Submit your post

Follow Us

भैरंट

बुक रिव्यूः झारखंड में मेरे समकालीन

बुक रिव्यूः झारखंड में मेरे समकालीन

दी लल्लनटॉप के लिए ये बुक रिव्यू लिखा है अरविंद दास ने. उन्होंने मीडिया पर 90 के दौर में बाजार के असर पर पीएचडी की है. जेएनयू से ही. देश विदेश घूमे हैं. खुली समझ के आदमी हैं. पेशे से पत्रकार हैं. करण थापर के साथ जुड़े हैं. दो जर्मन प्रोफेसर के साथ ‘रिलिजन पॉलिटिक्स एंड … और पढ़ें बुक रिव्यूः झारखंड में मेरे समकालीन

न्यूज़

वरुण धवन वाली 'कुली नंबर-1' टीम ने जो किया, उसे जानकर पीएम मोदी खुश हो जाएंगे

वरुण धवन वाली 'कुली नंबर-1' टीम ने जो किया, उसे जानकर पीएम मोदी खुश हो जाएंगे

जब बात सोशल कॉज की आती है तो बॉलीवुड स्टार्स बढ़-चढ़कर उसमें हिस्सा लेते नज़र आते हैं. और उनकी कोई फिल्म आने वाली हो तब तो उनका पार्टिसिपेशन और भी ज्यादा बढ़ जाता है. वरुण धवन ‘कुली नंबर 1’ की शूटिंग कर रहे हैं. सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ सरकार की जंग में फिल्म की … और पढ़ें वरुण धवन वाली ‘कुली नंबर-1’ टीम ने जो किया, उसे जानकर पीएम मोदी खुश हो जाएंगे

तहखाना

...मन को मैं तेरी नज्में नज़्में रिवाइज़ करा देता हूं

...मन को मैं तेरी नज्में नज़्में रिवाइज़ करा देता हूं

अनुराग आर्य पेशे से डॉक्टर हैं, पर उनके झोले में खूब सारी कहानियां होती हैं. स्किन स्पेशलिस्ट हैं, समाज की डेड स्किन भी कुरेदते रहते हैं. ब्लॉग पर ‘दिल की बात’ लिखते हैं बहुत पहले से. गुलज़ार पर जान छिड़कते हैं. उनके बर्थडे पर कुछ लिखा है. पढ़िए.     किसी सीले हुए मन को … और पढ़ें …मन को मैं तेरी नज्में नज़्में रिवाइज़ करा देता हूं

भैरंट

हिंदी के पहले और शायद आखिरी 'टॉप सेलर' लेखक प्रेमचंद को चिट्ठी

हिंदी के पहले और शायद आखिरी 'टॉप सेलर' लेखक प्रेमचंद को चिट्ठी

आज के दिन में एक पावन बात है. अपने मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिन है. एक चिट्ठी लिखी गई है मुंशी प्रेमचंद के नाम. दिव्य प्रकाश दुबे ने लिखी है. पढ़िए. आदरणीय प्रेमचंद जी, बहुत दिनों से आपसे ये कहना चाह रहा था, लेकिन मौका नहीं मिला. आज 31 जुलाई है और आपका जन्मदिन है तो … और पढ़ें हिंदी के पहले और शायद आखिरी ‘टॉप सेलर’ लेखक प्रेमचंद को चिट्ठी

तहखाना

महारानी गायत्री देवी को हराने के लिए इंदिरा गांधी इस हद तक चली गई थीं!

महारानी गायत्री देवी को हराने के लिए इंदिरा गांधी इस हद तक चली गई थीं!

 पत्रकार-गीतकार और लेखक दुष्यंत की रिहाइश जयपुर में है. फिल्म ‘लाल रंग’ का गाना ‘बावलीबूच’ उन्होंने ही लिखा है. उनकी पांच किताबें राजकमल और पेंगुइन से छपकर आ चुकी हैं. ये इंटरव्यू उन्होंने तब साझा किया था, जब जयपुर की पूर्व राजमाता गायत्री देवी का निधन हो गया था. आज राजमाता की बरसी है. इसे … और पढ़ें महारानी गायत्री देवी को हराने के लिए इंदिरा गांधी इस हद तक चली गई थीं!

