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दीप नारायण सिंह: रेलवे स्टेशन पर बम नहीं फटता तो ये नेता बिहार का मुख्यमंत्री होता

दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों की खास सीरीज 'मुख्यमंत्री' में आज हम आपको सुनाएंगे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्मे स्कूल इंस्पेक्टर की कहानी. जिसने गांधीजी के सविनय अवज्ञा आंदोलन के चलते अपनी नौकरी छोड़ दी और नेता बन गया. आजादी के बाद बिहार में सरकार बनी तो बिजली और सिंचाई मंत्रालय का जिम्मा संभाला और जब बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह का निधन हुआ तो बना 'मुख्यमंत्री'. पॉलिटिकल किस्सों के इस एपिसोड में देखिए 17 दिनों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री रहे दीप नारायण सिंह की कहानी.

दीप नारायण सिंह: रेलवे स्टेशन पर बम नहीं फटता तो ये नेता बिहार का मुख्यमंत्री होता

दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों की खास सीरीज 'मुख्यमंत्री' में आज हम आपको सुनाएंगे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्मे स्कूल इंस्पेक्टर की कहानी. जिसने गांधीजी के सविनय अवज्ञा आंदोलन के चलते अपनी नौकरी छोड़ दी और नेता बन गया. आजादी के बाद बिहार में सरकार बनी तो बिजली और सिंचाई मंत्रालय का जिम्मा संभाला और जब बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह का निधन हुआ तो बना 'मुख्यमंत्री'. पॉलिटिकल किस्सों के इस एपिसोड में देखिए 17 दिनों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री रहे दीप नारायण सिंह की कहानी.
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बिहार का वो मुख्यमंत्री जो बैद्यनाथ मंदिर की ओर चल पड़ा तो देवघर के पंडों में हड़कंप मच गया

मुख्यमंत्री. दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों की खास सीरीज.जिसमें आज बात होगी उस लड़के की जिसके शहर में दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी आया तो उसने नदी की तरफ वाली खिड़की भी नहीं खोली. फिर उसी आदमी के वंशजों की हुकूमत से लड़ते हुए जेल गया. नेता बना. गांधी दूसरे खेमे के साथ थे, फिर भी बिहार का पहला प्रधानमंत्री बना. आज़ादी के बाद पटेल और नेहरू दोनों को साधा और जब मौत हुई, तिजारी खुली तो एक जरूरी राज़ खुला. मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में हम आपको सुना रहे हैं बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के पॉलिटिकल किस्से.

बिहार का वो मुख्यमंत्री जो बैद्यनाथ मंदिर की ओर चल पड़ा तो देवघर के पंडों में हड़कंप मच गया

मुख्यमंत्री. दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों की खास सीरीज.जिसमें आज बात होगी उस लड़के की जिसके शहर में दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी आया तो उसने नदी की तरफ वाली खिड़की भी नहीं खोली. फिर उसी आदमी के वंशजों की हुकूमत से लड़ते हुए जेल गया. नेता बना. गांधी दूसरे खेमे के साथ थे, फिर भी बिहार का पहला प्रधानमंत्री बना. आज़ादी के बाद पटेल और नेहरू दोनों को साधा और जब मौत हुई, तिजारी खुली तो एक जरूरी राज़ खुला. मुख्यमंत्री के इस एपिसोड में हम आपको सुना रहे हैं बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के पॉलिटिकल किस्से.
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श्रीकृष्ण सिंह: बिहार का वो मुख्यमंत्री, जिसकी कभी डॉ. राजेंद्र प्रसाद तो कभी नेहरू से ठनी

मुख्यमंत्री. दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों की खास सीरीज. इस एपिसोड में हम आपको बताएंगे बिहार के पहले मुख्यमंत्री की कहानी. ये कहानी उस लड़के की है,  जिसने अपने हॉस्टल की खिड़की इसलिए नहीं खोली कि कहीं पटना दौरे पर आए जॉर्ज पंचम न दिख जाएं. कहानी उस नेता की जिस पर नेहरू और पटेल दोनों नेताओं के व्यक्तित्व का प्रभाव था. ये कहानी है बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे श्रीकृष्ण सिंह की. देखिए मुख्यमंत्री सीरीज का ये एपिसोड.

श्रीकृष्ण सिंह: बिहार का वो मुख्यमंत्री, जिसकी कभी डॉ. राजेंद्र प्रसाद तो कभी नेहरू से ठनी

मुख्यमंत्री. दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों की खास सीरीज. इस एपिसोड में हम आपको बताएंगे बिहार के पहले मुख्यमंत्री की कहानी. ये कहानी उस लड़के की है,  जिसने अपने हॉस्टल की खिड़की इसलिए नहीं खोली कि कहीं पटना दौरे पर आए जॉर्ज पंचम न दिख जाएं. कहानी उस नेता की जिस पर नेहरू और पटेल दोनों नेताओं के व्यक्तित्व का प्रभाव था. ये कहानी है बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे श्रीकृष्ण सिंह की. देखिए मुख्यमंत्री सीरीज का ये एपिसोड.
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गांधी जी का डॉक्टर कैसे बना गुजरात का पहला मुख्यमंत्री

