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अशोक गहलोत : एक जादूगर जिसने बाइक बेचकर चुनाव लड़ा और बना राजस्थान का मुख्यमंत्री| Part 1

मुख्यमंत्री की इस कड़ी में बात राजस्थान के उस नेता की, जो एक जादूगर था. जो संजय गांधी का करीबी था, जो राहुल-प्रियंका को जादू दिखाते हुए परिवार के करीब आया और जिसने चार हजार रुपये में बाइक बेचकर अपने सियासी करियर की शुरुआत की. हार से हुई शुरुआत केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंची. नाम है अशोक गहलोत. (भूल-चूक: इस वीडियो में 4 मिनट 40 सेकेंड पर पोकरण परमाणु विस्फोट को 1989 में हुआ बताया गया है. जबकि यह 1998 के साल में हुआ. हम अपनी इस गलती के लिए दर्शकों से माफी मांगते हैं.)

अशोक गहलोत : एक जादूगर जिसने बाइक बेचकर चुनाव लड़ा और बना राजस्थान का मुख्यमंत्री| Part 1

मुख्यमंत्री की इस कड़ी में बात राजस्थान के उस नेता की, जो एक जादूगर था. जो संजय गांधी का करीबी था, जो राहुल-प्रियंका को जादू दिखाते हुए परिवार के करीब आया और जिसने चार हजार रुपये में बाइक बेचकर अपने सियासी करियर की शुरुआत की. हार से हुई शुरुआत केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंची. नाम है अशोक गहलोत. (भूल-चूक: इस वीडियो में 4 मिनट 40 सेकेंड पर पोकरण परमाणु विस्फोट को 1989 में हुआ बताया गया है. जबकि यह 1998 के साल में हुआ. हम अपनी इस गलती के लिए दर्शकों से माफी मांगते हैं.)
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राजस्थान का वो सीएम जिसका सीधा संबंध महाराणा प्रताप से था

मार्च, 1985 का पहला सप्ताह. राजस्थान में कांग्रेस फिर से चुनाव जीत चुकी थी. सरकार बनाने की संख्या से 12 ज्यादा विधायक कांग्रेस के पास थे. मुख्यमंत्री चुनाव से 15 दिन पहले ही बदला गया था. ऐसे में नए मुख्यमंत्री को उम्मीद थी कि उनकी फिर से ताजपोशी होगी. लेकिन तभी दिल्ली से उन्हें कहा गया- आप इस्तीफा दे दीजिए. जोशी जी को टेक ओवर करना है. कौन थे ये 17 दिन के मुख्यमंत्री? पॉलिटिकल किस्से के इस एपिसोड में बात हीरालाल देवपुरा की.

राजस्थान का वो सीएम जिसका सीधा संबंध महाराणा प्रताप से था

मार्च, 1985 का पहला सप्ताह. राजस्थान में कांग्रेस फिर से चुनाव जीत चुकी थी. सरकार बनाने की संख्या से 12 ज्यादा विधायक कांग्रेस के पास थे. मुख्यमंत्री चुनाव से 15 दिन पहले ही बदला गया था. ऐसे में नए मुख्यमंत्री को उम्मीद थी कि उनकी फिर से ताजपोशी होगी. लेकिन तभी दिल्ली से उन्हें कहा गया- आप इस्तीफा दे दीजिए. जोशी जी को टेक ओवर करना है. कौन थे ये 17 दिन के मुख्यमंत्री? पॉलिटिकल किस्से के इस एपिसोड में बात हीरालाल देवपुरा की.
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शिवचरण माथुर: अशोक गहलोत के एमपी होते हुए राज्य सरकार में मंत्री बनाने वाले सीएम

आपने ससुर के सहारे दामाद की सियासी बेल चढ़ने के खूब प्रसंग सुने होंगे. पर बताइए तो, इनमें से कितने दामाद मुख्यमंत्री बने. जबकि ससुर उस पद की चाह लिए चले गए. कितने मुख्यमंत्री एक विधायक के एनकाउंटर के चलते, चलते बने? मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में कहानी राजस्थान के पूर्व सीएम शिवचरण माथुर की.

