अब छत्तीसगढ़ में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम जैसा कांड सामने आया है
खाने में नशा देने, रेप किए जाने, देह व्यापार में धकेलने के गंभीर आरोप लगाए बचकर निकली महिलाओं ने
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शेल्टर होम से निकलने में कामयाब हुई तीन महिलाओं ने संचालक पर रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. (बाईं फोटो शेल्टर होम की है, दाहिनी फोटो सांकेतिक है.)
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक सरकारी उज्ज्वला गृह में महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण किए जाने का मामला चर्चा में आ गया है. इस शेल्टर होम से किसी तरह बाहर निकली तीन महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाई है. बिलासपुर में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन महिलाओं ने बताया कि शेल्टर होम में उनके और अन्य महिलाओं के साथ किस तरह का व्यवहार होता है.
पीड़ित महिलाओं में से एक कविता (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह पति के झगड़े से परेशान होकर उज्ज्वला गृह आई थीं. लेकिन यहां आना उनके लिए मुसीबत बन गया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में कविता ने बताया कि पति से लड़ाई के बाद वह अपने पिता के घर जा रही थीं. वहां पहुंचने से पहले ही रास्ते में एक महिला उसे काम दिलवाने के बहाने शेल्टर होम ले गई. वहां पहुंचकर कविता को एहसास हुआ कि वो गलत जगह पहुंच गई हैं. उन्होंने उज्ज्वला गृह के कर्मियों से बार-बार गुहार लगाई की कि वे उसकी पति से बात करवाएं.
कविता का आरोप है कि उनकी प्रार्थना नहीं सुनी गई। बजाय इसके शेल्टर होम के लोगों ने उन्हें गालियां दीं. एक पूरी रात उन्हें वहां रखा गया. अगले दिन पति को फोन किया गया. उसे नियम बताकर कह दिया गया कि कविता को नहीं छोड़ सकते. बाद में पति वहां पहुंचा तो बड़ी मुश्किल से उसे मिलने दिया गया. उस समय वहां मौजूद दो अन्य महिलाओं ने बाहर निकालने की गुहार लगाई.
शेल्टर होम से पत्नी को नहीं निकाल पाने के बाद कविता का पति पुलिस के पास गया. आरोप है कि वहां भी पीड़ित की बात नहीं सुनी गई. आखिर में वो कविता के पिता के साथ शेल्टर होम पहुंचा और मिलने के बहाने जबरन अंदर घुसकर अपनी पत्नी और बाकी दोनों महिलाओं को बाहर निकाला. इसके बाद तीनों महिलाएं थाने पहुंचीं. तब तक मामला मीडिया में आ चुका था. वहीं, राजनीतिक दलों के लोग भी थाने पहुंच गए थे. ऐसे में पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी.
क्या होता था शेल्टर होम के अंदर?
बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में बने इस सरकारी शेल्टर होम में रेप, यौन शोषण, घरेलू हिंसा या किसी और तरह के अपराध की शिकार हुई महिलाओं को रखा जाता है. शेल्टर होम से निकलने के बाद तीनों महिलाओं ने बिलासपुर प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपने साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की जानकारी दी.
कविता ने बताया कि जिस दिन वह शेल्टर होम पहुंचीं, उसी दिन उन्होंने शेल्टर होम के संचालक जितेंद्र कुमार मौर्या को फोन पर किसी से ये कहते सुना था, 'कल रात नौ बजे तीन लड़कियां यहां से ले जाना. आज एक नई आई है.'
कविता के साथ ही शेल्टर होम से बाहर निकलीं राधिका (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह दो महीने से शेल्टर होम में रह रही थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां तीन लड़कों ने उनसे रेप किया था. खबर के मुताबिक, तीनों आरोपी जेल में हैं. बताया गया है कि मामले में तीन बयान होने के बाद राधिका अपने घर जा पाएंगी.
शेल्टर होम में हुए यौन शोषण के बारे में बात करते हुए राधिका ने बताया,
"शेल्टर होम में आने के चार दिन के बाद जितेंद्र मौर्या ने मेरे साथ गलत हरकत की. मैंने कहा कि मैं इसके खिलाफ आवाज उठाऊंगी तो वो मुझे धमकाने लगा. टॉर्चर करने लगा. कपड़े उतरवा के मुझे कमरे में बंद कर देते थे."राधिका ने ये भी बताया कि उनके खाने में कुछ मिलाया जाता था. इससे रात में खाना खाकर सोने के बाद अगले दिन सुबह ही नींद खुलती थी. राधिका ने यह भी कहा कि शेल्टर होम से निकलने के बाद जब वे अन्य के साथ थाने पहुंचीं तो वहां की महिला अधिकारी ने बयान बदलने का दबाव बनाया. बकौल राधिका महिला अधिकारी ने उनसे कहा, 'जैसा हम लोग बोलेंगे वैसा बोलना.' वहीं, शेल्टर होम से निकलने में कामयाब हुई तीसरी महिला शालिनी (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्हें शेल्टर होम में रहते एक हफ्ता हुआ था. उन्होंने बताया,