गांधी जी का डॉक्टर कैसे बना गुजरात का पहला मुख्यमंत्री

2 अक्टूबर 1956, गांधी जयंती के मौके पर अहमदाबाद में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सभा थी. गांधी जी की याद में रखी गई यह सभा उम्मीद से उलट राजनीतिक चौसर में बदल गई. यह चाचा बनाम चाचा का दिलचस्प मुकाबला था. अहमदाबाद में जवाहर लाल नेहरू के समानांतर एक और सभा का आयोजन हो … और पढ़ें गांधी जी का डॉक्टर कैसे बना गुजरात का पहला मुख्यमंत्री

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दांवपेचों के जादूगर मोदी: पीएम की कुर्सी तक पहुंचने के लिए कैसे बीजेपी के हर दिग्गज का तख़्तापलटा

दांवपेचों के जादूगर मोदी: पीएम की कुर्सी तक पहुंचने के लिए कैसे बीजेपी के हर दिग्गज का तख़्तापलटा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. आज 17 सितंबर 2020 को उनका 71वां जन्मदिन है. राजनीति में मोदी का सफ़र तमाम उतार-चढ़ावों से गुजरा है. बहुत से लोगों को ये जिज्ञासा रहती है कि आखिर बीजेपी और संघ का एक आम कार्यकर्ता पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक कैसे पहुंचा. इसके पीछे की कहानी … और पढ़ें दांवपेचों के जादूगर मोदी: पीएम की कुर्सी तक पहुंचने के लिए कैसे बीजेपी के हर दिग्गज का तख़्तापलटा

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बर्मा में पैदा हुआ ये आदमी दो बार गुजरात का मुख्यमंत्री बन गया

बर्मा में पैदा हुआ ये आदमी दो बार गुजरात का मुख्यमंत्री बन गया

पाटीदार आंदोलन, निकाय चुनावों में बीजेपी का खराब प्रदर्शन और फिर गुजरात के ऊना से निकली दलित आंदोलन की चिंगारी ने आनंदीबेन पटेल की सरकार को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया था. बेटी-दामाद को राजनीतिक रसूख के जरिए मदद पहुंचाने के आरोप ने आनंदीबेन पटेल की मुसीबतों की आग में घी का … और पढ़ें बर्मा में पैदा हुआ ये आदमी दो बार गुजरात का मुख्यमंत्री बन गया

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गुजरात का वो मुख्यमंत्री जो भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गया

गुजरात का वो मुख्यमंत्री जो भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गया

13 अप्रैल 1919 की तारीख किसी भी हिन्दुस्तानी को भूलनी नहीं चाहिए. जगह थी अमृतसर का जलियांवाला बाग़. वैशाखी का दिन था. करीब 20 से 25,000 लोगों की भीड़ बाग़ में जुटी हुई थी. यहां 4.30 बजे से एक जलसा शुरू होने वाला था. जलसा शुरू होने के कुछ समय पहले कर्नल रेगीनाल्ड डायर, सिख, … और पढ़ें गुजरात का वो मुख्यमंत्री जो भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गया

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सुषमा स्वराज: जिन्हें मदन लाल खुराना और साहिब सिंह वर्मा की लड़ाई में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया गया

10 अक्टूबर 1998. राजधानी में उस दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के इस्तीफे की खबरें तैर रही थीं. सुबह के वक्त पंत मार्ग स्थित दिल्ली बीजेपी दफ्तर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शशिकांत कुशाभाऊ ठाकरे लगातार बैठकें ले रहे थे. प्याज लगातार महंगा था. खुराना गुट का लगातार दबाव था. इन सबके मद्देनजर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर मीटिंग शुरू हुई. इसमें मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा को तलब किया गया. कमरे में प्रधानमंत्री के अलावा, गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष ठाकरे, राष्ट्रीय महासचिव वैंकेया नायडू और प्रमोद महाजन मौजूद थे. तीन घंटे तक चर्चा चली. आखिरी में दो निष्कर्ष निकले. 1 साहिब सिंह वर्मा को जाना होगा. 2 शीला दीक्षित का मुकाबला करने के लिए भाजपा अपनी सर्वश्रेष्ठ महिला चेहरा उतारेगी. ये चेहरा थीं, सूचना प्रसारण मंत्री और साउथ दिल्ली की सांसद सुषमा स्वराज.

