Submit your post

Follow Us

भैरंट

क्या हुआ जब दो देशों के बीच की सीमारेखा अचानक कहीं खो गई?

क्या हुआ जब दो देशों के बीच की सीमारेखा अचानक कहीं खो गई?

एक कहानी रोज़ में आज कुंवर नारायण- सीमारेखाएं   एक बार ऐसा हुआ कि दो देशों के बीच सीमारेखा, यानी विभाजन रेखा, अचानक कहीं खो गई. ख़ास वाद-विवाद, लड़ाई-झगड़ा, मारामार थी उसको लेकर. सब यकायक थम गया. दोनों देश लड़ना छोड़कर खोजने में लग गए अपनी-अपनी सीमारेखाएं, बल्कि अपनी सीमारेखा जो दोनों की होते हुए … और पढ़ें क्या हुआ जब दो देशों के बीच की सीमारेखा अचानक कहीं खो गई?

भैरंट

उसकी आवाज गूंजती है जैसे लोहे की सांकल बजती है जैसे ईमान बजता है!

उसकी आवाज गूंजती है जैसे लोहे की सांकल बजती है जैसे ईमान बजता है!

एक कहानी रोज़ में आज मुक्तिबोध- काठ का सपना भरी, धुआंती मैली आग जो मन में है और कभी-कभी सुनहली आंच भी देती है. पूरा शनिश्चरी रूप. वे एक बालिका के पिता हैं, और वह बालिका एक घर के बरामदे की गली में निकली मुंडेर पर बैठी है, अपने पिता को देखती हुई. उन्हें देख … और पढ़ें उसकी आवाज गूंजती है जैसे लोहे की सांकल बजती है जैसे ईमान बजता है!

भैरंट

'मेरा मांस का बुत गली में बेचारा-सा बना खड़ा था, और मेरे सामने हवा में ज़िन्दगी के खौफ़ का चाकू लहरा रहा था'

'मेरा मांस का बुत गली में बेचारा-सा बना खड़ा था, और मेरे सामने हवा में ज़िन्दगी के खौफ़ का चाकू लहरा रहा था'

एक कहानी रोज़ में आज अमृता प्रीतम की कहानी- ‘दो खिड़कियां’ इसकी लेखिका अमृता प्रीतम की मर्मस्पर्शी रचनाएँ संगृहीत हैं. ‘दो खिड़कियां’ जिसके आधार पर इस संग्रह का नामकरण हुआ है, दुनिया के निजाम पर भयानक व्यंग्य करती हुई कहानी है. इसकी नायिका के शब्द उसके कमरे की सामने वाली खिड़की में से निकलकर बाहर सड़क पर … और पढ़ें ‘मेरा मांस का बुत गली में बेचारा-सा बना खड़ा था, और मेरे सामने हवा में ज़िन्दगी के खौफ़ का चाकू लहरा रहा था’

तहखाना

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

101 साल पहले, इस्मत आपा का जन्म हुआ था. बदायूं में. उत्तरप्रदेश में पड़ती है ये जगह. अभी जन्मदिन आने को है. मुल्क आजाद हुआ था उससे ठीक 32 साल पहले पैदा हुईं थीं. तारीख वही 15 अगस्त. उर्दू की सबसे कंट्रोवर्शिअल और सबसे फेमस राइटर हुई हैं, हमने तय किया कि जन्मदिन के मौके … और पढ़ें ‘इस्मत आपा वाला हफ्ता’ शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

तहखाना

इस्मत लिखना शुरू करेगी तो उसका दिमाग़ आगे निकल जाएगा और अल्फ़ाज़ पीछे हांफते रह जाएंगे

इस्मत लिखना शुरू करेगी तो उसका दिमाग़ आगे निकल जाएगा और अल्फ़ाज़ पीछे हांफते रह जाएंगे

इस्मत आपा वाला हफ्ता चल रहा है.  आज हम आपको जो पढ़ा रहे हैं वास्तव में वो सआदत हसन मंटो द्वारा लिखा हुआ संस्मरण है.जो इस्मत चुगताई के कहानी संग्रह ‘चिड़ी की दुक्की’ की भूमिका के रूप में प्रकाशित हुआ था. वाणी प्रकाशन के सौजन्य से हम आप तक ये पहुंचा पाए हैं.   इस किताब … और पढ़ें इस्मत लिखना शुरू करेगी तो उसका दिमाग़ आगे निकल जाएगा और अल्फ़ाज़ पीछे हांफते रह जाएंगे

