995 में आमिर खान की फिल्म ‘रंगीला’ रिलीज हुई और एक महीने बाद अक्टूबर में शाहरुख़ की ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’. अगले साल फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में दोनों ही फिल्में प्रमुख श्रेणियों में साथ नामांकित हुईं. खासकर बेस्ट एक्टर की श्रेणी में शाहरुख-आमिर आमने सामने थे. खास बात ये थी कि कभी बॉलीवुड अवॉर्ड्स में न जाने वाले आमिर भी इसमें आए थे. उन्हें पूरा यकीन था कि वे ही जीतेंगे लेकिन शाहरुख को अवॉर्ड मिला. शाहरुख वैसे भी संबंधित मैगजीन के काफी करीबी हैं. बताया जाता है कि इसी दिन के बाद से आमिर ने फिल्म पुरस्कारों में जाना बंद कर दिया.

4.  शाहरुख ख़ान ने राज नाम के किरदार करियर में सबसे ज्यादा किए हैं और एनआरआई दर्शकों के बीच ये नाम ख़ासा लोकप्रिय है. डीडीएलजे से ही शाहरुख इस नाम में लोकप्रिय हुए. ये नाम रणबीर कपूर के दादा और दिग्गज फिल्मकार राज कपूर के नाम पर रखा गया था. इसे रखा था डायरेक्टर आदि ने जो राज कपूर के बड़े फैन हैं.

सिमरन. राज. काजोल. शाहरूख़.
सिमरन. राज. काजोल. शाहरुख़. (फोटोः yrf)

5.  इस फिल्म में ‘मेहंदी लगा के रखना’ गाना नहीं होना था. इसे यश चोपड़ा की किसी अन्य फिल्म के लिए बनाया गया था लेकिन बाद में यू़ज़ किया गया.

6.  इस गाने में काजोल की कैरेक्टर सिमरन हरे रंग के जोड़े में नजर आती हैं. ये रंग कॉस्ट्यूम डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने चुना था जबकि आदि इसके खिलाफ थे क्योंकि पंजाबी दुल्हनें लाल या पिंक जैसे रंगों के जोड़े पहनती हैं. वैसे अपनी शादी में भी काजोल ने हरे रंग की महाराष्ट्रियन साड़ी पहनी थी.

7.  फिल्म का नाम ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ किरण खेर ने सुझाया था. क्रेडिट्स में उन्हें इसका श्रेय भी दिया गया है. 1974 में आई फिल्म ‘चोर मचाए शोर’ में ‘ले जाएंगे ले जाएंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ गाना भी था जिसे डीडीएलजे में एक जगह अंताक्षरी में गाया जाता है. इसके अलावा 1980 में भी इसी नाम वाली एक रोमांटिक फिल्म रिलीज हुई थी.

8.  आदि और प्रोड्यूसर यश चोपड़ा फिल्म में एक्शन दृश्य नहीं रखना चाहते थे. शाहरुख ने उन्हें कहा कि फिल्म में एक्शन रखें. कथित तौर पर शाहरुख कहते थे डीडीएलजे हिट इसलिए हुई क्योंकि क्लाइमैक्स में मार धाड़ के दृश्य डाले गए.

रेलवे स्टेशन पर जब कुलजीत और उसके दोस्त राज को घेर लेते हैं. मारते हैं. लेकिन जब वो उसके पिता धरमवीर मल्होत्रा पर हाथ उठाते हैं तब राज पलटता है और ऐसे पलटता है.
रेलवे स्टेशन पर जब कुलजीत और उसके दोस्त राज को घेर लेते हैं. मारते हैं. लेकिन जब वो उसके पिता धरमवीर मल्होत्रा पर हाथ उठाते हैं तब राज पलटता है और ऐसे पलटता है. (फोटोः yrf)

9.  ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ इंडिया की पहली फिल्म थी जिसकी मेकिंग की आधे घंटे की डॉक्यूमेंट्री टीवी पर दिखाई गई थी. इसे दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया. इसे करण जौहर और उदय चोपड़ा ने मिलकर एडिट किया था. करण जौहर ने कहा, इसे बनाना ऐसा था जैसे वे अपनी पहली फिल्म बना रहे हैं.