शिवचरण माथुर: अशोक गहलोत के एमपी होते हुए राज्य सरकार में मंत्री बनाने वाले सीएम

आपने ससुर के सहारे दामाद की सियासी बेल चढ़ने के खूब प्रसंग सुने होंगे. पर बताइए तो, इनमें से कितने दामाद मुख्यमंत्री बने. जबकि ससुर उस पद की चाह लिए चले गए. कितने मुख्यमंत्री एक विधायक के एनकाउंटर के चलते, चलते बने? मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में कहानी राजस्थान के पूर्व सीएम शिवचरण माथुर की.
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जगन्नाथ पहाड़िया: राजस्थान के पहले दलित मुख्यमंत्री जो बस 13 महीने सीएम रह सके

दलित समाज से आने वाला, मजदूर का बेटा, मगर पढ़ाई में तेज. नाम जगन्नाथ पहाड़िया. 1957 के साल में पहाड़िया को जवाहर लाल नेहरू से मिलवाया गया. पंडित नेहरू से परिचय करवाया गया. नौजवान देख नेहरू पूछ पड़े- कैसा चल रहा है देश? पहाड़िया ने जवाब दिया- बाकी चीजें तो अच्छी चल रही हैं लेकिन देश में दलितों को रिप्रजेंटेशन ठीक से नहीं मिल रहा. इसके बाद जो हुआ वो इतिहास में दर्ज हो गया. जानने के लिए देखिए मुख्यमंत्री का ये एपिसोड.

जगन्नाथ पहाड़िया: राजस्थान के पहले दलित मुख्यमंत्री जो बस 13 महीने सीएम रह सके

दलित समाज से आने वाला, मजदूर का बेटा, मगर पढ़ाई में तेज. नाम जगन्नाथ पहाड़िया. 1957 के साल में पहाड़िया को जवाहर लाल नेहरू से मिलवाया गया. पंडित नेहरू से परिचय करवाया गया. नौजवान देख नेहरू पूछ पड़े- कैसा चल रहा है देश? पहाड़िया ने जवाब दिया- बाकी चीजें तो अच्छी चल रही हैं लेकिन देश में दलितों को रिप्रजेंटेशन ठीक से नहीं मिल रहा. इसके बाद जो हुआ वो इतिहास में दर्ज हो गया. जानने के लिए देखिए मुख्यमंत्री का ये एपिसोड.
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कांस्टेबल से राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने वाले भैरो सिंह शेखावत की कहानी। Part 1

मुख्यमंत्री की इस कड़ी में बात राजस्थान के उस नेता की, जिन्हें प्रदेश के लोग बाबोसा कहते थे. जिसने सिनेमाघर में मारपीट के चलते पुलिस की नौकरी गंवा दी. जो नौकरी गंवाने के बाद गांव में खेती करने लगा. जिसके बड़े भाई को चुनाव लड़ने का ऑफर आया और बड़े भाई ने छोटे भाई को टिकट दिला दिया. जो चुनाव लड़ने के लिए बीवी से 10 रुपये का नोट लेकर घर से निकल गया और जीत गया. 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनने की बारी आई तो ये नेता राजस्थान का मुख्यमंत्री बन गया. नाम था भैरो सिंह शेखावत.

कांस्टेबल से राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने वाले भैरो सिंह शेखावत की कहानी। Part 1

मुख्यमंत्री की इस कड़ी में बात राजस्थान के उस नेता की, जिन्हें प्रदेश के लोग बाबोसा कहते थे. जिसने सिनेमाघर में मारपीट के चलते पुलिस की नौकरी गंवा दी. जो नौकरी गंवाने के बाद गांव में खेती करने लगा. जिसके बड़े भाई को चुनाव लड़ने का ऑफर आया और बड़े भाई ने छोटे भाई को टिकट दिला दिया. जो चुनाव लड़ने के लिए बीवी से 10 रुपये का नोट लेकर घर से निकल गया और जीत गया. 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनने की बारी आई तो ये नेता राजस्थान का मुख्यमंत्री बन गया. नाम था भैरो सिंह शेखावत.
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बरकतुल्ला खान: राजस्थान के इकलौते मुस्लिम मुख्यमंत्री जिनकी लव स्टोरी भी सुपरहिट थी

