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लप्पू झन्ना निकले लाखों स्मार्टफोन, सैमसंग, शाओमी, ओप्पो क्या गूगल पिक्सल तक खतरे में!

गूगल की प्रोजेक्ट जीरो टीम को स्मार्टफोन में पांच खतरनाक कमजोरियां मिली है.

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25 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 25 नवंबर 2022, 12:53 PM IST)
Millions of samsung, xiaomi, pixel devices at risk of attack due to Arm Mali GPU driver flaws
लाखों स्मार्टफोन खतरे में (image pexels,canva)
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सैमसंग (Samsung), शाओमी (Xiaomi), ओप्पो (Oppo) से लेकर खुद गूगल (Google) के लाखों स्मार्टफोन खतरे में हैं. इनमें पांच ऐसी खतरनाक कमजोरियां मिली हैं जिनके जरिए साइबर अपराधी और हैकर्स स्मार्टफोन पर टोटल कंट्रोल कर सकते हैं. गूगल की इनहाउस प्रोजेक्ट जीरो टीम ने इस खामी का पता लगाया है. हालांकि स्मार्टफोन मेकर्स ने इसको ठीक करने की कोशिश की है, फिर भी लाखों स्मार्टफोन पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. कहीं आपका फोन तो इनमें शामिल नहीं, आइए पता करते हैं.

लाखों स्मार्टफोन पर खतरा

स्मार्टफोन के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के मामले देखने को मिलते रहते हैं. लेकिन इस बार हार्डवेयर में दिक्कत मिली है. स्मार्टफोन में एक प्रोडक्ट होता है Graphics Processing Unit (GPU). टेकराडार की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल की टीम को Arm Mali GPU Driver में कई सारी खामियां मिली हैं. इन कमियों को  CVE-2022-33917, और CVE-202236449 में बांटा गया है. कहा जा रहा है कि साइबर अपराधी इस कमी का फायदा उठाकर स्मार्टफोन की मेमोरी से छेड़छाड़ कर सकते हैं. क्रिमिनल इसके जरिए पूरे एंड्रॉयड सिस्टम को बायपास कर सकते हैं. सीधा कहें तो आपके फोन पर पूरा कंट्रोल कर सकते हैं.

गूगल की प्रोजेक्ट जीरो टीम के मुताबिक उनको इन खामियों के बारे में इसी साल जून में पता चला था. हालांकि माली ग्राफिक्स वाली आर्म ने इसको जुलाई के महीने में अपने स्तर पर ठीक कर दिया था. लेकिन अभी भी लाखों स्मार्टफोन इसी कमी के साथ चल रहे हैं. इसका कारण है गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का इकोसिस्टम. एंड्रॉयड वैसे तो गूगल का प्रोडक्ट है, लेकिन तकरीबन सारे स्मार्टफोन मेकर्स अपनी सुविधा के हिसाब से इसमें बदलाव करते हैं. हार्डवेयर से लेकर सॉफ्टवेयर तक में अपने हिसाब से यूजर इंटेरफेस होता है.

भले दिक्कत माली ग्राफिक्स में मिली है, लेकिन मसला ये है कि इसका इस्तेमाल कई सारे स्मार्टफोन मेकर्स करते हैं. उदाहरण के लिए सैमसंग अपने Exynos चिपसेट वाले स्मार्टफोन (गैलक्सी S-22 सीरीज को छोड़कर) में इसका यूज करता है. मीडिया टेक से लेकर Huawei जैसी कंपनियां भी इसका इस्तेमाल करती आई हैं. गूगल के पास अपना चिपसेट है, लेकिन अभी तक वो पिक्सल 6 सीरीज में इस गड़बड़ी को फिक्स नहीं कर पाया है. गूगल प्रोजेक्ट जीरो की रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है. 

फिलहाल तो यूजर्स के पास इस दिक्कत को ठीक करने का कोई जुगाड़ नहीं है. स्मार्टफोन मेकर्स की तरफ से आने वाले अपडेट के बाद ही ऐसा करना संभव होगा.  

वीडियो: गूगल ऐसा करेगा किसी ने सोचा न था!

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