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तहखाना

बर्मा में पैदा हुआ ये आदमी दो बार गुजरात का मुख्यमंत्री बन गया

बर्मा में पैदा हुआ ये आदमी दो बार गुजरात का मुख्यमंत्री बन गया

पाटीदार आंदोलन, निकाय चुनावों में बीजेपी का खराब प्रदर्शन और फिर गुजरात के ऊना से निकली दलित आंदोलन की चिंगारी ने आनंदीबेन पटेल की सरकार को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया था. बेटी-दामाद को राजनीतिक रसूख के जरिए मदद पहुंचाने के आरोप ने आनंदीबेन पटेल की मुसीबतों की आग में घी का … और पढ़ें बर्मा में पैदा हुआ ये आदमी दो बार गुजरात का मुख्यमंत्री बन गया

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गुजरात का वो मुख्यमंत्री जो भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गया

गुजरात का वो मुख्यमंत्री जो भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गया

13 अप्रैल 1919 की तारीख किसी भी हिन्दुस्तानी को भूलनी नहीं चाहिए. जगह थी अमृतसर का जलियांवाला बाग़. वैशाखी का दिन था. करीब 20 से 25,000 लोगों की भीड़ बाग़ में जुटी हुई थी. यहां 4.30 बजे से एक जलसा शुरू होने वाला था. जलसा शुरू होने के कुछ समय पहले कर्नल रेगीनाल्ड डायर, सिख, … और पढ़ें गुजरात का वो मुख्यमंत्री जो भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गया

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सुषमा स्वराज: जिन्हें मदन लाल खुराना और साहिब सिंह वर्मा की लड़ाई में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया गया

10 अक्टूबर 1998. राजधानी में उस दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के इस्तीफे की खबरें तैर रही थीं. सुबह के वक्त पंत मार्ग स्थित दिल्ली बीजेपी दफ्तर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शशिकांत कुशाभाऊ ठाकरे लगातार बैठकें ले रहे थे. प्याज लगातार महंगा था. खुराना गुट का लगातार दबाव था. इन सबके मद्देनजर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर मीटिंग शुरू हुई. इसमें मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा को तलब किया गया. कमरे में प्रधानमंत्री के अलावा, गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष ठाकरे, राष्ट्रीय महासचिव वैंकेया नायडू और प्रमोद महाजन मौजूद थे. तीन घंटे तक चर्चा चली. आखिरी में दो निष्कर्ष निकले. 1 साहिब सिंह वर्मा को जाना होगा. 2 शीला दीक्षित का मुकाबला करने के लिए भाजपा अपनी सर्वश्रेष्ठ महिला चेहरा उतारेगी. ये चेहरा थीं, सूचना प्रसारण मंत्री और साउथ दिल्ली की सांसद सुषमा स्वराज.

सुषमा स्वराज: जिन्हें मदन लाल खुराना और साहिब सिंह वर्मा की लड़ाई में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया गया

10 अक्टूबर 1998. राजधानी में उस दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के इस्तीफे की खबरें तैर रही थीं. सुबह के वक्त पंत मार्ग स्थित दिल्ली बीजेपी दफ्तर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शशिकांत कुशाभाऊ ठाकरे लगातार बैठकें ले रहे थे. प्याज लगातार महंगा था. खुराना गुट का लगातार दबाव था. इन सबके मद्देनजर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर मीटिंग शुरू हुई. इसमें मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा को तलब किया गया. कमरे में प्रधानमंत्री के अलावा, गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष ठाकरे, राष्ट्रीय महासचिव वैंकेया नायडू और प्रमोद महाजन मौजूद थे. तीन घंटे तक चर्चा चली. आखिरी में दो निष्कर्ष निकले. 1 साहिब सिंह वर्मा को जाना होगा. 2 शीला दीक्षित का मुकाबला करने के लिए भाजपा अपनी सर्वश्रेष्ठ महिला चेहरा उतारेगी. ये चेहरा थीं, सूचना प्रसारण मंत्री और साउथ दिल्ली की सांसद सुषमा स्वराज.
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साहिब सिंह वर्मा: दिल्ली का वो मुख्यमंत्री जिसे प्याज की बढ़ती कीमतों की वजह से कुर्सी छोड़नी पड़ी

तारीख - 12 अक्टूबर 1998. पता  - 9 शामनाथ मार्ग. नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री का आवास. घर के बाहर गुस्साए किसानों की भीड़ है. वहीं किनारे एक डीटीसी बस खड़ी है. नारेबाजी के बीच घर से एक शख्स धोती कुर्ता पहने निकलता है. बस में बैठता है और शालीमार बाग की ओर चल पड़ता है. अपने घर की तरफ. ये दिल्ली का मुख्यमंत्री था. दिल्ली में 50 दिन बाद चुनाव थे. दिल्ली में प्याज महंगा था. और भाजपा के शीर्ष पुरुषों को लगा कि इस आदमी की रुखसती से सत्ता की रुखसती बच सकती है. दी लल्लनटॉप के स्पेशल सीरीज 'मुख्यमंत्री' के इस एपिसोड में देखिए कहानी साहिब सिंह वर्मा की.

