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महामहिम: प्रधानमंत्री इस डांसर को राष्ट्रपति क्यों बनाना चाहते थे?

महामहिम: प्रधानमंत्री इस डांसर को राष्ट्रपति क्यों बनाना चाहते थे?

साल 1969 का राष्ट्रपति चुनाव देश का सबसे दिलचस्प राष्ट्रपति चुनाव था. कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार होने के बावजूद नीलम संजीव रेड्डी चुनाव हार गए. कांग्रेस दो भागों में बंट गई. रेड्डी कांग्रेस (ओ) के खेमे में थे. 1971 में पकिस्तान को धूल चटाने के बाद इंदिरा की लोकप्रियता आसमान छू रही थी. इंदिरा ने … और पढ़ें महामहिम: प्रधानमंत्री इस डांसर को राष्ट्रपति क्यों बनाना चाहते थे?

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वो राष्ट्रपति जिनकी जीत का ऐलान जामा मस्जिद से हुआ था

वो राष्ट्रपति जिनकी जीत का ऐलान जामा मस्जिद से हुआ था

भारत के तीसरे राष्ट्रपति चुनाव में जब इंदिरा चारों तरफ से घिरी हुई थी. कम्युनिस्ट पार्टी और जनसंघ सहित पूरा विपक्ष जाकिर हुसैन के खिलाफ लामबंद था. प्रचार अभियान के दौरान विपक्ष ने इस बात का खूब प्रचार किया कि अगर जाकिर हुसैन चुनाव हारते हैं तो इंदिरा गांधी के पास अपने पद से इस्तीफा … और पढ़ें वो राष्ट्रपति जिनकी जीत का ऐलान जामा मस्जिद से हुआ था

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महामहिम: दो प्रधानमंत्रियों की मौत और दो युद्ध का गवाह रहा राष्ट्रपति

महामहिम: दो प्रधानमंत्रियों की मौत और दो युद्ध का गवाह रहा राष्ट्रपति

भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के बारे में कहा जाता है कि वो धार्मिक प्रवृत्ति के आदमी थे और इस वजह से उनकी पंडित नेहरू के साथ पटरी नहीं बैठती थी. आपको कभी इस बात पर आश्चर्य नहीं हुआ कि 1957 में नेहरू प्रसाद की जगह राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाना चाहते थे. उन्होंने 1962 … और पढ़ें महामहिम: दो प्रधानमंत्रियों की मौत और दो युद्ध का गवाह रहा राष्ट्रपति

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महामहिम : जब नेहरू को अपने एक झूठ की वजह से शर्मिंदा होना पड़ा

महामहिम : जब नेहरू को अपने एक झूठ की वजह से शर्मिंदा होना पड़ा

पटना के एग्जीबिशन रोड पर पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा है. इस बैंक की खाता संख्या 0380000100030687 में करीब दो हजार रुपए पड़े हुए हैं. इस बैंक अकाउंट के मालिक को दुनिया छोड़े हुए 55 साल हो गए हैं. बैंक इस अकाउंट में हर 6 महीने में बिना नागा ब्याज जमा कर देता है. बैंक ने इसे … और पढ़ें महामहिम : जब नेहरू को अपने एक झूठ की वजह से शर्मिंदा होना पड़ा

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महामहिमः राजेंद्र प्रसाद और नेहरू का हिंदू कोड बिल पर झगड़ा किस बात को लेकर था?

महामहिमः राजेंद्र प्रसाद और नेहरू का हिंदू कोड बिल पर झगड़ा किस बात को लेकर था?

डॉ. राजेंद्र प्रसाद और पंडित जवाहर लाल नेहरू के बीच राजनीतिक मतभेद की एक बड़ी वजह दोनों का धर्म को लेकर रवैया था. नेहरू आधुनिक समाजवाद के पक्षधर थे. उन्हें लगता था कि भारत की मौजूदा स्थिति की एक वजह इसका भीरु धार्मिक रवैया भी है. ये परंपराओं के नाम पर सड़ी गली मान्यताओं में … और पढ़ें महामहिमः राजेंद्र प्रसाद और नेहरू का हिंदू कोड बिल पर झगड़ा किस बात को लेकर था?

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महामहिम: क्या कलाम ने सोनिया को पीएम बनाने से मना किया था?

महामहिम. महामहिम. देश के राष्ट्रपतियों के पॉलिटिकल किस्सों की स्पेशल सीरीज. इस सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं देश के 11वें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की. रामेश्वरम के मछुआरे का बेटा. जो अपनी मेधा के दम पर पहले डीआरडीओ का प्रमुख बना और फिर सात साल तक देश का वैज्ञानिक रहा. 1999 में जो अपनी सरकारी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर अपने पसंदीदा काम अध्यापन की ओर लौट आए थे. 2002 जून में अन्नामलाई यूनिवर्सिटी में अपना लेक्चर खत्म कर अपना नोट्स देख रहे थे. उनके पास यूनिवर्सिटी के वीसी आए और बोले, आपके दफ्तर का फोन पिछले दो घंटे से लगातार बज रहा है. प्रधानमंत्री आपसे बात करना चाहते हैं. कलाम फोन पर आए तो प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बोले, 'मुझे आपकी सहमति चाहिए. ना मत कहिएगा.'

