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झमाझम

जब अपना स्कूल बचाने के लिए बच्चों को पूरे गांव से लड़ना पड़ा

जब अपना स्कूल बचाने के लिए बच्चों को पूरे गांव से लड़ना पड़ा

हमारी मराठी सिनेमा की सीरीज ‘चला चित्रपट बघूया’ में आज की फिल्म है ‘उबुन्टु’. उबुन्टु जिसे हिंदी वाले उबंतू भी प्रोनाउंस करते हैं. उबुन्टु. क्या मतलब हुआ इस शब्द का? ये एक अफ्रीकन शब्द है और कहते हैं कि ये नेल्सन मंडेला का दुनिया को दिया हुआ गिफ्ट है. ये महज़ एक शब्द नहीं, फलसफा … और पढ़ें जब अपना स्कूल बचाने के लिए बच्चों को पूरे गांव से लड़ना पड़ा

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बाबा: मराठी की वो फिल्म जिसमें दीपक डोबरियाल ने एक्टिंग का एवरेस्ट छू लिया है

मराठी सिनेमा को समर्पित सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’. इस बार की मराठी फिल्म ‘बाबा’.संजय दत्त-मान्यता दत्त ने मराठी फिल्म ‘बाबा’ की स्क्रिप्ट में अपना विश्वास जताया और इस विश्वास का नतीजा एक खूबसूरत फिल्म के रूप में सामने आया. ‘बाबा’ मराठी में पिता को कहते हैं. ये एक एक्सीडेंटल माता-पिता और उनके बच्चे के बीच की स्पीचलेस प्रेम कहानी है. एक्टिंग में दीपक डोबरियाल के साथ-साथ कदम मिलाकर चलती हैं नंदिता धुरी पाटकर.

बाबा: मराठी की वो फिल्म जिसमें दीपक डोबरियाल ने एक्टिंग का एवरेस्ट छू लिया है

मराठी सिनेमा को समर्पित सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’. इस बार की मराठी फिल्म ‘बाबा’.संजय दत्त-मान्यता दत्त ने मराठी फिल्म ‘बाबा’ की स्क्रिप्ट में अपना विश्वास जताया और इस विश्वास का नतीजा एक खूबसूरत फिल्म के रूप में सामने आया. ‘बाबा’ मराठी में पिता को कहते हैं. ये एक एक्सीडेंटल माता-पिता और उनके बच्चे के बीच की स्पीचलेस प्रेम कहानी है. एक्टिंग में दीपक डोबरियाल के साथ-साथ कदम मिलाकर चलती हैं नंदिता धुरी पाटकर.
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दीपक डोबरियाल की एक शब्दशः स्पीचलेस कर देने वाली फिल्म: 'बाबा'

दीपक डोबरियाल की एक शब्दशः स्पीचलेस कर देने वाली फिल्म: 'बाबा'

मराठी सिनेमा को समर्पित इस सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’ (चलो फ़िल्में देखें) में हम आपका परिचय कुछ बेहतरीन मराठी फिल्मों से कराएंगे. वर्ल्ड सिनेमा के प्रशंसकों को अंग्रेज़ी से थोड़ा ध्यान हटाकर इस सीरीज में आने वाली मराठी फ़िल्में खोज-खोजकर देखनी चाहिए. ..  मराठी सिनेमा ने पिछले डेढ़-दो दशक में कुछेक बेहतरीन फ़िल्में दी हैं. इसकी सबसे … और पढ़ें दीपक डोबरियाल की एक शब्दशः स्पीचलेस कर देने वाली फिल्म: ‘बाबा’

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साईकल: वो क्यूट फिल्म जो उदासी के दौर में भी आपमें मुस्कराहट भर देगी

हर एक की ज़िंदगी में कुछ न कुछ बेहद कीमती होता है. जिससे हमें बेहद लगाव होता है. जिसे हम अपने से अलग नहीं करना चाहते. किसी के लिए वो पालतू जानवर हो सकता है, किसी बच्चे के लिए खिलौना, किसी के लिए डायरी-घडी-पेन जैसी चीज़ तो किसी के लिए कुछ और. आज के हालात को देखा जाए तो कईयों के लिए ये चीज़ मोबाइल फोन भी हो सकती है. बहरहाल, उस अनमोल चीज़ को हम अपने से दूर किसी कीमत पर नहीं जाने देना चाहते. वो होता है न एक इमोशन, ‘चाहे जान चली जाए लेकिन इससे जुदाई नसीब न हो’. ऐसे में अगर वही चीज़ खो जाए तो? क्या बीतेगी? हमारी इस फिल्म के हीरो के साथ ऐसा ही कुछ हुआ है. उसकी प्राणप्रिय साइकिल चोरी हो गई है. उसकी ज़िंदगी से जैसे चार्म ही निकल गया है.

