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क्या दिल्ली की सभी महिलाएं केजरीवाल की 'फ्री बस' सुविधा का लाभ ले पा रही हैं?

ज़मीनी हक़ीकत. 2020 की हमारी ख़ास सीरीज़. ज़मीनी हक़ीक़त. यहां हम बात कर रहे हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पांच सबसे चर्चित और प्रमुख योजनाओं की. इस सीरीज़ में हम ज़मीन पर जाकर, लोगों के बीच जान रहे हैं इन योजनाओं की हक़ीक़त. आज बात दिल्ली की महिलाओं को दी गई सुविधा फ्री बस की. ज़मीनी हकीकत का पिछला एपिसोड देखने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं

क्या दिल्ली की सभी महिलाएं केजरीवाल की 'फ्री बस' सुविधा का लाभ ले पा रही हैं?

ज़मीनी हक़ीकत. 2020 की हमारी ख़ास सीरीज़. ज़मीनी हक़ीक़त. यहां हम बात कर रहे हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पांच सबसे चर्चित और प्रमुख योजनाओं की. इस सीरीज़ में हम ज़मीन पर जाकर, लोगों के बीच जान रहे हैं इन योजनाओं की हक़ीक़त. आज बात दिल्ली की महिलाओं को दी गई सुविधा फ्री बस की. ज़मीनी हकीकत का पिछला एपिसोड देखने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं
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ज़मीनी हक़ीक़त: केजरीवाल सरकार को 'आयुष्मान भारत' से क्या दिक्कत है?

ज़मीनी हक़ीकत. 2020 की हमारी ख़ास सीरीज़. ज़मीनी हक़ीक़त. यहां हम बात कर रहे हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पांच सबसे चर्चित और प्रमुख योजनाओं की. इस सीरीज़ में हम ज़मीन पर जाकर, लोगों के बीच जान रहे हैं इन योजनाओं की हक़ीक़त. आज बात दिल्ली के स्वास्थ्य की.

ज़मीनी हक़ीक़त: केजरीवाल सरकार को 'आयुष्मान भारत' से क्या दिक्कत है?

ज़मीनी हक़ीकत. 2020 की हमारी ख़ास सीरीज़. ज़मीनी हक़ीक़त. यहां हम बात कर रहे हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पांच सबसे चर्चित और प्रमुख योजनाओं की. इस सीरीज़ में हम ज़मीन पर जाकर, लोगों के बीच जान रहे हैं इन योजनाओं की हक़ीक़त. आज बात दिल्ली के स्वास्थ्य की.
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ग्राउंड रिपोर्ट: JNU में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पर क्या है टीचर्स और स्टूडेंट्स की राय?

JNU के छात्र दो हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं. इन्हीं प्रदर्शनों के चलते 11 नवंबर को होने वाला JNU का दीक्षांत समारोह वाला कार्यक्रम कैंपस में नहीं रखा गया था.  कार्यक्रम में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के साथ-साथ उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को भी पहुंचना था. तो कार्यक्रम रखा गया AICTE के ऑडिटोरियम में. ये जेएनयू के पास ही है. उपराष्ट्रपति आए, कार्यक्रम में जेएनयू की तारीफ की और लौट गए. लेकिन निशंक तीन घंटे तक ऑडिटोरियम से बाहर नहीं निकल पाए. क्योंकि रास्ता रोके थे प्रदर्शनकारी छात्र जिन्हें पुलिस किसी तरह साध रही थी. छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं? क्या है उनकी मांगें? खुद जानिए छात्रों से.

ग्राउंड रिपोर्ट: JNU में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पर क्या है टीचर्स और स्टूडेंट्स की राय?

JNU के छात्र दो हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं. इन्हीं प्रदर्शनों के चलते 11 नवंबर को होने वाला JNU का दीक्षांत समारोह वाला कार्यक्रम कैंपस में नहीं रखा गया था.  कार्यक्रम में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के साथ-साथ उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को भी पहुंचना था. तो कार्यक्रम रखा गया AICTE के ऑडिटोरियम में. ये जेएनयू के पास ही है. उपराष्ट्रपति आए, कार्यक्रम में जेएनयू की तारीफ की और लौट गए. लेकिन निशंक तीन घंटे तक ऑडिटोरियम से बाहर नहीं निकल पाए. क्योंकि रास्ता रोके थे प्रदर्शनकारी छात्र जिन्हें पुलिस किसी तरह साध रही थी. छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं? क्या है उनकी मांगें? खुद जानिए छात्रों से.
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ज़मीनी हकीकत: असम से ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए NRC 1951 के पीछे क्या पॉलिटिक्स थी?

