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किताबवाला: अमित शाह ने नरेंद्र मोदी के लिए पर्दे के पीछे क्या-क्या काम किए?

किताबवाला. दी लल्लनटॉप का स्पेशल वीकली शो. जिसमें हम बात करते हैं किताबों के बारे में. और साथ में होतें हैं किताब के लेखक. किताबवाला के इस एपिसोड में हमारे साथ हैं वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार. संतोष ने 2019 के लोकसभा चुनाव पर किताब लिखी है. किताब का नाम है, 'भारत कैसे हुआ मोदीमय: ऐतिहासिक जीत की अंतर्कथा.'  इस किताब को प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशन किया है. संतोष लंबे समय से बीजेपी को कवर कर रहे हैं. और यही कारण है कि उनके पास पार्टी की ढेर सारी अंतर्कथाएं हैं. जिनके बारे में संतोष ने किताब में बताया है. देखिए इस हफ्ते का किताबवाला.

किताबवाला: अमित शाह ने नरेंद्र मोदी के लिए पर्दे के पीछे क्या-क्या काम किए?

किताबवाला. दी लल्लनटॉप का स्पेशल वीकली शो. जिसमें हम बात करते हैं किताबों के बारे में. और साथ में होतें हैं किताब के लेखक. किताबवाला के इस एपिसोड में हमारे साथ हैं वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार. संतोष ने 2019 के लोकसभा चुनाव पर किताब लिखी है. किताब का नाम है, 'भारत कैसे हुआ मोदीमय: ऐतिहासिक जीत की अंतर्कथा.'  इस किताब को प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशन किया है. संतोष लंबे समय से बीजेपी को कवर कर रहे हैं. और यही कारण है कि उनके पास पार्टी की ढेर सारी अंतर्कथाएं हैं. जिनके बारे में संतोष ने किताब में बताया है. देखिए इस हफ्ते का किताबवाला.
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किताबवाला: मशहूर एक्टर बलराज सहनी नास्तिक थे पर गुरु ग्रंथ साहिब पढ़ते मिले

मशहूर एक्टर परिक्षित सहनी की किताब 'नॉन कन्फर्मिस्ट मेमरीज़ ऑफ माई फादर बलराज सहनी'. जिसे पेंग्विन ने छापा है. किताबवाला के इस एपिसोड में एडिटर सौरव द्विवेदी ने परिक्षित सहनी से इस किताब और सिनेमा से जुड़े कई सवाल पूछे. जिसका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया. वैसे कई लोगों को इनके नाम को लेकर भी कन्फ्यूज़न की स्थिति बनी रहती है, परिक्षित सहनी ने अपने नाम से जुड़ा किस्सा भी बताया. फिल्म 3 इडियट्स, पीके और लगे रहो मुन्ना भाई जैसी फिल्मों में काम कर चुके परिक्षित सहनी की किताब में क्या-क्या खास बातें हैं, इसे जानने के लिए ये वीडियो आपको ज़रूर देखना चाहिए. इस वीडियो में आपको किताब की जानकारी के अलावा मशहूर एक्टर बलराज सहनी के बारे में भी कई नई बातें भी पता चलेंगी.

किताबवाला: मशहूर एक्टर बलराज सहनी नास्तिक थे पर गुरु ग्रंथ साहिब पढ़ते मिले

मशहूर एक्टर परिक्षित सहनी की किताब 'नॉन कन्फर्मिस्ट मेमरीज़ ऑफ माई फादर बलराज सहनी'. जिसे पेंग्विन ने छापा है. किताबवाला के इस एपिसोड में एडिटर सौरव द्विवेदी ने परिक्षित सहनी से इस किताब और सिनेमा से जुड़े कई सवाल पूछे. जिसका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया. वैसे कई लोगों को इनके नाम को लेकर भी कन्फ्यूज़न की स्थिति बनी रहती है, परिक्षित सहनी ने अपने नाम से जुड़ा किस्सा भी बताया. फिल्म 3 इडियट्स, पीके और लगे रहो मुन्ना भाई जैसी फिल्मों में काम कर चुके परिक्षित सहनी की किताब में क्या-क्या खास बातें हैं, इसे जानने के लिए ये वीडियो आपको ज़रूर देखना चाहिए. इस वीडियो में आपको किताब की जानकारी के अलावा मशहूर एक्टर बलराज सहनी के बारे में भी कई नई बातें भी पता चलेंगी.
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'आज फिर जीने की तमन्ना है' गाना, गाइड फिल्म में क्यों नहीं चाहते थे देव आनंद?