"इस एक हफ्ते में मेरे साथ बहुत कुछ हुआ. मुझे गालियां दी गईं. जब मैं वहां पहुंची तो वहां के लोग बोल रहे थे कि ''मस्त आइटम आई है''. तीसरे दिन जब मेरे घर वाले मिलने आए तो मैंने अपने भाई को बोला कि वह मिलने के लिए पीछे की तरफ आए. वहां कैमरा नहीं है. मैंने उससे मदद मांगी. इतने में शेल्टर होम की मैडम आई और मुझे ले गई. इसके बाद मेरे कपड़े उतरवाकर मुझे एक कमरे में एक घंटा बैठाया."शालिनी ने बताया कि इसके अगले दिन जब उनके घरवाले मिलने आए तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया. उनकी मां ने उनके लिए जो सामान छोड़ा था, वो भी उन्हें नहीं दिया गया. राधिका और शालिनी दोनों ने ये कहा है कि अगर उस दिन कविता के परिवार वाले नहीं आए होते तो शेल्टर होम वाले पता नहीं उन्हें कहां भेज देते. इन दोनों महिलाओं का आरोप है कि उस रात नौ बजे तीनों को कहीं भेजने की तैयारी थी. शेल्टर होम के संचालक का क्या कहना है? उज्ज्वला शेल्टर होम केंद्र सरकार की योजना के तहत चलते हैं. छत्तीसगढ़ में रायपुर, बिलासपुर, कोरिया और कोरबा जिलों में ये शेल्टर होम हैं. महिलाओं को सुरक्षा देने की योजना सरकारी है, लेकिन राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन केंद्रों के संचालन का जिम्मा स्वैच्छिक संगठनों को दिया है. सरकंडा स्थित उज्ज्वला गृह का संचालन शिवमंगल शिक्षण समिति करती है. इसके कर्ता-धर्ता का नाम जितेंद्र मौर्या है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जितेंद्र मौर्या का कहना है कि आरोप लगाने वाली तीनों महिलाओं की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है. खुद पर लगे आरोपों को झूठा करार देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी संस्था को बदनाम करने की कोशिश के तहत ये आरोप लगाए गए हैं. महिलाओं को निकालने वालों पर एफआईआर मामला सामने आने के बाद कविता के पति और पिता के ही खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जितेंद्र मौर्या ने शिकायत की थी कि ये दोनों जबरदस्ती शेल्टर होम में घुसे और वहां रह रही महिलाओं को भगा दिया. उनके खिलाफ शेल्टर होम के कर्मचारियों से मारपीट का मामला भी दर्ज किया गया है. वहीं, महिलाओं द्वारा किए गए दावों पर जो केस दर्ज हुए हैं, वे गाली-गलौज, गलत तरीके से बंद रखने और मारपीट के आरोप पर आधारित हैं. जबकि पीड़ित महिलाओं ने सेक्स रैकेट में जबरन धकेले जाने, रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. ये महिलाएं बीती 17 जनवरी की रात थाने पहुची थीं. उस समय छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला वहीं मौजूद थीं. उन्होंने सवाल उठाए हैं कि महिलाओं के आरोपों पर पुलिस ने रेप, यौन शोषण और जबरन सेक्स रैकेट में धकेलने से जुड़ी धाराओं के तहत केस क्यों नहीं दर्ज किया. बीबीसी ने इस बारे में सरकंडा के थाना प्रभारी जेबी गुप्ता से सवाल किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जेबी गुप्ता का कहना है कि 17 जनवरी की रात महिलाओं ने ऐसा कोई आरोप (रेप, यौन शोषण) नहीं लगाया था. वे कहते हैं कि शिकायत किए जाते समय थाने में महिला पुलिस अधिकारी भी मौजूद थीं. लल्लनटॉप ने इस मामले पर बात करने के लिए बिलासपुर रेंज आईजी रतन लाल डांगी को फोन किया. उन्होंने कहा कि इस मामले में एसपी बेहतर तरीके से बता पाएंगे. हमने एसपी प्रशांत अग्रवाल के ऑफिशियल नंबर पर भी कॉल किया, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया. हालांकि, स्थानीय मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक, एसपी अग्रवाल ने कहा है कि मामले की जांच चल रही है और पीड़ित महिलाओं को पूरा न्याय मिलेगा. उधर, पीड़ित महिलाओं ने गुरुवार 21 जनवरी को मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान दर्ज कराए हैं. इनमें उन्होंने शेल्टरहोम की महिला कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए हैं. मामले की जांच जारी है.
इस बीच, गुरुवार शाम को बिलासपुर की सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी संचालक जितेंद्र मौर्या को गिरफ्तार कर लिया है. मौर्या पर महिलाओं को देह व्यापार में धकेलने, उनका रेप और यौन शोषण करने से जुड़ी कानूनी धाराएं लगाई गई हैं. छत्तीसगढ़ का महिला एवं बाल विकास विभाग भी इस केस की जांच कर रहा है. तीनों महिलाओं के अनुभव सामने आने और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद उज्ज्वला शेल्टर होम को सील कर दिया गया है. यहां रह रही महिलाओं को दूसरी जगहों पर शिफ्ट किए जाने की जानकारी मिली है. बिलासपुर की ये घटना बिहार के बहुचर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की याद दिलाती है. मई 2018 में आए इस केस ने बिहार समेत पूरे देश में सरकारी शेल्टर होम में रह रही महिलाओं व बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे. इस घटना की जांच करने वाली सीबीआई ने बताया था कि न सिर्फ बालिका गृह के कर्मचारी बच्चियों का यौन शोषण कर रहे थे, बल्कि बिहार सरकार के कुछ अधिकारी भी इस कृत्य में शामिल थे. मामला सामने आने के दो साल बाद कोर्ट ने बालिका गृह के संचालक बृजेश चौधरी समेत 19 लोगों को दोषी करार दिया था.#UPDATE Bilaspur Ujjwala home alleged sexual harassment and violence case: Jitendra Maurya (President of Shiv Mangal Shikshan Samiti), who runs Ujjwala home, arrested under IPC section 376 (punishment for rape). https://t.co/yPKeNYT78H
— ANI (@ANI) January 21, 2021