10.  फिल्म के गाने ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ के एक हिस्से की शूटिंग हरियाणा के एक गांव में की गई. शूटिंग के लिए पंचायत से मंजूरी ले ली गई थी लेकिन ऐन वक्त पर वहां के लोग बिगड़ गए. वे शूटिंग रुकवा रहे थे कि शाहरुख बीच में आए और उन्होंने दिल्ली वाली हरियाणवी बोलकर मामला शांत करवाया.

11.  अनुपम खेर ने राज के कूल डैड का रोल किया किया था लेकिन असल में वे अमरीश पुरी वाला रोल करना चाहते थे. उन्होंने आदि से कहा था कि सिमरन के पिता का बड़ा रोल उन्होंने पुरी को क्यों दिया? लेकिन आदि ने उन्हें वो रोल नहीं दिया और खेर को धरमवीर मल्होत्रा ही बनना पड़ा.

12.  राज का रोल आदित्य चोपड़ा ने शाहरुख को ऑफर किया था. लेकिन शाहरुख ने मना कर दिया. उसके बाद वे सैफ अली ख़ान के पास गए. सैफ ने भी किन्हीं कारणों से फिल्म नहीं की. उसके बाद ये रोल आमिर के पास गया. आमिर ने भी मना कर दिया.

13.  अंत में आदित्य ने मन बना लिया कि शाहरुख को ही मनाएंगे. वे बार-बार उनके साथ मीटिंग करते रहे. उन्हें स्क्रिप्ट सुनाई. लेकिन शाहरुख ये रोमैंटिक रोल करना नहीं चाहते थे. क्योंकि तब वे ‘बाज़ीगर’ और ‘डर’ (1993) जैसी फिल्मों में नेगेटिव रोल्स में खूब चल रहे थे. शाहरुख को लगा था कि अब ऐसे रोल ही उनका भविष्य होंगे. लेकिन फिर यश चोपड़ा और आदि ने उनको समझाया कि अगर वे रोमैंटिक फिल्में नहीं करेंगे तो कभी भी बड़े स्टार नहीं बनेंगे. इसके बाद शाहरुख ने ये फिल्म साइन की.

राज अपने दोस्तों के साथ सिमरन के सामने आता है, पिछली रात को 'रुक जा ओ दिल दिवाने' गाना गाते हुए शरारतेंकरने के लिए. हाथों में फूल है. सिमरन पसीज जाती है. फूल लेने वाली होती है कि फिर शरारत हो जाती है. फूल में पानी होता है जो राज उसके चेहरे पर स्र्पे करके भाग जाता है.
राज अपने दोस्तों के साथ सिमरन के सामने आता है, बीती रात गाना (रुक जा..) गाते हुए उसने सिमरन को तंग जो किया था इसलिए. उसके हाथ में फूल है. सिमरन पसीज रही है. फूल लेने ही वाली होती है कि फिर शरारत हो जाती है. फूल में पानी होता है जो राज उसके चेहरे पर स्प्रे करके भाग जाता है. (फोटोः yrf)

बाद में जब डीडीएलजे इतनी बड़ी हिट हुई तो उन्होंने आदि को बहुत धन्यवाद दिया. बताया जाता है आदि के दफ्तर में एक पोस्टर लगा है जिस पर शाहरुख ने साइन करते हुए लिखा है – “थैंक यू आदि, मुझे वो स्टार बनाने के लिए जो आज मैं हूं.”

14.  शाहरुख ने ये फिल्म साइन की इसकी एक वजह सलमान खान भी थे. दोनों ने 1994 में साथ में ‘करण अर्जुन’ में काम तो किया ही था, शाहरुख बंबई आए तब से ही सलमान से दोस्ती हो गई थी. शाहरुख का कहना था कि सलमान ने उन्हें ये फिल्म करने के लिए प्रोत्साहित किया था और कहा था कि ये फिल्म बहुत बड़ी हिट होगी.

