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सोशल मीडिया पर मुसलमान महिला नेताओं को पड़ने वाली गालियां डराने वाली हैं

ये खबर हमारा घटियापन दिखाती है. और घटियापन के लिए कोई भूमिका नहीं बनाई जाती. इसलिए सीधा पॉइंट पर आते हैं. एमनेस्टी नाम का एनजीओ है, जो ह्यूमन राइट्स के लिए काम करता है. हेडक्वार्टर लंदन में है और एक ब्रांच ‘एमनेस्टी इंडिया’ नाम से भारत में फंक्शनल है.

एमनेस्टी इंडिया की ही एक रिपोर्ट आई है. नाम है- ट्रोल पेट्रोल इंडिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि हमारे देश की तमाम महिला नेता सोशल मीडिया, खासकर ट्विटर पर कुछ कहने के लिए कितनी आज़ाद हैं..और ‘सुनने’ के लिए कितनी सॉफ्ट टारगेट हैं.

नतीजा क्या निकला?

भारत में महिला नेताओं का नाम मेंशन करके किए जाने वाले 13.8% ट्वीट्स ऐसे होते हैं, जिनमें या तो उनका मजाक उड़ाया जाता है या गाली दी जाती है. अमेरिका में ये रेट 7.9%, इंग्लैंड में 7.2%, है. यानी भारत में महिला नेताओं की ट्रोलिंग और अब्यूज अमेरिका, इंग्लैंड की तुलना में दोगुना है. तो हम अपने ‘विश्वगुरू’ होने पर गर्व कर सकते हैं.

पहले तो रिपोर्ट तैयार होने का पूरा प्रोसेस समझिए…

एमनेस्टी इंडिया ने भारत की 95 महिला नेताओं के नाम शॉर्टलिस्ट किए. इनमें वही नाम शामिल थे, जिनका नाम कम से कम एक ट्वीट में तो मेंशन हो ही.

फिर मार्च से मई 2019 के बीच के वो सारे ट्वीट्स निकाले, जो इन महिला नेताओं ने किए थे. या जिनमें ये लोग मेंशन थे.

फिर इन लाखों ट्वीट्स में से रैंडमली 1,14,716 ट्वीट्स शॉर्टलिस्ट किए.

इतने सारे ट्वीट्स की स्टडी के लिए 82 देशों के 1,912 डीकोडर्स हायर किए. इन डीकोडर्स में 1095 तो भारत के ही थे.

इन सभी डीकोडर्स ने जून से लेकर अब तक सारे ट्वीट्स की स्टडी की, तब जाकर ये नतीजे निकले. प्रोसेस समझ लिया, अब एक-एक करके रिजल्ट जानिए.

रोज एवरेज 10 हजार ट्वीट्स, जिनमें महिला नेताओं को गाली

95 महिला नेताओं के तीन महीने का डेटा स्टडी किया गया. पता चला कि रोज एवरेज 10 हजार ट्वीट्स ऐसे होते हैं, जिनमें उन्हें गाली दी जाती है या ट्रोल किया जाता है. इसे और आसान कर दें तो हर महिला नेता को, रोज औसत 113 गाली या ट्रोलिंग वाले ट्वीट्स मिलते हैं.

जिन तीन महीनों में डेटा कलेक्शन किया गया था, वो भारत में लोकसभा चुनावों का वक्त भी था. इसी वजह से सोशल मीडिया ट्रोल्स अपने बिल्कुल चरम पर थे. उनक इस घनघोर एक्टिव स्टेटस ने नतीजे पाने में भी मदद कर दी.

जो जितनी पॉपुलर, उसकी उतनी ट्रोलिंग

भारत में जो महिला नेताएं जितनी पॉपुलर हैं, उनके नाम पर उतनी ही ट्रोलिंग और अब्यूज होती है. 95 में से टॉप-10 महिला नेताओं के डेटा स्टडी किए गए. ये वो नाम थे, जिनको सबसे ज्यादा, यानी लगभग तीन-चौथाई ट्वीट्स में मेंशन किया गया था. इन 10 पॉपुलर महिला नेताओं को ही सबसे ज्यादा यानी लगभग 80 फीसद ट्रोलिंग या गाली वाले ट्वीट्स किए गए.

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जैसे-जैसे महिला नेताओं की लोकप्रियता बढ़ती है, उनकी ट्रोलिंग भी बढ़ जाती है. (ग्राफ- एमनेस्टी)

मुस्लिम महिला नेता होना तो और भी मुश्किल

भारत में मुस्लिम महिला नेताओं को बाकी धर्म- जाति की महिला नेताओं की तुलना में 94.1% ज्यादा ट्रोलिंग और गाली मिलती है. यानी महिला नेता मुसलमान हो तो दुगनी गालियों का सामना करती है. आय रिपीट, दुगनी. यही हाल एससी-एसटी और बैकवर्ड क्लास की महिला नेताओं का है, जिन्हें जनरल कैटेगरी की महिला नेताओं की तुलना में लगभग 60 फीसद ज्यादा गालियां मिलती हैं. समझने के लिए आप ये ग्राफ देख सकते हैं.