सुषमा स्वराज: जिन्हें मदन लाल खुराना और साहिब सिंह वर्मा की लड़ाई में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया गया

10 अक्टूबर 1998. राजधानी में उस दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के इस्तीफे की खबरें तैर रही थीं. सुबह के वक्त पंत मार्ग स्थित दिल्ली बीजेपी दफ्तर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शशिकांत कुशाभाऊ ठाकरे लगातार बैठकें ले रहे थे. प्याज लगातार महंगा था. खुराना गुट का लगातार दबाव था. इन सबके मद्देनजर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर मीटिंग शुरू हुई. इसमें मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा को तलब किया गया. कमरे में प्रधानमंत्री के अलावा, गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष ठाकरे, राष्ट्रीय महासचिव वैंकेया नायडू और प्रमोद महाजन मौजूद थे. तीन घंटे तक चर्चा चली. आखिरी में दो निष्कर्ष निकले. 1 साहिब सिंह वर्मा को जाना होगा. 2 शीला दीक्षित का मुकाबला करने के लिए भाजपा अपनी सर्वश्रेष्ठ महिला चेहरा उतारेगी. ये चेहरा थीं, सूचना प्रसारण मंत्री और साउथ दिल्ली की सांसद सुषमा स्वराज.
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साहिब सिंह वर्मा: दिल्ली का वो मुख्यमंत्री जिसे प्याज की बढ़ती कीमतों की वजह से कुर्सी छोड़नी पड़ी

तारीख - 12 अक्टूबर 1998. पता  - 9 शामनाथ मार्ग. नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री का आवास. घर के बाहर गुस्साए किसानों की भीड़ है. वहीं किनारे एक डीटीसी बस खड़ी है. नारेबाजी के बीच घर से एक शख्स धोती कुर्ता पहने निकलता है. बस में बैठता है और शालीमार बाग की ओर चल पड़ता है. अपने घर की तरफ. ये दिल्ली का मुख्यमंत्री था. दिल्ली में 50 दिन बाद चुनाव थे. दिल्ली में प्याज महंगा था. और भाजपा के शीर्ष पुरुषों को लगा कि इस आदमी की रुखसती से सत्ता की रुखसती बच सकती है. दी लल्लनटॉप के स्पेशल सीरीज 'मुख्यमंत्री' के इस एपिसोड में देखिए कहानी साहिब सिंह वर्मा की.

साहिब सिंह वर्मा: दिल्ली का वो मुख्यमंत्री जिसे प्याज की बढ़ती कीमतों की वजह से कुर्सी छोड़नी पड़ी

तारीख - 12 अक्टूबर 1998. पता  - 9 शामनाथ मार्ग. नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री का आवास. घर के बाहर गुस्साए किसानों की भीड़ है. वहीं किनारे एक डीटीसी बस खड़ी है. नारेबाजी के बीच घर से एक शख्स धोती कुर्ता पहने निकलता है. बस में बैठता है और शालीमार बाग की ओर चल पड़ता है. अपने घर की तरफ. ये दिल्ली का मुख्यमंत्री था. दिल्ली में 50 दिन बाद चुनाव थे. दिल्ली में प्याज महंगा था. और भाजपा के शीर्ष पुरुषों को लगा कि इस आदमी की रुखसती से सत्ता की रुखसती बच सकती है. दी लल्लनटॉप के स्पेशल सीरीज 'मुख्यमंत्री' के इस एपिसोड में देखिए कहानी साहिब सिंह वर्मा की.
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मुख्यमंत्री: पाकिस्तान के ल्यालपुर से आया शरणार्थी, जो दिल्ली का मुख्यमंत्री बना

एक छात्रसंघ का महामंत्री जो अध्यक्ष से भिड़ गया. क्योंकि वो नहीं चाहता था कि छात्रसंघ के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू आएं. वो चाहता था कि कार्यक्रम में बलरामपुर के युवा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी आएं. उसी महामंत्री ने आगे चलकर इतिहास रचा. क्योंकि वो दिल्ली का पहला मुख्यमंत्री था. इतिहास, जो जुड़ा था पाकिस्तान के ल्यालपुर से. जो उसे बंटवारे के बाद अपने पिता के साथ छोड़ना पड़ा था. और आगे छोड़ना पड़ा, मुख्यमंत्री का पद, केंद्रीय मंत्री का पद और दो-दो बार अपनी पार्टी भी. दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों के स्पेशल सीरीज 'मुख्यमंत्री' में देखिए कहानी, मदन लाल खुराना की.

मुख्यमंत्री: पाकिस्तान के ल्यालपुर से आया शरणार्थी, जो दिल्ली का मुख्यमंत्री बना

एक छात्रसंघ का महामंत्री जो अध्यक्ष से भिड़ गया. क्योंकि वो नहीं चाहता था कि छात्रसंघ के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू आएं. वो चाहता था कि कार्यक्रम में बलरामपुर के युवा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी आएं. उसी महामंत्री ने आगे चलकर इतिहास रचा. क्योंकि वो दिल्ली का पहला मुख्यमंत्री था. इतिहास, जो जुड़ा था पाकिस्तान के ल्यालपुर से. जो उसे बंटवारे के बाद अपने पिता के साथ छोड़ना पड़ा था. और आगे छोड़ना पड़ा, मुख्यमंत्री का पद, केंद्रीय मंत्री का पद और दो-दो बार अपनी पार्टी भी. दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल किस्सों के स्पेशल सीरीज 'मुख्यमंत्री' में देखिए कहानी, मदन लाल खुराना की.