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झमाझम

ख़लील ज़िब्रान के ये 31 कोट 'बेहतर इंसान' बनने का क्रैश कोर्स हैं

केवल 48 वर्ष की अवस्था में मृत्यु को प्राप्त हो चुके ख़लील ज़िब्रान को, उनके लेखन के चलते उस समय के धर्म-गुरुओं और रसूख वाले लोगों ने जाति से बहिष्कृत करके देश निकाला दे दिया था. ऐसे ‘क्रांतिकारी’ लेखक की पुस्तक, Sand & foam (रेत और झाग) से 31 झमाझम कोट्स पढ़िये और बेहतरी की तरफ़ एक … और पढ़ें 31 Quotes from Sand and Foam written by Kahlil Gibran

ख़लील ज़िब्रान के ये 31 कोट 'बेहतर इंसान' बनने का क्रैश कोर्स हैं

केवल 48 वर्ष की अवस्था में मृत्यु को प्राप्त हो चुके ख़लील ज़िब्रान को, उनके लेखन के चलते उस समय के धर्म-गुरुओं और रसूख वाले लोगों ने जाति से बहिष्कृत करके देश निकाला दे दिया था. ऐसे ‘क्रांतिकारी’ लेखक की पुस्तक, Sand & foam (रेत और झाग) से 31 झमाझम कोट्स पढ़िये और बेहतरी की तरफ़ एक … और पढ़ें 31 Quotes from Sand and Foam written by Kahlil Gibran

भैरंट

'उस वक्त लाश बिलकुल सजीव हो उठ बैठी और बोली - बहुत सोए'

आज भारतीय साहित्य में ‘महापंडित’ के नाम से विख्यात राहुल सांकृत्यायन का 125वां जन्मदिन है. (9 अप्रैल 1893-14 अप्रैल 1963) वह सही मायने में एक यात्री थे. उन्होंने पूरे  हिन्दुस्तान की  यात्राएं तो की ही. योरोप, सोवियत रशिया, लंका आदि कई अन्य देशों की यात्राएं भी कीं. उन यात्राओं को दर्ज किया. हिन्दी की यात्रा-वृत्तांत … और पढ़ें Excerpts from the book Ghumakkad Shastra written by Rahul Sankrityayan on his 125th birth anniversary

'उस वक्त लाश बिलकुल सजीव हो उठ बैठी और बोली - बहुत सोए'

आज भारतीय साहित्य में ‘महापंडित’ के नाम से विख्यात राहुल सांकृत्यायन का 125वां जन्मदिन है. (9 अप्रैल 1893-14 अप्रैल 1963) वह सही मायने में एक यात्री थे. उन्होंने पूरे  हिन्दुस्तान की  यात्राएं तो की ही. योरोप, सोवियत रशिया, लंका आदि कई अन्य देशों की यात्राएं भी कीं. उन यात्राओं को दर्ज किया. हिन्दी की यात्रा-वृत्तांत … और पढ़ें Excerpts from the book Ghumakkad Shastra written by Rahul Sankrityayan on his 125th birth anniversary

वीडियो

किताबवाला: चौचक दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी ने सुनाए लखनउआ किस्से

किताबवाला. दी लल्लनटॉप की खास इंटरव्यू सीरीज. जिसमें हम बात करते हैं किताबों के लेखकों से. सवाल करते हैं उनकी किताब से जुड़ी सवालों से. इसी कड़ी में आज हमारे साथ हैं हिमांशु बाजपेयी. जिनकी किताब है, 'किस्सा किस्सा लखनउआ, लखनऊ के आवामी किस्से.' लेकिन इस किताब में वो किस्से नहीं हैं जो अब तक आपने सुन रखे हैं. मसलन नवाबों के किस्से, उनकी बेगमों के किस्से या फिर 1857 के किस्से. तो फिर क्या है इस किस्सों की किताब  में? बता रहे हैं हिमांशु.