15.  ‘मेरे ख़्वाबों में जो आए’ फिल्म में काजोल की एंट्री वाला गाना होता है. इसमें वे तौलिये में नाचती नजर आती हैं. पहले वे सख़्त ख़िलाफ थीं. उन्होंने आदि से बहस की कि इतने वक्त तक कोई लड़की तौलिये में क्यों नाचेगी और वे कम कपड़ों में नाचने वाली हीरोइन नहीं हैं. बाद में आदि ने कहा कि गाना दिखने में सुंदर और अच्छा लगेगा तब वे मान गईं.

16.  इसी गाने के आखिरी हिस्से में काजोल सफेद शॉर्ट टॉप और शॉर्ट स्कर्ट पहन बरसात में नाचती हैं. पहले ये स्कर्ट बहुत लंबी थी लेकिन आदि के कहने पर कॉस्ट्यूम डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने उसे काटा. आखिर में वो बहुत छोटी हो गई और उसी के साथ गाना शूट हुआ.

17.  राज के कूल डैड का रोल असल में यश चोपड़ा के व्यक्तित्व पर आधारित था. आदि ने अपने पिता के व्यवहार और व्यक्तित्व को देखते हुए धर्मवीर मल्होत्रा का रोल लिखा. यश चोपड़ा की पत्नी पामेला के मुताबिक वे अपने बच्चों के पिता नहीं बल्कि दोस्त बनने में यकीन रखते थे और यही फिल्म में दर्शकों ने बहुत पसंद किया.

18.  जब राज फेल हो जाता है तो उसके डैड (अनुपम खेर) नाराज नहीं होते, बल्कि खुश होते हैं. वे दीवार पर टंगी अपने पुरखों की तस्वीरों की ओर इशारा कर-करके बताते हैं कि वो उन्हीं के नक्शेकदम पर चल रहा है. इस सीन में अनुपम खेर ने अपने असली चाचा लोगों के नाम लिए थे जो पढ़ाई में अच्छे नहीं थे.

धर्मवीर मल्होत्रा जैसे पिता की कामना ये सीन देखने के बाद हर किशोर को हुई होगी जो अपने बेटे राज के फेल होने पर भी कूल है और उसे अपनी जवानी जीने के लिए कहता है.
धर्मवीर मल्होत्रा जैसे पिता की कामना ये सीन देखने के बाद हर लड़के ने की होगी जो अपने बेटे राज के फेल होने पर भी कूल है और उसके अपनी जवानी को भरपूर जीने को अहमियत देता है. (फोटोः yrf)

19.  परमीत सेठी ने कहानी में सिमरन के होने वाले पति कुलजीत का रोल किया था. इसका स्क्रीन टेस्ट अरमान कोहली ने भी दिया था लेकिन परमीत को मिला क्योंकि वे टेस्ट में बूट, जींस और वेस्टकोट पहनकर आए थे.

20.  आदित्य चोपड़ा और करण जौहर को अनुपम ख़ेर ने जुलाई 1994 में ‘हम आपके हैं कौन’ के ट्रायल शो में बुलाया था. दोनों वहां गए. उनको डायरेक्टर सूरज बड़जात्या की ये फिल्म बहुत पसंद आई. करण जौहर की तो ये फेवरेट फिल्म बन गई और आदित्य चोपड़ा भी बहुत प्रभावित हुए. वहीं ‘हम आपके..’ के निर्देशक सूरज बड़जात्या अगले साल रिलीज हुई आदि की ‘डीडीएलजे’ से बहुत अधिक प्रभावित हुए. एक समय ऐसा था जब वे हर हफ्ते इस फिल्म को देखते थे. ये भी कहा जाता है कि वे अपनी हर नई फिल्म शुरू करने से पहले ‘डीडीएलजे’ जरूर देखते हैं.

