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भैरंट

'वे जब हंसती हैं फेनिल दूध-सी निश्छल हंसी'

निर्मला पुतुल के शब्द कविता की दुनिया और उसके बाहर भी नगाड़े की तरह बजते हैं. एक संताल आदिवासी परिवार में जन्मीं निर्मला झारखंड से आती हैं. हिंदी में कविताओं की दो और संताली में एक किताब प्रकाशित हो चुकी है. आदिवासी समाज के लिए अपनी जमीनी सेवाएं भी वह दे रही हैं. पेश है … और पढ़ें Ek Kavita Roz: Aadiwasi Ladkiyon Ke Bare Mein A Hindi Poem By Nirmala Putul

'वे जब हंसती हैं फेनिल दूध-सी निश्छल हंसी'

निर्मला पुतुल के शब्द कविता की दुनिया और उसके बाहर भी नगाड़े की तरह बजते हैं. एक संताल आदिवासी परिवार में जन्मीं निर्मला झारखंड से आती हैं. हिंदी में कविताओं की दो और संताली में एक किताब प्रकाशित हो चुकी है. आदिवासी समाज के लिए अपनी जमीनी सेवाएं भी वह दे रही हैं. पेश है … और पढ़ें Ek Kavita Roz: Aadiwasi Ladkiyon Ke Bare Mein A Hindi Poem By Nirmala Putul

भैरंट

'वो मछलियां ही थीं जिन्होंने पुरखों का पेट भरा कई पीढ़ियों तक'

एक कविता रोज़ में आज विनय सुल्तान की एक कविता- मछलियां सभ्यताएं नदियों के किनारे बसी इतिहास की किताब में दर्ज है लेकिन किसी ने नहीं दर्ज की मछलियां सिवाय कक्षा एक की पोथी के जिसमें लिखा था मछली जल की रानी है दरअसल वो मछलियां ही थीं जिन्होंने पुरखों का पेट भरा कई पीढ़ियों तक … और पढ़ें Ek Kavita Roz machhaliyan by vinay sultan

'वो मछलियां ही थीं जिन्होंने पुरखों का पेट भरा कई पीढ़ियों तक'

एक कविता रोज़ में आज विनय सुल्तान की एक कविता- मछलियां सभ्यताएं नदियों के किनारे बसी इतिहास की किताब में दर्ज है लेकिन किसी ने नहीं दर्ज की मछलियां सिवाय कक्षा एक की पोथी के जिसमें लिखा था मछली जल की रानी है दरअसल वो मछलियां ही थीं जिन्होंने पुरखों का पेट भरा कई पीढ़ियों तक … और पढ़ें Ek Kavita Roz machhaliyan by vinay sultan

भैरंट

एक कविता रोज़: मां पर मुनव्वर राना के 30 शेर

‘मदर्स डे’ है आज, ऐसा लोग कहते हैं. पर कोई क्या खाकर मां के लिए कोई दिन मुक़र्रर करेगा. वह सब दिन की है. सब घंटों की है. उसने तब से हमारी परवरिश की है, जब इस आसमान के नीचे हमने आंख भी नहीं खोली थी. डॉ. कुमार विश्वास की एक बात याद आती है. … और पढ़ें Mothers Day special: best urdu shayari on maa by Munawwar Rana

एक कविता रोज़: मां पर मुनव्वर राना के 30 शेर

‘मदर्स डे’ है आज, ऐसा लोग कहते हैं. पर कोई क्या खाकर मां के लिए कोई दिन मुक़र्रर करेगा. वह सब दिन की है. सब घंटों की है. उसने तब से हमारी परवरिश की है, जब इस आसमान के नीचे हमने आंख भी नहीं खोली थी. डॉ. कुमार विश्वास की एक बात याद आती है. … और पढ़ें Mothers Day special: best urdu shayari on maa by Munawwar Rana

भैरंट

'इसलिए कि यह पृथ्वी बड़ी सुंदर है'

मनोज कुमार झा हिंदी के उन कवियों में से हैं जो दिल्ली से दूर रह कर खुद के कवि को सिद्ध कर चुके हैं. मनोज दरभंगा में रहते हैं और अप्रतिम कविताओं का एक लोक निर्मित कर चुके हैं. ‘तथापि जीवन’ शीर्षक से कविताओं की एक किताब छप चुकी है. अनुवादक भी मनोज खासे हैं. … और पढ़ें ek kavita roz: gyan a poem by manoj kumar jha

'इसलिए कि यह पृथ्वी बड़ी सुंदर है'

मनोज कुमार झा हिंदी के उन कवियों में से हैं जो दिल्ली से दूर रह कर खुद के कवि को सिद्ध कर चुके हैं. मनोज दरभंगा में रहते हैं और अप्रतिम कविताओं का एक लोक निर्मित कर चुके हैं. ‘तथापि जीवन’ शीर्षक से कविताओं की एक किताब छप चुकी है. अनुवादक भी मनोज खासे हैं. … और पढ़ें ek kavita roz: gyan a poem by manoj kumar jha