साईकल: वो क्यूट फिल्म जो उदासी के दौर में भी आपमें मुस्कराहट भर देगी

हर एक की ज़िंदगी में कुछ न कुछ बेहद कीमती होता है. जिससे हमें बेहद लगाव होता है. जिसे हम अपने से अलग नहीं करना चाहते. किसी के लिए वो पालतू जानवर हो सकता है, किसी बच्चे के लिए खिलौना, किसी के लिए डायरी-घडी-पेन जैसी चीज़ तो किसी के लिए कुछ और. आज के हालात को देखा जाए तो कईयों के लिए ये चीज़ मोबाइल फोन भी हो सकती है. बहरहाल, उस अनमोल चीज़ को हम अपने से दूर किसी कीमत पर नहीं जाने देना चाहते. वो होता है न एक इमोशन, ‘चाहे जान चली जाए लेकिन इससे जुदाई नसीब न हो’. ऐसे में अगर वही चीज़ खो जाए तो? क्या बीतेगी? हमारी इस फिल्म के हीरो के साथ ऐसा ही कुछ हुआ है. उसकी प्राणप्रिय साइकिल चोरी हो गई है. उसकी ज़िंदगी से जैसे चार्म ही निकल गया है.
झमाझम

एक तवायफ, एक सैनिक, एक मज़दूर, एक पोस्टमैन और तीन ख़त

एक तवायफ, एक सैनिक, एक मज़दूर, एक पोस्टमैन और तीन ख़त

मराठी सिनेमा को समर्पित इस सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’ (चलो फ़िल्में देखें) में हम आपका परिचय कुछ बेहतरीन मराठी फिल्मों से कराएंगे. वर्ल्ड सिनेमा के प्रशंसकों को अंग्रेज़ी से थोड़ा ध्यान हटाकर इस सीरीज में आने वाली मराठी फ़िल्में खोज-खोजकर देखनी चाहिए. ..  आज की फिल्म है ‘पोस्टकार्ड’. उस वक्त की कहानी जब सूचनाएं और भावनाएं दूरभाष … और पढ़ें एक तवायफ, एक सैनिक, एक मज़दूर, एक पोस्टमैन और तीन ख़त

झमाझम

क्या हुआ जब दो चोर, एक भले आदमी की सायकल लेकर फरार हो गए

क्या हुआ जब दो चोर, एक भले आदमी की सायकल लेकर फरार हो गए

मराठी सिनेमा को समर्पित इस सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’ (चलो फ़िल्में देखें) में हम आपका परिचय कुछ बेहतरीन मराठी फिल्मों से कराएंगे. वर्ल्ड सिनेमा के प्रशंसकों को अंग्रेज़ी से थोड़ा ध्यान हटाकर इस सीरीज में आने वाली मराठी फ़िल्में खोज-खोजकर देखनी चाहिए. ..  आज की फिल्म है ‘सायकल’. हर एक की ज़िंदगी में कुछ न कुछ बेहद … और पढ़ें क्या हुआ जब दो चोर, एक भले आदमी की सायकल लेकर फरार हो गए

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श्वास: क्या गुज़रती है, जब पता चले आपके किसी अज़ीज़ की आंखें हमेशा के लिए जाने वाली हैं!

श्वास. मराठी भाषा की नायाब फिल्म.2004 में फिल्म की रिलीज़ हुई. ‘श्वास’ ही वो फिल्म है जिसने मराठी सिनेमा के लिए कंटेंट बेस्ड सिनेमा के दरवाज़े खोले. ‘श्वास’ ही वो फिल्म है जिसने मराठी को 51 साल बाद नैशनल अवॉर्ड दिलाया. और ‘श्वास’ ही वो फिल्म है जिसने ऑस्कर के लिए जाने वाली पहली मराठी फिल्म होने का सम्मान हासिल किया.