21.  फराह ख़ान ने ‘रुक जा ओ दिल दीवाने’ गाने को कोरियोग्राफ किया था. वे फिल्म के दूसरे गानों को भी डायरेक्ट करने के लिए यूरोप जाने वाली थीं लेकिन जा नहीं सकीं क्योंकि उनकी डेट्स नाना पाटेकर ने बुक कर रखी थीं.

22.  डीडीएलजे’ की शुरुआत अमरीश पुरी के किरदार चौधरी बलदेव सिंह से होती है जो सुबह-सुबह लंदन के एक चौक में कबूतरों को दाना डाल रहे हैं. उसके बाद अपना छाता लिए इस शहर की गीली सड़कों से होते हुए पैदल अपनी शॉप तक जाते हैं. कहानी में ये नहीं बताया जाता कि बलदेव आखिर पंजाब छोड़कर लंदन आए क्यों थे और उनकी जर्नी क्या थी? लेकिन फिल्म की असली स्क्रिप्ट में बलदेव की बैकस्टोरी भी थी. इसका एक सीन भी फिल्म में था जिसे हटा दिया गया था. दरअसल बलदेव की कहानी ये होती है कि 22 बरस पहले लंदन में उनको कोई नौकरी मिलती है. लेकिन जब वो पंजाब से अपनी पत्नी को लेकर इस अजनबी  देश पहुंचते हैं तो झटका लगता है. उनको पता चलता है कि नौकरी तो थी ही नहीं. उनके साथ धोखा हुआ है. उनको नरेंदर नाम के जिस आदमी ने नौकरी का वादा करके पंजाब से यहां बुलाया था वो सारे पैसे लेकर अफ्रीका भाग चुका है. अब बलदेव और लाजो  लंदन में फंस जाते हैं. वापस जा नहीं सकते और लंदन में कोई नौकरी है नहीं, तो संघर्षभरी जिंदगी शुरू करते हैं. करीब दो साल बाद बलदेव एक स्टोर में काम करने लगते हैं और वो ही उनका स्थायी रोजगार बन जाता है.

23.  फिल्म में ये भी दिखाया जाता है कि चौधरी बलदेव सिंह एक सख्त इंसान है जो कभी हंसते नहीं हैं. लेकिन असल में लंदन आने के बाद जो धोखाधड़ी उनके साथ हुई वहीं से वो चेंज हो गए. उससे पहले वो बहुत ही खुशमिजाज इंसान थे. गांव में बलदेव के ठहाके की आवाज़ नदी के पार जाया करती थी.

बियर लेने के लिए राज बलदेव सिंह के साथ ट्रिक करता है, सिर दर्द की दवाई देने की याचना करके स्टोर खुलवाता है. लेकिन फिर कहता है मैं ये भी लूंगा. और बलदेव सबकुछ समझ जाता है.
बियर लेने के लिए राज बलदेव सिंह के साथ ट्रिक करता है, सिर दर्द की दवाई देने की याचना करके स्टोर खुलवाता है. लेकिन फिर कहता है मैं ये भी लूंगा. और बलदेव सबकुछ समझ जाता है. (फोटोः yrf)

24.  पहले हीरो का रोल हॉलीवुड एक्टर टॉम क्रूज़ के लिए लिखा गया था. डायरेक्टर आदि की कहानी में हिंदुस्तानी लड़की को अमेरिकी से प्यार हो जाता है. लेकिन बाद में पापा यश चोपड़ा के कहने पर आदि ने हीरो को इंडियन बना दिया और उसका नाम राज रखा.

25.  रेलवे स्टेशन वाले आखिरी सीन में घर के प्रमुख लोग मौजूद होते हैं लेकिन हिमानी शिवपुरी का कम्मो का कैरेक्टर नहीं. स्क्रिप्ट के मुताबिक उन्हें भी वहां होना था लेकिन उनके पति की मृत्यु हो गई थी.

