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योगी का नया ऐप ये काम कर देगा, किसी ने सोचा भी नहीं था

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योगी आदित्यनाथ कोशिश कर रहे हैं कि यूपी में शिक्षा व्यवस्था सुधरे. और इसके लिए उन्होंने वो किया कि जो पलटकर वापिस प्रदेश सरकार की खोपड़ी पर पड़ गया. योगी “ऐप” लेकर आए. प्रेरणा ऐप.

काम क्या है?

यूपी के बेसिक शिक्षकों को गूगल के प्ले स्टोर से ये प्रेरणा ऐप इंस्टाल करना है. उसके बाद स्कूल से तीन टाइम सेल्फी खींचनी है. बच्चों के साथ. स्कूल की बिल्डिंग के सामने. छुट्टी के समय लाइन लगाकर निकलते बच्चों की फोटो खींचनी है. बच्चों की और खुद की अटेंडेंस लगानी है. और छुट्टी चाहिए तो भी इसी प्रेरणा ऐप से अप्लाई करना है.

हम इस ऐप पर पहले भी बहुत कुछ बता चुके हैं :

वीडियो देखा? मतलब ऐप की लॉन्चिंग की पहले ही शिक्षक कह रहे थे कि इस ऐप की वजह से प्राइवेसी का मसला पैदा हो रहा है. खासकर महिला शिक्षकों को. लॉन्चिंग के पहले ही गूगल के प्ले स्टोर पर इस ऐप की रेटिंग 1 स्टार थी. और लॉन्चिंग के बाद अभी भी 2 स्टार तक सीमित है.

लेकिन अब जब शिक्षक दिवस यानी 5 सितम्बर के दिन योगी आदित्यनाथ ने ऐप लॉन्च कर दिया था, उसके बाद प्रदेश भर में धरने शुरू हुए. शिक्षकों ने कहा कि ऐप वापिस लीजिए. अब 30 सितम्बर को बेसिक शिक्षक संगठन ने योगी आदित्यनाथ को बाकायदे पत्र लिखा, और पत्र में गिन-गिनकर बता दिया कि ऐप में कहां समस्या है?

इन समस्याओं को देखिए, और फौरी तौर पर यही लगता है कि इस ऐप में सुरक्षा की दृष्टि से तमाम ख़ामियां हैं, जिस वजह से यूपी के टीचर इसे इस्तेमाल करने से बच रहे हैं.

पहली दिक्कत

फोन में नेटवर्क नहीं है, तो भी ये ऐप जीपीएस लोकेशन पकड़ेगा. इस जीपीएस लोकेशन को टैग करके शिक्षकों की जगह पता चलेगी. लेकिन मुद्दा ये है कि टीचर हर समय स्कूल में तो होते हैं नहीं. स्कूल के समय के अलावा और भी कई जगहों पर होते हैं, हो सकते हैं. लेकिन ये ऐप उस समय भी शिक्षकों की लोकेशन टैग करता रह्रेगा. शिक्षक कह रहे हैं कि ये उनकी सुरक्षा का मुद्दा है.

Basic Teachers association letter 1

दूसरी दिक्कत

शिकायत कर रहे शिक्षकों का कहना है कि फोन रखने वाले शिक्षकों ने किसको फोन किया और किसका फोन रिसीव किया, इस सब की जानकारी भी ऐप जुटा रहा है, जबकि प्रेरणा ऐप का कॉल से कोई लेना-देना नहीं है. फिर भी ये कॉल से जुडी जानकारियां क्यों जुटा रहा है?

Basic Teachers association letter 2

तीसरी दिक्कत

गूगल पर आपने क्या सर्च किया? क्या डाउनलोड किया? ये सारी जानकारी भी ऐप जुटाएगा. मतलब क्या खोज रहे हैं? ऐप को पता लग जाएगा. संगठन ने अपने पत्र में लिखा है कि यह पूर्णरूप से स्वतंत्रता अधिकार और संविधान में उल्लिखित मूल अधिकारों का हनन है. और निजता पर कुठाराघात है.