1971 की जुलाई में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल लंदन गया था. उसमें एक आदमी था. प्यारे मियां. उन्हें दिल्ली से एक फोन पहुंचा. मैडम की आवाज आई. वापस लौट आओ. तुम्हें राजस्थान का सीएम बनाया गया है. आकर शपथ लो. प्यारे मियां ने बोले- जी भाभी. कौन थे ये प्यारे मियां और मैडम? और क्या है इनके सीएम बनने की कहानी. जानने के लिए देखिए मुख्यमंत्री का ये एपिसोड.

बरकतुल्ला खान: राजस्थान के इकलौते मुस्लिम मुख्यमंत्री जिनकी लव स्टोरी भी सुपरहिट थी

1971 की जुलाई में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल लंदन गया था. उसमें एक आदमी था. प्यारे मियां. उन्हें दिल्ली से एक फोन पहुंचा. मैडम की आवाज आई. वापस लौट आओ. तुम्हें राजस्थान का सीएम बनाया गया है. आकर शपथ लो. प्यारे मियां ने बोले- जी भाभी. कौन थे ये प्यारे मियां और मैडम? और क्या है इनके सीएम बनने की कहानी. जानने के लिए देखिए मुख्यमंत्री का ये एपिसोड.
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टीकाराम पालीवाल: जो मुख्यमंत्री बनने के बाद उपमुख्यमंत्री बने

देश में पहली बार चुनाव हुए. 1952 में. लोकसभा और विधानसभा के लिए. राजस्थान में जब इसके नतीजे आए तो मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास दोनों सीटों से हार गए. व्यास को शास्त्री के बाद राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया गया था. उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस राज्य में पहले चुनाव में उतरी थी. चुनाव पहले की व्यास कैबिनेट में पालीवाल सिर्फ मंत्री भर नहीं थे. डिप्टी सीएम भी बनाए दिए गए थे. इसलिए जब सीएम साहब यानी व्यास हारे तो उनके डिप्टी यानी टीकाराम को सीएम बना दिया गया. वैसे भी इन चुनावों में टीका बीस साबित हुए थे. उनके पॉलिटिकल बॉस व्यास जहां दोनों सीटें हारे थे, वहीं टीकाराम महवा (महुआ बोला जाता है) और मलारना चौर, दोनों जगहों से जीते थे. फिर उन्हें डिप्टी सीएम क्यों बनना पड़ा? मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में कहानी टीकाराम पालीवाल की.

टीकाराम पालीवाल: जो मुख्यमंत्री बनने के बाद उपमुख्यमंत्री बने

देश में पहली बार चुनाव हुए. 1952 में. लोकसभा और विधानसभा के लिए. राजस्थान में जब इसके नतीजे आए तो मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास दोनों सीटों से हार गए. व्यास को शास्त्री के बाद राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया गया था. उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस राज्य में पहले चुनाव में उतरी थी. चुनाव पहले की व्यास कैबिनेट में पालीवाल सिर्फ मंत्री भर नहीं थे. डिप्टी सीएम भी बनाए दिए गए थे. इसलिए जब सीएम साहब यानी व्यास हारे तो उनके डिप्टी यानी टीकाराम को सीएम बना दिया गया. वैसे भी इन चुनावों में टीका बीस साबित हुए थे. उनके पॉलिटिकल बॉस व्यास जहां दोनों सीटें हारे थे, वहीं टीकाराम महवा (महुआ बोला जाता है) और मलारना चौर, दोनों जगहों से जीते थे. फिर उन्हें डिप्टी सीएम क्यों बनना पड़ा? मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में कहानी टीकाराम पालीवाल की.
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जय नारायण व्यास: नेहरू के खास सीएम जिनकी कुर्सी नेहरू भी न बचा पाए

बात राजस्थान के उस मुख्यमंत्री की, जिसकी सदारत में पार्टी तो जीत गई, लेकिन वो खुद दो जगहों से चुनाव हार गया. वो मुख्यमंत्री, जिसकी कुर्सी नेहरू भी नहीं बचा पाए और जिसे हराने में उसके दो करीबियों की ही भूमिका थी. नाम था जयनारायण व्यास? देखिए मुख्यमंत्री का ये एपिसोड.

