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झमाझम

लॉकडाउन का ग़म ग़लत करना है, तो ये पांच मज़ेदार मराठी फ़िल्में देख डालिए

लॉकडाउन का ग़म ग़लत करना है, तो ये पांच मज़ेदार मराठी फ़िल्में देख डालिए

लॉकडाउन के दौरान फिल्म रेकमंडेशन देने का चलन हुआ है. मैं चला चित्रपट बघूया सीरीज में आपको हर हफ्ते एक उम्दा मराठी फिल्म के बारे में बताता था. आज पेश है पांच कॉमेडी फिल्में की लिस्ट. ज़ाहिर है कि ये फिल्में मराठी भाषा की ही हैं. (1) नाम – टाइमपास (2014) डायरेक्टर – रवि जाधव कलाकार … और पढ़ें लॉकडाउन का ग़म ग़लत करना है, तो ये पांच मज़ेदार मराठी फ़िल्में देख डालिए

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ये हैं 2019 की मस्ट वॉच पांच मराठी फ़िल्में

मराठी सिनेमा ने कथापरक फ़िल्में देने का अपना रूटीन 2019 में भी जारी रखा. अपनी रेप्युटेशन के मुताबिक कुछ अच्छी तो कुछ बहुत अच्छी फ़िल्में दीं. सबके बारे में बताएंगे तो बात लंबी खिंच जाएगी. फिलहाल इस ईयर एंडर में आपको पांच फिल्मों के बारे में बता देते हैं. वक्त निकाल कर इन्हें देखिएगा ज़रूर. मज़ा भी आएगा और हो सकता है आपका मन हमें थैंक यू बोलने का कर आए.

ये हैं 2019 की मस्ट वॉच पांच मराठी फ़िल्में

मराठी सिनेमा ने कथापरक फ़िल्में देने का अपना रूटीन 2019 में भी जारी रखा. अपनी रेप्युटेशन के मुताबिक कुछ अच्छी तो कुछ बहुत अच्छी फ़िल्में दीं. सबके बारे में बताएंगे तो बात लंबी खिंच जाएगी. फिलहाल इस ईयर एंडर में आपको पांच फिल्मों के बारे में बता देते हैं. वक्त निकाल कर इन्हें देखिएगा ज़रूर. मज़ा भी आएगा और हो सकता है आपका मन हमें थैंक यू बोलने का कर आए.
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2019 की ये पांच शानदार मराठी मूवीज़ देखिए, यकीनन थैंक यू बोलेंगे

2019 की ये पांच शानदार मराठी मूवीज़ देखिए, यकीनन थैंक यू बोलेंगे

मराठी सिनेमा ने कथापरक फ़िल्में देने का अपना रूटीन 2019 में भी जारी रखा. अपनी रेप्युटेशन के मुताबिक कुछ अच्छी तो कुछ बहुत अच्छी फ़िल्में दीं. सबके बारे में बताएंगे तो बात लंबी खिंच जाएगी. फिलहाल इस ईयर एंडर में आपको पांच फिल्मों के बारे में बता देते हैं. वक्त निकाल कर इन्हें देखिएगा ज़रूर. … और पढ़ें 2019 की ये पांच शानदार मराठी मूवीज़ देखिए, यकीनन थैंक यू बोलेंगे

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जब एक पत्रकार ने तीखे सवाल पूछे तो नेताजी ने उसको उठवा लिया

आज की फिल्म है ‘त्या रात्री पाउस होता’. जिसका मतलब है, उस रात बारिश थी. कुछ फ़िल्में ऐसी होती हैं जो दिलचस्प कहानी से ज़्यादा, ज़बरदस्त परफॉरमेंसेस के लिए याद रखी जाती हैं. ‘त्या रात्री पाउस होता’ एक ऐसी ही फिल्म है. सयाजी शिंदे, सोनाली कुलकर्णी, अमृता सुभाष, सुबोध भावे जैसे शानदार एक्टर्स, एक दिलचस्प कहानी को किसी अलग ही लेवल पर ले जाकर रखते हैं. महज़ अपने अभिनय से. मैं कह क्या रहा हूं ये समझने के लिए आपको एक बार ये फिल्म देखनी पड़ेगी बॉस. 2009 की फिल्म है और काफी सारे ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है.