साहिब सिंह वर्मा: दिल्ली का वो मुख्यमंत्री जिसे प्याज की बढ़ती कीमतों की वजह से कुर्सी छोड़नी पड़ी

तारीख - 12 अक्टूबर 1998. पता  - 9 शामनाथ मार्ग. नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री का आवास. घर के बाहर गुस्साए किसानों की भीड़ है. वहीं किनारे एक डीटीसी बस खड़ी है. नारेबाजी के बीच घर से एक शख्स धोती कुर्ता पहने निकलता है. बस में बैठता है और शालीमार बाग की ओर चल पड़ता है. अपने घर की तरफ. ये दिल्ली का मुख्यमंत्री था. दिल्ली में 50 दिन बाद चुनाव थे. दिल्ली में प्याज महंगा था. और भाजपा के शीर्ष पुरुषों को लगा कि इस आदमी की रुखसती से सत्ता की रुखसती बच सकती है. दी लल्लनटॉप के स्पेशल सीरीज 'मुख्यमंत्री' के इस एपिसोड में देखिए कहानी साहिब सिंह वर्मा की.
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मुख्यमंत्री: पाकिस्तान के ल्यालपुर से आया शरणार्थी, जो दिल्ली का मुख्यमंत्री बना

एक छात्रसंघ का महामंत्री जो अध्यक्ष से भिड़ गया. क्योंकि वो नहीं चाहता था कि छात्रसंघ के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू आएं. वो चाहता था कि कार्यक्रम में बलरामपुर के युवा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी आएं. उसी महामंत्री ने आगे चलकर इतिहास रचा. क्योंकि वो दिल्ली का पहला मुख्यमंत्री था. इतिहास, जो जुड़ा था पाकिस्तान के ल्यालपुर से. जो उसे बंटवारे के बाद अपने पिता के साथ छोड़ना पड़ा था. और आगे छोड़ना पड़ा, मुख्यमंत्री का पद, केंद्रीय मंत्री का पद और दो-दो बार अपनी पार्टी भी. दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों के स्पेशल सीरीज 'मुख्यमंत्री' में देखिए कहानी, मदन लाल खुराना की.

मुख्यमंत्री: पाकिस्तान के ल्यालपुर से आया शरणार्थी, जो दिल्ली का मुख्यमंत्री बना

एक छात्रसंघ का महामंत्री जो अध्यक्ष से भिड़ गया. क्योंकि वो नहीं चाहता था कि छात्रसंघ के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू आएं. वो चाहता था कि कार्यक्रम में बलरामपुर के युवा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी आएं. उसी महामंत्री ने आगे चलकर इतिहास रचा. क्योंकि वो दिल्ली का पहला मुख्यमंत्री था. इतिहास, जो जुड़ा था पाकिस्तान के ल्यालपुर से. जो उसे बंटवारे के बाद अपने पिता के साथ छोड़ना पड़ा था. और आगे छोड़ना पड़ा, मुख्यमंत्री का पद, केंद्रीय मंत्री का पद और दो-दो बार अपनी पार्टी भी. दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों के स्पेशल सीरीज 'मुख्यमंत्री' में देखिए कहानी, मदन लाल खुराना की.
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नरेंद्र मोदी की अनसुनी कहानीः कैसे बीजेपी के हर दिग्गज का तख़्तापलट करके वो पीएम बने

नरेंद्र मोदी की अनसुनी कहानीः कैसे बीजेपी के हर दिग्गज का तख़्तापलट करके वो पीएम बने

1 अक्टूबर 2001. नरेंद्र मोदी किसी टीवी पत्रकार के दाह संस्कार में हिस्सा ले रहे थे. ठीक उसी समय उनके पास प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया. दूसरी तरफ अटल बिहारी वाजपेयी थे. उन्होंने मोदी को शाम को आकर उनसे मिलने का फरमान सुनाया. शाम को तय समय पर मोदी उनसे मिलने पहुंचे. इस मुलाकात में … और पढ़ें नरेंद्र मोदी की अनसुनी कहानीः कैसे बीजेपी के हर दिग्गज का तख़्तापलट करके वो पीएम बने