26.  फिल्म में राज के दो दोस्त होते हैं – रॉकी और रॉबी. इन दोनों भूमिकाओं को निभाया था करण जौहर और अर्जुन सबलोक ने. करण की बतौर एक्टर ये पहली फिल्म थी. बाद में ये दोनों एक्टर्स जाकर डायरेक्टर बने. करण ने शाहरुख, काजोल, रानी मुखर्जी को लेकर ‘कुछ कुछ होता है’ (1998) डायरेक्ट की. वहीं अर्जुन ने नए एक्टर्स को लेकर ‘हमको इश्क ने मारा’ (1997) से डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू किया. बाद में उन्होंने ऋतिक रोशन, सैफ अली खान और ईशा देओल स्टारर ‘ना तुम जानो न हम’ (2002) भी बनाई. वहीं करण जौहर का प्रोफाइल डीडीएलजे के बाद से ही काफी बड़ा होता गया.

तीनों दोस्तों के रोल में करण जौहर, शाहरुख और अर्जुन. (फोटोः yrf)
तीनों दोस्तों के रोल में करण जौहर, शाहरुख और अर्जुन. (फोटोः yrf)

27.  आदित्य चोपड़ा ने जब तीन साल लगाकर ‘डीडीएलजे’ की स्क्रिप्ट लिख ली तो उसे लेकर अपने पिता यश चोपड़ा के पास गए थे और वे उनसे ही इसे डायरेक्ट करवाना चाहते थे. लेकिन बाद में खुद डायरेक्ट की और ये उनकी डेब्यू फिल्म बनी.

28.  ‘डीडीएलजे’ से भी पहले आदि ने कई स्क्रिप्ट लिख ली थीं. और इनमें से जो स्क्रिप्ट वो सबसे पहले डायरेक्ट करना चाहते थे वो थी ‘मोहब्बतें’ (2000) जो उनकी दूसरी रिलीज बनी.

29. ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ गाने में सबसे पहले वो सीन फिल्माया जाना था जहां ब्रिज पर ब्लैक सूट, बो टाय में शाहरुख और ब्लैक गाउन में काजोल मिलते हैं और डांस करते हैं. इसकी शूटिंग में कोरियोग्राफर सरोज खान टाइम पर नहीं पहुंचीं. वे एक दिन लेट थीं. आदि इससे आगबबूला हो रहे थे. वे अपने पिता से बोले कि मैं सरोज जी को फिल्म से बाहर फेंक दूंगा. हालांकि उनका सब्र टूटा उससे पहले सरोज पहुंच गई थीं. वे आज भी हंसकर इस वाकये को याद करती हैं.

30.  डांस डायरेक्टर सरोज खान कुछ मौकों पर आदि के फैसलों से सहमत नहीं थीं. जैसे गानों की शूटिंग के दौरान वो उनको बोलती थीं कि तुम ये गाना खराब कर रहे हो. लेकिन सिनेमैटोग्राफर मनमोहन सिंह, पिता यश चोपड़ा और सरोज जैसे सभी अनुभवी लोगों की राय के उलट आदि अपने तरीके से ही फैसला लेते थे. लेकिन जब फिल्म बनी तो सभी ने माना कि डायरेक्टर आदि के फैसले सही थे. खुद सरोज भी एक बार उनके घर गईं और आदि से कहा कि तुम सही थे.

 31.  ‘रुक जा ओ दिल दीवाने’ गाने से पहले के सीन में राज शीना को फ्लर्ट करने के लिए कहता है कि “..इस बुड्ढे से अच्छा पियानो तो मैं बजाता सकता हूं. मैं तो पैदा ही पियानो पर हुआ था. बचपन से ही मैं पियानो बजाता ही जा रहा हूं, बजाता ही जा रहा हूं, बजाता ही जा रहा हूं. जानती हो, मेरी उंगलियों में कुछ अजीब सा जादू है. ये जैसे ही पियानो पर पड़ती हैं, पियानो ख़ुद ब ख़ुद बजने लगता है.” उसकी इन बातों से इरीटेट होकर सिमरन मंच पर जाती है और कहती है कि “हमारे बीच एक ग्रेट  पियानो प्लेयर हैं और वो हमारे लिए कुछ बजाना चाहते हैं. और वो हैं मि. राज.” राज की सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है. वो मंच पर जाता है और पियानो बजाने लगता है और बहुत बेसुरे नोट्स मारता है.