किताबवाला: चौचक दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी ने सुनाए लखनउआ किस्से

किताबवाला. दी लल्लनटॉप की खास इंटरव्यू सीरीज. जिसमें हम बात करते हैं किताबों के लेखकों से. सवाल करते हैं उनकी किताब से जुड़ी सवालों से. इसी कड़ी में आज हमारे साथ हैं हिमांशु बाजपेयी. जिनकी किताब है, 'किस्सा किस्सा लखनउआ, लखनऊ के आवामी किस्से.' लेकिन इस किताब में वो किस्से नहीं हैं जो अब तक आपने सुन रखे हैं. मसलन नवाबों के किस्से, उनकी बेगमों के किस्से या फिर 1857 के किस्से. तो फिर क्या है इस किस्सों की किताब  में? बता रहे हैं हिमांशु.
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बीमारी का इलाज करवा कर लौटने के बाद इरफान खान ने फैंस के आगे दिल खोलकर रख दिया

तकरीबन साल भर बीमारी से लड़ने के बाद इरफान इसी साल फरवरी में इंडिया लौटे हैं. तब से लेकर अब तक छुप्पम-छुपाई का खेल चल रहा था. इरफान भी मास्क वगैरह लगाकर घूम रहे थे. 2 अप्रैल को उन्होंने खुद को मुंबई एयरपोर्ट पर अनमास्क किया. और इसके बाद एक लेटर लिखकर अपने फैंस का शुक्रिया अदा किया. लेटर ऐसा मानो इरफान ने अपना दिल ही निकालकर कीबोर्ड पर रख दिया हो. देखिए क्या लिखा है इरफान ने?

बीमारी का इलाज करवा कर लौटने के बाद इरफान खान ने फैंस के आगे दिल खोलकर रख दिया

तकरीबन साल भर बीमारी से लड़ने के बाद इरफान इसी साल फरवरी में इंडिया लौटे हैं. तब से लेकर अब तक छुप्पम-छुपाई का खेल चल रहा था. इरफान भी मास्क वगैरह लगाकर घूम रहे थे. 2 अप्रैल को उन्होंने खुद को मुंबई एयरपोर्ट पर अनमास्क किया. और इसके बाद एक लेटर लिखकर अपने फैंस का शुक्रिया अदा किया. लेटर ऐसा मानो इरफान ने अपना दिल ही निकालकर कीबोर्ड पर रख दिया हो. देखिए क्या लिखा है इरफान ने?
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किताबवाला: मिलिए शिवम सिंह से, जो बता रहे हैं भारत में चुनाव जीतने के तरीके

किताबवाला. यानी लेखकों का लल्लनटॉप इंटरव्यू. इस एपिसोड में हमारे साथ हैं शिवम सिंह. जो कि ''How to win an election in India'' के लेखक हैं. यानी कि इस किताब में उन्होंने भारत में चुनाव जीतने के तरीके बताए हैं. क्या है वो तरीके? देखिए वीडियो में.

किताबवाला: मिलिए शिवम सिंह से, जो बता रहे हैं भारत में चुनाव जीतने के तरीके

किताबवाला. यानी लेखकों का लल्लनटॉप इंटरव्यू. इस एपिसोड में हमारे साथ हैं शिवम सिंह. जो कि ''How to win an election in India'' के लेखक हैं. यानी कि इस किताब में उन्होंने भारत में चुनाव जीतने के तरीके बताए हैं. क्या है वो तरीके? देखिए वीडियो में.
भैरंट

कोहिनूर ले जाने वाले नादिर शाह के संग जाने से एक तवायफ ने क्यों इनकार का दिया?

