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भारतीय इंजिनियर ने नासा को बताया, यहां है विक्रम का मलबा

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA को विक्रम लैंडर का मलबा मिल गया है. NASA ने बताया कि इसके लूनर रीकॉनेसेंस ऑर्बिटर (LRO) कैमरा ने चांद की सतह पर विक्रम लैंडर के अवशेष खोज निकाले हैं. NASA ने दो तस्वीरें जारी की हैं. ये विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की हैं. इम्पैक्ट साइट का मतलब वो इलाका, जहां विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह से टकराया होगा. एक फोटो, उसके क्रैश होने से पहले की है. दूसरी, हार्ड-लैंडिंग के बाद की. दोनों तस्वीरों की तुलना करके बताया गया है कि लैंडिंग के कारण उस जगह की सतह में क्या बदलाव आए.

पढ़ें: चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम में दिक्कत कहां आई? 

Vikram Impact Blink
इस GIF फाइल में आप क्रैश के पहले और बाद वाली तस्वीर देखकर क्रैश के कारण इम्पैक्ट साइट पर आए अंतर को साफ देख सकते हैं (फोटो: NASA)

कैसे मिला मलबा?
NASA ने शनमुगा सुब्रमणियन नाम के एक भारतीय कंप्यूटर प्रोग्रेमर और मैकेनिकल इंजिनियर की भूमिका के बारे में भी बताया. NASA की दी जानकारी के मुताबिक, शनमुगा ने ही सबसे पहले नासा की ली तस्वीरों में मलबे को आइडेंटिफाई किया. ये विक्रम लैंडर के क्रैश होने वाली जगह से करीब 750 मीटर उत्तरपूर्व की तरफ था. शनमुगा ने इस जानकारी के साथ NASA के LRO प्रॉजेक्ट से संपर्क किया. ये टिप मिलने के बाद LRO टीम ने फिर से उस जगह की तस्वीरें लीं. ये तस्वीरें 14-15 अक्टूबर और 11 नवंबर को ली गईं.

इनमें LRO टीम ने इस जगह और इसके आस-पास की जगहों को अच्छे से छान मारा. उन्होंने इम्पैक्ट साइट भी खोज लिया. जिस इलाके में मलबा फैला था, वो भी तलाश लिया गया. क्रैश से पहले ली गई उस जगह की तस्वीरों को क्रैश के बाद ली गई तस्वीरों से मिलाकर देखा गया. और फिर इसके बाद मलबा मिलने की पुष्टि की गई. 11 नवंबर को ली गई तस्वीर की क्वॉलिटी सबसे बढ़िया थी. इसमें इम्पैक्ट साइट पर बना गड्ढा और छितराए हुए मलबे नज़र आ रहे हैं. मलबे के तीन सबसे बड़े टुकड़े, जो NASA ने पहचाने, वो इन तस्वीरों में 2 गुणे 2 के पिक्सल में हैं.

तस्वीरें: बिफोर ऐंड आफ्टर
अभी जो तस्वीरें जारी की गई हैं, उसमें दिखाया गया है कि विक्रम लैंडर की हार्ड-लैंडिंग से पहले वो साइट कैसी थी. और लैंडिंग के बाद वहां क्या तब्दीलियां आईं. तस्वीर में विक्रम लैंडर के मलबे को हरे और नीले बिंदुओं से हाइटलाइट किया गया है. हरे रंग वाले बिंदु विक्रम लैंडर का मलबा हैं. नीले रंग के बिंदु लैंडिंग की वजह से वहां की मिट्टी में आए बदलाव को दिखाने के लिए उकेरे गए हैं.

ये भी पढ़िए: ये क्या? चंद्रयान भेजा लेकिन चंद्रयान के हीरो को ही इसरो भूल गया!

विक्रम लैंडर का टारगेट था चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से तकरीबन 600 किलोमीटर दूर एक समतल जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग करना. NASA ने कहा कि भले ही विक्रम लैंडर अपने इस मकसद में कामयाब न रहा हो, मगर चंद्रमा की सतह के इतने करीब पहुंच जाना भी बड़ी उपलब्धि है (फोटो: NASA)
विक्रम लैंडर का टारगेट था चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से तकरीबन 600 किलोमीटर दूर एक समतल जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग करना. NASA ने कहा कि भले ही विक्रम लैंडर अपने इस मकसद में कामयाब न रहा हो, मगर चंद्रमा की सतह के इतने करीब पहुंच जाना भी बड़ी उपलब्धि है (फोटो: NASA)

क्या हुआ था विक्रम लैंडर के साथ?
विक्रम लैंडर चंद्रयान-2 मिशन का हिस्सा था. 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से ये मिशन शुरू हुआ था. तय कार्यक्रम के मुताबिक, 2 सितंबर को विक्रम लैंडर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से अलग हुआ. करीब 23 दिनों तक पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाने के बाद 14 अगस्त को ये चांद के अपने सफर पर रवाना हुआ. 7 सितंबर को इसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करना था. ये लैंडिंग सॉफ्ट होनी थी. सॉफ्ट लैंडिंग माने, सही तरह से सतह पर उतरना. क्रैश न होना. मगर ऐसा हो पाता, इससे कुछ मिनट पहले ही विक्रम लैंडर से ISRO का संपर्क टूट गया. जिस पॉइंट पर विक्रम लैंडर का कम्यूनिकेशन टूटा, वो चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था.

NASA की वेबसाइट पर जाने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

इससे पहले ली गई तस्वीरों में क्या दिखा था?
इससे पहले सितंबर में भी NASA ने कुछ हाई-रेजॉल्यूशन तस्वीरें जारी की थीं. ये चंद्रमा के उस हिस्से की तस्वीरें थीं, जहां सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश कर रहा था विक्रम लैंडर. मगर तब शाम का धुंधलका होने की वजह से मलबे को लोकेट नहीं किया जा सका था. उस समय NASA ने ट्वीट करके बताया था-

हमारे लूनर रीकॉनेसेंस ऑर्बिटर मिशन ने उस जगह की तस्वीरें लीं, जहां भारत के चंद्रयान-2 मिशन का लैंडर- विक्रम उतरने की कोशिश कर रहा था. ये तस्वीरें शाम के समय ली गईं. हमारी टीम लैंडर को नहीं खोज सकी. हम अक्टूबर में फिर से तस्वीरें लेने की कोशिश करेंगे. तब, जब हमारा मिशन इस जगह से होकर गुजरेगा. तब चंद्रमा के इस हिस्से में रोशनी हमारे मुनासिब होगी.


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