पियानो के साथ कुश्ती करते हुए राज और मन ही मन खुश होती सिमरन जिसे नहीं पता कि आगे कुछ शॉकिंग होने वाला है. (फोटोः yrf)
पियानो के साथ कुश्ती करते हुए राज और मन ही मन खुश होती सिमरन जिसे नहीं पता कि आगे कुछ शॉकिंग होने वाला है. (फोटोः yrf)

दरअसल ये वाइल्ड पियानो नोट्स पहले कंपोजर ललित पंडित ने ट्राई किए थे. आदि ने सुना तो बोला कि ये तो बहुत अच्छा लग रहा है, अच्छा नहीं चाहिए,  कुछ जंगली सा बजाओ. ललित ने और वाइल्ड बजाने की कोशिश की लेकिन आदि को जमा नहीं. वे बोले “तू हट, तेेरे से नहीं होगा”. फिर उन्होंने बजाया. और फिल्म में वो पागलपन भरी पियानो प्लेइंग जो शाहरुख का किरदार राज करता है, पियानो के ऊपर चढ़कर और उछल-उछलकर, वो असल में खुद डायरेक्टर आदि का बजाया हुआ पियानो है.

32.  फिल्म में अनाइटा अदजानिया ने काजोल की लंदन वाली ग्लैमरस दोस्त शीना का रोल किया था जिसे यूरोप टूअर के शुरू में राहुल फ्लर्ट करता है. दरअसल वो डीडीएलजे में शीना के अलावा भी एक किरदार में दिखती हैं जो हमारे ध्यान में नहीं आता. वो राज के इंट्रोडक्टरी सॉन्ग ‘मेरे ख़्वाबों में जो आए’ में कुछ पलों के लिए नजर आती हैं, जब बाइक पर जा रहे राज से एक अनजान लड़की लिफ्ट मांगती है और बाद में वो दोनों बाइक पर तेजी से निकल जाते हैं. इस सीन में उस लड़की का चेहरा नहीं दिखता. वो अनाइटा ही होती हैं.

इसके बाद अनाइटा ने शाहरुख की ‘कल हो न हो’, ‘रा. वन’, ‘डियर जिंदगी’ और ‘धूम’, ‘लव आजकल’ जैसी कई फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए. वैसे मुख्यतौर पर वे कॉस्ट्यूम डिजाइनर और वोग इंडिया मैगजीन की फैशन डायरेक्टर हैं. उनके पति होमी अदजानिया हैं जिन्होंने ‘बीइंग साइरस’, ‘कॉकटेल’ और ‘फाइंडिंग फैनी’ जैसी फिल्में बनाई हैं.

फिल्म के उन दो किरदारों में अनाइटा. साथ हैं शाहरुख. अनाइटा ने एक तीसरा रोल भी किया था जब सिमरन गुजर रही होती है तो पार्क में बच्चे और कुछ लोग भी आसपास होते हैं. वहां एक कपल भी घूम रहा होता है. इस कपल में युवती होती हैं अनाइटा और हुडी में युवक होते हैं शाहरुख. (फोटोः yrf)
फिल्म के उन दो किरदारों में अनाइटा. साथ हैं शाहरुख. अनाइटा ने एक तीसरा रोल भी किया था जब सिमरन गुजर रही होती है तो पार्क में बच्चे और कुछ लोग भी आसपास होते हैं. वहां एक कपल भी घूम रहा होता है. इस कपल में युवती होती हैं अनाइटा और हुडी में युवक होते हैं शाहरुख. (फोटोः yrf)
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