एनआरसी की फाइनल लिस्ट सामने आने के बाद से असम सवाल पूछ रहा है कि जिनके नाम एनआरसी की लिस्ट में शामिल हैं, उन्हें अब डरने की तो ज़रूरत नहीं. या फिर जिनके नाम एनआरसी में शामिल नहीं किए गए हैं उनका क्या होगा. इनके अलावे भी कई सवाल हैं जिनका जवाब इन दिनों असम वासी और बाकी का पूरा देश ढूंढ रहा है. सभी सवालों के साथ हम पहुंचे असम यहां हमने तमाम लोगों से मिलकर पूरी प्रकिया समझने की कोशिश की. साथ ही उन लोगों की भी सुनने की कोशिश की जिनके नाम एनआरसी की लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं. ज़मीनी हकीकत के तीन एपिसोड का ये पहला पार्ट है जिसे आपको ज़रूर देखना चाहिए.

ज़मीनी हकीकत: असम से ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए NRC 1951 के पीछे क्या पॉलिटिक्स थी?

एनआरसी की फाइनल लिस्ट सामने आने के बाद से असम सवाल पूछ रहा है कि जिनके नाम एनआरसी की लिस्ट में शामिल हैं, उन्हें अब डरने की तो ज़रूरत नहीं. या फिर जिनके नाम एनआरसी में शामिल नहीं किए गए हैं उनका क्या होगा. इनके अलावे भी कई सवाल हैं जिनका जवाब इन दिनों असम वासी और बाकी का पूरा देश ढूंढ रहा है. सभी सवालों के साथ हम पहुंचे असम यहां हमने तमाम लोगों से मिलकर पूरी प्रकिया समझने की कोशिश की. साथ ही उन लोगों की भी सुनने की कोशिश की जिनके नाम एनआरसी की लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं. ज़मीनी हकीकत के तीन एपिसोड का ये पहला पार्ट है जिसे आपको ज़रूर देखना चाहिए.
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टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की बढ़ी डेट पर भरोसा किया तो बुरा झेलेंगे

टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की बढ़ी डेट पर भरोसा किया तो बुरा झेलेंगे

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की नयी तारीख आपके पास आई होगी. लेटर चला कि इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की डेट बढ़ गयी है. पहले 31 अगस्त थी. बढ़कर 30 सितम्बर हो गयी. लोग खुश हो गए. महीना ख़त्म करने के पहले झाम नहीं फैलाना पड़ेगा. सुस्ताकर-हरे होकर आराम से फ़ाइल कर सकते हैं. लोग … और पढ़ें टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की बढ़ी डेट पर भरोसा किया तो बुरा झेलेंगे

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ग्राउंड रिपोर्ट: आज़म खान, रामपुर और जौहर यूनिवर्सिटी की पूरी कहानी

साल 1994-95. रामपुर के एक सरकारी कर्मचारी ने अपने पैसे पर एक छोटी सी लाइब्रेरी खोली. नाम रखा जौहर लाइब्रेरी. आज़म खान उस समय सूबे में मंत्री थे. इस लाइब्रेरी के उद्घाटन के लिए उन्हें बुलाया गया. आज़म खान को इस छोटी सी लाइब्रेरी में अपने काम की बड़ी चीज मिल गई. उस चीज का नाम था मौलाना जौहर. कौन थे मोहम्मद अली जौहर? और रामपुर से उनका ताल्लुक क्या था? आजम खान को उनमें ऐसा क्या मिला कि उनके नाम पर यूनिवर्सिटी खड़ी कर दी. उन पर किसानों की जमीन कब्जाने का आरोप लगा और भूमाफिया घोषित कर दिया गया. देखिए आजम खान, रामपुर के नवाब मिकी मियां,  मौलाना अली जौहर और रामपुर के राजनीति की पूरी कहानी.