जब एक पत्रकार ने तीखे सवाल पूछे तो नेताजी ने उसको उठवा लिया

आज की फिल्म है ‘त्या रात्री पाउस होता’. जिसका मतलब है, उस रात बारिश थी. कुछ फ़िल्में ऐसी होती हैं जो दिलचस्प कहानी से ज़्यादा, ज़बरदस्त परफॉरमेंसेस के लिए याद रखी जाती हैं. ‘त्या रात्री पाउस होता’ एक ऐसी ही फिल्म है. सयाजी शिंदे, सोनाली कुलकर्णी, अमृता सुभाष, सुबोध भावे जैसे शानदार एक्टर्स, एक दिलचस्प कहानी को किसी अलग ही लेवल पर ले जाकर रखते हैं. महज़ अपने अभिनय से. मैं कह क्या रहा हूं ये समझने के लिए आपको एक बार ये फिल्म देखनी पड़ेगी बॉस. 2009 की फिल्म है और काफी सारे ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है.

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जब एक पत्रकार ने तीखे सवाल पूछे तो नेताजी ने उसको उठवा लिया

जब एक पत्रकार ने तीखे सवाल पूछे तो नेताजी ने उसको उठवा लिया

मराठी सिनेमा को समर्पित इस सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’ (चलो फ़िल्में देखें) में हम आपका परिचय कुछ बेहतरीन मराठी फिल्मों से कराएंगे. वर्ल्ड सिनेमा के प्रशंसकों को अंग्रेज़ी से थोड़ा ध्यान हटाकर इस सीरीज में आने वाली मराठी फ़िल्में खोज-खोजकर देखनी चाहिए. ..  आज की फिल्म है ‘त्या रात्री पाउस होता’. जिसका मतलब है, उस रात बारिश … और पढ़ें जब एक पत्रकार ने तीखे सवाल पूछे तो नेताजी ने उसको उठवा लिया

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फिल्म रिव्यू: पिप्सी

 

मराठी फिल्म पिप्सी. ये फिल्म बच्चों के लिए बनाई गई है. ये फिल्म दो बच्चों की कहानी पर आधारित है. मराठी सिनेमा में बच्चों को लेकर काफी अच्छी फ़िल्में बन रही हैं. मराठी सिनेमा इस दिशा में बहुत उम्दा काम कर रहा है. हमारी आज की फिल्म भी ऐसी ही है. बच्चों की दुनिया. जो बड़ों की दुनिया में विश्वास, करुणा और प्रेम की मात्रा बढ़ाने का माद्दा रखती है.

   

फिल्म रिव्यू: पिप्सी

 

मराठी फिल्म पिप्सी. ये फिल्म बच्चों के लिए बनाई गई है. ये फिल्म दो बच्चों की कहानी पर आधारित है. मराठी सिनेमा में बच्चों को लेकर काफी अच्छी फ़िल्में बन रही हैं. मराठी सिनेमा इस दिशा में बहुत उम्दा काम कर रहा है. हमारी आज की फिल्म भी ऐसी ही है. बच्चों की दुनिया. जो बड़ों की दुनिया में विश्वास, करुणा और प्रेम की मात्रा बढ़ाने का माद्दा रखती है.

   
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क्या किया उस बच्ची ने, जिसकी मां की जान मछली में थी और बच्ची को उसे बचाना ही था?

क्या किया उस बच्ची ने, जिसकी मां की जान मछली में थी और बच्ची को उसे बचाना ही था?

