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तस्वीर: कोरोना और लॉकडाउन के बीच जब मानसून में भारत भीग रहा है

तस्वीर: कोरोना और लॉकडाउन के बीच जब मानसून में भारत भीग रहा है

बारिश का मेहमान आया है समंदर के देश से. खिड़कियों दरवाज़ों पर दस्तक दे रही हैं बूंदें. कैद में बंद दुनिया के माथे पर राहत के दस्तख़त हैं ये बादल. ना सही बाहर निकलकर झूमते हुए भीगना, लेकिन नज़र को भीगने से कौन रोक सकता है. मन को सराबोर करने भर की ताक़त और उम्मीद … और पढ़ें तस्वीर: कोरोना और लॉकडाउन के बीच जब मानसून में भारत भीग रहा है

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तस्वीर: कोरोना और लॉकडाउन के बीच जब भारत मानसून में भीग जाता है

तस्वीर के इस संस्करण में सुनिये बारिश की दास्तान. बारिश का मेहमान आया है समंदर के देश से. खिड़कियों दरवाज़ों पर दस्तक दे रही हैं बूंदें. कैद में बंद दुनिया के माथे पर राहत के दस्तख़त हैं ये बादल. ना सही बाहर निकलकर झूमते हुए भीगनालेकिन नज़र को भीगने से कौन रोक सकता है. मन को सराबोर करने भर की ताक़त और उम्मीद अब भी बची है हमारी मुट्ठियों में. इस बार नहीं पड़ेंगे झूले पेड़ों परघर लौट आए बच्चों के लिए. इस बार सावन के गीत गाने को नहीं होगी भीड़. इन्हीं सब को बयां करते हुए मानसून की मनोदशा को लिखा है और आवाज दी है ‘दी लल्लनटॉप’ के साथी सुमित ने. तस्वीरे हैं एसोसिएट प्रेस AP और PTI के खज़ाने से. देखिए वीडियो.  

तस्वीर: कोरोना और लॉकडाउन के बीच जब भारत मानसून में भीग जाता है

तस्वीर के इस संस्करण में सुनिये बारिश की दास्तान. बारिश का मेहमान आया है समंदर के देश से. खिड़कियों दरवाज़ों पर दस्तक दे रही हैं बूंदें. कैद में बंद दुनिया के माथे पर राहत के दस्तख़त हैं ये बादल. ना सही बाहर निकलकर झूमते हुए भीगनालेकिन नज़र को भीगने से कौन रोक सकता है. मन को सराबोर करने भर की ताक़त और उम्मीद अब भी बची है हमारी मुट्ठियों में. इस बार नहीं पड़ेंगे झूले पेड़ों परघर लौट आए बच्चों के लिए. इस बार सावन के गीत गाने को नहीं होगी भीड़. इन्हीं सब को बयां करते हुए मानसून की मनोदशा को लिखा है और आवाज दी है ‘दी लल्लनटॉप’ के साथी सुमित ने. तस्वीरे हैं एसोसिएट प्रेस AP और PTI के खज़ाने से. देखिए वीडियो.  
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तस्वीर: कोरोना के दौर में धरती के गिरफ्त मेें आए ये हवाई जहाज, आपस में क्या बतिया रहे हैं?

‘दी लल्लनटॉप’ की सीरीज़ ‘तस्वीर’ में सुनिए नहीं उड़ पा रहे जहाजों की दास्तान. मुंह जोड़कर खड़े  जहाज़ मुहल्ले के दो बूढों की तरह खड़े हैं. हाल समाचार ले रहे हैं एक दूसरे का. ज़मीन पर धूल खाते महीनों हुए पार्टनर. अब तो पंख के जोड़ में दर्द उठता है धीमा-धीमा. जाने कब फिर से पूछेंगे साथ उड़ती चिड़िया के हाल-चाल. महामारी की वजह से थमे हुए हैं पंखपहिएचप्पू सब के सब. बुरा है इन आसमानी डाकियों का हाल भी बहुत. दुपहरें सब की सब ख़ाली और शामें पुराने बरगद की तरह मायूस बीत रही हैं. इन्हीं सब को बयां करते हुए जहाजों की इस मनोदशा को लिखा है और आवाज दी है ‘दी लल्लनटॉप’ के साथी सुमित ने. तस्वीरे हैं एसोसिएट प्रेस AP और PTI के खज़ाने से. देखिए वीडियो.    

तस्वीर: कोरोना के दौर में धरती के गिरफ्त मेें आए ये हवाई जहाज, आपस में क्या बतिया रहे हैं?