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योगी आदित्यनाथ को रेपिस्ट, आरएसएस को आतंकी संगठन कहा, सिंगर हार्ड कौर के खिलाफ FIR

योगी आदित्यनाथ को रेपिस्ट, आरएसएस को आतंकी संगठन कहा, सिंगर हार्ड कौर के खिलाफ FIR

हार्ड कौर पर देशद्रोह का मुकदमा लग गया है, वही हार्ड कौर तरण कौर ढिल्लौ के नाम से भी जाना जाता है. ये हिप हॉप सिंगर और रैपर हैं. फिलहाल चर्चा में हैं. कारण ये है कि इन्होंने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ सोशल मीडिया … और पढ़ें योगी आदित्यनाथ को रेपिस्ट, आरएसएस को आतंकी संगठन कहा, सिंगर हार्ड कौर के खिलाफ FIR

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जज की नौकरी छोड़कर हिमाचल प्रदेश बनाने वाले नेता की कहानी

सौरभ द्विवेदी अपने लल्लनटॉप अंदाज में बता रहे हैं हिमाचल के सबसे बड़े नेता की कहानी. अच्छे खासे करियर को छोड़कर तीन दशकों तक संघर्ष करने वाले यशवंत सिंह परमार की कहानी. आप भी सुनिए.

जज की नौकरी छोड़कर हिमाचल प्रदेश बनाने वाले नेता की कहानी

सौरभ द्विवेदी अपने लल्लनटॉप अंदाज में बता रहे हैं हिमाचल के सबसे बड़े नेता की कहानी. अच्छे खासे करियर को छोड़कर तीन दशकों तक संघर्ष करने वाले यशवंत सिंह परमार की कहानी. आप भी सुनिए.
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कैसे वसुंधरा राजे ने राजस्थान बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं को ठिकाने लगाया| Part 2

मुख्यमंत्री की पिछली कड़ी में आपने जाना कि किस तरह एक चुनावी हार ने वसुंधरा राजे को मायके से ससुराल जाने पर मजबूर कर दिया. किस तरह भैरो सिंह शेखावत के कहने पर केंद्र से राज्य की राजनीति में लौटी. और महज एक साल के भीतर मुख्यमंत्री पद का ताज उनके सिर पर था. वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री बन तो गई थीं लेकिन पार्टी के भीतर उनके खिलाफ विद्रोह अभी जारी था. आगे की कहानी में आप जानेंगे कि किस तरह उन्होंने पार्टी में अपने विरोधियों को किनारे लगाया. कहानी आलाकमान के साथ चली लंबी अदावत की भी.

कैसे वसुंधरा राजे ने राजस्थान बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं को ठिकाने लगाया| Part 2

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वसुंधरा राजे सिंधिया को धौलपुर क्यों लौटना पड़ा?| Part 1

1952 से 2002 तक भैरो सिंह शेखावत राजस्थान में जनसंघ और बीजेपी के सबसे बड़े नेता हुआ करते थे. 2002 में वो उपराष्ट्रपति बने तो बीजेपी के कई नेताओं के लिए मौका आया. दिल्ली में वाजपेयी ने राजस्थान के पार्टी अध्यक्ष के बारे में भैरों सिंह शेखावत से पूछा. कुछ नामों पर चर्चा हुई. फिर शेखावत ने एक नाम लिया तो अटल चौंक गए. ये नाम अटल सरकार में मंत्री और राज्य की सियासत से सिरे से कटी वसुंधरा राजे का था. यहां से शुरू होती है वसुंधरा की राजनीतिक यात्रा. कहां तक चलती है चलिए जानते हैं.

वसुंधरा राजे सिंधिया को धौलपुर क्यों लौटना पड़ा?| Part 1

1952 से 2002 तक भैरो सिंह शेखावत राजस्थान में जनसंघ और बीजेपी के सबसे बड़े नेता हुआ करते थे. 2002 में वो उपराष्ट्रपति बने तो बीजेपी के कई नेताओं के लिए मौका आया. दिल्ली में वाजपेयी ने राजस्थान के पार्टी अध्यक्ष के बारे में भैरों सिंह शेखावत से पूछा. कुछ नामों पर चर्चा हुई. फिर शेखावत ने एक नाम लिया तो अटल चौंक गए. ये नाम अटल सरकार में मंत्री और राज्य की सियासत से सिरे से कटी वसुंधरा राजे का था. यहां से शुरू होती है वसुंधरा की राजनीतिक यात्रा. कहां तक चलती है चलिए जानते हैं.