प्रभात प्रकाशन से छपी शिवेंद्र कुमार सिंह और गिरिजेश कुमार की किताब 'रागगीरी' फिल्मी संगीत में शास्त्रीय रागों की अनुसनी कहानी का अद्भुत संग्रह है. जिसे आप किसी भी सूरत में मिस नहीं करना चाहेंगे. इस किताब के लेखक शिवेंद्र कुमार सिंह हैं जो पेशे से पत्रकार रहे हैं. जबकि दूसरे लेखक गिरिजेश भी पेशे से पत्रकार ही हैं. किताबवाला के इस एपिसोड में शिवेंद्र कुमार सिंह से खास बातचीत है जिन्होंने 'रागगीरी' के बारे में विस्तार से बात की है. इस किताब की खूबियां बताई हैं. साथ ही है हर राग से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा, जिन्हें जोड़कर 'रागगीरी' का निर्माण हुआ है. किताब रागगीरी को इन लिंक्स के जरिए खरीदा जा सकता है. Amazon- https://amzn.to/33lvKEJ Flipkart- https://bit.ly/2My7VTt Prabhat Prakashan- https://www.prabhatbooks.com/raaggiri.htm

'आज फिर जीने की तमन्ना है' गाना, गाइड फिल्म में क्यों नहीं चाहते थे देव आनंद?

प्रभात प्रकाशन से छपी शिवेंद्र कुमार सिंह और गिरिजेश कुमार की किताब 'रागगीरी' फिल्मी संगीत में शास्त्रीय रागों की अनुसनी कहानी का अद्भुत संग्रह है. जिसे आप किसी भी सूरत में मिस नहीं करना चाहेंगे. इस किताब के लेखक शिवेंद्र कुमार सिंह हैं जो पेशे से पत्रकार रहे हैं. जबकि दूसरे लेखक गिरिजेश भी पेशे से पत्रकार ही हैं. किताबवाला के इस एपिसोड में शिवेंद्र कुमार सिंह से खास बातचीत है जिन्होंने 'रागगीरी' के बारे में विस्तार से बात की है. इस किताब की खूबियां बताई हैं. साथ ही है हर राग से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा, जिन्हें जोड़कर 'रागगीरी' का निर्माण हुआ है. किताब रागगीरी को इन लिंक्स के जरिए खरीदा जा सकता है. Amazon- https://amzn.to/33lvKEJ Flipkart- https://bit.ly/2My7VTt Prabhat Prakashan- https://www.prabhatbooks.com/raaggiri.htm
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किताबवाला: मनीष सिसोदिया के सामने लेडी टीचर के रोने की वजह आपको भावुक कर देगी

किताबवाला के इस नए एपिसोड में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से खास बातचीत है. मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री का पदभार संभालने के साथ ही कई बदलाव किए. दिल्ली में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने में इनका बड़ा योगदान है. साल 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्होंने स्कूलों को लेकर जितने काम किए उसे उन्होंने एक किताब की शक्ल दी है. इस किताब का नाम है 'शिक्षा'. इस इंटरव्यू को या फिर किताबवाला सेगमेंट के इस नए वीडियो को आपको ज़रूर देखना चाहिए.

किताबवाला: मनीष सिसोदिया के सामने लेडी टीचर के रोने की वजह आपको भावुक कर देगी

किताबवाला के इस नए एपिसोड में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से खास बातचीत है. मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री का पदभार संभालने के साथ ही कई बदलाव किए. दिल्ली में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने में इनका बड़ा योगदान है. साल 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्होंने स्कूलों को लेकर जितने काम किए उसे उन्होंने एक किताब की शक्ल दी है. इस किताब का नाम है 'शिक्षा'. इस इंटरव्यू को या फिर किताबवाला सेगमेंट के इस नए वीडियो को आपको ज़रूर देखना चाहिए.
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किताबवाला: 12वीं में फेल हुआ, टैंपो में कंडक्टरी की फिर कुत्ता घुमाने वाला गांव का लड़का IPS कैसे बना?