‘दी लल्लनटॉप’ की सीरीज़ ‘तस्वीर’ में सुनिए नहीं उड़ पा रहे जहाजों की दास्तान. मुंह जोड़कर खड़े  जहाज़ मुहल्ले के दो बूढों की तरह खड़े हैं. हाल समाचार ले रहे हैं एक दूसरे का. ज़मीन पर धूल खाते महीनों हुए पार्टनर. अब तो पंख के जोड़ में दर्द उठता है धीमा-धीमा. जाने कब फिर से पूछेंगे साथ उड़ती चिड़िया के हाल-चाल. महामारी की वजह से थमे हुए हैं पंखपहिएचप्पू सब के सब. बुरा है इन आसमानी डाकियों का हाल भी बहुत. दुपहरें सब की सब ख़ाली और शामें पुराने बरगद की तरह मायूस बीत रही हैं. इन्हीं सब को बयां करते हुए जहाजों की इस मनोदशा को लिखा है और आवाज दी है ‘दी लल्लनटॉप’ के साथी सुमित ने. तस्वीरे हैं एसोसिएट प्रेस AP और PTI के खज़ाने से. देखिए वीडियो.    
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तस्वीर: कोरोना के चलते उड़ान नहीं भर पा रहे ये हवाई जहाज आपस में दु:ख-सुख बतिया रहे हैं

तस्वीर: कोरोना के चलते उड़ान नहीं भर पा रहे ये हवाई जहाज आपस में दु:ख-सुख बतिया रहे हैं

मुंह जोड़कर खड़े ये दो जहाज़ मुहल्ले के दो बूढों की तरह खड़े हैं. हाल समाचार ले रहे हैं एक दूसरे का. ज़मीन पर धूल खाते महीनों हुए पार्टनर. अब तो पंख के जोड़ में दर्द उठता है धीमा-धीमा. जाने कब फिर से पूछेंगे साथ उड़ती चिड़िया के हाल-चाल. महामारी की वजह से थमे हुए … और पढ़ें तस्वीर: कोरोना के चलते उड़ान नहीं भर पा रहे ये हवाई जहाज आपस में दु:ख-सुख बतिया रहे हैं

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तस्वीर: 'प्राइड मंथ' में LGBTQIA + कम्युनिटी से सहज होने के तरीके जान लीजिए

आप होमोसेक्सुअल्टी को ग़लत नहीं मानते? उन्हें कमतर नहीं समझते? वाह, क्या बात है!! लेकिन आपकी ये महानता आपको संवेदनशील और सामाजिक बराबरी का तरफ़दार नहीं बना देती. प्राइड मंथ के उपलक्ष्य में  विभिन्न रंगों, मनोदशाओं, विषयों, टेम्पलेट्स की यह सुंदर प्रस्तुति लेकर आईं हैं मुदिता. उनके लिखे को आवाज़ दी है 'दी लल्लनटॉप' की साथी उपासना ने. तस्वीरे हैं AP से. देखिए वीडियो.

तस्वीर: 'प्राइड मंथ' में LGBTQIA + कम्युनिटी से सहज होने के तरीके जान लीजिए

आप होमोसेक्सुअल्टी को ग़लत नहीं मानते? उन्हें कमतर नहीं समझते? वाह, क्या बात है!! लेकिन आपकी ये महानता आपको संवेदनशील और सामाजिक बराबरी का तरफ़दार नहीं बना देती. प्राइड मंथ के उपलक्ष्य में  विभिन्न रंगों, मनोदशाओं, विषयों, टेम्पलेट्स की यह सुंदर प्रस्तुति लेकर आईं हैं मुदिता. उनके लिखे को आवाज़ दी है 'दी लल्लनटॉप' की साथी उपासना ने. तस्वीरे हैं AP से. देखिए वीडियो.
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तस्वीर: इस खास महीने में LGBTQIA+ कम्युनिटी से सहज रहने के तरीके जान लीजिए

तस्वीर: इस खास महीने में LGBTQIA+ कम्युनिटी से सहज रहने के तरीके जान लीजिए

तो आप होमोसेक्शुऐल्टी को ग़लत नहीं मानते? उन्हें कमतर नहीं समझते? वाह, क्या बात है!! लेकिन आपकी ये महानता आपको संवेदनशील और सामाजिक बराबरी का तरफ़दार नहीं बना देती. प्राइड मंथ के उपलक्ष्य में कुछ छोटी-छोटी लेकिन ज्ञानपूर्ण बातें हार्मलेस ह्यूमर के तौर पे भी, अटपटे नाम देकर या इशारों में किसी की सेक्शुऐल्टी, हाव-भाव, … और पढ़ें तस्वीर: इस खास महीने में LGBTQIA+ कम्युनिटी से सहज रहने के तरीके जान लीजिए

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तस्वीर: धरती का स्वर्ग तब और सुंदर हो जाता है, जब वह खबरों में नहीं होता

‘दी लल्लनटॉप’ की सीरीज़ ‘तस्वीर’ में सुनिए कश्मीर के उस दौर के हालात को जो खबरों में कभी नहीं होता. कश्मीर की जो खबरें हम तक आती हैं दरअसल कश्मीर की खूबसूरती उससे ढंकी रह जाती है. इस बार सुनें सकारात्मक तस्वीरों के साथ डल झील से लेकर कश्मीरी कुम्हार तक, श्रीनगर की हवाओं से लेकर गर्मियों तक का हाल. धरती के स्वर्ग के विभिन्न रंगों, मनोदशाओं, विषयों, टेम्पलेट्स की यह सुंदर प्रस्तुति लेकर आएं हैं दी लल्लनटॉप के साथी सुमित. तस्वीरे हैं AP से. देखिए वीडियो.