भैरंट

हर दिन दो अप्रैल होने को स्वतंत्र है

‘नींद से लंबी रात’ और ‘हर घर से गायब’ जैसे दो कविता-संग्रह हिंदी को देने वाले नवीन सागर (1948 – 2000)  को अक्सर कवियों की लिस्ट से बाहर रखा जाता है. एक बेहद चालू मुहावरे में कहें तो वह एक भुला दिए गए कवि हैं. आज दो अप्रैल है. नवीन सागर ने इस तारीख को … और पढ़ें ek kavita roz: a poem by naveen sagar

हर दिन दो अप्रैल होने को स्वतंत्र है

‘नींद से लंबी रात’ और ‘हर घर से गायब’ जैसे दो कविता-संग्रह हिंदी को देने वाले नवीन सागर (1948 – 2000)  को अक्सर कवियों की लिस्ट से बाहर रखा जाता है. एक बेहद चालू मुहावरे में कहें तो वह एक भुला दिए गए कवि हैं. आज दो अप्रैल है. नवीन सागर ने इस तारीख को … और पढ़ें ek kavita roz: a poem by naveen sagar

भैरंट

एक कविता रोज़: 'यह कविता इरोम पर नहीं है'

फ़रीद खां मुंबई में रहते हैं. वैसे पटना से हैं. कविता-कथा के साथ-साथ फिल्म और पटकथा-लेखन से भी जुड़े हैं. इरोम शर्मिला पर उन्होंने एक कविता लिखी है जो यह कहते हुए शुरू होती है कि यह कविता इरोम पर नहीं है… इरोम का आज जन्मदिन है, ऐसे में यह कविता इरोम पर न होकर … और पढ़ें ek kavita roz: irom sharmila a poem by farid khan

एक कविता रोज़: 'यह कविता इरोम पर नहीं है'

फ़रीद खां मुंबई में रहते हैं. वैसे पटना से हैं. कविता-कथा के साथ-साथ फिल्म और पटकथा-लेखन से भी जुड़े हैं. इरोम शर्मिला पर उन्होंने एक कविता लिखी है जो यह कहते हुए शुरू होती है कि यह कविता इरोम पर नहीं है… इरोम का आज जन्मदिन है, ऐसे में यह कविता इरोम पर न होकर … और पढ़ें ek kavita roz: irom sharmila a poem by farid khan

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एक कविता रोज: जब वहां नहीं रहता

एक कविता रोज़ दी लल्लनटॉप की सीरीज है जो आपको बेहतरीन कविताओं से रूबरू कराती है. इस कड़ी में सुनिए कुंवर नारायण की कविता 'जब वहां नहीं रहता.'

एक कविता रोज: जब वहां नहीं रहता

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एक कविता रोज़: याद नहीं

एक कविता रोज़ दी लल्लनटॉप की सीरीज है जो आपको बेहतरीन कविताओं से रूबरू कराती है. इस कड़ी में सुनिए मनमोहन की कविता 'याद नहीं'.

एक कविता रोज़: याद नहीं

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एक कविता रोज: सीलमपुर की लड़कियां

सारे जहान की लड़कियां एक सी थोड़े ना होती हैं. उनका शहर, कस्बा, मुहल्ला भी उनके भीतर रहता है. 'जमना पार' की दिल्ली का एक इलाका है सीलमपुर. कामगार, लोअर और लोअर मिडल क्लास लोगों का ठिकाना. मुसलमान बहुतायत में हैं. पानी-बिजली आज भी बड़ी समस्या है. आर चेतन क्रांति की एक कविता है. सीलमपुर की लड़कियां. आप हो सकता है मुंबई या कोलकाता में रहते हों. पर अपने पड़ोस में ही 'सीलमपुर की लड़कियां' देख पाएं. देखिए 'एक कविता रोज' में 'सीलमपुर की लड़कियां.'

एक कविता रोज: सीलमपुर की लड़कियां

सारे जहान की लड़कियां एक सी थोड़े ना होती हैं. उनका शहर, कस्बा, मुहल्ला भी उनके भीतर रहता है. 'जमना पार' की दिल्ली का एक इलाका है सीलमपुर. कामगार, लोअर और लोअर मिडल क्लास लोगों का ठिकाना. मुसलमान बहुतायत में हैं. पानी-बिजली आज भी बड़ी समस्या है. आर चेतन क्रांति की एक कविता है. सीलमपुर की लड़कियां. आप हो सकता है मुंबई या कोलकाता में रहते हों. पर अपने पड़ोस में ही 'सीलमपुर की लड़कियां' देख पाएं. देखिए 'एक कविता रोज' में 'सीलमपुर की लड़कियां.'
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एक कविता रोज़: सच्चा प्यार

एक कविता रोज़ दी लल्लनटॉप की सीरीज है जिसमें हम आपको कुछ बेहतरीन कविताएं सुनाते हैं. आज की कविता है, सच्चा प्यार. ये पॉलिश कवियित्री की कविता है जिसका हिंदी अनुवाद सौरभ द्विवेदी आपको सुना रहे हैं.

एक कविता रोज़: सच्चा प्यार

एक कविता रोज़ दी लल्लनटॉप की सीरीज है जिसमें हम आपको कुछ बेहतरीन कविताएं सुनाते हैं. आज की कविता है, सच्चा प्यार. ये पॉलिश कवियित्री की कविता है जिसका हिंदी अनुवाद सौरभ द्विवेदी आपको सुना रहे हैं.