नियो लिट पब्लिकेशन से छपी अनुराग पाठक की किताब ‘12th फेल.. हारा वही जो लड़ा नहीं’. अनुराग पाठक जीएसटी के डिप्टी कमिश्रनर हैं. जिन्होंने मनोज शर्मा के ऊपर किताब लिखी हैं. मनोज शर्मा 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर से आईपीएस हैं. अभी मुंबई में एडिशनल कमिश्रनर ऑफ वेस्ट रीजन के पद पर तैनात हैं. इस किताब में मनोज शर्मा के जीवन की पूरी कहानी लिखी गई है कि कैसे मध्यप्रदेश के मुरैना का एक लड़का जो 12वीं में फेल होता है, फिर टंपो कंडक्टर बनता है, फिर लाइब्रेरी असिस्टेंट की नौकरी करता है और आखिर में यूपीएससी एग्ज़ाम पास कर जाता है. इस किताब में मनोज शर्मा के जीवन की सारी ऊंच-नीच की कहानी बड़े ही खूबसूरत तरीके से बताई गई है जिससे आम लोगों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा. मनोज शर्मा की जीवनी पढ़ कर ये भी सीखा जा सकता है कि कैसे जीवन में कितनी भी बाधाएं क्यों न आ जाए, इंसान इन तरीकों को अपना कर अपने जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति आसानी से कर सकता है.   किताब को इस लिंक पर क्लिक करके खरीद सकते हैं लल्लनटॉप की बाकी स्पेशल सीरीज इस लिंक पर क्लिक करते देख सकते हैं

किताबवाला: 12वीं में फेल हुआ, टैंपो में कंडक्टरी की फिर कुत्ता घुमाने वाला गांव का लड़का IPS कैसे बना?

नियो लिट पब्लिकेशन से छपी अनुराग पाठक की किताब ‘12th फेल.. हारा वही जो लड़ा नहीं’. अनुराग पाठक जीएसटी के डिप्टी कमिश्रनर हैं. जिन्होंने मनोज शर्मा के ऊपर किताब लिखी हैं. मनोज शर्मा 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर से आईपीएस हैं. अभी मुंबई में एडिशनल कमिश्रनर ऑफ वेस्ट रीजन के पद पर तैनात हैं. इस किताब में मनोज शर्मा के जीवन की पूरी कहानी लिखी गई है कि कैसे मध्यप्रदेश के मुरैना का एक लड़का जो 12वीं में फेल होता है, फिर टंपो कंडक्टर बनता है, फिर लाइब्रेरी असिस्टेंट की नौकरी करता है और आखिर में यूपीएससी एग्ज़ाम पास कर जाता है. इस किताब में मनोज शर्मा के जीवन की सारी ऊंच-नीच की कहानी बड़े ही खूबसूरत तरीके से बताई गई है जिससे आम लोगों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा. मनोज शर्मा की जीवनी पढ़ कर ये भी सीखा जा सकता है कि कैसे जीवन में कितनी भी बाधाएं क्यों न आ जाए, इंसान इन तरीकों को अपना कर अपने जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति आसानी से कर सकता है.   किताब को इस लिंक पर क्लिक करके खरीद सकते हैं लल्लनटॉप की बाकी स्पेशल सीरीज इस लिंक पर क्लिक करते देख सकते हैं
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किताबवाला: एक नेता जो लोकसभा चुनाव हारा और बच्चों का दिल जीतने निकल पड़ा

राजकमल प्रकाशन से छपी दिलीप पांडे और चंचल शर्मा की किताब ‘टपकी और बूंदी के लड्डू’. दिलीप पांडे आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता हैं. नेता हैं. लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. हार गए. चंचल शर्मा अन्ना हजारे की अगुवाई में हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हुईं. तब से दिलीप के साथ किताबें लिख रही हैं. दोनों ने अब तक चार किताबें लिखी हैं. दहलीज पर दिल, कॉल सेंटर, खुलती गिरहें के बाद ये उनकी चौथी रचना है. ‘टपकी और बूंदी के लड्डू’ में बच्चों के लिए छोटी-छोटी कहानियों को संकलित किया गया है. इसकी मुख्य किरदार टपकी है. जिसके जरिए समाज के बीच से कुछ सवालों को जवाब देने की कोशिश की गई है. किताबवाला में हमने बात की इस किताब के इर्द-गिर्द बच्चों और अभिभावकों से जुड़े आज के तमाम सवालों पर. बच्चों की बदलती परवरिश पर. बच्चों पर थोपी जा रही कुछ आदर्शवादी बातों की. किताब को इस लिंक पर क्लिक करके खरीद सकते हैं- https://amzn.to/2klyhhz