विलियम डेलरिंपल और अनिता आनंद की किताब कोहिनूर: दुनिया के सबसे मशहूर हीरे की कहानी सम्राट मुहम्मद शाह के शासन, नादिर शाह के कत्लेआम और कोहिनूर हीरे के किस्से के बारे में हैं. जिससे छापा है जगरनॉटबुक्स ने. हम आपको इस किताब का कुछ अंश पढ़वा रहे हैं. कोहिनूर: दुनिया के सबसे मशहूर हीरे की कहानी … और पढ़ें Book Excerpt of Kohinoor publish by juggernaut books

कोहिनूर ले जाने वाले नादिर शाह के संग जाने से एक तवायफ ने क्यों इनकार का दिया?

विलियम डेलरिंपल और अनिता आनंद की किताब कोहिनूर: दुनिया के सबसे मशहूर हीरे की कहानी सम्राट मुहम्मद शाह के शासन, नादिर शाह के कत्लेआम और कोहिनूर हीरे के किस्से के बारे में हैं. जिससे छापा है जगरनॉटबुक्स ने. हम आपको इस किताब का कुछ अंश पढ़वा रहे हैं. कोहिनूर: दुनिया के सबसे मशहूर हीरे की कहानी … और पढ़ें Book Excerpt of Kohinoor publish by juggernaut books

भैरंट

पहले चुनाव से पहले ही नेहरू ने कहा था, 'कोई भी पार्टी प्रचार में तिरंगे का इस्तेमाल नहीं करेगी'

पीयूष बबेले पत्रकार हैं. 2004 से अब तक वे देश के अनेक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में पत्रकारिता कर चुके हैं.  पत्र पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के लिए वह लगातार लिखते रहे हैं. इनमें से बहुत से लेख आजादी के बाद वाले इतिहास के भ्रामक चित्रण के खिलाफ रहे हैं. उनकी एक किताब आई है. नेहरू: मिथक और … और पढ़ें Prime Minister Jawaharlal Nehru made a code of conduct for his ministers and all political parties before first general election in India

पहले चुनाव से पहले ही नेहरू ने कहा था, 'कोई भी पार्टी प्रचार में तिरंगे का इस्तेमाल नहीं करेगी'

पीयूष बबेले पत्रकार हैं. 2004 से अब तक वे देश के अनेक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में पत्रकारिता कर चुके हैं.  पत्र पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के लिए वह लगातार लिखते रहे हैं. इनमें से बहुत से लेख आजादी के बाद वाले इतिहास के भ्रामक चित्रण के खिलाफ रहे हैं. उनकी एक किताब आई है. नेहरू: मिथक और … और पढ़ें Prime Minister Jawaharlal Nehru made a code of conduct for his ministers and all political parties before first general election in India

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किताबवाला: इंदिरा गांधी को सबसे ज्यादा एलर्जी किस चीज से थी?

कुमकुम चड्ढा. लेखिका हैं. वरिष्ठ पत्रकार भी. नई किताब जो लिखी है उसका नाम है दी मैरीगोल्ड स्टोरी, इंदिरा गांधी एंड अदर्स. (The Marigold Story: Indira Gandhi & Others). किताब में क्या है? किताब में है संजय गांधी, राजीव गांधी, लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली जैसे नेताओं का जिक्र. उनके अलावा भी कुछ बड़े लोग हैं जिनके बारे में आपको जानने को मिलेगा. आपको पता चलेगा कि इंदिरा गांधी को किस चीज से एलर्जी है? संजय गांधी को न क्यों पसंद नहीं था?
UPSC के चेयरमैन रहे दीपक गुप्ता से IAS के इतिहास पर बात

किताबवाला: इंदिरा गांधी को सबसे ज्यादा एलर्जी किस चीज से थी?