महामहिम: क्या कलाम ने सोनिया को पीएम बनाने से मना किया था?

महामहिम. महामहिम. देश के राष्ट्रपतियों के पॉलिटिकल किस्सों की स्पेशल सीरीज. इस सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं देश के 11वें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की. रामेश्वरम के मछुआरे का बेटा. जो अपनी मेधा के दम पर पहले डीआरडीओ का प्रमुख बना और फिर सात साल तक देश का वैज्ञानिक रहा. 1999 में जो अपनी सरकारी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर अपने पसंदीदा काम अध्यापन की ओर लौट आए थे. 2002 जून में अन्नामलाई यूनिवर्सिटी में अपना लेक्चर खत्म कर अपना नोट्स देख रहे थे. उनके पास यूनिवर्सिटी के वीसी आए और बोले, आपके दफ्तर का फोन पिछले दो घंटे से लगातार बज रहा है. प्रधानमंत्री आपसे बात करना चाहते हैं. कलाम फोन पर आए तो प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बोले, 'मुझे आपकी सहमति चाहिए. ना मत कहिएगा.'
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महामहिम: वो राष्ट्रपति जिसने रबर स्टांप बनने से इंकार कर दिया

महामहिम. महामहिम. देश के राष्ट्रपतियों के पॉलिटिकल किस्सों की स्पेशल सीरीज. इस सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं देश के 10वें राष्ट्रपति केआर नारायणन की. 27 अक्टूबर 1920 को केरल में पैदा हुए नारायणन ने पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स चले गए. भारदीय विदेश सेवा में अफसर बने और नेहरू के शासन काल में जापान, यूनाइटेड किंगडम, चीन और अमेरिका में काम किया. इंदिरा गांधी के कहने पर राजनीति में आए और राजीव गांधी की सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री बने. 1992 में देश के नौवें उपराष्ट्रपति बने और 25 जुलाई 1997 में देश के 10वें राष्ट्रपति बने.

महामहिम: वो राष्ट्रपति जिसने रबर स्टांप बनने से इंकार कर दिया

महामहिम. महामहिम. देश के राष्ट्रपतियों के पॉलिटिकल किस्सों की स्पेशल सीरीज. इस सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं देश के 10वें राष्ट्रपति केआर नारायणन की. 27 अक्टूबर 1920 को केरल में पैदा हुए नारायणन ने पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स चले गए. भारदीय विदेश सेवा में अफसर बने और नेहरू के शासन काल में जापान, यूनाइटेड किंगडम, चीन और अमेरिका में काम किया. इंदिरा गांधी के कहने पर राजनीति में आए और राजीव गांधी की सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री बने. 1992 में देश के नौवें उपराष्ट्रपति बने और 25 जुलाई 1997 में देश के 10वें राष्ट्रपति बने.
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महामहिम: वो राष्ट्रपति जिसकी बाथरूम के कार्टून से बदनामी हुई

महामहिम. महामहिम. देश के राष्ट्रपतियों के पॉलिटिकल किस्सों की स्पेशल सीरीज. इस सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं देश के 5वें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की. 13 मई 1905 को पुरानी दिल्ली के हौज काजी इलाके में पैदा हुए फखरुद्दीन ने पढ़ाई की दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से. और फिर आगे की पढ़ाई के लिए चले गए सेंट कैथरीन्स कॉलेज, कैंब्रिज. लंदन में वे जवाहर लाल नेहरू से मिले और कांग्रेस के सदस्य बने गए. वापस आए तो लाहौर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी. 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल गए. फखरुद्दीन आजादी के बाद राज्यसभा के सदस्य बने. 1967 और 1971 में लोकसभा सदस्य चुने गए और 20 अगस्त 1974 को देश के राष्ट्रपति बने. महामहिम के इस एपिसोड में देखिए आजाद भारत के सबसे विवादित फैसलों में से एक इमरजेंसी को लागू करने वाले राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की कहानी.

महामहिम: वो राष्ट्रपति जिसकी बाथरूम के कार्टून से बदनामी हुई

महामहिम. महामहिम. देश के राष्ट्रपतियों के पॉलिटिकल किस्सों की स्पेशल सीरीज. इस सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं देश के 5वें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की. 13 मई 1905 को पुरानी दिल्ली के हौज काजी इलाके में पैदा हुए फखरुद्दीन ने पढ़ाई की दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से. और फिर आगे की पढ़ाई के लिए चले गए सेंट कैथरीन्स कॉलेज, कैंब्रिज. लंदन में वे जवाहर लाल नेहरू से मिले और कांग्रेस के सदस्य बने गए. वापस आए तो लाहौर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी. 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल गए. फखरुद्दीन आजादी के बाद राज्यसभा के सदस्य बने. 1967 और 1971 में लोकसभा सदस्य चुने गए और 20 अगस्त 1974 को देश के राष्ट्रपति बने. महामहिम के इस एपिसोड में देखिए आजाद भारत के सबसे विवादित फैसलों में से एक इमरजेंसी को लागू करने वाले राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की कहानी.
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जहां कुशल पंजाबी की लाश मिली, वहीं पर एक सुसाइड नोट भी था