Basic Teachers association letter 3

चौथी दिक्कत

शिकायत करने वालों ने कहा है कि ऐप को डेवलप करने वाली, मतलब ऐप को बनाने वाली कंपनी का फोन, ईमेल एड्रेस, या कोई भी संपर्क सूत्र नहीं दिया गया है. ऐप ही नहीं, प्रेरणा की वेबसाइट पर भी किसी प्रकार का पता या फोन नंबर नहीं दर्ज है.

पांचवीं दिक्कत

जैस ही ऐप इंस्टाल करेंगे, मोबाइल फोन का सीरियल नंबर, मॉडल नंबर, ब्रांड, ऑपरेटिंग सिस्टम, सिमकार्ड का नंबर, ईमेल आईडी सब ले लिया जाएगा. और सबसे ज़रूरी बात, इन सबके लिए फोन यूज़र की अनुमति लेने की ज़रुरत नहीं होगी.

ये बड़ी दिक्कतें हैं. छोटी-छोटी कई दिक्कतें हैं, जिसे संगठन ने अपने ज्ञापन में चिन्हित करने की कोशिश की है. पहले से ही ऐप की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं. इसी बीच यूपी सरकार ने भी इस ऐप की सुरक्षा एनालिसिस करवाने की कोशिश की. उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम कारपोरेशन लिमिटेड यानी UPDESCO को ये जिम्मेदारी दी गयी. लेकिन इस सुरक्षा जांच के नतीजे अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं.

लखनऊ-इलाहाबाद समेत यूपी के कई शहरों में शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा विभाग के सामने विरोध प्रदर्शन किये हैं. कहा है यूपी सरकार ऐप को वापिस ले या सुरक्षा की दृष्टि से उठ रहे प्रश्नों का निराकरण करें.

क्या इस ऐप का इस्तेमाल ज़रूरी है?

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने तो कह दिया है कि ऐप को वापिस नहीं लिया जाएगा. कहा कि बच्चों को अपने टीचरों का नाम नहीं पता है. टीचरों को यूपी सरकार 50 हज़ार रुपए तनख्वाह इसलिए नहीं देती कि वे दिल्ली में किराए का कमरा लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करें. अभी प्रेरणा ऐप को स्कूली शिक्षकों की अटेंडेंस के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन इतनी अनिवार्यता ज़रूरी है कि अगर शिक्षकों को छुट्टी चाहिए, तो उन्हें प्रेरणा ऐप से ही छुट्टी के लिए आवेदन करना होगा.

जुगाड़ ज़िंदगी जिंदाबाद

हां. जुगाड़ निकल गया है. शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारियां दी हैं. बताया है कि वे इस ऐप से बचने के लिए क्या कर रहे हैं? कहा है कि वे अपना स्मार्टफोन लेकर स्कूल नहीं जा रहे हैं. बेसिक फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं. इस वजह से ऐप को इंस्टाल करने या उसका इस्तेमाल करने से शिक्षक बच जा रहे हैं. ऐसे में जब अधिकारी शिक्षकों से पूछ रहे हैं कि ऐप कहां है? तो शिक्षक-शिक्षिकाएं कहते हैं, “फोन कहां है?”

अब सरकार ने तो कह दिया कि ऐप वापिस नहीं लिया जाएगा. शिक्षक कह रहे हैं अलग बात. यूपी जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार पाण्डेय ने कहा है,

“शिक्षकों से जुड़ी तमाम समस्याएं हैं. वो समस्याएं दूर नहीं की जा रही हैं. दूसरी खामियों को दूर नहीं किया जा रहा है, बल्कि शिक्षकों की समस्याओं को और बढ़ाया जा रहा है.”

शिक्षकों ने कहा है कि केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही ऐसी व्यवस्था को क्यों लागू किया जा रहा है? अन्य विभागों के लिए भी इसे शुरू किया जाना चाहिए.

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