श्वास: क्या गुज़रती है, जब पता चले आपके किसी अज़ीज़ की आंखें हमेशा के लिए जाने वाली हैं!

श्वास. मराठी भाषा की नायाब फिल्म.2004 में फिल्म की रिलीज़ हुई. ‘श्वास’ ही वो फिल्म है जिसने मराठी सिनेमा के लिए कंटेंट बेस्ड सिनेमा के दरवाज़े खोले. ‘श्वास’ ही वो फिल्म है जिसने मराठी को 51 साल बाद नैशनल अवॉर्ड दिलाया. और ‘श्वास’ ही वो फिल्म है जिसने ऑस्कर के लिए जाने वाली पहली मराठी फिल्म होने का सम्मान हासिल किया.
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‘कट्यार काळजात घुसली’: जब जलन ने ख़ान साहब को रावण बना डाला

मराठी सिनेमा को समर्पित सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’. आज की फिल्म ‘कट्यार काळजात घुसली’. यानी कटार कलेजे में घुस गई. पुरुषोत्तम दारव्हेकर की कलम और पंडित जितेंद्र अभिषेकी के संगीत की शानदार जुगलबंदी. ज़बरदस्त कामयाबी मिली थी इस नाटक को. 2015 में इस पर इसी नाम से एक फिल्म बनी. आज बात इसी फिल्म की.

‘कट्यार काळजात घुसली’: जब जलन ने ख़ान साहब को रावण बना डाला

मराठी सिनेमा को समर्पित सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’. आज की फिल्म ‘कट्यार काळजात घुसली’. यानी कटार कलेजे में घुस गई. पुरुषोत्तम दारव्हेकर की कलम और पंडित जितेंद्र अभिषेकी के संगीत की शानदार जुगलबंदी. ज़बरदस्त कामयाबी मिली थी इस नाटक को. 2015 में इस पर इसी नाम से एक फिल्म बनी. आज बात इसी फिल्म की.
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उस कटार की कहानी, जिससे किया हुआ एक ख़ून माफ था

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मराठी सिनेमा को समर्पित इस सीरीज़ ‘चला चित्रपट बघूया’ (चलो फ़िल्में देखें) में हम आपका परिचय कुछ बेहतरीन मराठी फिल्मों से कराएंगे. वर्ल्ड सिनेमा के प्रशंसकों को अंग्रेज़ी से थोड़ा ध्यान हटाकर इस सीरीज में आने वाली मराठी फ़िल्में खोज-खोजकर देखनी चाहिए. ..  मराठी में जो जलवा आज फिल्मों का है, वो कभी नाटकों का हुआ करता … और पढ़ें उस कटार की कहानी, जिससे किया हुआ एक ख़ून माफ था

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फिल्म रिव्यू: 'नाळ'

आज फॉर अ चेंज एक नई फिल्म ‘नाळ’ की बात करेंगे. नागराज मंजुळे मराठी सिनेमा का बड़ा नाम बन चुके हैं. उनके हर प्रोजेक्ट पर दर्शकों की नज़र रहती है. भले भी फिर वो किसी फिल्म के डायरेक्टर न हो, प्रोड्यूसर के तौर पर उनका जुड़ना भी फिल्म के लिए पर्याप्त अटेंशन बटोर लेता है. ‘नाळ’ में आपकी शुरूआती दिलचस्पी महज़ इसीलिए होती है कि इसे नागराज ने प्रड्यूस किया है. क्या खास है इस फिल्म में, आइए बताते हैं इस वीडियो में.

फिल्म रिव्यू: 'नाळ'

आज फॉर अ चेंज एक नई फिल्म ‘नाळ’ की बात करेंगे. नागराज मंजुळे मराठी सिनेमा का बड़ा नाम बन चुके हैं. उनके हर प्रोजेक्ट पर दर्शकों की नज़र रहती है. भले भी फिर वो किसी फिल्म के डायरेक्टर न हो, प्रोड्यूसर के तौर पर उनका जुड़ना भी फिल्म के लिए पर्याप्त अटेंशन बटोर लेता है. ‘नाळ’ में आपकी शुरूआती दिलचस्पी महज़ इसीलिए होती है कि इसे नागराज ने प्रड्यूस किया है. क्या खास है इस फिल्म में, आइए बताते हैं इस वीडियो में.