जय नारायण व्यास: नेहरू के खास सीएम जिनकी कुर्सी नेहरू भी न बचा पाए

बात राजस्थान के उस मुख्यमंत्री की, जिसकी सदारत में पार्टी तो जीत गई, लेकिन वो खुद दो जगहों से चुनाव हार गया. वो मुख्यमंत्री, जिसकी कुर्सी नेहरू भी नहीं बचा पाए और जिसे हराने में उसके दो करीबियों की ही भूमिका थी. नाम था जयनारायण व्यास? देखिए मुख्यमंत्री का ये एपिसोड.
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कदांबी शेषाटार वेंकटाचार: IAS होते हुए राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने वाले नेता की कहानी

ये कहानी है राजस्थान के दूसरे मुख्यमंत्री कदांबी शेषाटार वेंकटाचार की, जो थे तो सिविल सर्वेंट. मगर एक संवैधानिक संकट के चलते जिन्हें मुख्यमंत्री बना दिया गया. ये देश में आईएएस के पद पर रहते हुए वर्किंग सीएम बनने का इकलौता मौका है. मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में देखिए उनके आईएएस से मुख्यमंत्री और फिर दोबारा सिविल सर्वेंट बनने का मजेदार सफर.

कदांबी शेषाटार वेंकटाचार: IAS होते हुए राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने वाले नेता की कहानी

ये कहानी है राजस्थान के दूसरे मुख्यमंत्री कदांबी शेषाटार वेंकटाचार की, जो थे तो सिविल सर्वेंट. मगर एक संवैधानिक संकट के चलते जिन्हें मुख्यमंत्री बना दिया गया. ये देश में आईएएस के पद पर रहते हुए वर्किंग सीएम बनने का इकलौता मौका है. मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में देखिए उनके आईएएस से मुख्यमंत्री और फिर दोबारा सिविल सर्वेंट बनने का मजेदार सफर.
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वनस्थली विद्यापीठ के संस्थापक और राजस्थान के पहले सीएम हीरा लाल शास्त्री की कहानी

जयपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर एक कस्बा है जोबनेर. यहीं के एक किसान परिवार में 24 नवंबर 1899 को पैदा हुए हीरालाल जोशी. मां बचपन में गुजर गई. पढ़ने लिखने में हीरा हीरा जैसे ही निकले. जयपुर स्टेट टॉप किया. 21 साल की उम्र में संस्कृत में शास्त्री की उपाधि भी हासिल कर ली. अध्यापकी भी चल रही थी. अब नया नाम हो गया. हीरालाल शास्त्री. आगे चलकर यही हीरालाल शास्त्री राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री बने. मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में देखिए कैसे उनकी बेटी की मौत ने देश की ख्यात यूनिवर्सिटीज में से एक वनस्थली विद्यापीठ को जन्म दिया. आइए देखते हैं सवाईमाधोपुर से सांसद रहे हीरालाल शास्त्री की कहानी.

वनस्थली विद्यापीठ के संस्थापक और राजस्थान के पहले सीएम हीरा लाल शास्त्री की कहानी

जयपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर एक कस्बा है जोबनेर. यहीं के एक किसान परिवार में 24 नवंबर 1899 को पैदा हुए हीरालाल जोशी. मां बचपन में गुजर गई. पढ़ने लिखने में हीरा हीरा जैसे ही निकले. जयपुर स्टेट टॉप किया. 21 साल की उम्र में संस्कृत में शास्त्री की उपाधि भी हासिल कर ली. अध्यापकी भी चल रही थी. अब नया नाम हो गया. हीरालाल शास्त्री. आगे चलकर यही हीरालाल शास्त्री राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री बने. मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में देखिए कैसे उनकी बेटी की मौत ने देश की ख्यात यूनिवर्सिटीज में से एक वनस्थली विद्यापीठ को जन्म दिया. आइए देखते हैं सवाईमाधोपुर से सांसद रहे हीरालाल शास्त्री की कहानी.