टीवी और फिल्मों के मशहूर एक्टर कुशल पंजाबी नहीं रहे. 26 दिसंबर की रात कुशल की बॉडी उनके ही घर में लटकी मिली. न्यूज़ वेबसाइट मिड डे ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा कि कुशल ने आत्महत्या की है. मुंबई में उनके घर से एक सुसाइड नोट भी मिला. इसमें उन्होंने लिखा कि उनकी मौत की ज़िम्मेदारी किसी और पर नहीं डाली जानी चाहिए. खबरों के मुताबिक वो पिछले काफी समय से डिप्रेशन से जूझ रहे थे. इससे उबरने के लिए वो मेडिकल हेल्प भी ले रहे थे. उन्होंने सुसाइड क्यों किया? इस बारे में अभी ज़्यादा डिटेल्स नहीं आई हैं. कुशल सिर्फ 37 साल के थे.

जहां कुशल पंजाबी की लाश मिली, वहीं पर एक सुसाइड नोट भी था

टीवी और फिल्मों के मशहूर एक्टर कुशल पंजाबी नहीं रहे. 26 दिसंबर की रात कुशल की बॉडी उनके ही घर में लटकी मिली. न्यूज़ वेबसाइट मिड डे ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा कि कुशल ने आत्महत्या की है. मुंबई में उनके घर से एक सुसाइड नोट भी मिला. इसमें उन्होंने लिखा कि उनकी मौत की ज़िम्मेदारी किसी और पर नहीं डाली जानी चाहिए. खबरों के मुताबिक वो पिछले काफी समय से डिप्रेशन से जूझ रहे थे. इससे उबरने के लिए वो मेडिकल हेल्प भी ले रहे थे. उन्होंने सुसाइड क्यों किया? इस बारे में अभी ज़्यादा डिटेल्स नहीं आई हैं. कुशल सिर्फ 37 साल के थे.
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महामहिम: वो राष्ट्रपति, जिसे लोकसभा का टिकट तक देने से इनकार कर दिया गया था

महामहिम. देश के राष्ट्रपतियों के पॉलिटिकल किस्सों की स्पेशल सीरीज. इस सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की. 1 अक्टूबर 1945 को कानपुर देहात के परौंख गांव में पैदा हुए रामनाथ कोविंद ने डीएवी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की. वही डीएवी कॉलेज जहां से अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पढ़ाई की थी. वकालत पढ़ने के बाद रामनाथ कोविंद दिल्ली आ गए और दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे. इसी दौरान उनकी मुलाकात मोरारजी देसाई से हुई. 1977 में देसाई प्रधानमंत्री बने तो कोविंद सरकारी वकील बन गए. यहीं अटल बिहारी वाजपेयी, कोविंद से मिले और उनकी मुलाकात कल्याण सिंह से कराई. 1991 में लोकसभा के चुनाव हुए तो कोविंद को यूपी के घाटमपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने मैदान में उतारा. कोविंद चुनाव हार गए और वापस दिल्ली आ गए. लेकिन राजनीति में बने रहे. और परौंख गांव के एक कच्ची मिट्टी के घर निकलकर से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे. महामहिम के इस एपिसोड में देखिए, कहानी रामनाथ कोविंद की.

महामहिम: वो राष्ट्रपति, जिसे लोकसभा का टिकट तक देने से इनकार कर दिया गया था

महामहिम. देश के राष्ट्रपतियों के पॉलिटिकल किस्सों की स्पेशल सीरीज. इस सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की. 1 अक्टूबर 1945 को कानपुर देहात के परौंख गांव में पैदा हुए रामनाथ कोविंद ने डीएवी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की. वही डीएवी कॉलेज जहां से अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पढ़ाई की थी. वकालत पढ़ने के बाद रामनाथ कोविंद दिल्ली आ गए और दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे. इसी दौरान उनकी मुलाकात मोरारजी देसाई से हुई. 1977 में देसाई प्रधानमंत्री बने तो कोविंद सरकारी वकील बन गए. यहीं अटल बिहारी वाजपेयी, कोविंद से मिले और उनकी मुलाकात कल्याण सिंह से कराई. 1991 में लोकसभा के चुनाव हुए तो कोविंद को यूपी के घाटमपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने मैदान में उतारा. कोविंद चुनाव हार गए और वापस दिल्ली आ गए. लेकिन राजनीति में बने रहे. और परौंख गांव के एक कच्ची मिट्टी के घर निकलकर से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे. महामहिम के इस एपिसोड में देखिए, कहानी रामनाथ कोविंद की.