किताबवाला: एक नेता जो लोकसभा चुनाव हारा और बच्चों का दिल जीतने निकल पड़ा

राजकमल प्रकाशन से छपी दिलीप पांडे और चंचल शर्मा की किताब ‘टपकी और बूंदी के लड्डू’. दिलीप पांडे आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता हैं. नेता हैं. लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. हार गए. चंचल शर्मा अन्ना हजारे की अगुवाई में हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हुईं. तब से दिलीप के साथ किताबें लिख रही हैं. दोनों ने अब तक चार किताबें लिखी हैं. दहलीज पर दिल, कॉल सेंटर, खुलती गिरहें के बाद ये उनकी चौथी रचना है. ‘टपकी और बूंदी के लड्डू’ में बच्चों के लिए छोटी-छोटी कहानियों को संकलित किया गया है. इसकी मुख्य किरदार टपकी है. जिसके जरिए समाज के बीच से कुछ सवालों को जवाब देने की कोशिश की गई है. किताबवाला में हमने बात की इस किताब के इर्द-गिर्द बच्चों और अभिभावकों से जुड़े आज के तमाम सवालों पर. बच्चों की बदलती परवरिश पर. बच्चों पर थोपी जा रही कुछ आदर्शवादी बातों की. किताब को इस लिंक पर क्लिक करके खरीद सकते हैं- https://amzn.to/2klyhhz
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किताबवाला: भाजपा में जुड़ने के पहले यशवंत सिन्हा और लालू यादव में क्यों ठन गयी थी?

यशवंत सिन्हा. पूर्व ब्यूरोक्रेट, चंद्रशेखर की सरकार में विदेश मंत्री और वाजपेयी सरकार में वित्तमंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा आज हमारे साथ हैं. साथ में है उनकी आत्मकथा 'रिलेंटलेस: एन ऑटोबॉयग्रफी.' आज के किताबवाला में हम यशवंत सिन्हा से उनकी किताब के बारे में बात करेंगे और सुनेंगे कुछ किस्से. जो इस किताब में दर्ज है. किताबवाला के पिछले एपिसोड्स आप यहां देख सकते हैं.

किताबवाला: भाजपा में जुड़ने के पहले यशवंत सिन्हा और लालू यादव में क्यों ठन गयी थी?

यशवंत सिन्हा. पूर्व ब्यूरोक्रेट, चंद्रशेखर की सरकार में विदेश मंत्री और वाजपेयी सरकार में वित्तमंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा आज हमारे साथ हैं. साथ में है उनकी आत्मकथा 'रिलेंटलेस: एन ऑटोबॉयग्रफी.' आज के किताबवाला में हम यशवंत सिन्हा से उनकी किताब के बारे में बात करेंगे और सुनेंगे कुछ किस्से. जो इस किताब में दर्ज है. किताबवाला के पिछले एपिसोड्स आप यहां देख सकते हैं.
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इंटरव्यू: साइंस के स्टुडेंट रहे सुरेंद्र मोहन पाठक क्राइम पर क्यों लिखने लगे?

हिंदी में क्राइम फिक्शन लिखने वाले सुरेंद्र मोहन पाठक ने 300 से भी ज्यादा उपन्यास लिखे हैं. उनके सबसे ज्यादा चर्चित उपन्यासों में ‘सुनील सीरीज़’, ‘विमल सीरीज़’, ‘सुधीर सीरीज़’ काफी चर्चित हैं. लल्लनटॉप की स्पेशल सीरीज़ 'किताबवाला' के दौरान सुरेंद्र मोहन पाठक से खास बातचीत हुई जिसमें उन्हें अपने जीवन से जुड़े कई राज़ खोले. साथ ही उन्होंने इंटरव्यू के दौरान ये भी बताया कि उन्हें अपने जीवन भर इस खास काम को नहीं कर पाने का अफसोस रहेगा.

लल्लनटॉप की पूरी स्पेशल सीरीज़ देखने के लिए यहां क्लिक करें

इंटरव्यू: साइंस के स्टुडेंट रहे सुरेंद्र मोहन पाठक क्राइम पर क्यों लिखने लगे?

हिंदी में क्राइम फिक्शन लिखने वाले सुरेंद्र मोहन पाठक ने 300 से भी ज्यादा उपन्यास लिखे हैं. उनके सबसे ज्यादा चर्चित उपन्यासों में ‘सुनील सीरीज़’, ‘विमल सीरीज़’, ‘सुधीर सीरीज़’ काफी चर्चित हैं. लल्लनटॉप की स्पेशल सीरीज़ 'किताबवाला' के दौरान सुरेंद्र मोहन पाठक से खास बातचीत हुई जिसमें उन्हें अपने जीवन से जुड़े कई राज़ खोले. साथ ही उन्होंने इंटरव्यू के दौरान ये भी बताया कि उन्हें अपने जीवन भर इस खास काम को नहीं कर पाने का अफसोस रहेगा.

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भारत की आजादी के इतिहास का सबसे विवादित किरदार क्यों बने सावरकर?

