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झमाझम

पागलपंती: मूवी रिव्यू

पागलपंती: मूवी रिव्यू

‘एक और एक ग्यारह’ मूवी में एक डायलॉग था ओ पाजी! जब हमारे साथ सब राईट ही राईट हो रहा है तो एक और राईट ले लेते हैं. और यूं राईट लेते-लेते वो जहां से निकले थे वहीं पहुंच जाते हैं. यानी गुंडों के अड्डे. इस सीन की याद मुझे ‘पागलपंती’ देखते हुए आई क्यूंकि … और पढ़ें पागलपंती: मूवी रिव्यू

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फ्रोज़न 2: मूवी रिव्यू

फ्रोज़न 2: मूवी रिव्यू

फ्रोज़न वन में एल्सा को डर था कि उसके पास दुनिया के लिहाज़ से कुछ ज़्यादा ही शक्तियां हैं, लेकिन फ्रोज़न टू में उसे उम्मीद रखनी होगी कि ये शक्तियां पर्याप्त हों. – ये फ्रोज़न 2 मूवी की प्रमोशनल लाइन है. # कहानी- एल्सा और ऐना. दो बहनें. बहनें कम सोलमेट ज़्यादा. फ्रोजन पार्ट वन … और पढ़ें फ्रोज़न 2: मूवी रिव्यू

न्यूज़

शिल्पा शेट्टी ने बिहार तो छोड़ दिया लेकिन यूपी 'लूटने' ज़रूर आ रही हैं

शिल्पा शेट्टी ने बिहार तो छोड़ दिया लेकिन यूपी 'लूटने' ज़रूर आ रही हैं

निकम्मा. शिल्पा शेट्टी की अगली फिल्म. इसके बारे में महीनों से बज़ बना हुआ है. शूटिंग तो खैर अगस्त से ही शुरू हो गई थी और शिल्पा के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की खबरें भी तब से ही चल रहीं थीं. # क्यूं नज़र रहनी चाहिए इस फिल्म पर- 1) अव्वल तो शिल्पा शेट्टी की … और पढ़ें शिल्पा शेट्टी ने बिहार तो छोड़ दिया लेकिन यूपी ‘लूटने’ ज़रूर आ रही हैं

झमाझम

हाउस अरेस्ट: मूवी रिव्यू

हाउस अरेस्ट: मूवी रिव्यू

हाउस अरेस्ट का बेसिक कॉन्सेप्ट एक शब्द का है. और वो शब्द है ‘हिकिकोमोरी‘. हिकिकोमोरी एक जापानी कॉन्सेप्ट है. जापान के लोग, खासतौर पर युवा अपने को कई दिनों, महीनों या सालों तक घर में बंद कर लेते हैं. वो कहते हैं न भीड़ में रहकर अकेला होना, बस वही है हिकिकोमोरी. नेटफ्लिक्स पर 15 … और पढ़ें हाउस अरेस्ट: मूवी रिव्यू

झमाझम

मरजावां: मूवी रिव्यू

मरजावां: मूवी रिव्यू

‘मरजावां‘ के डायरेक्टर मिलाप ज़ावेरी ने 2002 की कल्ट मूवी ‘कांटे’ के डायलॉग लिखे हैं. कांटे में उनका एक डायलॉग है- कहानी में ट्विस्ट हो न, तो मज़ा आता है. लेकिन वो ये कहीं नहीं बताते कि क्या हो अगर कहानी में ज़रूरत से कहीं ज़्यादा ट्विस्ट हों और कोई एक सिरा पकड़ना ही असंभव … और पढ़ें मरजावां: मूवी रिव्यू

झमाझम

फिल्म रिव्यू: मोतीचूर चकनाचूर

फिल्म रिव्यू: मोतीचूर चकनाचूर

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और अथिया शेट्टी की नई फिल्म आई है. ‘मोतीचूर चकनाचूर’. फिल्म की लीड पेयरिंग देखकर जो फीलिंग आपको आई, ये फिल्म उसी के बारे में है. एक 36 साल का आदमी है पुष्पेंद्र त्यागी. पिछले कई सालों से दुबई में रह रहा है. शादी के लिए अपने घर भोपाल आया है. दूसरी ओर … और पढ़ें फिल्म रिव्यू: मोतीचूर चकनाचूर

वीडियो

'सैटेलाइट शंकर' फिल्म रिव्यू: ऐसी एक्सपेरिटमेंट कोशिश जो सफलता-असफलता के बीच कोशिश ही बनकर रह जाती है

‘हीरो’ से डेब्यू करने के चार साल सूरज पंचोली की दूसरी फिल्म आई है. नाम है ‘सैटेलाइट शंकर’. और ये कोई साइंस-फिक्शन नहीं है. इसे बनाया है इरफान कमाल ने. ये उनकी दूसरी फिल्म है. इससे पहले 2010 में वो ‘थैंक्स मां’ नाम की एक क्राइम ड्रामा फिल्म बना चुके हैं. पहली वाली तो ठीक थी. अब दूसरी भी देख ली है. कैसी है वीडियो में बता रहे हैं.