कुमकुम चड्ढा. लेखिका हैं. वरिष्ठ पत्रकार भी. नई किताब जो लिखी है उसका नाम है दी मैरीगोल्ड स्टोरी, इंदिरा गांधी एंड अदर्स. (The Marigold Story: Indira Gandhi & Others). किताब में क्या है? किताब में है संजय गांधी, राजीव गांधी, लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली जैसे नेताओं का जिक्र. उनके अलावा भी कुछ बड़े लोग हैं जिनके बारे में आपको जानने को मिलेगा. आपको पता चलेगा कि इंदिरा गांधी को किस चीज से एलर्जी है? संजय गांधी को न क्यों पसंद नहीं था?
UPSC के चेयरमैन रहे दीपक गुप्ता से IAS के इतिहास पर बात
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किताबवाला: क्या जवाहर लाल नेहरू से बहुत कुछ सीख रहे हैं नरेंद्र मोदी?

'नेहरू: मिथक और सत्य'. नई किताब है. किताब लिखी है पत्रकार और लेखक पीयूष बबेले. किताब का पूरा नाम है 'नेहरू: मिथक और सत्य, आधुनिक भारत के निर्माण की परियोजना पर एक विहंगम दृष्टि'. संवाद प्रकाशन की किताब है. किताब में क्या है? सौरभ द्विवेदी को पीयूष बबेले ने बताया किताब में है नेहरू से क्या सीखने की कोशिश करते हैं नरेंद्र मोदी? क्या नेहरू अय्याशी पसंद नेता थे? लोग नेहरू को क्यों किसानों का नेता मानते थे? और क्या है नेहरू का इस देश के लिए योगदान? क्या हैं नेहरू की गलतियां?

किताबवाला: क्या जवाहर लाल नेहरू से बहुत कुछ सीख रहे हैं नरेंद्र मोदी?

'नेहरू: मिथक और सत्य'. नई किताब है. किताब लिखी है पत्रकार और लेखक पीयूष बबेले. किताब का पूरा नाम है 'नेहरू: मिथक और सत्य, आधुनिक भारत के निर्माण की परियोजना पर एक विहंगम दृष्टि'. संवाद प्रकाशन की किताब है. किताब में क्या है? सौरभ द्विवेदी को पीयूष बबेले ने बताया किताब में है नेहरू से क्या सीखने की कोशिश करते हैं नरेंद्र मोदी? क्या नेहरू अय्याशी पसंद नेता थे? लोग नेहरू को क्यों किसानों का नेता मानते थे? और क्या है नेहरू का इस देश के लिए योगदान? क्या हैं नेहरू की गलतियां?
भैरंट

सारागढ़ी के 21 सिखों की कहानी, जो 10 हज़ार की अफ़ग़ान सेना से भिड़ गए थे

सारागढ़ी का संग्राम  अविभाजित भारत का पश्चिमी विस्तार अफगानिस्तान की सरहद तक है. ख़ैबर-पख्तूनवा इलाके के पास भारत और अफगानिस्तान की सरहद. ‘समाना’ पहाड़ियों के बीच कोहट (अब पाकिस्तान में) कस्बे मे 40 मील दूर एक चोटी पर छोटी सी चौकी है. यह चौकी दो किलों के बीच है. एक तरफ लॉकहार्ट और दूसरी ओर … और पढ़ें Battle of Saragarhi when 21 sikhs fought with army of 10 thousand filmed in Kesari

सारागढ़ी के 21 सिखों की कहानी, जो 10 हज़ार की अफ़ग़ान सेना से भिड़ गए थे

सारागढ़ी का संग्राम  अविभाजित भारत का पश्चिमी विस्तार अफगानिस्तान की सरहद तक है. ख़ैबर-पख्तूनवा इलाके के पास भारत और अफगानिस्तान की सरहद. ‘समाना’ पहाड़ियों के बीच कोहट (अब पाकिस्तान में) कस्बे मे 40 मील दूर एक चोटी पर छोटी सी चौकी है. यह चौकी दो किलों के बीच है. एक तरफ लॉकहार्ट और दूसरी ओर … और पढ़ें Battle of Saragarhi when 21 sikhs fought with army of 10 thousand filmed in Kesari