भैरंट

जब वह अपनी नाच मंडली लेकर असम गए तो वहां के सिनेमाघरों में ताला लटकने की नौबत आ गई थी

जब वह अपनी नाच मंडली लेकर असम गए तो वहां के सिनेमाघरों में ताला लटकने की नौबत आ गई थी

यह लेख दी लल्लनटॉप के लिए मुन्ना के. पाण्डेय ने लिखा है. 1 मार्च 1982 को बिहार के सिवान में जन्मे डॉ. पाण्डेय के नाटक, रंगमंच और सिनेमा विषय पर नटरंग, सामयिक मीमांसा, संवेद, सबलोग, बनास जन, परिंदे, जनसत्ता, प्रभात खबर जैसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में तीन दर्जन से अधिक लेख/शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं. … और पढ़ें जब वह अपनी नाच मंडली लेकर असम गए तो वहां के सिनेमाघरों में ताला लटकने की नौबत आ गई थी

भैरंट

जब धर्मवीर भारती ने असगर वजाहत की कहानी छापने से मना कर दिया था

जब धर्मवीर भारती ने असगर वजाहत की कहानी छापने से मना कर दिया था

‘जिस लाहौर नहीं देख्या…’ उनका प्रसिद्ध नाटक है. उसने सफलता के झंडे गाड़े. लेकिन असग़र वजाहत ने शायद ही कभी खुद इसकी चर्चा की हो. फैज़ शताब्दी वर्ष के दौरान यह लाहौर की उनकी पहली यात्रा थी. इस छोटी लेकिन एक बेहद आत्मीय यात्रा के दौरान वे कराची और मुल्तान भी गए. ताकि वे पकिस्तान … और पढ़ें जब धर्मवीर भारती ने असगर वजाहत की कहानी छापने से मना कर दिया था

तहखाना

बाबा नागार्जुन की अविनाश कथा, पार्ट-1

बाबा नागार्जुन की अविनाश कथा, पार्ट-1

बाबा नागार्जुन का आज जन्मदिन है. अब ये भी बताना पड़े कि बाबा हिन्दी और मैथिली के लेखक-कवि थे तो कोई बात हुई. हां इतना जान लो ऐसे तो बाबा का असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था पर जब हिंदी में लिखते तो नागार्जुन और मैथिली में लिखते तो यात्री हो जाते थे. दरभंगा, बिहार में रहते … और पढ़ें बाबा नागार्जुन की अविनाश कथा, पार्ट-1

न्यूज़

कंकालों की ये तस्वीर घाना या सीरिया की नहीं, मुज़फ्फरपुर के उसी अस्पताल की है जहां 130 बच्चे मरे

कंकालों की ये तस्वीर घाना या सीरिया की नहीं, मुज़फ्फरपुर के उसी अस्पताल की है जहां 130 बच्चे मरे

नॉर्थ बिहार का एक ज़िला मुज़फ्फरपुर. जो पहले लीची, आम और लहठी के लिए फेमस हुआ करता था. आज की तारीख में बच्चों की मौत के लिए बदनाम हो चुका है. यहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम की वजह से 130 बच्चों की मौत हो चुकी है. नॉर्थ बिहार के ज़िले मोतिहारी, बेतिया, छपरा, वैशाली, सीतामढ़ी और … और पढ़ें कंकालों की ये तस्वीर घाना या सीरिया की नहीं, मुज़फ्फरपुर के उसी अस्पताल की है जहां 130 बच्चे मरे

भैरंट

योग सिर्फ हिंदू ही नहीं है, इसमें इस्लाम का भी तगड़ा हाथ लगा है

योग सिर्फ हिंदू ही नहीं है, इसमें इस्लाम का भी तगड़ा हाथ लगा है

यह लेख डेली ओ से लिया गया है, जिसे माधवी मेनन  ने लिखा है.   दी लल्लनटॉप के लिए हिंदी में यहां प्रस्तुत कर रही हैं शिप्रा किरण. भले ही पूरी दुनिया के सामने योग को ‘प्राचीन हिन्दू परंपरा’ की देन के रूप में प्रचारित किया जा रहा हो लेकिन सच तो ये है कि योग भी भारत की मिली-जुली … और पढ़ें योग सिर्फ हिंदू ही नहीं है, इसमें इस्लाम का भी तगड़ा हाथ लगा है