'सैटेलाइट शंकर' फिल्म रिव्यू: ऐसी एक्सपेरिटमेंट कोशिश जो सफलता-असफलता के बीच कोशिश ही बनकर रह जाती है

‘हीरो’ से डेब्यू करने के चार साल सूरज पंचोली की दूसरी फिल्म आई है. नाम है ‘सैटेलाइट शंकर’. और ये कोई साइंस-फिक्शन नहीं है. इसे बनाया है इरफान कमाल ने. ये उनकी दूसरी फिल्म है. इससे पहले 2010 में वो ‘थैंक्स मां’ नाम की एक क्राइम ड्रामा फिल्म बना चुके हैं. पहली वाली तो ठीक थी. अब दूसरी भी देख ली है. कैसी है वीडियो में बता रहे हैं.
वीडियो

बाल्ड-बाल्ड देखें या बाल-बाल बचें, जानने के लिए पहले 'बाला' का रिव्यू देखिए

काफी विवादों के बाद आख़िरकार 8 नवंबर, 2019 को रिलीज़ हुई फिल्म ‘बाला’. ये कहानी है बालमुकुंद शुक्ला उर्फ बाला की. बाला कानपुर का एक सेल्समैन है. ब्यूटी प्रॉडक्ट बेचता है. लेकिन उसका बॉस उससे फील्ड वर्क छुड़वाकर उसे ऑफिस वर्क दे देता है. काइंड ऑफ़ डिमोशन. और डिमोशन इसलिए क्योंकि उसके बाल नहीं हैं. बाला गंजा है. इसीलिए बॉस और समाज़ की नज़र में उसकी पर्सनेलिटी ठंडी है. बाल नहीं, तो चार्म नहीं. बाकी फिल्म की कहानी कैसे आगे बढ़ती है, फिल्म में हमें क्या-क्या देखने मिला, फिल्म कहां कमज़ोर रही. सब कुछ की जानकारी इस वीडियो में आपको मिलेगी. तो फिल्म देखने से पहले ये वीडियो देख डालिए.

बाल्ड-बाल्ड देखें या बाल-बाल बचें, जानने के लिए पहले 'बाला' का रिव्यू देखिए

काफी विवादों के बाद आख़िरकार 8 नवंबर, 2019 को रिलीज़ हुई फिल्म ‘बाला’. ये कहानी है बालमुकुंद शुक्ला उर्फ बाला की. बाला कानपुर का एक सेल्समैन है. ब्यूटी प्रॉडक्ट बेचता है. लेकिन उसका बॉस उससे फील्ड वर्क छुड़वाकर उसे ऑफिस वर्क दे देता है. काइंड ऑफ़ डिमोशन. और डिमोशन इसलिए क्योंकि उसके बाल नहीं हैं. बाला गंजा है. इसीलिए बॉस और समाज़ की नज़र में उसकी पर्सनेलिटी ठंडी है. बाल नहीं, तो चार्म नहीं. बाकी फिल्म की कहानी कैसे आगे बढ़ती है, फिल्म में हमें क्या-क्या देखने मिला, फिल्म कहां कमज़ोर रही. सब कुछ की जानकारी इस वीडियो में आपको मिलेगी. तो फिल्म देखने से पहले ये वीडियो देख डालिए.
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बाला: मूवी रिव्यू

बाला: मूवी रिव्यू

बालमुकुंद इमोशनल होते हुए कहता है. कि नहाने के तुरंत बाद वो अपना कच्छा नहीं, अपना विग पहनता है. इसलिए कि विग न पहना हो, तो उसे लगता है वो नंगा हो गया. उसका ये कहना सुनकर आपके अंदर हास्य और करुणा एक साथ जनमती है. हास्य और पीड़ा का ये ही जोड़ आप पूरी फिल्म में पाते हैं. वही जोड़, जिसके बारे में शायद चार्ली … और पढ़ें बाला: मूवी रिव्यू

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फिल्म रिव्यू: सैटेलाइट शंकर

फिल्म रिव्यू: सैटेलाइट शंकर

‘हीरो’ से डेब्यू करने के चार साल सूरज पंचोली की दूसरी फिल्म आई है. नाम है ‘सैटेलाइट शंकर’. और ये कोई साइंस-फिक्शन नहीं है. इसे बनाया है इरफान कमाल ने. ये उनकी दूसरी फिल्म है. इससे पहले 2010 में वो ‘थैंक्स मां’ नाम की एक क्राइम ड्रामा फिल्म बना चुके हैं. पहली वाली तो ठीक … और पढ़ें फिल्म रिव्यू: सैटेलाइट शंकर