तस्वीर: धरती का स्वर्ग तब और सुंदर हो जाता है, जब वह खबरों में नहीं होता

‘दी लल्लनटॉप’ की सीरीज़ ‘तस्वीर’ में सुनिए कश्मीर के उस दौर के हालात को जो खबरों में कभी नहीं होता. कश्मीर की जो खबरें हम तक आती हैं दरअसल कश्मीर की खूबसूरती उससे ढंकी रह जाती है. इस बार सुनें सकारात्मक तस्वीरों के साथ डल झील से लेकर कश्मीरी कुम्हार तक, श्रीनगर की हवाओं से लेकर गर्मियों तक का हाल. धरती के स्वर्ग के विभिन्न रंगों, मनोदशाओं, विषयों, टेम्पलेट्स की यह सुंदर प्रस्तुति लेकर आएं हैं दी लल्लनटॉप के साथी सुमित. तस्वीरे हैं AP से. देखिए वीडियो.
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तस्वीर: खबरों में नहीं होने के दौरान कश्मीर सबसे सुंदर होता है

तस्वीर: खबरों में नहीं होने के दौरान कश्मीर सबसे सुंदर होता है

  बहती नदी में नहा सकते हैं सिर्फ़ एक बार, दोबारा नदी वो नहीं होती जिसमें हम नहाए थे. ये किसी जानकार ने कहा था सदियों पहले. तब से सदियां बीत चुकी हैं, समय की नदी में बहुत सा पानी बह चुका है, हर पल नई होती रही है नदी, हमारा समय. गुज़र चुके कल … और पढ़ें तस्वीर: खबरों में नहीं होने के दौरान कश्मीर सबसे सुंदर होता है

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तस्वीर: आपातकाल में नरेंद्र मोदी से लेकर इंदिरा गांधी तक की ये तस्वीरें सबको देख लेनी चाहिए

‘दी लल्लनटॉप’ की सीरीज़ ‘तस्वीर’ में सुनिए इमरजेंसी की दास्तान. जब 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में गांधीवादी और सर्वोदयी जयप्रकाश नारायण बोलने को खड़े हुए, तब तक इस शोर से आने वाली आवाज़ें साफ-साफ सुनाई आने लगी थीं. मांग थी कि गरीबी हटाओ का नारा देने वाली इंदिरा गांधी खुद हट जाएं. और फिर उसी रात इमरजेंसी लगा दी गई. अखबारों की कतरनें संभालने वाले बताएंगे कि इसकी शुरुआत गुजरात में हुई. इन्हीं सब को बयां करते हुए लिखा है  ‘दी लल्लनटॉप’ के साथी निखिल ने. और आवाज दी है सुमित ने. तस्वीरे हैं इंडिया टुडे आर्काइव से. देखिए वीडियो.

तस्वीर: आपातकाल में नरेंद्र मोदी से लेकर इंदिरा गांधी तक की ये तस्वीरें सबको देख लेनी चाहिए

‘दी लल्लनटॉप’ की सीरीज़ ‘तस्वीर’ में सुनिए इमरजेंसी की दास्तान. जब 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में गांधीवादी और सर्वोदयी जयप्रकाश नारायण बोलने को खड़े हुए, तब तक इस शोर से आने वाली आवाज़ें साफ-साफ सुनाई आने लगी थीं. मांग थी कि गरीबी हटाओ का नारा देने वाली इंदिरा गांधी खुद हट जाएं. और फिर उसी रात इमरजेंसी लगा दी गई. अखबारों की कतरनें संभालने वाले बताएंगे कि इसकी शुरुआत गुजरात में हुई. इन्हीं सब को बयां करते हुए लिखा है  ‘दी लल्लनटॉप’ के साथी निखिल ने. और आवाज दी है सुमित ने. तस्वीरे हैं इंडिया टुडे आर्काइव से. देखिए वीडियो.
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तस्वीर: आपातकाल के दौर की यह तस्वीरें किसी भी सत्ता का गुमान तोड़ देती हैं

तस्वीर: आपातकाल के दौर की यह तस्वीरें किसी भी सत्ता का गुमान तोड़ देती हैं

ये उस रात की बात है. तारीख बदलने से 15 मिनिट पहले रायसीना की पहाड़ी पर महामहिम ने एक जगह दस्तखत किए. लोग बताते हैं कि उन्हें टोका गया था. जैसे किसी अनहोनी की आहट हो. लेकिन तब तक कागज़ पर स्याही सूख चुकी थी. अगले दिन मुल्क में सूरज निकला. लेकिन सुबह नहीं हुई. … और पढ़ें तस्वीर: आपातकाल के दौर की यह तस्वीरें किसी भी सत्ता का गुमान तोड़ देती हैं