Muslim
देखिए कि किस जाति की महिला नेता को कितनी ट्रोलिंग झेलनी पड़ती है. (ग्राफ- एमनेस्टी)

कांग्रेस की सोशल मीडिया कन्वीनर हसीबा अमीन कहती हैं…

2014 में मैं राजनीति में नई-नई थी. मेरी जिस तरह की ऑनलाइन ट्रोलिंग हुई, वो एक नई लड़की के लिए ट्रॉमा से कम नहीं था. सोशल मीडिया पर मुझसे कहा गया कि एक मुस्लिम लड़की को अपनी बात रखने का कोई हक़ नहीं है. रेप की धमकियां तो आम थीं. कहा गया कि मैं बूढ़ों मर्दों के साथ सेक्शुअल रिलेशन रखती हूं. नतीजा- अब 2019 में मैंने अपनी ट्विटर एक्टिविटी ही कम कर दी है.

काबिलियत पर शक किया जाता है 

-सोशल मीडिया ट्रोल्स के घटियापन को समझने के लिए जानिए कि वे महिला नेताओं को कैसी-कैसी, किस-किस तरह की गालियां देते हैं.

-इसमें लगभग 20 फीसद उनकी काबिलियत पर सिर्फ इसलिए सवाल उठाते हैं क्योंकि वे महिलाएं हैं.

-लगभग 15 फीसद ट्वीट्स में धर्म के नाम पर गाली दी जाती है.

-लगभग 10 फीसद ट्वीट्स में रेसिज़्म की भाषा होती है. यानी उनके रंग-रूप को टारगेट किया जाता है.

-और लगभग 9 फीसद ट्वीट्स में फिजिकल नुकसान की धमकी दी जाती है, जैसे- रेप, हत्या.

शाज़िया इल्मी कहती हैं…

कभी-कभी तो मुस्लिम महिला नेता होना बोझ जैसा लगने लगता है. मुझे तो मुस्लिम पुरुषों की तुलना में भी ज्यादा नफ़रत का सामना करना पड़ता है. सोशल मीडिया पर मेरे बारे में जो कुछ भी कहा जाता है, उसमें से 25% बातें ही मेरे काम या राजनीति के आधार पर कही जाती हैं. बाकी 75% बातें मेरे मुस्लिम या महिला होने के नाते ही सुनाई जाती हैं.

बीजेपी की महिला नेताओं की बाकियों से कम ट्रोलिंग

पॉलिटिकल पार्टी के आधार पर भी देखा गया कि किस पार्टी की नेताओं को कितनी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है. कांग्रेस की महिला नेताओं को लगभग 15 फीसद ट्वीट्स ट्रोलिंग या हेट वाले किए जाते हैं. जबकि भाजपा की महिला नेताओं के लिए ये आंकड़ा 10 फीसद है. इन दोनों के अलावा बाकी सारी पार्टियों की नेताओं को मिलाकर 16% ट्रोलिंग या हेट वाले ट्वीट्स होते हैं. यानी भाजपा की महिला नेताओं को ट्रोल्स सबसे कम टारगेट करते हैं.

Parties
किस पार्टी की महिला नेताओं की कितनी ट्रोलिंग होती है. (ग्राफ- एमनेस्टी)

ट्रोलिंग और नफरत वाले सबसे ज्यादा ट्वीट हिंदी में

महिला नेताओं के लिए ट्रोलिंग और नफरत वाले सबसे ज्यादा ट्वीट हिंदी में किए जाते हैं- 15.3%. इसके बाद इंग्लिश- 14.1%, तमिल 11.9% और तेलुगू- 10.6% का नंबर आता है. इसी तरह शादीशुदा महिलाओं की तुलना में गैर-शादीशुदा महिलाओं को 41% ज्यादा ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है.

 आप क्रोनोलॉजी समझिए…

2019 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद भारत की संसद में महिला सांसदों की हिस्सेदारी अब तक की हाइएस्ट हो गई है. हाइएस्ट से ये मत समझिएगा कि 30-40% हो गई है. अभी भी संसद में 14% ही महिला सांसद हैं. महिला सांसदों की संसद में हिस्सेदारी के लिहाज से भारत 190 देशों में 145वें नंबर पर है.

ब्रिटेन में 32% महिला सांसद और अमेरिका में 24% हैं. पाकिस्तान तक में भारत से ज्यादा महिला सांसद हैं- 20%.

अब इस फैक्ट को एमनेस्टी इंडिया की रिपोर्ट से निकले नतीजों के साथ जोड़िए. दो स्टेटमेंट निकलेंगे. पहला- भारत में महिला नेता इतनी कम हैं, इसीलिए उनकी ट्रोलिंग होती है. दूसरा- भारत में महिला नेताओं की इतनी ज्यादा ट्रोलिंग और अब्यूसिंग होती है, इसीलिए राजनीति में उनकी संख्या कम है.

असल में ये दोनों स्टेटमेंट मिलकर एक सायकल बना रहे हैं, जो चलती ही जा रही है. एक दुष्चक्र. एक सिरा सुलझे तो मामला बने. भारतीय पॉलिटिक्स में महिलाएं आज भी ‘मायनॉरिटी’ हैं. संख्या में कम हो तो सॉफ्ट टारगेट बनना आसान हो जाता है. और टारगेट करने में सोशल मीडिया से आगे कौन है!


 

‘सेक्स इन दिल्ली’ नाम के ग्रुप में महिला नेता की फोटो किसने अपलोड कर दी?

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