मराठी सिनेमा को समर्पित इस सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’ (चलो फ़िल्में देखें) में हम आपका परिचय कुछ बेहतरीन मराठी फिल्मों से कराएंगे. वर्ल्ड सिनेमा के प्रशंसकों को अंग्रेज़ी से थोड़ा ध्यान हटाकर इस सीरीज में आने वाली मराठी फ़िल्में खोज-खोजकर देखनी चाहिए. ..  आज की फिल्म है ‘पिप्सी’. अभी हाल ही में लल्लनटॉप अड्डा हुआ. उसमें गीतकार … और पढ़ें क्या किया उस बच्ची ने, जिसकी मां की जान मछली में थी और बच्ची को उसे बचाना ही था?

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जब अपना स्कूल बचाने के लिए बच्चों को पूरे गांव से लड़ना पड़ा

जब अपना स्कूल बचाने के लिए बच्चों को पूरे गांव से लड़ना पड़ा

हमारी मराठी सिनेमा की सीरीज ‘चला चित्रपट बघूया’ में आज की फिल्म है ‘उबुन्टु’. उबुन्टु जिसे हिंदी वाले उबंतू भी प्रोनाउंस करते हैं. उबुन्टु. क्या मतलब हुआ इस शब्द का? ये एक अफ्रीकन शब्द है और कहते हैं कि ये नेल्सन मंडेला का दुनिया को दिया हुआ गिफ्ट है. ये महज़ एक शब्द नहीं, फलसफा … और पढ़ें जब अपना स्कूल बचाने के लिए बच्चों को पूरे गांव से लड़ना पड़ा

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बाबा: मराठी की वो फिल्म जिसमें दीपक डोबरियाल ने एक्टिंग का एवरेस्ट छू लिया है

मराठी सिनेमा को समर्पित सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’. इस बार की मराठी फिल्म ‘बाबा’.संजय दत्त-मान्यता दत्त ने मराठी फिल्म ‘बाबा’ की स्क्रिप्ट में अपना विश्वास जताया और इस विश्वास का नतीजा एक खूबसूरत फिल्म के रूप में सामने आया. ‘बाबा’ मराठी में पिता को कहते हैं. ये एक एक्सीडेंटल माता-पिता और उनके बच्चे के बीच की स्पीचलेस प्रेम कहानी है. एक्टिंग में दीपक डोबरियाल के साथ-साथ कदम मिलाकर चलती हैं नंदिता धुरी पाटकर.

बाबा: मराठी की वो फिल्म जिसमें दीपक डोबरियाल ने एक्टिंग का एवरेस्ट छू लिया है

मराठी सिनेमा को समर्पित सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’. इस बार की मराठी फिल्म ‘बाबा’.संजय दत्त-मान्यता दत्त ने मराठी फिल्म ‘बाबा’ की स्क्रिप्ट में अपना विश्वास जताया और इस विश्वास का नतीजा एक खूबसूरत फिल्म के रूप में सामने आया. ‘बाबा’ मराठी में पिता को कहते हैं. ये एक एक्सीडेंटल माता-पिता और उनके बच्चे के बीच की स्पीचलेस प्रेम कहानी है. एक्टिंग में दीपक डोबरियाल के साथ-साथ कदम मिलाकर चलती हैं नंदिता धुरी पाटकर.
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दीपक डोबरियाल की एक शब्दशः स्पीचलेस कर देने वाली फिल्म: 'बाबा'

दीपक डोबरियाल की एक शब्दशः स्पीचलेस कर देने वाली फिल्म: 'बाबा'

मराठी सिनेमा को समर्पित इस सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’ (चलो फ़िल्में देखें) में हम आपका परिचय कुछ बेहतरीन मराठी फिल्मों से कराएंगे. वर्ल्ड सिनेमा के प्रशंसकों को अंग्रेज़ी से थोड़ा ध्यान हटाकर इस सीरीज में आने वाली मराठी फ़िल्में खोज-खोजकर देखनी चाहिए. ..  मराठी सिनेमा ने पिछले डेढ़-दो दशक में कुछेक बेहतरीन फ़िल्में दी हैं. इसकी सबसे … और पढ़ें दीपक डोबरियाल की एक शब्दशः स्पीचलेस कर देने वाली फिल्म: ‘बाबा’