लेखक हैं विक्रम संपत. इतिहास पर पहले भी किताबें लिख चुके हैं. अबकी उनकी नई किताब आई है 'Savarkar, echoes from a forgotten past'. इस किताब में वो विनायक दामोदर सावरकर के पूरे जीवन को समेटा है. सावरकर हैं जो इतिहास के कुछ विवादित किरदारों में से रहे हैं. पेंगुइन से आई इस किताब का हिंदी वर्जन भी जल्दी आने वाला है? विक्रम संपत जब दी लल्लनटॉप के स्टूडियो आए तो हमने उनसे पूछा? इस किताब के लिखे जाने के पीछे आज के हिंदुत्ववादी माहौल का कितना हाथ? किताब लिखने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ी? क्या सावरकर को अब तक के इतिहास में ठीक से नहीं आंका गया? क्या सावरकर पर लिखते हुए लेखक कितना तटस्थ रह पाए? सारे  सवालों के जवाब हैं किताबवाला सीरीज के इस वीडियो में.  

भारत की आजादी के इतिहास का सबसे विवादित किरदार क्यों बने सावरकर?

लेखक हैं विक्रम संपत. इतिहास पर पहले भी किताबें लिख चुके हैं. अबकी उनकी नई किताब आई है 'Savarkar, echoes from a forgotten past'. इस किताब में वो विनायक दामोदर सावरकर के पूरे जीवन को समेटा है. सावरकर हैं जो इतिहास के कुछ विवादित किरदारों में से रहे हैं. पेंगुइन से आई इस किताब का हिंदी वर्जन भी जल्दी आने वाला है? विक्रम संपत जब दी लल्लनटॉप के स्टूडियो आए तो हमने उनसे पूछा? इस किताब के लिखे जाने के पीछे आज के हिंदुत्ववादी माहौल का कितना हाथ? किताब लिखने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ी? क्या सावरकर को अब तक के इतिहास में ठीक से नहीं आंका गया? क्या सावरकर पर लिखते हुए लेखक कितना तटस्थ रह पाए? सारे  सवालों के जवाब हैं किताबवाला सीरीज के इस वीडियो में.  
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देश का वो पूर्व पीएम जो अपने राजनीति के शिखर पर बिल्कुल अकेला पड़ गया था

दी लल्लनटॉप की बेहद खास सीरीज. किताबवाला. सौरभ द्विवेदी के साथ इस बार हैं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश. वो वरिष्ठ पत्रकार भी रहे हैं. उनकी किताब आई है. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पर. किताब का शीर्षक है  Chandra Shekhar - The Last Icon of Ideological Politics. रूपा पब्लिकेशन से किताब छपी है. इस किताब की रोशनी में कुछ सवालों के जवाब हमें मिलेंगे इस एपिसोड में. मसलन. चंद्रशेखर की राम मनोहर लोहिया से साथ कैसी लड़ाई थी? चंद्रशेखर कैसे कांग्रेस में आए और कैसे उन्होंने इंदिरा गांधी को कांग्रेस तोड़ने की सीधी चुनौती दे डाली? कैसे वीपी सिंह से पीएम की रेस हार गए चंद्रशेखर? चंद्रशेखर को राजीव गांधी ने कैसे पीएम की कुर्सी तक पहुंचा दिया? पंजाब में आतंकवाद, अयोध्या का मंदिर-मस्जिद विवाद और आर्थिक मंदी, चंद्रशेखर कैसे निपटे इन गंभीर मसलों से.  

देश का वो पूर्व पीएम जो अपने राजनीति के शिखर पर बिल्कुल अकेला पड़ गया था

दी लल्लनटॉप की बेहद खास सीरीज. किताबवाला. सौरभ द्विवेदी के साथ इस बार हैं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश. वो वरिष्ठ पत्रकार भी रहे हैं. उनकी किताब आई है. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पर. किताब का शीर्षक है  Chandra Shekhar - The Last Icon of Ideological Politics. रूपा पब्लिकेशन से किताब छपी है. इस किताब की रोशनी में कुछ सवालों के जवाब हमें मिलेंगे इस एपिसोड में. मसलन. चंद्रशेखर की राम मनोहर लोहिया से साथ कैसी लड़ाई थी? चंद्रशेखर कैसे कांग्रेस में आए और कैसे उन्होंने इंदिरा गांधी को कांग्रेस तोड़ने की सीधी चुनौती दे डाली? कैसे वीपी सिंह से पीएम की रेस हार गए चंद्रशेखर? चंद्रशेखर को राजीव गांधी ने कैसे पीएम की कुर्सी तक पहुंचा दिया? पंजाब में आतंकवाद, अयोध्या का मंदिर-मस्जिद विवाद और आर्थिक मंदी, चंद्रशेखर कैसे निपटे इन गंभीर मसलों से.