भैरंट

वह इसी कस्बे का बाशिंदा है, अपनी झील और अपनी पहाड़ी छोड़कर कहां जाए

वह इसी कस्बे का बाशिंदा है, अपनी झील और अपनी पहाड़ी छोड़कर कहां जाए

आज कुर्रतुल ऐन हैदर की कहानी- फ़ोटोग्राफ़र मौसमे-बहार के फलों से घिरा बेहद नज़रफ़रेब (1) गेस्टहाउस हरे-भरे टीले की चोटी पर दूर से नज़र आ जाता है. टीले के ऐन नीचे पहाड़ी झील है. एक बल खाती सड़क झील के किनारे-किनारे गेस्टहाउस के फाटक तक पहुंचती है. फाटक के नज़दीक वालरस की ऐसी मूंछों वाला … और पढ़ें वह इसी कस्बे का बाशिंदा है, अपनी झील और अपनी पहाड़ी छोड़कर कहां जाए

भैरंट

हिंदी के पहले और शायद आखिरी 'टॉप सेलर' लेखक प्रेमचंद को चिट्ठी

हिंदी के पहले और शायद आखिरी 'टॉप सेलर' लेखक प्रेमचंद को चिट्ठी

आज के दिन में एक पावन बात है. अपने मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिन है. एक चिट्ठी लिखी गई है मुंशी प्रेमचंद के नाम. दिव्य प्रकाश दुबे ने लिखी है. पढ़िए. आदरणीय प्रेमचंद जी, बहुत दिनों से आपसे ये कहना चाह रहा था, लेकिन मौका नहीं मिला. आज 31 जुलाई है और आपका जन्मदिन है तो … और पढ़ें हिंदी के पहले और शायद आखिरी ‘टॉप सेलर’ लेखक प्रेमचंद को चिट्ठी

भैरंट

प्रेमचंद की सबसे धांसू कहानियां, एक जगह पर एक साथ

प्रेमचंद की सबसे धांसू कहानियां, एक जगह पर एक साथ

प्रेमचंद भारत के सबसे महान राइटर माने जाते हैं. हम कहते हैं वो सबसे नए और कूल राइटर थे. आज होते तो दर ऑफेंड होते लोग उनसे. ट्विटर पर उनको बहुत कोसा जाता और वेबसाइट्स उनकी कहानियों के बीच से लाइन निकाल-निकाल कोट्स बनाती. सन 36 था, दिन आज का था. आज मतलब 8 अक्टूबर. … और पढ़ें प्रेमचंद की सबसे धांसू कहानियां, एक जगह पर एक साथ

भैरंट

'विलोम क्या है? एक असफल कालिदास. और कालिदास ? एक सफल विलोम'

'विलोम क्या है? एक असफल कालिदास. और कालिदास ? एक सफल विलोम'

आषाढ़ का महीना खत्म हो गया है और शुरू हो गया है सावन. झमाझम बारिश भी होने लगी है. इस बारिश के मौसम में पढ़िए मोहन राकेश का लिखा नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’. मोहन राकेश की इस रचना ने उन्हें साहित्य अकादमी दिलाया था. उनकी बहुत सी किताबें छपी हैं. जिनमें से एक आषाढ़ का एक … और पढ़ें ‘विलोम क्या है? एक असफल कालिदास. और कालिदास ? एक सफल विलोम’

भैरंट

'मां के चेहरे का रंग बदलने लगा, धीरे-धीरे उनका झुर्रियों-भरा मुंह खिलने लगा'

'मां के चेहरे का रंग बदलने लगा, धीरे-धीरे उनका झुर्रियों-भरा मुंह खिलने लगा'

भीष्म साहनी. पंजाब में जन्मे एक अंग्रेजी के अध्यापक थे. जिन्होंने तमस लिखकर हिंदी साहित्य में एक नई लहर पैदा की. इनमें और प्रेमचंद की कहानियों में बहुत समानता है. दोनों समाज के दिखावों को अपने- अपने तरीके से लताढ़ लगाते  थे. आज इन्हीं भीष्म साहनी की बरसी है. इनकी बेहतरीन रचनाओं में से ‘एक … और पढ़ें ‘मां के चेहरे का रंग बदलने लगा, धीरे-धीरे उनका झुर्रियों-भरा मुंह खिलने लगा’