ग्राउंड रिपोर्ट: आज़म खान, रामपुर और जौहर यूनिवर्सिटी की पूरी कहानी

साल 1994-95. रामपुर के एक सरकारी कर्मचारी ने अपने पैसे पर एक छोटी सी लाइब्रेरी खोली. नाम रखा जौहर लाइब्रेरी. आज़म खान उस समय सूबे में मंत्री थे. इस लाइब्रेरी के उद्घाटन के लिए उन्हें बुलाया गया. आज़म खान को इस छोटी सी लाइब्रेरी में अपने काम की बड़ी चीज मिल गई. उस चीज का नाम था मौलाना जौहर. कौन थे मोहम्मद अली जौहर? और रामपुर से उनका ताल्लुक क्या था? आजम खान को उनमें ऐसा क्या मिला कि उनके नाम पर यूनिवर्सिटी खड़ी कर दी. उन पर किसानों की जमीन कब्जाने का आरोप लगा और भूमाफिया घोषित कर दिया गया. देखिए आजम खान, रामपुर के नवाब मिकी मियां,  मौलाना अली जौहर और रामपुर के राजनीति की पूरी कहानी.
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ग्राउंड रिपोर्ट : क्या खत्म होने को है आजम खान का सियासी खेल?

ग्राउंड रिपोर्ट : क्या खत्म होने को है आजम खान का सियासी खेल?

कहते हैं कि रामपुर के नवाब खुद को विपरीत से विपरीत परिस्थिति में बचाए रखने में माहिर थे. 1857 के गदर में जब कुछ अंग्रेज अपनी जान बचाने के लिए भागे तो रामपुर के नवाब युसूफ अली खान ने उन्हें ख़ुशी-ख़ुशी पनाह दी. 1857 के ग़दर की धूल जब छंटी तो रामपुर के नवाब ने … और पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट : क्या खत्म होने को है आजम खान का सियासी खेल?

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न योगी न प्रियंका, ये है सोनभद्र में 10 आदिवासियों की हत्या का पूरा सच

न योगी न प्रियंका, ये है सोनभद्र में 10 आदिवासियों की हत्या का पूरा सच

राजेश कुमार गोंड. उम्र लगभग 30 साल. घर सोनभद्र के उम्भा गांव में. लेकिन राजेश का ज़्यादातर काम था मुंबई में. मुंबई में राजेश ट्रक और ट्रेलर टाइप की बड़ी गाड़ियां चलाते थे. हर दस महीने पर ही घर आना होता था. और घर आना होता था जून और जुलाई में. साल का वो समय, … और पढ़ें न योगी न प्रियंका, ये है सोनभद्र में 10 आदिवासियों की हत्या का पूरा सच

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ज़मीनी हकीकत (पार्ट-10): मोदी सरकार की इस योजना से बैंकों को क्यों नुकसान हो रहा है?

ज़मीनी हकीकत (पार्ट-10): मोदी सरकार की इस योजना से बैंकों को क्यों नुकसान हो रहा है?

इसरावती देवी और नंदलाल विश्वकर्मा देवरिया के बिशुनपुर कलां गांव में रहते हैं. गांव देवरिया शहर से 12 किलोमीटर दूर है. घर में धान पीसने की मशीन है. नंदलाल लकड़ी का काम करते हैं. लकड़ियां लाकर फर्नीचर बनाते हैं. धान पीसने का भी काम करते हैं. बच्चों को मिलाकर कुल सात लोगों का परिवार है. … और पढ़ें ज़मीनी हकीकत (पार्ट-10): मोदी सरकार की इस योजना से बैंकों को क्यों नुकसान हो रहा है?

भैरंट

ज़मीनी हकीकत (पार्ट-9): पीएम मोदी की इस योजना का पता केंद्रीय मंत्री के गांव वालों को भी नहीं!

ज़मीनी हकीकत (पार्ट-9): पीएम मोदी की इस योजना का पता केंद्रीय मंत्री के गांव वालों को भी नहीं!

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की ज़मीनी हकीकत जानने के लिए हमने चुना बिहार के पूर्वी चंपारण जिले को. ये जगह इसलिए क्योंकि केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह पूर्वी चंपारण से सांसद हैं. 26 मई 2014 को उन्हें केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया था. क्षेत्र में इस योजना की स्थिति पर बात करने से पहले जानते हैं … और पढ़ें ज़मीनी हकीकत (पार्ट-9): पीएम मोदी की इस योजना का पता केंद्रीय मंत्री के गांव वालों को भी नहीं!